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आइए साथ🤝मिलकर हिंद 🇮🇳की इस मिट्टी के जरूरतमंदो के लिए भोजन, शिक्षा,वस्त्र,रक्त(जीवन)प्रदान करे।🙏
अपने समाज में निहित #गरीबी , #अशिक्षा, #जातिगतभेदभाव , #ऊंच-नीच , #महिलादुर्व्यवहार तथा #बालअपराध के विरुद्ध हम सभी को आवाज उठानी होगी
अन्यथा इस मुल्क को पुनः उस #गुलामी की बेड़ियों में बधने से कोई नहीं रोक सकता..।
क्योंकि एक मनुष्य होने के कारण जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे हम सभी का संबंध होना चाहिए ।
गुलामी की जंजीरों को तोड़ने में शहीद 7 लाख क्रांतिकारियों के बलिदान को यूं ही नहीं भुलाया जा सकता।
Textile Manufacturing Companies | Oswal group
From global raw-material sourcing to advanced production processes and customer-centric innovation, these industry pioneers are shaping the future of textile manufacturing in India and beyond. Discover how leading textile manufacturing companies in Ludhiana are redefining excellence. https://www.oswalgroup.com/blo....gdetails-7-textile-m
#इस_धरती पर कौन कितनी उम्र जिया इसका क्या मतलब ?
#भारत के इतिहास में कई ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जिनका योगदान बहुत बड़ा था, लेकिन उनका जीवनकाल कम रहा। उनकी अल्पायु मृत्यु के बावजूद उन्होंने देश, समाज, संस्कृति, स्वतंत्रता संग्राम और ज्ञान के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी---
1. #चंद्रशेखर_आज़ाद (1906–1931) आयु: 25 वर्ष
#परिचय: महान क्रांतिकारी, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के प्रमुख।
मृत्यु: इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में वीरगति।
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2. #भगतसिंह (1907–1931) आयु: 23 वर्ष
परिचय: देशभक्त, क्रांतिकारी, लाहौर साजिश केस में फांसी।
उपाधि: शहीदे-ए-आजम।
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3. #सुखदेव_थापर (1907–1931) आयु: 23 वर्ष
परिचय: भगत सिंह के साथी, HSRA के सदस्य।
मृत्यु: भगत सिंह और राजगुरु के साथ फांसी।
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4. #राजगुरु (1908–1931) आयु: 22 वर्ष
परिचय: भगत सिंह-सुखदेव के सहयोगी, मृत्यु: लाहौर जेल में फांसी।
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5. #खुदीराम_बोस (1889–1908) आयु: 18 वर्ष
परिचय: भारत के सबसे कम उम्र के क्रांतिकारियों में से एक।
मृत्यु: बम विस्फोट मामले में फांसी।
“वंदे मातरम्” के 150 वर्ष — माँ भारती को समर्पित वो अमर स्वर, जिसने जगाया था राष्ट्रभाव! 🙏🔥
यह केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की आत्मा की आवाज़ है। जो हर युग में हम सभी भारतीयों को देशभक्ति, एकता और त्याग की प्रेरणा देता रहा है। 🇮🇳
माँ भारती की आत्मा की पुकार है —
जिसने गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ीं, और हर भारतीय के दिल में आज़ादी की ज्वाला जगाई! 🔥
आइए, इस अमर राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर को मनाएं और गर्व से कहें - "वंदे मातरम्"
💬 आज फिर उसी भावना को महसूस करें —
माँ भारती को नमन करें,
और गूंज उठे हर कोना — “वंदे मातरम्!” 🇮🇳✨