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हर्षवर्धन सिंह ज़ाला की यह कहानी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मात्र 14 वर्ष की आयु में, जहाँ बच्चे अपनी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त होते हैं, गुजरात के इस होनहार छात्र ने वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट (2017) में राज्य सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ ₹5 करोड़ का ऐतिहासिक समझौता (MoU) साइन किया। हर्षवर्धन ने एक ऐसा एंटी-लैंडमाइन ड्रोन विकसित किया है जो युद्ध के मैदान में छिपी बारूदी सुरंगों (landmines) का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित रूप से नष्ट कर सकता है। यह ड्रोन 21-मेगापिक्सल कैमरे, इंफ्रारेड और थर्मल सेंसर से लैस है, जो जमीन से 2 फीट ऊपर उड़ते हुए 8 वर्ग मीटर के क्षेत्र में लैंडमाइंस खोज सकता है और उन्हें विस्फोट करने के लिए 50 ग्राम का डेटोनेटर भी साथ ले जाता है। अपने विजन को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने अपनी खुद की कंपनी 'एयरोबोटिक्स 7 (Aerobotics 7)' शुरू की है, जिसका मुख्य उद्देश्य हमारे जांबाज सैनिकों की जान बचाना है।

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🔥✨ “सहारे नहीं, हौसले चाहिए” ✨🔥

अपना सफर खुद चुनो… क्योंकि सहारे अक्सर इंसान को कमजोर बना देते हैं।

ज़िंदगी में आगे बढ़ना है तो अपने पैरों पर खड़े होना सीखो, किसी के कंधे पर नहीं।

ज़रा उस एक टांग वाली चिड़िया को देखिए…
ना शिकायत, ना हार — फिर भी हर दिन उड़ान भरती है। 🕊️

वो हमें सिखाती है कि कमी शरीर में नहीं, सोच में होती है।

अगर वो बिना हार माने जी सकती है,
तो हम क्यों छोटी-छोटी मुश्किलों से टूट जाते हैं?

👉 हिम्मत रखो
👉 खुद पर भरोसा करो
👉 और आगे बढ़ते रहो

क्योंकि असली ताकत सहारों में नहीं,
आपके अंदर छिपे हौसले में होती है। 💪

पोस्ट अच्छा लगे तो शेयर जरूर करें ❤️🔥

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मिनट भर की देरी सपनो पर भारी, परीक्षा केंद्र के बाहर बेसुध हुई युवती, सरकार और प्रशासन पर जमकर बिफर
राजस्थान में आज एसआई भर्ती परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। झुंझुनूं जिले के चिड़ावा शहर में एक परीक्षा केंद्र पर दूसरी पारी के दौरान एक युवती को करीब एक मिनट की देरी से पहुंचने के चलते प्रवेश नहीं दिया गया। युवती काफी मिन्नतें करती रही लेकिन नियमानुसार युवती को प्रवेश नहीं दिया गया। जिसके बाद युवती परीक्षा केंद्र के बाहर ही बेसुध हो गई। इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने युवती को उठाया और समझाने का प्रयास किया। होश में आने के बाद युवती बिफर गई और सरकार व प्रशासन पर बरस पड़ी। युवती ने कहा कि उसकी दो साल की मेहनत खराब हो गई। जानकारी के अनुसार युवती ने सुबह ही प्रथम पारी का पेपर दिया था। दूसरी पारी के लिए एक से दो बजे तक ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति थी। लेकिन युवती की मिनट भर की देरी उसके सपनो पर भारी पड़ गई।

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केरलम की 36 वर्षीय ट्रेकर जी.एस. शरण्या ने कर्नाटक के कोडागु जिले के घने जंगलों में चार दिन अकेले बिताए। बिना मोबाइल नेटवर्क और सिर्फ आधे लीटर पानी की बोतल के साथ उन्होंने इस कठिन अनुभव को बिना किसी डर के सहन किया। रविवार को उन्हें स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित बचा लिया गया।

शरण्या कोझिकोड की आईटी प्रोफेशनल हैं। 2 अप्रैल को वे अपने ट्रेकिंग ग्रुप के साथ कोडागु की सबसे ऊंची चोटी ताडियांडामोल पर गई थीं। उतरते समय वे ग्रुप से अलग हो गईं और रास्ता भटक गईं। इसके बाद चार दिनों तक उन्हें घने जंगलों में अकेले रहना पड़ा।

बचाए जाने के बाद शरण्या ने बताया कि नीचे उतरते समय वे किसी तरह रास्ता भटक गईं और अपने ग्रुप को दोबारा नहीं ढूंढ पाईं। उनके फोन की बैटरी खत्म हो गई और नेटवर्क भी नहीं था, जिससे बाहरी दुनिया से उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया।

उन्होंने आगे बताया कि वे पत्थरों वाली एक छोटी नदी के पास पहुंचीं और वहीं रात बिताई। उनके पैर में दर्द था, इसलिए पहले दिन उन्होंने ज्यादा पैदल चलने से परहेज किया। दूसरे दिन वे एक खुली जगह पर रुकीं, जहां से आसपास का इलाका साफ दिखाई दे रहा था। उन्हें उम्मीद थी कि अगर ड्रोन से तलाशी होगी तो उन्हें देख लिया जाएगा।

तीसरे दिन उन्होंने ऊंची जगह पर चढ़ने की योजना बनाई थी, लेकिन बारिश की वजह से उनका प्लान बिगड़ गया। रविवार को दोपहर तक वे अपने कपड़े सूखने का इंतजार करती रहीं। बीच-बीच में वे लगातार चिल्लाती रहीं ताकि कोई उनकी आवाज सुन ले। खोज टीम के हिस्से रहे स्थानीय आदिवासी लोगों ने उनकी आवाज सुनी और उन्हें ढूंढ निकाला।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के निर्देश पर थर्मल ड्रोन और अतिरिक्त कर्मचारियों की मदद से अभियान को तेज कर दिया गया था। 72 घंटे से ज्यादा समय बाद रविवार दोपहर को उन्हें जंगल के एक सुनसान इलाके से बचाया गया, जहां आमतौर पर कोई नहीं जाता। बचाए जाने के समय शरण्या होश में थीं और उनकी हालत स्थिर थी। उन्हें तुरंत जंगल से बाहर निकाला गया और मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया।

कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने शरण्य को बहादुर और साहसी बताया और कहा कि नेटवर्क कनेक्टिविटी न होने के कारण उसे ट्रैक करना काफी मुश्किल हो गया था।

शरण्य कोडागु में एक होमस्टे में रुकी हुई थी और वह एक समूह के साथ ट्रेकिंग पर गई थी। जहां समूह के बाकी सदस्य उसी दिन सुरक्षित लौट आए थे, वहीं शरण्य के न लौटने पर अलर्ट जारी कर दिया गया, जिसके बाद चौबीसों घंटे चलने वाला यह खोज अभियान शुरू हुआ।

#kerala #kodaguforest

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माझे सहकारी श्री. मारुती निळकंठ धांडे यांचे चिरंजीव विकास आणि चि.सौ.कां. निशा (कन्या श्रीमती अंबादास व स्व. विजय काशिनाथ शेंडामे, रा. कळमणा बु.) यांचा आज वांजरी येथे शुभ विवाह सोहळा संपन्न झाला.
या मंगल प्रसंगी वांजरी येथे प्रत्यक्ष उपस्थित राहून नवदाम्पत्याच्या नवीन आयुष्यासाठी शुभेच्छा दिल्या आणि त्यांना शुभ आशीर्वाद दिले.
विवाह बंधनात अडकलेल्या या नवविवाहित दांपत्याला सुख, समृद्धी आणि आनंदाचे आयुष्य लाभो, हीच ईश्वरचरणी प्रार्थना..!
#शुभविवाह #आशीर्वाद #नवदाम्पत्य #मंगलसोहळा #weddingblessings #newbeginning #wani

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