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आज कानपुर के नवाबगंज स्थित चंद्रशेखर आजाद महाविद्यालय में 'महाराज अग्रसेन जयंती समिति' द्वारा आयोजित 'अपने-अपने राम' कार्यक्रम में सम्मिलित होकर विश्वविख्यात कवि एवं सुप्रसिद्ध कथावाचक डॉ. कुमार विश्वास जी के मुखारविंद से दिव्य श्रीराम कथा का श्रवण कर लोकमंगल की कामना की।
जय श्रीराम!🙏
आज कानपुर के नवाबगंज स्थित चंद्रशेखर आजाद महाविद्यालय में 'महाराज अग्रसेन जयंती समिति' द्वारा आयोजित 'अपने-अपने राम' कार्यक्रम में सम्मिलित होकर विश्वविख्यात कवि एवं सुप्रसिद्ध कथावाचक डॉ. कुमार विश्वास जी के मुखारविंद से दिव्य श्रीराम कथा का श्रवण कर लोकमंगल की कामना की।
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आज कानपुर के नवाबगंज स्थित चंद्रशेखर आजाद महाविद्यालय में 'महाराज अग्रसेन जयंती समिति' द्वारा आयोजित 'अपने-अपने राम' कार्यक्रम में सम्मिलित होकर विश्वविख्यात कवि एवं सुप्रसिद्ध कथावाचक डॉ. कुमार विश्वास जी के मुखारविंद से दिव्य श्रीराम कथा का श्रवण कर लोकमंगल की कामना की।
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राजस्थान के जालोर में पंचायत का फरमान: महिलाओं के लिए स्मार्टफोन बना ‘गुनाह’, 15 गांवों में कैमरा मोबाइल पर रोक
डिजिटल इंडिया और स्मार्टफोन के दौर में जालोर जिला से आया एक पंचायत फैसला पूरे राज्य में बहस का विषय बन गया है। यहां की एक सामाजिक पंचायत ने 15 गांवों में महिलाओं के इंटरनेट और कैमरा वाले मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। फैसले के अनुसार, नई-नवेली दुल्हन हो या कोई अन्य महिला, सभी को अब केवल की-पैड फोन ही इस्तेमाल करने की अनुमति होगी।
9 साल बाद फिर पोडियम पर लौटा भारत, जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप में कांस्य पदक
भारतीय हॉकी के लिए यह गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण है। 2025 पुरुष जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप में भारत ने अर्जेंटीना को 4–2 से हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया और 9 साल के पदक सूखे को खत्म कर दिया। इस जीत के साथ भारत के उभरते सितारों ने वैश्विक मंच पर अपनी चमक बिखेरी।
मैच की शुरुआत में अर्जेंटीना ने दबाव बनाया, लेकिन भारतीय टीम ने जुझारूपन और रणनीतिक समझ से शानदार वापसी की। निर्णायक पलों में तेज़ आक्रमण, सटीक पेनल्टी कॉर्नर और मजबूत डिफेंस ने मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। आखिरी क्वार्टर में भारत की आक्रामकता और अनुशासन ने विपक्ष को संभलने का मौका नहीं दिया।
फ्लोरिडा के तट पर स्कैलपिंग के लिए निकली 18 वर्षीय एडिसन बेथिया के लिए वह दिन बिल्कुल सामान्य था—जब तक अचानक एक 9 फीट लंबी बुल शार्क ने उसका पैर जकड़ नहीं लिया। पानी में अफरा-तफरी मच गई, दर्द और डर से हालात बेकाबू हो गए।
इसी पल उसके भाई Rhett Bethea ने वह किया जो बहुत कम लोग करने की हिम्मत जुटा पाते हैं। वह सीधे शार्क की ओर तैरा, उसे लात मारी, और तब तक संघर्ष करता रहा जब तक शार्क ने एडिसन को छोड़ नहीं दिया। इसके बाद उसने होश संभाला—एडिसन को नाव तक खींचा, तुरंत पैर पर टूरनिके बांधा ताकि खून बहना कम हो, और उसे किनारे तक पहुंचाया जहाँ पैरामेडिक्स इंतज़ार कर रहे थे।
एडिसन बच गईं, हालांकि डॉक्टरों को घुटने के ऊपर से पैर काटना पड़ा। यह कहानी डरावनी है—लेकिन उससे भी ज़्यादा भाई के साहस, त्वरित सोच और अटूट प्रेम की मिसाल है।