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समाज की बेटी को बधाई नहीं दोगे?
सवर्ण समाज की बेटी निशा कंवर राठौड़ नागौर,राजस्थान
NCC में कमीशन ऑफिसर से लेफ्टिनेंट बनने पर हार्दिक बधाई।

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UGC काले कानून के बावजूद इस पेज के 9 लाख फॉलोवर में से कितने योगी आदित्यनाथ जी का समर्थन करते है? कमेंट में जरूर बताए।

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ये लोग चीन, जापान या सिंगापुर क्यों नहीं जाते? क्योंकि वहाँ के कानून बहुत सख्त हैं—वहाँ घुसपैठ करना और घुसपैठियों की मदद करना जघन्य अपराध माना जाता है।
देश की सुरक्षा और भविष्य के बारे में समय रहते सोचने की जरूरत है।
कितने भाई एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय जी से सहमत है?

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सवर्ण समाज के तीनों प्रहरी, UGC काले कानून के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे है, सवर्ण भाइयों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ लड़ने वाले एडवोकेट रीना एन सिंह जी, ठाकुर बृजभूषण शरण सिंह जी, राजा भैया पर कितने भाई गर्व करते है? कमेंट में जरूर बताए।

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हिमाचल प्रदेश और सवर्ण समाज की बेटी अंबालिका ठाकुर को भारतीय सेना में मेज़र बनने पर हार्दिक शुभकामनाएं
समाज की बेटी को बधाई नहीं दोगे?

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ਸ਼ਹੀਦ ਹੌਲਦਾਰ ਜਰਨੈਲ ਸਿੰਘ ਮੋਰਾਂਵਾਲੀ ਦੀ ਯਾਦ ਵਿੱਚ ਮੋਰਾਂਵਾਲੀ ਵਿਖੇ ਕਰਵਾਏ ਗਏ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਕਬੱਡੀ ਕੱਪ ਵਿੱਚ ਹਾਜ਼ਰੀ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਮੌਕਾ ਮਿਲਿਆ।
ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਲੱਕੀ ਸਪੋਰਟਸ ਕੁੱਪ ਕਲਾਂ ਵੱਲੋਂ ਕਰਵਾਏ ਗਏ ਬੋਡੀ ਬਿਲਡਿੰਗ ਮੁਕਾਬਲੇ ਅਤੇ ਮਾਨ ਫਿੱਟਨੈੱਸ ਜਿੰਮ ਰੌਣੀ ਵੱਲੋਂ ਲਗਾਏ ਗਏ ਖੂਨ ਦਾਨ ਕੈਂਪ ਵਿੱਚ ਜਾਣ ਦਾ ਮੌਕਾ ਮਿਲਿਆ ਸਾਰੇ ਪ੍ਰਬੰਧਕ ਵੀਰਾਂ ਦਾ ਕੋਟਿਨ-ਕੋਟ ਧੰਨਵਾਦ 🙏

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लेबर पार्टी के संस्थापक बाबा पृथ्वी सिंह
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देने वाले कुछ ऐसे क्रांतिकारी भी रहे, जिन्हें आजादी मिलने के बाद भुला दिया गया। या तो उन्हें जानबूझकर भुलाया गया या फिर उनके बारे में कहीं कोई जानकारी दर्ज थी ही नहीं, इसलिए देश उन्हें भूल गया। ऐसे ही क्रांतिवीर थे पृथ्वीसिंह आजाद, जिनके बारे में छुटपुट जानकारी ही देश के सामने आ सकी। बाबा पृथ्वीसिंह आजाद ऐसे क्रांतिवीर थे, जिनके जीवन का प्रत्येक क्षण देश की स्वतंत्रता के लिए अर्पित था। 15 सितंबर 1892 को पंजाब के सर्कपुर टावर, जिला अम्बाला में जन्मे पृथ्वीसिंह आजाद कुछ कमाने के लिए कई देशों की यात्रा करते हुए अमेरिका पहुंचे थे। वहां वे भारत की आजादी के लिए लड़ रही 'गदर पार्टी' में शामिल हो गए।
गदर पार्टी के आह्वान पर वे अपने साथियों के साथ वापस भारत लौटे और अम्बाला की सैनिक छावनियों में भारतीय सैनिकों को अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने की प्रेरणा देने लगे। दुर्भाग्य से 8 दिसम्बर 1914 को उन्हें बंदी बनाकर लाहौर की सेंट्रल जेल भेज दिया गया। उन्हें लाहौर षड्‌यंत्र केस में अन्य कई क्रांतिकारियों के साथ अभियुक्त बनाया गया।

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