राजपूतों की तलवार केवल कोई लोहे का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह साक्षात 'माँ भवानी' का रूप होती है। 🙏
विशेषकर 'खांडा' (दोधारी सीधी तलवार) — जिसका वजन 20 से 25 किलो तक होता था! रणभूमि में इसे दोनों हाथों से चलाने के लिए असीम शारीरिक बल और फौलादी सीने की आवश्यकता होती थी। 💪🔥
हमारी गौरवशाली परंपरा और मान्यता यही सिखाती है:
"हम शस्त्र पूजते हैं, इसीलिए शस्त्र हमारी रक्षा करते हैं।" जय माँ भवानी! 🚩
जय राजपूताना! 🚩
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