20 hrs - Translate

पृथ्वी पर पड़े बारह वर्षों के भीषण अकाल के दौरान, जब नदियाँ और जलाशय सूख गए थे और चारों ओर हाहाकार मचा था, तब एक किसान चिलचिलाती धूप में अपनी बंजर ज़मीन पर हल जोत रहा था। वहां से गुज़र रहे भगवान शिव और माता पार्वती ने जब उसे देखा, तो वे आश्चर्यचकित रह गए।

पार्वती जी के पूछने पर कि बिना वर्षा के हल चलाने का क्या लाभ, शिव जी ने बताया कि किसान केवल इसलिए हल चला रहा है ताकि वह लंबे अकाल के कारण हल चलाने का अभ्यास न भूल जाए। किसान की इस अटूट निष्ठा और तर्क को जानकर माता पार्वती ने एक चतुर युक्ति अपनाई। उन्होंने शिव जी से कहा कि कहीं इतने वर्षों तक वर्षा न करने के कारण आप भी अपना शंख बजाना न भूल गए हों।

image
20 hrs - Translate

प्रथम पंक्ति: इस पंक्ति में महादेव के परोपकारी स्वरूप का वर्णन है। समुद्र मंथन के समय जब सृष्टि को बचाने के लिए शिव जी ने भयंकर 'हलाहल' विष का पान किया, तो उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। उन्होंने स्वयं कष्ट सहा (विष पिया), लेकिन बदले में संसार को जीवन और खुशहाली की सुवास (सुगंध/शांति) प्रदान की। यह उनके त्याग और करुणा का प्रतीक है।
द्वितीय पंक्ति: यहाँ शिव की सर्वव्यापकता को दर्शाया गया है। शिव केवल कैलाश पर ही नहीं, बल्कि संसार के कण-कण (प्रकृति के हर अंश) में विद्यमान हैं। वे घट-घट (प्रत्येक जीव के हृदय) में 'विश्वास' बनकर वास करते हैं। यदि मनुष्य के भीतर अटूट श्रद्धा और विश्वास है, तो उसे अपने भीतर ही महादेव के दर्शन हो सकते हैं।
मुख्य संदेश:
यह दोहा हमें सिखाता है कि दूसरों के कल्याण के लिए विष (कष्ट/अपमान) को पी जाना ही महानता है। साथ ही, यह ईश्वर को बाहर खोजने के बजाय अपने भीतर और पूरी सृष्टि में देखने का दृष्टिकोण प्रदान करता है।

image

image

image
20 hrs - Translate

भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक, भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं हम सभी के प्रेरणास्रोत श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।

image
20 hrs - Translate

#राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि भगवा ध्वज को गुरु के रूप में प्रणाम किया जाता है। संघ की परंपरा में इसे श्री गुरु दक्षिणा उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
#गुरु_पूर्णिमा के दिन भारत में गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। संघ इस परंपरा को एक विशिष्ट रूप देता है।
संघ के अनुसार:
भगवा ध्वज त्याग, तपस्या, शौर्य, ज्ञान और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक है।
कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता, इसलिए किसी व्यक्ति को गुरु न मानकर आदर्शों के प्रतीक भगवा ध्वज को गुरु माना जाता है।
इससे व्यक्तिपूजा के स्थान पर तत्त्वपूजा और आदर्शपूजा की भावना विकसित होती है।

image
20 hrs - Translate

गोविंद नगर स्थित कैंप कार्यालय में आज वरिष्ठ भाजपा नेता श्री महेश दीक्षित (चच्चू) जी का केक काटकर जन्मदिन मनाया।
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं।
#sevakajaykapoor #bjp #bjp4india #kanpur #happybirthday

image
20 hrs - Translate

गोविंद नगर स्थित कैंप कार्यालय में आज वरिष्ठ भाजपा नेता श्री महेश दीक्षित (चच्चू) जी का केक काटकर जन्मदिन मनाया।
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं।
#sevakajaykapoor #bjp #bjp4india #kanpur #happybirthday

image
20 hrs - Translate

गोविंद नगर स्थित कैंप कार्यालय में आज वरिष्ठ भाजपा नेता श्री महेश दीक्षित (चच्चू) जी का केक काटकर जन्मदिन मनाया।
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं।
#sevakajaykapoor #bjp #bjp4india #kanpur #happybirthday

imageimage
20 hrs - Translate

प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती और इस बात को हैदराबाद की मात्र २ साल ७ महीने की नन्हीं आिशी गली ने सच साबित कर दिखाया है। आिशी ने शतरंज की दुनिया में एक ऐसा कारनामा किया है जिसने बड़ों-बड़ों को हैरान कर दिया है। गचीबोवली में रॉय चेस एकेडमी द्वारा आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम में इस नन्हीं विलक्षण प्रतिभा ने मात्र १७ मिनट और १ सेकंड में १०० 'पॉन प्रमोशन चेकमेट' शतरंज पहेलियों (Chess Puzzles) को सफलतापूर्वक हल कर दिया।
दिलचस्प बात यह है कि आिशी को ३० मिनट में ७५ पहेलियां हल करने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन उन्होंने अपनी असाधारण गति और सटीकता से लक्ष्य से कहीं आगे बढ़कर रिकॉर्ड समय में १०० पजल सही-सही हल किए। नेशनल चेस आर्बिटर एस. सुब्बा राजू द्वारा प्रमाणित इस ऐतिहासिक उपलब्धि को अब 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन' में दर्ज कराने के लिए भेजा जा रहा है, जिसके बाद आिशी को ब्रिटिश संसद में सम्मानित किए जाने की उम्मीद है।

image