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देश के 35 करोड़ सवर्णों में से कितने समाज के प्रहरियों के साथ UGC के विरोध में खड़े है?
48 घंटे बाद UGC पर फैसला आने वाला है सभी भाई ज्यादा से ज्यादा समर्थन करें ताकि यह काला कानून वापस हो सके जो हमें जातियों में बांट रहा है।

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🙏Good Morning
🗓️Today in Indian Calendar🗓️
▶️Vaishakh Maah
▶️Krishna Paksha
▶️Ekadashi
▶️13th April 2026
▶️Din - Monday

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🌄सुप्रभात🙏

🌞अपने दिन का शुभारम्भ कीजिए अनमोल विचारों से🌻

"एक छात्र का सबसे महत्त्वपूर्ण गुण यह है कि वह हमेशा अपने अध्यापक से सवाल पूछे।" - डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

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Today at 9:15 AM

Listen to an interaction with Col. Akash Patil, Director, Ambedkar International Centre, in our program 'Our Guest'.
Host: Nitish Arora

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अपनी कहानी छोड़ जा इक तो निशानी छोड़ जा 🎶
एक उत्कृष्ट और नैसर्गिक कलाकार बलराज साहनी ने अपनी सादगी भरे अभिनय से गरम हवा, सीमा, 2 बीघा ज़मीन जैसी कई फ़िल्मों में आम आदमी के चरित्र को जीवंत किया. वे अपने पीछे कभी ना ख़त्म होने वाली दास्तान छोड़ गए हैं.
पुण्यतिथि पर सादर नमन🙏

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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏

वरुथिनी एकादशी का महत्व हिंदू धर्म में अत्यधिक माना जाता है, इस दिन का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

वरूथिनी एकादशी पर भगवान मधुसूदन की पूजा की जाती है, इस दिन भगवान नारायण के वराह अवतार की पूजा भी किए जाने का विधान है।

शास्त्रों में वरूथिनी एकादशी के व्रत को अन्नदान तथा कन्यादान दोनों के समान फलों की प्राप्ति होने वाला कहा गया है।

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बैसाखी का पर्व सिख धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है।
- सिख इतिहास में बैसाखी का दिन विशेष है, क्योंकि 13 अप्रैल 1699 को सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी।
- कृषि के लिए विशेष महत्व: किसानों के लिए यह समय नई फसल की खुशी का है, जब वे अपनी मेहनत का फल पाकर प्रसन्न होते हैं।
- नववर्ष का आगमन: यह पर्व सौर नववर्ष की शुरुआत का भी संकेत देता है, जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।
असम में इस पर्व को बिहू कहा जाता है, इस दौरान यहां फसल काटकर इसे मनाया जाता है, बंगाल में भी इसे पोइला बैसाख कहते हैं।
मेष संक्राति के दौरान पर्वतीय इलाकों में भी मेलों का आयोजन होता है व देवी पूजा करने का रिवाज है, इस दिन को सौर नववर्ष भी कहा जाता है।

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