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कानपुर के आहूजा अस्पताल में हुए फर्जी किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। इस खुलासे के बाद फरार आरोपी डॉक्टर अफजाल का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह 500-500 के नोटों के बिस्तरों पर लेटकर अपनी काली कमाई का प्रदर्शन कर रहा है। 31 मार्च 2026 को हुए इस भंडाफोड़ में सामने आया कि मासूम छात्रों को बहला-फुसलाकर उनकी किडनी निकाली जा रही थी और बदले में लाखों का लेन-देन हो रहा था। पुलिस ने अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी डॉक्टर और उसका ड्राइवर परवेज अभी भी फरार हैं। इस गैंग के तार कई राज्यों से जुड़े होने की आशंका है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने वायरल वीडियो को संज्ञान में लेते हुए फरार डॉक्टर की संपत्ति कुर्क करने और उसे सलाखों के पीछे भेजने के लिए विशेष टीमों का गठन किया है।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस को 'X' कैटेगरी का सिक्योरिटी कवर दिया है. हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने वाले पेस की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब सीआईएसएफ (CISF) के जवानों के पास रहेगी. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में लिएंडर पेस की बड़ी भूमिका मिलने की संभावना है. सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने उन्हें केंद्र की सुरक्षा देने का फैसला लिया है.

टेनिस जगत के इस बड़े नाम को औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल होने के तुरंत बाद यह सिक्योरिटी कवर दिया गया है. अब लिएंडर पेस के साथ हर वक्त सीआईएसएफ के सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे.

बंगाल चुनाव के प्रचार के दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर कोई कोताही न हो इसके लिए गृह मंत्रालय ने यह आदेश जारी किया है.

लिएंडर पेस ने हाल ही में औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का हाथ थामा है.

#leanderpaes #bjp #cisf #xcategorysecurity #westbengalelections #atcard #aajtaksocial

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हाई-प्रोफाइल विवाद का सुखद अंत, चर्चित PCS अधिकारी ज्योति मौर्या और आलोक फिर रहने लगे साथ

PCS अधिकारी ज्योति मौर्या और पंचायती राज विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात उनके पति आलोक मौर्या के बीच करीब ढाई साल से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है.

#jyotimaurya #alok

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🚨 बड़ा बदलाव! अप्रैल में ही मिलेगा 3 महीने का राशन
सरकार ने राशन वितरण को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे लाखों लोगों की दिनचर्या बदल सकती है। अब अप्रैल महीने में ही अप्रैल, मई और जून का राशन एक साथ दिया जाएगा।
लेकिन सवाल ये है…
क्या ये सिर्फ सुविधा है या कोई बड़ी रणनीति?
✔️ किन लोगों को मिलेगा फायदा
✔️ कैसे होगा पूरा वितरण
✔️ क्या हैं नए नियम
👉 पूरी जानकारी पढ़ें और दूसरों के साथ शेयर करें

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दिल्ली की सियासत से लेकर पंजाब और मुंबई तक इन दिनों एक चर्चा तेज़ हो रही है—कि आम आदमी पार्टी के युवा चेहरा राघव चड्ढा, अब कांग्रेस में आने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की एक महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष स्तर की नेता, पंजाब के सुपर CM कहे जाने वाले वरिष्ठ चेहरे और 2–3 बड़े कांग्रेसी नेताओं के साथ उनकी लगातार बातचीत चल रही है।
बताया जा रहा है कि यह सिर्फ सामान्य मुलाकातें नहीं हैं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव की रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं। खास बात यह भी सामने आ रही है कि फिल्म इंडस्ट्री के कुछ प्रभावशाली लोगों के जरिए भी उनकी छवि और एंट्री को लेकर माहौल बनाया जा रहा है।
पंजाब की राजनीति में नई जगह बनाने और राष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करने की चाहत के बीच, राघव चड्ढा के लिए कांग्रेस एक नया प्लेटफॉर्म बन सकता है। वहीं कांग्रेस भी एक युवा, पढ़ा-लिखा और आक्रामक वक्ता अपने साथ जोड़कर नई ऊर्जा लाना चाहती है।
हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से अंदरखाने बातचीत की खबरें सामने आ रही हैं, उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

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रमेश गुप्ता की 2019 में हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। उम्र सिर्फ 54 साल।

उनके पास ₹50 लाख की टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी थी। 11 साल तक एक भी प्रीमियम मिस नहीं किया।

उनकी पत्नी ने क्लेम फाइल किया।
इंश्योरेंस कंपनी बोली: “हमें जांच करनी होगी।”

जांच 3 साल तक चली।
बार-बार नए दस्तावेज मांगे गए।
वह हर बार देती रहीं, और हर बार नई मांग आ जाती।

इस बीच हालात बिगड़ गए—
घर की EMI नहीं भर पाईं,
गाड़ी बेचनी पड़ी,
रिश्तेदारों से उधार लेना पड़ा।

2022 में कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट कर दिया।
कारण बताया “पहले से बीमारी छुपाई गई थी।”

वो “बीमारी” क्या थी?
सिर्फ हल्का ब्लड प्रेशर,
जो 2015 के एक रूटीन चेकअप में नोट हुआ था।
न कोई इलाज, न कोई दवा।

पत्नी ने हार नहीं मानी।
IRDAI और फिर कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट का साफ फैसला आया—
जिस बीमारी का कभी इलाज नहीं हुआ,
जो कभी स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करती,
उसे 11 साल बाद क्लेम रिजेक्ट करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

आदेश दिया गया:
₹50 लाख की पूरी राशि,
2019 से 9% ब्याज के साथ,
और ₹1 लाख मानसिक उत्पीड़न के लिए।

3 साल तक एक विधवा को घुमाया गया।
लेकिन अदालत ने उसका हक वापस दिलाया—पूरा, ब्याज सहित।

याद रखिए:
अगर आपका इंश्योरेंस क्लेम “नॉन-डिस्क्लोज़र” के नाम पर खारिज हो
तो चुप मत बैठिए, लड़िए।

अदालतें बार-बार कह चुकी हैं
छोटी, बिना इलाज वाली स्थितियों को आधार बनाकर क्लेम रिजेक्ट करना गलत है।