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झुठ फरेब जुमलेबाजी मोदी जी ने सिर्फ अडानी और अंबानी के लिए काम किया है देश के विकास के नाम पर #bsnl रेल एयरपोर्ट आदि सहित देश की सरकारी संस्थाओं को बेच है भाजपा एक धोखा है #मोदी_है_तोबर्बादी_है #boycottbjp #boycott_narendramodi #banevm_save_india #ban_evm_save_democracy
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक अब्दुल्ला ने बेंगलुरु में एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. 'संविधान और राष्ट्रीय एकता सम्मेलन-2024' में समापन भाषण देते हुए श्रीनगर से सांसद ने लोकसभा चुनाव से पहले ईवीएम को लेकर भी चिंता जताई और उम्मीद जताई कि निष्पक्ष चुनाव हों.
Ajit Pawar, in a MASSIVE Baramati rally, urges people to work unitedly to win NDA 400 LS seats.
"More than 65% people want Narendra Modi to be PM again. In the coming days, I'll work hard and everyone will be surprised."
He urged his supporters to forget differences and work unitedly for the Lok Sabha elections to help Modi win 400 seats.
#dhruvrathee ठीक बोल रहा है कि सरकार विपक्षी नेताओं को जेल में डाल रही है.
उसकी बात सही है. कांग्रेस अलग थी. उसने विरोधियों को नहीं, अपने ही सहयोगी दलों के नेताओं को चुन चुन कर जेल में डाला.
2013 में लालू यादव को पहली बार सीबीआई कोर्ट ने सजा सुनाई, जेल भेजा और उनको जीवन भर के लिए राजनीति से बाहर कर दिया. राहुल गांधी की गारंटी है. सीबीआई तब भी प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत ही काम करती थी. प्रधानमंत्री बेशक मनमोहन सिंह थे. प्रधानमंत्री वाजपेयी तक लालू के खिलाफ ये नहीं कर पाए थे.
मनमोहन सरकार ने अपने सबसे बडे सहयोगी डीएमके के नेता करुणानिधि की बेटी कनिमोझी और अपने मंत्री ए राजा को गलत केस में तिहाड जेल में डाला. केस फर्जी निकला.
कांग्रेस ने इसी दौर में अपने एक और सगयोगी मंत्री माननीय शिबू सोरेन को जेल में डाला. साधारण ट्रेन में बिठाकर रास्ते भर तमाशा बनाकर दिल्ली से धनबाद ले गए थे.
याद है न?
बहनजी के खिलाफ ताज कोरिडोर और पार्क के केस खोले गए. भट्टा पारसौल में बहनजी की सरकार के खिलाफ आंदोलन करने खुद राहुल गांधी गए. मुलायम सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस इसी दौरान खुला.
बीजेपी के किसी नेता को यूपीए दौर में जेल में नहीं डाला गया. उनको कोई दिक्कत नहीं दी गई.
जानते है क्यों?
कांग्रेस को जेएनयू की एक प्रोफेसर ने समझा दिया था कि आपका जनाधार ये सहयोगी दल ले गए हैं. ये दल खत्म हुए तो आपका पुराना सुनहरा दौर वापस आ जाएगा.
बस यहीं खेल हो गया. वो जनता इन दलों से छिटकी, पर बीजेपी के पास चली गई.