Discover postsExplore captivating content and diverse perspectives on our Discover page. Uncover fresh ideas and engage in meaningful conversations
मेरा सभी से, पुनः हाथ जोड कर विशेष अनुरोध है कि आगे हनुमान *जन्मोत्सव* आ रहा है(जयंती नही)।
इसे हम सभी लोग *हनुमान जयंती* ना कहते हुए *हनुमान जन्मोत्सव* कहें व सभी को *हनुमान जन्मोत्सव* कहने के लिए प्रेरित करें।
क्योंकि जयंती उनकी मनाई जाती है *जो इस संसार में नहीं है* ।
और कलियुग में केवल श्री राम भक्त हनुमान जी ही *चिरंजीवी* है, आज भी विद्यमान है ।
अतः यह परिवर्तन हमें जरुर लाना है तथा यह मैसेज *हनुमान जन्मोत्सव* से पहले पहले सभी तक पहुंचना चाहिए ।।
।।जय श्री राम।।
एक महात्मा ने एक साहूकार को एक ऐसी पारसमणि की बटिया दी कि जिसको लोहे में छुआते ही लोहा सोना बन जाता था, परन्तु महात्मा ने उससे यह कहा था कि बटिया मैं तुम्हें सात दिन के लिये देता हूँ । सात दिन पूरे होने पर मैं तुझसे ये बटिया वापस ले लूँगा । साहूकार ने बटिया पाते ही सोंचा कि मेरे घर में तो लोहे के रूप में, हँसिया, खुरपी, फावड़ा व कुदाल ही है, इसके अलावा और कुछ भी नहींहै और बटिया केवल सात दिन को ही मिली है । अभी तो सात दिन पड़े हैं इतने में लोहा खरीदा जा सकता है । ऐसा सोंच कर उसने एक आदमी कलकत्ता और दूसरा बम्बई भेजा और लोहा खरीद कर लाने को कहा । दो दिन बाद गाड़ी कलकत्ता पहुँची फिर आई , दो या ढाई दिन में बम्बई पहुँची फिर आई लोहा खरीदते और गाड़ियों में लादते दोदिन बीत गये ।फिर दोदिन में रेलगाड़ियाँ आँई । इसतरह से छह दिन बीत गये । सातवें दिन साहूकार ने मालगाड़ियों से माल उतरवा कर सोंचा अगर यहीं पारस पथरी छुआते हैं तो लुटेरे डाकू सब लूट ले जायें गे अतः लोहे को घर में भर कर तब पारस छुआयें ऐसा सोंच कर लोहा बैलगाड़ियों में भरकर घर लाये ।
.
दरवाजे से लोहा उतरवा कर घर में भर रहे थे ( यह समय सातवें दिन बारह बजे रात का था ) तब तक महात्मा जी बटिया लेने को आ गये । साहूकार ने महात्मा जी का बहुत आदर-सत्कार किया ,
महात्मा जी ने कहा - "यह बटिया लाइये " ।
साहूकार ने कहा - " महाराज अबतक तो हम लोहा खरीदते रहे, कृपया हमें थोड़ा सा समय और दीजिये ।"
महात्मा जी ने कहा -"मैं एक मिनट भी नहीं दे सकता ; बटिया लाइये" ।
साहूकार ने कहा -" महाराज ! हम जाकर लोहे से छुवाये लेते हैं ।"
महात्मा जी ने कहा -" बस आपकी अवधि पूरी हो गई ।" और उसके हाँथ से बटिया छीन ली ।
इस दृष्टान्त का भाव यह है कि जीवात्मा रूपी साहूकार को परमात्मारूपी महात्मा ने शरीर रूपी पारसमणि पथरी सात दिन के लिये ( सात दिन का तात्पर्य ये कि दिन सात ही होते हैं ) ही दी थी कि इस पारसमणि पथरी से माया-जंजाल विषयों से अलग होकर भक्ति रूपी असली सोना बना लेंना, पर ये यह जीवात्मा रूपी साहूकार सातों दिन लोहा खरीदता रहा, यानि सदैव यह अपने शरीर व शरीर की इन्दियों के बिषयों में फंसा रहा ।
जिस हरिभजन के लिये ये देह मिली है उसके लिये आगे की प्रतीक्षा न करके अभी करें । अतः इस पारसमणि पथरी को यों ही व्यर्थ न गँवायें यह मनुष्य शरीर बार-बार नहीं मिलता।
जय श्री राधे. जै श्री कृष्ण
---:: ॐ :: ---
120 बजने के स्थान पर आदित्य लिखा हुआ है जिसका अर्थ यह है कि सूर्य 12 प्रकार के होते हैं*
10 बजने के स्थान पर ब्रह्म लिखा हुआ है इसका अर्थ यह है कि ब्रह्म एक ही प्रकार का होता है ।
🕉️एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति।
20 बजने की स्थान पर अश्विन और लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि अश्विनी कुमार दो हैं।
30 बजने के स्थान पर त्रिगुणः लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि गुण तीन प्रकार के हैं ---- सतोगुण रजोगुण तमोगुण।
40 बजने के स्थान पर चतुर्वेद लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं -- ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद।
50 बजने के स्थान पर पंचप्राणा लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य है कि प्राण पांच प्रकार के होते हैं ।
60 बजने के स्थान पर षड्र्स लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि रस 6 प्रकार के होते हैं ।
70 बजे के स्थान पर सप्तर्षि लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सप्त ऋषि 7 हुए हैं ।
80 बजने के स्थान पर अष्ट सिद्धियां लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सिद्धियां आठ प्रकार की होती है ।
90 बजने के स्थान पर नव द्रव्यणि अभियान लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि 9 प्रकार की निधियां होती हैं।
100 बजने के स्थान पर दश दिशः लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि दिशाएं 10 होती है।
110 बजने के स्थान पर रुद्रा लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि रुद्र 11 प्रकार के हुए हैं।
इति सिद्धम !!
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏