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Amazing 🏍️
#motocross #motor #motorcycle #australia #race #tb

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आदरणीय रेवंतसिंह जी राजपुरोहित को भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश महामंत्री बनने के बाद पहली बार जन्म भूमि पश्चिमी काशी लटियाल नगरी फलोदी पधारने पर आज जोधपुर चौराहे पर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ साफा व माला पहला कर स्वागत अभिनंदन किया ! BJP Rajasthan CP Joshi

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आदरणीय रेवंतसिंह जी राजपुरोहित को भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश महामंत्री बनने के बाद पहली बार जन्म भूमि पश्चिमी काशी लटियाल नगरी फलोदी पधारने पर आज जोधपुर चौराहे पर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ साफा व माला पहला कर स्वागत अभिनंदन किया ! BJP Rajasthan CP Joshi

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आदरणीय रेवंतसिंह जी राजपुरोहित को भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश महामंत्री बनने के बाद पहली बार जन्म भूमि पश्चिमी काशी लटियाल नगरी फलोदी पधारने पर आज जोधपुर चौराहे पर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ साफा व माला पहला कर स्वागत अभिनंदन किया ! BJP Rajasthan CP Joshi

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देवाधिदेव नीलकंठ महादेव के अनन्य भक्त मेरे भतीजे विशाल बोहरा उर्फ बबलू को जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाए ! जगत जननी चामुण्डा माता जी का आशीर्वाद सदैव बना रहे 🎂❤️

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बात गंभीर हैं, आजकल स्टेटस मेंटेन और आलस की वजह से लोगो का होटल और रेस्टरेंट में खाना खाने का चलन काफी ज्यादा बढ़ गया है सरकारी एजेंसी की माने तो पिछले 5 साल की तुलना में 200% अधिक ज्यादा होटल्स में बिक्री हो रही
रही कही कसर जोमैटो और स्वीगी पूरी कर देते हैं इसकी तादाद इतनी ज्यादा बढ़ गई है की छोटे बड़े शहर में लोग क्लाउड किचन चलाना शुरू कर दिए हैं
लेकिन 1 घंटे के आलस के चक्कर लोग कितनी बड़ी तादाद में अपने हेल्थ से खिलवाड़ कर रहे हैं ये कोई नही समझता
पहले घर की महिलाओ का मुख्य काम खाना बनाना होता था, घर का शुद्ध प्यार से बनाए खाने को खा कर मन तो प्रसन्न होता था साथ में स्वास्थ्य भी ठीक रहता था,
लेकिन आजकल की मॉडर्न मां मॉडर्न वाइफ, ये स्किल ही नही आती हैं हर वीकेंड पे आराम करना ( खाना ना बनाना) अब उन सब का मौलिक अधिकार है, बाहर नौकरी करना और पैसे कमाना हसबैंड वाइफ का कंधे से कंधे मिलकर काम करना अच्छा पैसा कमाना और बाहर खा कर पैसा खर्च करना
और फिर इन्ही खाने के खाने से बीमारी हो।उस पर कमाए हुए पैसे खर्च करना संपन्न जीवन शैली मानी जा रही है
लेकिन अगर आप अगर घर का खाना खा रहे हैं बाहर नही खाना चाहते तो लोग आप की ओल्ड फैशन समझेंगे
आप को बता दें बाहर खाना खिलाने वाले 90 प्रतिशत रेस्टुरेंट खाने का टेस्ट बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल फ्लेवर एड करते हैं
सबसे निम्न कैलिटी का तेल इस्तमाल करते हैं।
और साथ में जो भर भर के बटर डालते हैं वास्तव में वह वेजिटेबल तेल होता है ( डालडा घी जैसा )

तो आज से आप खुद डिसाइड कीजिए पैसा कमा कर बाहर खाना है फिर कमाए हुए पैसे को स्वास्थ्य पर खर्च
करना है या घर का खाना खा कर स्वास्थ्य रहना चाहते हैं
क्यों कि आज आपको दिखाना ज्यादा महत्व होगया है आज जितना दिखाओगे उतना ज्यादा आपको प्रोग्रेसिव समझते है
और अपने को मॉडर्न फैमिली का तबका जो हासिल होता है बस इसको दिखाने मे अपना स्वस्थ खराब कररहे है समझो और देखो ये सही नही है आपके और आपकी फैमिली के लिए
क्यों बीमारियों को न्योता देरहे हो क्यों परेशानी को मोल खरीद कर खा रहे हो.

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Birendra K Jha जी की पोस्ट :
पुरातत्व: भगवान कृष्ण की आयु और रेडियो डेटिंग:
Archaeology: Age of Bhagwan Krishna And Radio Dating:
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हमारे भारत के पंडितजी कमाल की प्राचीन परम्परा अपने साथ लेकर आज भी चल रहे हैं। समय बदल गया, पर वे नहीं बदले। वे अत्यंत प्राचीन काल से किसी पूजा संकल्प के पहले इस मन्त्र का पाठ करते हैं :
“ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद् भगवतो महापुरूषस्य,विष्णुराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीये परार्धे श्रीश्वेत वाराहकल्पे वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टाविंशति तमे कलियुगे कलि प्रथमचरणे भारतवर्षे भरतखण्डे जम्बूद्वीपे आर्यावर्तैक देशान्तर्गते..."
.... और इसके साथ जिस दिन पूजा हो रही है कलियुग वर्ष कितने बीत गए , इसका उल्लेख अनिवार्यतः करते हैं।
यह प्राचीन मन्त्र तबका बना है, जब न तो इस्लाम का जन्म हुआ था और न ही यूरोप की ईसापूर्व या ईस्वी संका ही प्रचलन था।
यह मन्त्र निःसंदेह महाभारत काल का है। जिसमें सम्वत बताने की अत्यंत प्राचीन परम्परा है। २२ मार्च २०२३ से कलियुग के ५१२५ वर्ष ठीक बीत रहे हैं। इसी कली सम्वत का प्रयोग भारत के हिन्दू पंडित करते हैं।
यह संकल्प न पढ़ी जाय तो पूजा निष्फल मानी जाती है। २२ मार्च २०२३ में कलियुग के ५१२५, वर्ष बीतने का अर्थ यह भी है की, भगवान कृष्ण ने उसी दिन पृथ्वी को छोड़ कर बैकुंठ की महायात्रा की थी। गणना करने पर यह समय सटीक ३१०२ ईस्वी पूर्व मिलता है। अब असली मुद्दे की बात करता हूँ।
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समुद्र में डूबे "कोरल रीफ" पुरातत्व जगत के लिए कितने महत्वपूर्ण और उपयोगी हैं, इसका ज्ञान भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को नहीं है। जब एजेंसी ही नहीं जानती है, तब साधारण पुरातात्विक क्या जानेंगे !
मेरे द्वारका की खोज में ये कोरल रीफ बड़े काम के चीज हुए। मैंने टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च में कोरल रीफ की कार्बन डेटिंग निकलवाई थी। मुझे दो जानकारी मिली। ओखा के कोरल कोई ६०००० वर्ष के थे तो वर्तमान डूबे हुए द्वारका के कोरल ३१०० ईस्वी पूर्व के मिल रहे थे।
कोरल ने सटीक भगवान कृष्ण के बैकुंठ गमन की यात्रा तिथि निश्चित कर दी। यही द्वारका के डूबने की तिथि थी। कोरल रीफ की कार्बन डेटिंग, भारत के भ्रमित इतिहास को न केवल उलट देती है अपितु पूरातात्विकों के हाथ में समुद्र में डूबे पुरातात्विक सम्पदा की कार्बन डेटिंग जानने का अचूक अस्त्र भी है।
ज्ञात रहे जैसे ही द्वारका समुद्र में डूबी, ये कोरल ठीक उसी दिन से बन रहे हैं। ये कोरल आज भी ज़िंदा हैं।
सेटेलाइट के सेंसर चिंत्रण में जो हरा रंग आप देख रहे हैं , वे समुद्र में डूबे कोरल हैं। कोरल के चारों ओर सफ़ेद लाल रंग प्रकाश पेटिका जो आप देख रहे हैं वहाँ पत्थर के बने विशाल नगर निर्माण हैं।

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