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सचिन तेंदुलकर इस समय अपनी जिंदगी की सबसे लाजवाब पारी खेल रहे हैं कश्मीर में.
दुनिया के सबसे बड़े Cricket Star... और सबसे बड़े Sports Star में से एक.. पिछले कई दिनों से कश्मीर में घूम रहे हैं... कभी मार्तण्ड मंदिर जाते हैं कभी शंकराचार्य मंदिर के दर्शन करते हैं...
कभी सेना के जवानों से मिलते हैं.. कभी Cricket Bat बनाने वालों के साथ मुलाक़ात करते हैं.... कभी सड़क पर ही आम लोगों के साथ cricket खेलते हैं.. कभी दिव्यांग खिलाड़ी से मिलते हैं, उसका हौसला बढ़ाते हैं... कभी उरी के उस क्षेत्र में जाते हैं, जो एक दम पाकिस्तानी चौकियों के सामने है... और कभी कश्मीर के सामान्य व्यापारियों से मिलते हैं.
चूँकि सचिन एक Mega Star हैं.. उनकी हर movement cover होती है.. उस पर लाखों लोग post लिखते हैं, articles छापते हैं.. Videos बनाते हैं.
इन सभी Post, वीडियो, articles का बहुत गहरा प्रभाव ना सिर्फ देश में पड़ता है, विदेशों में भी पड़ता है.
एक Soft Signal जाता है.. कि कश्मीर अब So Called Disputed या Disturbed Territory नहीं है... वहाँ कोई भी आ जा सकता है... खुला घूम सकता है..... यह Soft Signalling कई दशकों के बने हुए Narrative को ध्वस्त करती हैं.
कश्मीर घाटी में G-20 meetings करवा कर एक बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है.... अब सरकार को चाहिए कि बॉलीवुड stars, Sports Person और Social Media Influencers भी जम्मू कश्मीर और लद्दाख लगातार जाएं.... और इन क्षेत्रों की सामान्य तस्वीर दुनिया के सामने रखें.
यकीन मानिये.... इतना सा काम करते ही आप चीन और पाकिस्तान द्वारा पोषित Narrative Industry को तबाह कर देंगे.
Information Warfare ऐसे ही लड़ा जाता है... उन्होंने कश्मीर को पिछले कई दशकों से उबाले रखा है.... आप उस पर ठन्डे छिंटे डाल दीजिये.
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#ntr #jhanvikapoor #devra
18 साल की उम्र में लाहौर जितने वाले महाराजा रणजीत सिंह जी का इतिहास :-
जब भी देश के इतिहास में महान राजाओं के बारे में बात होगी तो शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह का नाम इसमें जरूर आएगा। महाराजा रणजीत सिंह ने 10 साल की उम्र में पहला युद्ध लड़ा था वहीं 18 साल की उम्र में लाहौर को जीत लिया था।
40 वर्षों तक के अपने शासन में उन्होंने अंग्रेजों को अपने साम्राज्य के आसपास भी नहीं फटकने दिया, इसके बाद 1802 में उन्होंने अमृतसर को अपने साम्राज्य में मिला लिया और 1807 में उन्होंने अफगानी शासक कुतुबुद्दीन को हराकर कसूर पर कब्जा किया।
रणजीत सिंह ने अपनी सेना के साथ आक्रमण कर 1818 में मुल्तान और 1819 में कश्मीर पर कब्जा कर उसे भी सिख साम्राज्य का हिस्सा बन गया। महाराजा रणजीत ने अफगानों के खिलाफ कई लड़ाइयां लड़ीं और उन्हें पश्चिमी पंजाब की ओर खदेड़ दिया।
अब पेशावर समेत पश्तून क्षेत्र पर उन्हीं का अधिकार हो गया। यह पहला मौका था जब पश्तूनों पर किसी गैर-मुस्लिम ने राज किया। अफगानों और सिखों के बीच 1813 और 1837 के बीच कई युद्ध हुए।
1837 में जमरुद का युद्ध उनके बीच आखिरी भिड़ंत थी। इस भिड़ंत में रणजीत सिंह के एक बेहतरीन सिपाहसालार हरि सिंह नलवा मारे गए थे।
दशकों तक शासन के बाद रणजीत सिंह का 1839 को निधन हो गया, लेकिन उनकी वीर गाथाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं।
21 फरवरी 1899 को जन्में महान कवि, उपन्यासकार सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' जी को जन्मदिन पर सादर नमन ||
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अर्जुन के बाद इस देश मे ज्ञात किसी भी हिन्दू शाशक का अंतिम तीर कमान चित्र !!
🙏 पारंपरिक पण्डितराव पेशवे शंकराचार्य उत्तर प्रदत्त शिखाबन्ध, पुलस्त्य उपमन्यु मर्यादित दो गाँठ निकुंजला शक्ति जनेऊ और सूती धोती के साथ 🙏
श्रीमन्त नारायणराव साहेब बहादुर पेशवा
चित्रकूट घारणा , बुन्देलखण्ड
1854
(1857 में देश के लिए सेमरिया मोर्चे में अंग्रेज़ो से लड़ते हुए बलिदान )