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सम्राट असोक महान मौर्य ने सिर्फ 84,000 स्तूप चैत्य ही नही बनाया, उन्होंने 52 ,00,000 लाख स्क्वायर किलोमीटर भारत का क्षेत्रफल भी बनाया जिसे अखंड भारत कहां जाता था
नालंदा तक्षशिला विक्रमशिला जैसे कई विश्वविद्यालय बनावाए
थे जिससे विदेश से लोग शिक्षा ग्रहण करने भारत आते थे !
ईसा पूर्व भारत में 500 BC से बौद्ध सभ्यता थी कोई भी भारत पर आंख उठाकर देखने की हिम्मत नही करता था.!
सिकंदर आया लेकिन सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य से डर कर भाग गया. सम्राट असोक महान के दौर में भारत पर हमला करना तो छोड़ो, विदेशी राजाओं को यह डर सताए रहता था कहीं सम्राट असोक महान उनके साम्राज्य पर आक्रमण ना कर दें
सेंट्रल एशिया पूरा गंधारा, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, नेपाल, म्यांमार, सब भारत का अभिन्न अंग थे.!
इसलिए कहा जाता है 👇
था सूर्य चमकता मौर्यो का घनघोर बदरिया डरती थी
था शेर गरजता सीमाओ पर बिजली भी आहें भरती थी
जय सम्राट............................🦁
Great Samrat Ashoka
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डॉली चायवाला एक दिन में चाय बेचकर करता है इतनी कमाई? अपने स्वैग से सोशल मीडिया से भी बना रहा इतने पैसे?
डॉली चायवाला इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। नागपुर में स्वैग के साथ चाय बेचने वाले 'डॉली चायवाले' ने जब से माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स को चाय पिलाई है, तब से वह इंटरनेट पर सनसनी बने हुए हैं।
अपने चाय बेचने के स्टाइल के लिए मशहूर 'डॉली चायवाला' रातों-रात स्टार बन गया है। लोग डॉली चायवाला के बारे में जानना चाहते हैं। हर कोई जानना चाहता है कि बिल गेट्स के साथ उसकी मुलाकात कैसे और कब हुई थी? वो कहां के रहने वाले हैं, उनका नाम क्या है, वो कितना कमाते हैं?

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भारत को पूअर कंट्री बोलने वाली टूलकिट रिहाना को
अंबानी ने अपने बेटे की शादी मे नाचने को बुला लिया

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DADA ANANDPAL SINGH 🦁

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1613 ई. में जहांगीर द्वारा समूचे मुगल साम्राज्य की फौज को मेवाड़ के महाराणा अमरसिंह के विरुद्ध भेजने के बारे में खुद जहांगीर अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-जहांगीरी में लिखता है कि :-

"मिर्ज़ा अज़ीज कोका की कमान में एक फौज पहले से मेवाड़ में तैनात थी। फिर मैंने ख़ुर्रम को इतनी बड़ी फौज देकर विदा किया जिसकी गिनती कर पाना भी मुश्किल है। मैंने राजपूताने की रियासतों बूंदी, जोधपुर, किशनगढ़ और आमेर की फौजों को मेवाड़ भेज दिया। इनके अलावा आगरा, गुजरात, पंजाब, बुंदेलखंड और मालवा की फौजों को भी मेवाड़ विदा किया। दक्कन में जो फौज मैंने परवेज़ की कमान में भेजी थी, उसको भी मैंने मेवाड़ के राणा अमरसिंह के खिलाफ मेवाड़ भेज दिया।"

अब आप अनुमान लगाइए कि महाराणा अमरसिंह कितने महान शासक रहे होंगे, जिन्हें झुकाने के लिए सारे मुगल साम्राज्य की फौज भी कम पड़ गई।

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वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप अपने अंतिम समय में बड़ी पीड़ा में थे, लेकिन उनके प्राण नहीं निकल रहे थे।
जब कुँवर अमरसिंह और मेवाड़ के सरदारों ने मुगलों के विरुद्ध चल रहे स्वतंत्रता के संघर्ष को जारी रखने का प्रण लिया,
तब जाकर महाराणा प्रताप ने अंतिम श्वास ली।

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