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बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत अपनी नई फिल्म की शुटिंग शुरू कर दी हैं। यह एक साइकोलॉजिकल थ्रीलर फिल्म हैं। इस फिल्म में कंगना के साथ आर माधवन दिखाई देने वाले हैं। आर माधवन के साथ कंगना ने 'तनु वेड्स मनु' और 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' में काम किये थे और अब फिर से इस साइकोलॉजिकल थ्रीलर फिल्म में काम कर रहे हैं। कंगना की इस नई फिल्म की शुटिंग शनिवार को शुरू हुई हैं। फिल्म की शुटिंग चैन्नई में हो रही हैं। कंगना ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम पर स्टोरी पोस्ट करके इस फिल्म की जानकारी दी थी। स्टोरी में कंगना ने लिखा था "आज चेन्नई में हमने अपनी नई फिल्म, एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर की शूटिंग शुरू की। अन्य डिटेल्स जल्द ही आ रहे हैं। फिलहाल इस बेहद असामान्य और रोमांचक स्क्रिप्ट के लिए आप सभी के समर्थन और आशीर्वाद की जरूरत हैं।" सोशल मीडिया पर स्टोरी पोस्ट करने के बाद फिर से सोशल मीडिया पर कंगना ने तस्वीर पोस्ट करी हैं। तस्वीर में कंगना साउथ के दिग्गज एक्टर रजनीकांत के साथ दिख रही हैं। रजनीकांत संग तस्वीर शेयर करते हुए कंगना ने लिखा हैं "शूटिंग के पहले दिन भारतीय सिनेमा के भगवान थलाइवर ने स्वयं हमारे सेट पर अचानक आकर हमें रोमांचित कर दिया। क्या एक प्यारा दिन है!! मैडी की याद आ रही हैं, वह जल्द ही हमारे साथ जुड़ेंगे।" इसके अलावा इंस्टाग्राम पर रजनीकांत संग तस्वीर शेयर करते हुए कंगना ने लिखा "ट्राइडेंट आर्ट्स के साथ अपना नया प्रोजेक्ट शुरू करने पर सुपरस्टार रजनीकांत का आशीर्वाद पाकर आभारी और सम्मानित महसूस कर रहा हूं, जिसमें 8 साल बाद फिर से कंगना रनौत और माधवन एक साथ नजर आएंगे!"

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ढाकास व सहणुसर में जन सम्पर्क के दौरान जनता जनार्दन ने बड़े मान सम्मान के साथ समर्थन दिया ।आप सभी का ये स्नेह व दुलार दिन प्रतिदिन मुझमे नवीन ऊर्जा का संचार करता है, आपके और मेरे इस बंधन को और अधिक गहरा करता जाता है।
#fatehpur #nandkishoremaharia #fatehpurvidansabha #shekhawati #jjp #fatehpurvidansabha #dushyantchautala

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ढाकास व सहणुसर में जन सम्पर्क के दौरान जनता जनार्दन ने बड़े मान सम्मान के साथ समर्थन दिया ।आप सभी का ये स्नेह व दुलार दिन प्रतिदिन मुझमे नवीन ऊर्जा का संचार करता है, आपके और मेरे इस बंधन को और अधिक गहरा करता जाता है।
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ढाकास व सहणुसर में जन सम्पर्क के दौरान जनता जनार्दन ने बड़े मान सम्मान के साथ समर्थन दिया ।आप सभी का ये स्नेह व दुलार दिन प्रतिदिन मुझमे नवीन ऊर्जा का संचार करता है, आपके और मेरे इस बंधन को और अधिक गहरा करता जाता है।
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दुख को दूर नही किया जा सकता ! न करना चाहिये।
दुख से ध्यान हटना चाहिये। मात्र हम यही कर सकते है। जो हम नही करते है।
जिसको कम करना है। या दूर करना है। उस पर ध्यान अधिक जाता है। फिर वह और बढ़ता है।
तो उपाय एक ही है।
दुख से ध्यान हटे।
ध्यान तब हटेगा, जब ध्यान कहीं और जाय।
वह है, सृजन।
सृजन, निर्माण नही है।
सृजन purposeless है।
वह कर्म जिसका कोई उद्देश्य ना हो।
वह पढ़ना भी सृजन, जिसके आधार पर कोई परीक्षा नही देनी हो। अपना ज्ञान न प्रदर्शित करना हो।
ऐसे वृक्ष को पानी देना भी सृजन है। जिससे फल लेने की चाह न हो।
ऐसा प्रेम भी सृजन है। जिसमे कोई चाह न हो।

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मुझे इसका ज्ञान नही है कि नीत्से कभी गीता पढ़े थे, या नहीं। लेकिन वह ईसाई रिलीजन के सबसे कठोर आलोचक थे। जिस रिलीजन ने आधी दुनिया में 'दास' पैदा किये, उसको नष्ट हो जाना चाहिये।
#नीत्से इस आधुनिक दुनिया के सबसे अधिक प्रभावित करने वाले दार्शनिक थे। उन्होंने collective struggle, collective development को महत्व नहीं दिया।
लेकिन जिस सिद्धांत के लिये नीत्से को जाना जाता है वह 'Eternal recurrence' शास्वत की पुनरावृत्ति। यह गीता के पुनर्जन्म सिद्धांत जैसा ही है। गीता में और भी स्पष्टता, पवित्रता है।
नीत्से कहता है यही जीवन, जिसमें यही दुख, दर्द, पीड़ा, यादें हैं। पुनः ऐसे मिले तो क्या आप स्वीकार करेंगे ?
वह कहता है... हमको प्रसन्नता से स्वीकार करना चाहिये। नीत्से इस स्वीकार के लाभ को बताता है। उसका कहना है कि इससे पता चलता है कि आपका इस पृथ्वी पर विश्वास है।
#गीता_इसके_बहुत_गहरे_अर्थ_में_जाती_है। यद्यपि पुनर्जन्म का विचार वेद से ही है। लेकिन गीता ने ही पुनर्जन्म को सबसे प्रभावी ढंग से रखा है।
गीता कहती है कि इसी सुख, दुख, पीड़ा के लिये आपको बार बार पुनर्जन्म लेना ही है। यह आपकी इच्छा है या नहीं है, इस पर निर्भर नही करता है। इससे मुक्ति तभी मिलेगी, जब आपके सभी कर्मों का परिष्कार हो जायेगा।
गीता कहती है कि जन्म का उद्देश्य ही स्वयं को पहले से अधिक परिष्कृत करना है। पुनर्जन्म इसी प्रक्रिया का चक्र है।
यह परिष्करण कैसे होगा ?
हमारे अपने कर्मों से होगा। यदि आप गीता को समझते हैं तो गीता कहती है कि आपका जन्म इसलिये नहीं हुआ है कि आपको संसार की रचना करनी है।
जन्म तो इसलिये हुआ है कि आप पहले से अधिक परिष्कृत हुये या नही।
यदि हां ! तो आपको एक ऊंचे स्तर के चक्र में डाला जायेगा। यदि नहीं, तो नीचे स्तर के चक्र में।
यह ऊंचा स्तर एक समय इस चक्र से निकालकर मुक्त करके मोक्ष देगा।
अब इतने गहरे दर्शन में क्या छिपा है। गीता मनुष्य को कहां ले जा रही है।
वास्तव में गीता भी individual evolution पर ही जो दे रही है। यह मोक्ष कोई अलौकिक शब्द नही है।
हम जैसे जैसे अपने कर्मो को परिष्कृत करके आगे बढ़ते है। इस भीड़ से कटकर, एक अलग व्यक्तित्व के साथ। उन लोगों में सम्मिलित हो जाते हैं जो महानतम परिवर्तन के आधार बनते हैं। वह जीवन का कोई भी क्षेत्र हो। ऐसे ही लोग संचालन करते हैं। यह व्यक्तित्व जीवन चक्रों के साथ हमारे जीन का भाग बन जाता है।
गीता जो कहती है... हमारी मुक्ति में संसार की मुक्ति है। इसका अर्थ यही है कि अपने परिष्करण में हम इस संसार को बहुत कुछ देते हैं।
पुनर्जन्म का उद्देश्य एक ऐसे व्यक्ति का जन्म है जो भीड़ का हिस्सा न हो, वह अलौकिक शक्तियों से युक्त हो। इस जगत का मार्गदर्शन करे।
नीत्से ने इसे Superman की संज्ञा दिया। नीत्से नास्तिक है। तो वह कारणों और अनिवार्यता पर जोर नहीं देता।
लेकिन गीता आध्यात्मिक है, तो पुनर्जन्म को अनिवार्य मानती है। मोक्ष पर सभी को अधिकार देती है।
मेरे पिताजी गीता के विद्वान थे। वह सैदव कहते थे कि
मनुष्य को स्वयं के उद्धार पर विचार करना चाहिये। कोई दूसरा, किसी का उद्धार नहीं कर सकता है। सरल शब्दों में वही विचार है।