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Kejriwal tenders an apology to the BJP for peddling misleading #dhruvrathee videos
Veteran Classical Gazal Singer #pankajudhas has passed away at age 72. After a prolonged illness, the singer breathed his last on February 26, as confirmed by his daughter Nayaab Udhas.
फेसबुकिया यूनिवर्स का एक और चुटियापा तैयार....
आज इस फोटो के पीछे पैर निचोड़ पड़े हैं...
इसको मुमताज़ की फोटो बता रिये हैं...
कह रिये हैं इत्ती भुंडी के लिए खामखाह ताज़महल बनाया....
रे भाई एक काम कर ले तू अपणी घराड़ी खातिर बिटोरा ही बनवा दे...... कती सेनोरिटा की फूफी वरगी है....
पहली बात भाई शाहजहाँ के ज़माने में कैमरा न था और ये फोटो कैमरा से खींची हुईं है कोई पेंटिंग नहीं..... और पेंटिंग होती तो मोटी बात बूझो उसमें रंग होते..... कैमरा कलर वाला आने से पहले दुनियाँ में रंग थे...
ये जो खड़ी दीख री है यो थी भाई भोपाल के नवाब जहांगीर मोहम्मद खान की लुगाई.... इसका नाम था शाह ज़हाँन बेग़म..... नाम शाह जहान बेग़म था.... शाहजहाँ की बेग़म न थी.... शाहजहाँ इसके पैदा होने से 200 साल पहले मर चुका था...
ये लेखिका थी और 1857 के बाद के ब्रिटिश भारत पर इनका लिखा काफ़ी प्रामाणिक दस्तावेज माना जाता है...
वैसे इसी की एक फोटो कुछ साल पहले लक्ष्मीबाई बता कर भी घुमा चुके हैं फेसबूकिया योद्धा....... और तब खूबसूरती की तारीफ़ के पुल बांध... कमेंट में नमन नमन खेल....
दौनो फोटो देख लो...... समझ लो.... और हो सके तो इतिहास की एंटोनिआ बेंका एक करने से पहले थोड़ा सा सोच लिया करो....!
अजय सिंह
फेसबुकिया यूनिवर्स का एक और चुटियापा तैयार....
आज इस फोटो के पीछे पैर निचोड़ पड़े हैं...
इसको मुमताज़ की फोटो बता रिये हैं...
कह रिये हैं इत्ती भुंडी के लिए खामखाह ताज़महल बनाया....
रे भाई एक काम कर ले तू अपणी घराड़ी खातिर बिटोरा ही बनवा दे...... कती सेनोरिटा की फूफी वरगी है....
पहली बात भाई शाहजहाँ के ज़माने में कैमरा न था और ये फोटो कैमरा से खींची हुईं है कोई पेंटिंग नहीं..... और पेंटिंग होती तो मोटी बात बूझो उसमें रंग होते..... कैमरा कलर वाला आने से पहले दुनियाँ में रंग थे...
ये जो खड़ी दीख री है यो थी भाई भोपाल के नवाब जहांगीर मोहम्मद खान की लुगाई.... इसका नाम था शाह ज़हाँन बेग़म..... नाम शाह जहान बेग़म था.... शाहजहाँ की बेग़म न थी.... शाहजहाँ इसके पैदा होने से 200 साल पहले मर चुका था...
ये लेखिका थी और 1857 के बाद के ब्रिटिश भारत पर इनका लिखा काफ़ी प्रामाणिक दस्तावेज माना जाता है...
वैसे इसी की एक फोटो कुछ साल पहले लक्ष्मीबाई बता कर भी घुमा चुके हैं फेसबूकिया योद्धा....... और तब खूबसूरती की तारीफ़ के पुल बांध... कमेंट में नमन नमन खेल....
दौनो फोटो देख लो...... समझ लो.... और हो सके तो इतिहास की एंटोनिआ बेंका एक करने से पहले थोड़ा सा सोच लिया करो....!
अजय सिंह
फेसबुकिया यूनिवर्स का एक और चुटियापा तैयार....
आज इस फोटो के पीछे पैर निचोड़ पड़े हैं...
इसको मुमताज़ की फोटो बता रिये हैं...
कह रिये हैं इत्ती भुंडी के लिए खामखाह ताज़महल बनाया....
रे भाई एक काम कर ले तू अपणी घराड़ी खातिर बिटोरा ही बनवा दे...... कती सेनोरिटा की फूफी वरगी है....
पहली बात भाई शाहजहाँ के ज़माने में कैमरा न था और ये फोटो कैमरा से खींची हुईं है कोई पेंटिंग नहीं..... और पेंटिंग होती तो मोटी बात बूझो उसमें रंग होते..... कैमरा कलर वाला आने से पहले दुनियाँ में रंग थे...
ये जो खड़ी दीख री है यो थी भाई भोपाल के नवाब जहांगीर मोहम्मद खान की लुगाई.... इसका नाम था शाह ज़हाँन बेग़म..... नाम शाह जहान बेग़म था.... शाहजहाँ की बेग़म न थी.... शाहजहाँ इसके पैदा होने से 200 साल पहले मर चुका था...
ये लेखिका थी और 1857 के बाद के ब्रिटिश भारत पर इनका लिखा काफ़ी प्रामाणिक दस्तावेज माना जाता है...
वैसे इसी की एक फोटो कुछ साल पहले लक्ष्मीबाई बता कर भी घुमा चुके हैं फेसबूकिया योद्धा....... और तब खूबसूरती की तारीफ़ के पुल बांध... कमेंट में नमन नमन खेल....
दौनो फोटो देख लो...... समझ लो.... और हो सके तो इतिहास की एंटोनिआ बेंका एक करने से पहले थोड़ा सा सोच लिया करो....!
अजय सिंह

हिंदुओं के एक गाँव में मोदीजी पहुँचे।
मोदीजी ने पूछा, मित्रो अपनी मांग बताइये।
गांव वालों ने आपस में सलाह की और फिर बोले, हमारे गाँव में सबकुछ है बस एक बड़ा पुल नहीं है तो एक पुल बनवा दीजिये।
मोदीजी आश्चर्यचकित होकर बोले कि यहॉं कोई नदी तो है नहीं फिर पुल की क्या जरूरत है।
गांव वालों ने फिर आपस में खुसरपुसुर की और फिर उनके पंचलोग समवेत स्वर में बोले,
"#फिर_हमको_नदी_भी_चाहिये।\"
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सुना है कि पंचों की वह प्रजाति आजकल मोदीजी के #स्वस्थ_आलोचक के रूप में पाई जाती है।