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No brand came forward, but Mayank Arya did. Yes Madam is making an ad with Rajpal Yadav and proving that action speaks louder than statements. #indianstartup

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पूज्य श्रद्धेय श्री राजन जी महाराज के श्रीमुख से पावन रामकथा का दिव्य आयोजन, मेरे पूज्य पिताजी स्वo. उदयनाथ सिंह "चुलबुल" जी (पूर्व विधान परिषद सदस्य) की 8वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर संपन्न हुआ।
इस आध्यात्मिक अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं एवं सम्मानित अतिथियों ने श्रद्धा, भक्ति और भाव के साथ प्रभु श्रीराम की अमृतमयी कथा का श्रवण किया। वातावरण पूर्णतः भक्ति और भावनाओं से ओतप्रोत रहा।
प्रभु श्रीराम की पावन कथा के माध्यम से पिताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। ऐसा अनुभव हुआ मानो उनका स्नेह, आशीर्वाद और उनके दिए हुए संस्कार आज भी हमारे जीवन को आलोकित कर रहे हैं।
पिताजी द्वारा दिए गए आदर्श, जीवन-मूल्य और संस्कार सदैव हमारे पथप्रदर्शक रहेंगे। उनकी स्मृतियाँ हमारे हृदय में सदा जीवित रहेंगी और हमें धर्म, सत्य एवं कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेंगी।

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पूज्य श्रद्धेय श्री राजन जी महाराज के श्रीमुख से पावन रामकथा का दिव्य आयोजन, मेरे पूज्य पिताजी स्वo. उदयनाथ सिंह "चुलबुल" जी (पूर्व विधान परिषद सदस्य) की 8वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर संपन्न हुआ।
इस आध्यात्मिक अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं एवं सम्मानित अतिथियों ने श्रद्धा, भक्ति और भाव के साथ प्रभु श्रीराम की अमृतमयी कथा का श्रवण किया। वातावरण पूर्णतः भक्ति और भावनाओं से ओतप्रोत रहा।
प्रभु श्रीराम की पावन कथा के माध्यम से पिताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। ऐसा अनुभव हुआ मानो उनका स्नेह, आशीर्वाद और उनके दिए हुए संस्कार आज भी हमारे जीवन को आलोकित कर रहे हैं।
पिताजी द्वारा दिए गए आदर्श, जीवन-मूल्य और संस्कार सदैव हमारे पथप्रदर्शक रहेंगे। उनकी स्मृतियाँ हमारे हृदय में सदा जीवित रहेंगी और हमें धर्म, सत्य एवं कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेंगी।

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पूज्य श्रद्धेय श्री राजन जी महाराज के श्रीमुख से पावन रामकथा का दिव्य आयोजन, मेरे पूज्य पिताजी स्वo. उदयनाथ सिंह "चुलबुल" जी (पूर्व विधान परिषद सदस्य) की 8वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर संपन्न हुआ।
इस आध्यात्मिक अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं एवं सम्मानित अतिथियों ने श्रद्धा, भक्ति और भाव के साथ प्रभु श्रीराम की अमृतमयी कथा का श्रवण किया। वातावरण पूर्णतः भक्ति और भावनाओं से ओतप्रोत रहा।
प्रभु श्रीराम की पावन कथा के माध्यम से पिताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। ऐसा अनुभव हुआ मानो उनका स्नेह, आशीर्वाद और उनके दिए हुए संस्कार आज भी हमारे जीवन को आलोकित कर रहे हैं।
पिताजी द्वारा दिए गए आदर्श, जीवन-मूल्य और संस्कार सदैव हमारे पथप्रदर्शक रहेंगे। उनकी स्मृतियाँ हमारे हृदय में सदा जीवित रहेंगी और हमें धर्म, सत्य एवं कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेंगी।

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