साहिब-दिल्ली आने तक के पैसे नही है कृपया पुरुस्कार डाक से भिजवा दो!
हलधर नाग-जिसके नाम के आगे कभी श्री नही लगाया गया, 3 जोड़ी कपड़े, एक टूटी रबड़ की चप्पल एक बिन कमानी का चश्मा और जमा पूंजी 732रु का मालिक पद्मश्री से उद्घोषित होता है। ये हैं ओड़िशा के हलधर नाग जो कोसली भाषा के प्रसिद्ध कवि हैं। ख़ास बात यह है कि उन्होंने जो भी कविताएं और 20 महाकाव्य अभी तक लिखे हैं, वे उन्हें ज़ुबानी याद हैं। अब संभलपुर विश्वविद्यालय में उनके लेखन के एक संकलन ‘हलधर ग्रन्थावली-2’ को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।
देश के सच्चे सेवकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए अभिनंदन

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