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क्या आप जानते हैं......
भारत आने वाला ब्रिटेन का यह पहला जलयान था । यह एक सूत्र मात्र ही तो था, इसी को आधार बनाकर अंग्रेजों ने 200 वर्षों तक भारत पर राज किया।
उससे पहले भी आक्रांता आये और उन्होने भारत पर कुशासन किया जो देशवासियों के लिए किसी विभीषिका से कम नहीं था। उन आक्रांताओ ने हमारी संस्कृति, ज्ञान, विज्ञान को नष्ट विनष्ट किया । वे आक्रांता तो नहीं रहे किंतु उनके अनुयायी अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए आज पुनः छटपटा ही नही रहे, अनैतिक और कुत्सित दुस्साहस भी कर रहे हैं।
जयचंद और वीरभद्र कल भी थे ! आज भी हैं... आज तो अधिक हैं.... कुछ प्रकट हैं तो वहीं कुछ छद्म वेश मे हैं.... हमें उन्हें पहचानना भी है।
एकता, समरसता और परस्पर प्रतिबद्धता सिद्ध करने का लोकतांत्रिक सुअवसर है । यदि आज चूक गए तो हमारी आने वाली संततियां कदाचित हमें क्षमा न कर पायें।