Coimbatore ने मोदी जी पर बरसाया, प्यार भरपूर

बेंगलुरु में शांतिदूत बाइक सवारों का खुला आतंक

आखिर जिस राज्य में कांग्रेस सत्ता में आती है वहां शांति दूत समुदाय खुद को कानून व्यवस्था से ऊपर क्यों समझने लगता है ?

दरअसल इन्हें पता है यह चाहे कुछ भी करें कांग्रेस सरकार इनके ऊपर कोई भी कार्रवाई नहीं करेगी और अगर मीडिया का दबाव हुआ तो हल्की-फुल्की धाराओं में केस दर्ज करेगी साथ ही साथ जमाते उलेमा हिंद और मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के बड़े-बड़े वकील मुफ्त में केस लड़ने के लिए तैयार बैठे हैं

बेंगलुरु के हेब्बाल इलाके में प्रार्थना के बाद सात-आठ बदमाशों का एक मुस्लिम समूह बाइक पर आया और हाथों में तलवार का प्रदर्शन किया। वे जोर-जोर से चिल्लाने लगे और पूरे इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया। घटना कल सुबह आरटी नगर थानांतर्गत सुल्तान पाल्या की है।

आरटी नगर पुलिस ने सुओमोटो मामला दर्ज किया और घटना के संबंध में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। मोहम्मद फरान (19), अदनान शरीफ (18), अब्दुल रयान (19) और अकील बाश (18) को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल पुलिस आरोपी के बैकग्राउंड की जांच कर रही है।

2 yrs - Translate

भले ही मैं कल जीवित न रहूं, फिर भी मेरी आत्मा इस चेपक के आसपास ही रहेगी। यह जगह मेरे लिए कितनी महत्वपूर्ण है।" -रविचंद्रन अश्विन

image

image
2 yrs - Translate

वैदिक ज्योतिष तथा सनातन पंचांग से निर्धारित प्रतिदिन की समय काल गणना —>

🌞 शुभ काल/अशुभ काल 🌚

काल गणना के लिए भारतीय वैदिक ज्योतिष में एक दिन में अलग अलग अवधि होती है और उन सभी अवधि में अलग-अलग काल का उल्लेख किया गया है। जिसमें से जहां कुछ काल को शुभ तो कुछ काल को अशुभ की श्रेणी में रखा गया है।

इसी के अनुसार जहाँ शुभ काल के दौरान किया गया कार्य फलित होता है, वहीं अशुभ काल के दौरान कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में प्रतिदिन के नियम से निम्न समय काल का उल्लेख है।

प्रात:काल —

सबसे प्रथम काल की अवधि प्रात:काल कहलाती है। ये अवधि सूर्योदय होने से ठीक 48 मिनट पूर्व का समय होता है।

अरुणोदय काल —

ये अवधि सूर्योदय होने से ठीक 1 घंटे और 12 मिनट पूर्व की होती है, जिसे हम पंचांग अनुसार अरुणोदय काल कहते हैं।

उषा काल —

ये अवधि सूर्योदय होने से ठीक 2 घंटे पूर्व का समय होता है, इसे हम सरल भाषा में उषाकाल कहते हैं।

अभिजित काल —

भारतीय समय के अनुसार ये अवधि दोपहर में लगभग 11 बजकर 36 मिनट से लेकर 12 बजकर 24 मिनट तक रहती है। जो लगभग एक घंटे की होती है। ज्योतिष विशेषज्ञों अनुसार अभिजीत काल बुधवार को वर्जित होता है।

प्रदोष काल —

ये अवधि सूर्यास्त होने से लेकर 48 मिनट बाद तक का समय होता है, जिसे हम प्रदोष काल कहते हैं।

गोधूलि काल —

ये अवधि सूर्यास्त होने से 24 मिनट पूर्व से शुरू होती है और सूर्यास्त के 24 मिनट बाद तक माननीय होती है।

राहुकाल —

राहुकाल रोजाना डेढ़ यानी 1 घंटे 30 मिनट का होता है।सूर्योदय अगर प्रात: 6 बजे है तो ऐसा काल नियम अनुसार होगा,राहुकाल के दौरान कोई भी शुभ व नया कार्य करने से बचना चाहिए। राहुकाल सातों दिन के अनुसार कुछ इस प्रकार है।

सोमवार को प्रातः 7 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक होता है।
मंगलवार को दोपहर 3 बजे से 4 बजकर 30 मिनट तक होता है।
बुधवार को दोपहर 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक होता है।
गुरुवार को दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक होता है।
शुक्रवार को राहुकाल प्रातः 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक होता है।
शनिवार को राहुकाल प्रातः 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक होता है।
रविवार को सायं 4 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक होता है।

गुलिक काल —

इस काल की अवधि भी डेढ़ यानी 1 घंटे 30 मिनट की होती है। माना जाता है कि कुछ विशेष कार्य को इस समय काल के दौरान करने से बचना चाहिए। गुलिक काल सातों दिन के अनुसार कुछ इस प्रकार है-

रविवार को गुलिक काल का समय दोपहर 3 बजे से 4 बजकर 30 मिनट तक होता है।
सोमवार का गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक होता है।
मंगलवार को गुलिक काल दोपहर 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक होता है।
बुधवार को गुलिक काल प्रात: 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक होता है।
गुरुवार को गुलिक काल प्रातः 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक होता है।
शुक्रवार का गुलिक काल प्रातः 07 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक होता है।
शनिवार को गुलिक काल प्रातः 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक होता है।

यमगंड काल —

इस काल की अवधि भी प्रतिदिन डेढ़-डेढ़ घंटे की होती है। साथ ही यमगंड काल में भी शुभ कार्यों को करने से परहेज करना चाहिए। इसके काल की अवधि सातों दिन के अनुसार कुछ इस प्रकार है:

रविवार को यमगंड काल का समय दोपहर 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक होता है।

image

image

आज ही के दिन यानी 18 मार्च 1999 को बिहार के जहानाबाद जिले के सेनारी गांव में भूमिहार ब्राह्मण जाति के 34 निर्दोष लोगों को घरों से बाहर खींचकर बारी-बारी से गला काटा फिर सबका पेट फाड़ दिया

जी हां, यह नरसंहार MCC के नक्सलियों ने किया था जब बिहार में लालू यादव का जंगल राज था, आज आपको पूरा कहानी बताता हूं।

उस रात सेनारी गांव में 500 से ज्यादा सत्ता समर्थित नक्सलवादी लाल सलाम का नारा लगाते हुए घुस आए, उन्होंने गांव को चारों ओर से घेर लिया इसके बाद शुरू हुआ दरिंदगी का खेल, गांव के घरों से खींच-खींच कर पुरुषों को बाहर निकाला गया फिर उनमें से 40 लोग चुने गए, जिन्हें जानवरों की तरह खींचकर गांव से बाहर ले जाया गया फिर उन्हें तीन टीम में बांट दिया गया फिर सबको एक साथ खड़ा किया गया और बारी-बारी उनका गला काट दिया गया और उनके पेट चीर दिए गए नतीजा ये हुआ कि उनमें से 34 लोग मौके पर ही मर गए जबकि कुछ लोग वहां पड़े तड़प रहे थे

मारने वालों में इतनी नफरत और गुस्सा भरा था कि वे एक एक कर सबको मारते गए, ना कुछ सुना ना कुछ कहा, सेनारी गांव भूमिहारों का था जबकि मारने वाले आरोपी MCC के नक्सली थे, घटना के अगले दिन पटना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार पद्मनारायण सिंह वहां जा पहुंचे, वो सेनारी गांव के ही निवासी थे, अपने परिवार के 8 लोगों की फाड़ी हुई लाशें देखकर उनको दिल का दौरा पड़ा और वे भी मर गए

इस वारदात से इलाके में ऐसी दहशत फैल गई कि इलाके में लोग लाइसेंसी हथियारों के साथ घरों की छतों पर बैठ जाते थे जिनके पास लाइसेंसी हथियार नहीं थे, वे कट्टा खरीदते थे पर खरीदते जरूर थे, कई बार अफवाह उड़ जाती थी कि माओवादी आ गए तो गांव वाले तुरंत पोजीशन ले लेते थे, जिनमें गांव की महिलाएं और बच्चे भी शामिल होते थे

मामला इतना बढ़ा कि केंद्र सरकार ने उस वक्त बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था मगर कांग्रेस के विरोध के चलते 24 दिनों में ही कानून वापस लेना पड़ा था

आज के दिन जितने भी लोग शहीद हुए उन सभी को विनम्र श्रद्धांजलि और शत-शत नमन

image

आज ही के दिन यानी 18 मार्च 1999 को बिहार के जहानाबाद जिले के सेनारी गांव में भूमिहार ब्राह्मण जाति के 34 निर्दोष लोगों को घरों से बाहर खींचकर बारी-बारी से गला काटा फिर सबका पेट फाड़ दिया

जी हां, यह नरसंहार MCC के नक्सलियों ने किया था जब बिहार में लालू यादव का जंगल राज था, आज आपको पूरा कहानी बताता हूं।

उस रात सेनारी गांव में 500 से ज्यादा सत्ता समर्थित नक्सलवादी लाल सलाम का नारा लगाते हुए घुस आए, उन्होंने गांव को चारों ओर से घेर लिया इसके बाद शुरू हुआ दरिंदगी का खेल, गांव के घरों से खींच-खींच कर पुरुषों को बाहर निकाला गया फिर उनमें से 40 लोग चुने गए, जिन्हें जानवरों की तरह खींचकर गांव से बाहर ले जाया गया फिर उन्हें तीन टीम में बांट दिया गया फिर सबको एक साथ खड़ा किया गया और बारी-बारी उनका गला काट दिया गया और उनके पेट चीर दिए गए नतीजा ये हुआ कि उनमें से 34 लोग मौके पर ही मर गए जबकि कुछ लोग वहां पड़े तड़प रहे थे

मारने वालों में इतनी नफरत और गुस्सा भरा था कि वे एक एक कर सबको मारते गए, ना कुछ सुना ना कुछ कहा, सेनारी गांव भूमिहारों का था जबकि मारने वाले आरोपी MCC के नक्सली थे, घटना के अगले दिन पटना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार पद्मनारायण सिंह वहां जा पहुंचे, वो सेनारी गांव के ही निवासी थे, अपने परिवार के 8 लोगों की फाड़ी हुई लाशें देखकर उनको दिल का दौरा पड़ा और वे भी मर गए

इस वारदात से इलाके में ऐसी दहशत फैल गई कि इलाके में लोग लाइसेंसी हथियारों के साथ घरों की छतों पर बैठ जाते थे जिनके पास लाइसेंसी हथियार नहीं थे, वे कट्टा खरीदते थे पर खरीदते जरूर थे, कई बार अफवाह उड़ जाती थी कि माओवादी आ गए तो गांव वाले तुरंत पोजीशन ले लेते थे, जिनमें गांव की महिलाएं और बच्चे भी शामिल होते थे

मामला इतना बढ़ा कि केंद्र सरकार ने उस वक्त बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था मगर कांग्रेस के विरोध के चलते 24 दिनों में ही कानून वापस लेना पड़ा था

आज के दिन जितने भी लोग शहीद हुए उन सभी को विनम्र श्रद्धांजलि और शत-शत नमन

image

आज ही के दिन यानी 18 मार्च 1999 को बिहार के जहानाबाद जिले के सेनारी गांव में भूमिहार ब्राह्मण जाति के 34 निर्दोष लोगों को घरों से बाहर खींचकर बारी-बारी से गला काटा फिर सबका पेट फाड़ दिया

जी हां, यह नरसंहार MCC के नक्सलियों ने किया था जब बिहार में लालू यादव का जंगल राज था, आज आपको पूरा कहानी बताता हूं।

उस रात सेनारी गांव में 500 से ज्यादा सत्ता समर्थित नक्सलवादी लाल सलाम का नारा लगाते हुए घुस आए, उन्होंने गांव को चारों ओर से घेर लिया इसके बाद शुरू हुआ दरिंदगी का खेल, गांव के घरों से खींच-खींच कर पुरुषों को बाहर निकाला गया फिर उनमें से 40 लोग चुने गए, जिन्हें जानवरों की तरह खींचकर गांव से बाहर ले जाया गया फिर उन्हें तीन टीम में बांट दिया गया फिर सबको एक साथ खड़ा किया गया और बारी-बारी उनका गला काट दिया गया और उनके पेट चीर दिए गए नतीजा ये हुआ कि उनमें से 34 लोग मौके पर ही मर गए जबकि कुछ लोग वहां पड़े तड़प रहे थे

मारने वालों में इतनी नफरत और गुस्सा भरा था कि वे एक एक कर सबको मारते गए, ना कुछ सुना ना कुछ कहा, सेनारी गांव भूमिहारों का था जबकि मारने वाले आरोपी MCC के नक्सली थे, घटना के अगले दिन पटना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार पद्मनारायण सिंह वहां जा पहुंचे, वो सेनारी गांव के ही निवासी थे, अपने परिवार के 8 लोगों की फाड़ी हुई लाशें देखकर उनको दिल का दौरा पड़ा और वे भी मर गए

इस वारदात से इलाके में ऐसी दहशत फैल गई कि इलाके में लोग लाइसेंसी हथियारों के साथ घरों की छतों पर बैठ जाते थे जिनके पास लाइसेंसी हथियार नहीं थे, वे कट्टा खरीदते थे पर खरीदते जरूर थे, कई बार अफवाह उड़ जाती थी कि माओवादी आ गए तो गांव वाले तुरंत पोजीशन ले लेते थे, जिनमें गांव की महिलाएं और बच्चे भी शामिल होते थे

मामला इतना बढ़ा कि केंद्र सरकार ने उस वक्त बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था मगर कांग्रेस के विरोध के चलते 24 दिनों में ही कानून वापस लेना पड़ा था

आज के दिन जितने भी लोग शहीद हुए उन सभी को विनम्र श्रद्धांजलि और शत-शत नमन

imageimage
2 yrs - Translate

#razakar कल सिनेमाघरों में इसे पकड़ लो

image