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खाना अच्छे से पचे इसके लिए वागभट्ट जी ने सूत्र दिए।
"भोजनान्ते विषं वारी"
(मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है )
इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी मत पिये।
अब आपके मन मे सवाल आएगा कितनी देर तक नहीं पीना ???
तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना.....
अब आप कहेंगे इसका क्या calculation हैं ??
बात ऐसी है,
जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता है.....
पेस्ट में बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है....
उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है.....
(बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है )
पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की परिक्रिया शुरू होती है....
तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती हैं ।
तब आप जितना इच्छा हो उतना पानी पिये....
जो बहुत मेहनती लोग है (खेत मे हल चलाने वाले ,रिक्शा खींचने वाले पत्थर तोड़ने वाले)
उनको 1 घंटे के बाद ही रस बनने लगता है उनको घंटे बाद पानी पीना चाहिए.....
अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं ??? ...
तो खाना खाने के 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं !
अब आप पूछेंगे ये मिनट का calculation ????
बात ऐसी ही जब हम पानी पीते हैं
तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है.....
और अगर बच जाये तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है....
तो पानी - पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है...
तो आप खाना खाने से 45 मिनट पहले ही पाने पिये।
अच्छा खाएं , व्यायाम करें और स्वस्थ रहें 🙏
रेड मूवी रिलीज को 6 साल पूरे
रिलीज डेट-16 मार्च 2018
इस फिल्म में सौरभ शुक्ला ने किस तरह का किरदार निभाया है ?
#raidmovie #raid2018 #ghoomtiaankh #bollywoodclassics
महारानी जी की कहानी आपके साथ साझा करना एक सम्मान की बात है।
#महारानी3 अब सोनीलाइव पर स्ट्रीमिंग कर रही है।
#बिरयानी की ईजाद हिंदुस्तान में हुई, लेकिन पुलाव उससे बहुत पहले वजूद में आ चुका था,
... ये पुलाव असल में तुर्की में ईजाद हुआ "पिलाफ़" या "पलाउ" है, जिसका जिक्र इतिहास में दसवीं शताब्दी से मिलता है,
गोश्त की यखनी में चावल और मेवे वगैरह डालकर जो पकवान मध्य एशिया में बना करता था, उसे पिलाफ़ कहा जाता था, और यही व्यंजन तुर्की ईरानी लोगों के साथ भारत भी पहुँचा, .... शाहजहां का दौर आते आते गोश्त के स्टॉक में चावल पकाने से अलग एक विधि भी ईजाद हो गई जिसमें गोश्त के कोरमे और चावलों की तह लगाकर पुलाव बनाया जाने लगा, जिसको बिरयानी नाम दिया गया
.
.... लेकिन बिरयानी से अलग बीसियों तरह के पुलाव अब भी मध्य एशिया में बनाये जाते हैं, तस्वीर में उज़्बेकी पुलाव दिख रहा है, जिसमे काली किशमिश और गाजर के लम्बे पीस डाले जाते हैं... यही पुलाव कुछ मसालों और मेवों की घटाबढ़ी के साथ अफगानिस्तान में भी बनता है, और वहां का राष्ट्रीय व्यंजन है
अरब में बनने वाला पुलाव "मंदी" आजकल बहुत मशहूर हो रहा है जो असल में यमनी डिश है....
शक्ल से ये सभी पुलाव बहुत ज़ायकेदार महसूस होते हैं.... ये बहस क्या है कि लखनऊ की बिरयानी अच्छी है या दिल्ली की ? ज़रा अपने घरों से निकलकर दुनिया भी घूमें और पुलाव बिरयानी को उन जगहों पर भी खाकर देखा जाए जहां इन खानों की पैदाइश हुई थी, .... यक़ीनन ज़ायके के मामले में वो तमाम पुलाव भी बेजोड़ होंगे