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इस पेज द्वारा जो भी पोस्ट होता है उसपर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएँ आती है...। कुछ पोस्ट के पक्ष में तो कुछ विपक्ष में। कोई बात नहीं सबकी अपनी अपनी सोच होती है। मैं सबको तो खुश नहीं कर सकता न!
जब राम राज्य (त्रेता )में भी एक धोबी संदेहित रह गया तथा राम से संतुष्ट नहीं हुआ, तो मैं तो फिर भी कलयुग में हूँ वो भी.........।
खैर........, लेकिन बुरा तब लगता है की कमेंट करने वाले अपनी मर्यादा और सीमा भूल जाते हैं।
इस देश में 𝑭𝒓𝒆𝒆𝒅𝒐𝒎 𝒐𝒇 𝒔𝒑𝒆𝒆𝒄𝒉 & 𝑬𝒙𝒑𝒓𝒆𝒔𝒔𝒊𝒐𝒏 है की नहीं...?
लोग पोस्ट पर कई तरह के नकारात्मक कमेंट करने लग जाते है।
गंदी - गंदी गालियाँ देते हैं।
कॉंग्रेस का दलाल और मुस्लिम का पेज कहते हैं।
पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित कहते हैं...।
गैर हिन्दू कहते हैं।
भीमटो का पेज कहते है.....।
फिर कमेंट पर हमारी प्रतिक्रिया आती है तो हमसे राम की मर्यादा की उम्मीद करते हैं।
परवरिश पर सवाल उठाते हैं...।
जो रामत्व को लेकर शालीनता से आएगा उसके लिए राम हूँ परन्तु जो उड्डंडता से पेश आएगा उसके लिए लक्ष्मण हूँ।
और फिर राम ने भी तो कई बार शस्त्र उठाया ही था।
सहनशक्ति से जब चीजें परे जाएगी तो कोई भी तेवर दिखायेगा ही।
और क्षत्रिय अकेले राम ही नहीं थे बल्कि लक्ष्मण भी थे, जो जिस भाषा में समझता था उसे उसी भाषा में समझाते थे.....।
वर्तमान में योगी जी।
इसलिए जब भी पोस्ट पर गंदे कमेंट करें तो अच्छे रिप्लाई की उम्मीद ना करें।
और क्षत्रिय मर्यादा न सिखाने लग जाएँ!
सारी शालीनता क्षत्रियों को ही सिखायी जाती है।
जैसा समय होगी वैसी बातें होंगी।
कभी राम तो कभी कृष्ण या फिर कभी लक्ष्मण की भाषा में समझायेंगे।
गाली देकर फूल की उम्मीद मत करना।
जितना दोगे उससे दुगुना वापस कर दूँगा।
Gulaal movie के दुक्की बना का किरदार याद है न।
वैसा तेवर मिलेगा.......।
मैं तो चाहता हूँ हर राजपूत को समय को देखते हुए दुक्की बना का किरदार अपनाना चाहिए।
अब कोई उल्टा बोल के देखो...!
दुबारा पोस्ट पर दिखोगे नहीं।
मुझे राजपूत समाज के लिए काम करने पर पैसा नहीं मिलता है।
अपना नुकसान कर के काम करता हूँ।
जिसकी औकात सामने खड़े होने की नहीं है, वो भी उल्टा कमेंट करेगा क्या?
मर्यादा की ज्ञान पेलने जो आएगा....।
स्पष्ट बात वह पेला जाएगा।

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बीजेपी और क्षत्रिय समाज की अनबन क्यों?
1. बीजेपी के विकास वाले मसले पर क्षत्रिय समाज को कोई लेना देना नहीं था।
2. बीजेपी के मँहगाई वाले मसले पर क्षत्रिय समाज को कोई मतलब नहीं था।
3. बीजेपी के योजनाओं से क्षत्रिय समाज को कोई मतलब नहीं था।
4. बीजेपी के न्यायिक फैसलों से भी क्षत्रिय समाज को कोई मतलब नहीं था।
...... लेकिन जब बीजेपी और आरएसएस ने क्षत्रिय इतिहास विकृत करना चाहा, तब स्वाभिमानी राजपूतों का ज़मीर जागा और फिर तब विरोध शुरु हुआ भाजपा के क्षत्रिय विरोध नेताओं का।
शुरुआत हुई राजस्थान से, जब राजपूत समाज के एक बड़े चेहरे आनंद पाल सिंह का एनकाउंटर हुआ, तब नारा दिया गया -"मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं. "

मिहिरभोज को गैर क्षत्रिय बताने पर हरियाणा (कैथल )
के राजपूतों ने बीजेपी का विरोध शुरु किया....।

हरियाणा से ही सम्भवतः क्षत्रिय समाज द्वारा लोटे में नमक डालकर भाजपा के विरोध का संकल्प लिया गया।
हरियाणा व मध्यप्रदेश के राजपूत व राजपूत संगठनों द्वारा नारा दिया गया भाजपा हटाओ, देश बचाओ।

राजस्थान, पश्चिमी उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश,हरियाणा के क्षत्रियों द्वारा ये नारा और ट्वीटर व फेसबुक ट्रेंड चलाया गया की क्षत्रिय विरोधी भाजपा।
सुखदेव सिंह हत्या मामले पर भी राजस्थान राजपूत करणी सेना ने भाजपा का विरोध शुरू हुआ।
बिहार के मधुबनी और सारण (छपरा)में राजपूतों के निर्मम हत्या के बाद भी विरोध शुरु हुआ भाजपा का।
सहारनपुर (उप ) से भी दो बार भाजपा का विरोध हो चुका है।
बृजभूषण शरण सिंह को किनारे लगाने पर भी क्षत्रिय समाज का गुस्सा फूटा, फिर नारा दिया बृजभूषण नहीं तो बीजेपी नहीं...। और इसी वजह से उनपर आँच नहीं आई...। नहीं तो उनको भी दरकिनार करने का सोच लिया था बीजेपी ने.....।
गुजरात में क्षत्रिय में क्षत्रिय समाज द्वारा बीजेपी का विरोध....।
और ऐसे अनगिनत मसले हैं जहाँ राजपूत समाज ने भाजपा के प्रति अपना विरोध दिखाया है।
यदि इतिहास के साथ छेड़ -छाड़ न होता तो शायद राजपूत समाज भाजपा का विरोध न करता।
क्योंकि सबकुछ छिन जाने के बाद क्षत्रियों के पास इतिहास ही उसकी धरोहर है।

बीजेपी के कुछ अन्य मामले :-
1. दिल्ली नॉर्थ सांसद मनोज तिवारी द्वारा मिहिरभोज को गुज्जर बताना...
2. तत्कालीन जम्मू -कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा प्रतिहारों को गैर राजपूत बताना...
3. ओमेन्द्र रतनू द्वारा लिखित किताब महाराणा सहस्त्र वर्षों का संघर्ष के लॉन्च पर अमित शाह का जाना और महाराणा के व राजपूतों पर न बोलकर, चोल सम्राज्य का महिमा मंडन करना...
4. बिहार बीजेपी द्वारा आल्हा को अहीर बताना...
आदि।

इतना सबकुछ होने के बाद भी अंधभक्ति क्यों?
मेरे समझ में एक बात नहीं आ रही है की ग्राउंड लेवल पर जो राजपूत संगठनों और राजपूतों ने विरोध किया उनको असली राजपूत माँनू या फिर सोशल मिडिया पर बीजेपी के लिए अंधभक्ति करने वालों को असली राजपूत माँनू?
ग्राउंड लेवल पर तो मैं देख रहा हूँ की सारे राजपूत हैं, परन्तु सोशल मिडिया पर अकाउंट फेक भी हो सकता है।
जमीनी स्तर पर राजपूतों द्वारा इतना विरोध के बाद वो कौन लोग हैं जो राजपूतों के नाम पर अकाउंट बनाकर अंधभक्ति में लगे हैं।

प्रश्न और भी है जैसे - क्या राजपूत समाज बीजेपी के विरोध में उतर आई है ये बाद सारे राजपूत समाज को नहीं पता क्या?
या क्या बीजेपी विरोधी राजपूतों को , बीजेपी सहयोगी राजपूत, राजपूत नहीं मानते...।
असली स्वाभिमानी कौन???
क्या हिन्दू और क्षत्रिय होने का प्रमाण पत्र अंधभक्त बाटेंगे हमें?
मूर्खों का जमावड़ा नहीं बल्कि सजग राजपूतों का दस संख्या भी काफी है.

इतिहास संरक्षण में मैं सजग, स्वाभिमानी, शिक्षित और संवेदनशील राजपूतों से सहयोग माँगता हूँ। क्योंकि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता....।
मुझे गैर -राजपूतों से ज्यादा अंधभक्त राजपूतों से लड़ना पड़ता है।
स्वाभिमानी राजपूतों से मैं कहना चाहता हूँ ना ज्यादा तो कम से कम कमेंट बॉक्स में ही सही, मूर्खों को समझायें।
आपके सहयोग के बिना हम या हमारी पूरी टीम कम पड़ जाएगी।

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