Discover postsExplore captivating content and diverse perspectives on our Discover page. Uncover fresh ideas and engage in meaningful conversations
🌹 🌷 ।। श्री ।। 🌷 🌹
जय सियाराम सुमंगल सुप्रभात प्रणाम बन्धु मित्रों। राम राम जी।
श्रीरामचरितमानस नित्य पाठ।। पोस्ट २९८, बालकाण्ड दोहा ५५/५-८, शिवजी ने सती का झूठ जान लिया।
बहुरि राममायहि सिरु नावा।
प्रेरि सतीहि जेहिं झूठ कहावा।।
हरि इच्छा भावी बलवाना।
हृदय विचारत संभु सुजाना।।
सती कीन्ह सीता कर बेषा।
सिव उर भयउ बिषाद बिसेषा।।
जौं अब करउॅं सती सन प्रीती।
मिटइ भगति पथु होइ अनीती।
भावार्थ:- शिवजी ने श्रीरामचन्द्र जी की माया को सिर नवाया, जिसने प्रेरणा करके सती के मुंह से भी झूठ कहला दिया।सुजान शिवजी ने मन में विचार किया कि हरि की इच्छा रूपी भावी प्रबल है। सतीजी ने सीताजी का वेष धारण किया, यह जानकर शिवजी के हृदय में बडा विषाद हुआ़। उन्होंने सोंचा कि यदि मैं अब सती से प्रीति करता हूं तो भक्ति मार्ग लुप्त हो जाता है और बडा अन्याय होगा।