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'हमारा 10 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड इस बात का प्रमाण है कि भाजपा की गारंटी पूरी होती है। अब हम 2047 में 'विकसित भारत' का विजन लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं। हमारे पास एक ऐसे भारत का विजन है, जिसमें हर व्यक्ति के सिर पर पक्की छत हो और युवाओं के लिए रोजगार के अनेक अवसर हों। हम उस भारत के निर्माण में जुटे हैं, जहां किसान समृद्ध और महिलाएं सशक्त हों।'
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी द्वारा Hindustan को दिए इस साक्षात्कार को अवश्य पढ़ें...
क्षत्रिय और राजनीतिक पार्टियाँ :-
शासन चाहे जिस भी दल का रहा हो, शोषित हमेशा से क्षत्रिय समाज ही रहा है।
शुरु से लेकर अबतक जिस भी राजनीतिक दल को देखें सब ने राजपूतों का शोषण ही किया है....।
क्षत्रिय समाज की महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करना कोई आज की बात नहीं, किन्तु हाल के वर्षों से इसका दायरा काफी बढ़ गया है हिंदुत्व के ध्रुविकरण को लेकर।
अभी तक मैंने किसी राजनीतीक दल का नाम भी नहीं लिया है, परन्तु कुछ भक्त लोग कहेंगे की किसी विशेष दल को टारगेट कर रहे हैं।
जबकि वास्तविकता ये है की मुझे किसी राजनीतिक दल से कोई मतलब है ही नहीं।
मुझे मतलब है तो बस अपने समाज से।
अपने समाज को जागरूक और विवेकशील बनाना मेरा कर्तव्य है, और वो मैं आखिरी साँस तक करता रहूँगा।
एक बात मैं बताना चाहूँगा कि अभी तो मैं किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा हूँ परन्तु 2014 के लोकसभा चुनाव में खुलकर मेरा पूरा परिवार ने तथाकथित हिंदूवादी दल को वोट किया था।
आज जितने भी लोग इस तथाकथित हिंदूवादी दल के कट्टर विरोधी हैं वे ही इसका एक समय प्रबल समर्थक थे।
Note - क्षत्रियों का शोषण प्रत्येक दल ने किए है चाहे व कॉंग्रेस हो या बीजेपी या भी कोई अन्य क्षेत्रीय दल।
ऐसा क्यों???
क्योंकि न तो क्षत्रियों की न तो कोई पार्टी है और न ये स्वतंत्र राजनीतिक विचारधारा को अपनाते हैं।
इस चीज़ में हमें ब्राह्मणों से सीख लेना चाहिए।
हालांकि उनका भी कोई अपना दल नहीं है परन्तु बीजेपी और ख़ासकर आरएसएस तो ब्राह्मणों की पोषक रही है।
और साथ ही साथ ब्राह्मण स्वतंत्रत राजनीति भी अपनाते हैं। चाहे आप राजस्थान को देखें या फिर उत्तरप्रदेश अथवा बिहार को, सब जगह राज्य मन्त्रीमंडल में आपको ब्राह्मण मिलेंगे ही।
केंद्रीय मंत्रालय में भी इनकी अच्छी धाक है।
राज्य स्तर की बात करें तो बिहार को देखें चाहे वह JDU हो, RJD हो, कॉंग्रेस हो या फिर बीजेपी सब में ब्राह्मणों के टिकट का वितरण अच्छा है...।
क्यों?
क्योंकि ब्राह्मण स्वतंत्र राजनीति अपनाते हैं।
✍️ कॉंग्रेस सरकार में क्षत्रियों का नुकसान :-
1. राज्यों का एकीकरण के तहत राजपूतों का राज्य छीन जाना.
2. प्रिवी पर्स के तहत रजवाड़ों को दी जाने वाली सुविधा का छिन जाना.
3. सीलिंग द्वारा जमीनों का छीन जाना.
✍️बीजेपी सरकार में क्षत्रियों का नुकसान :-
1. SC, ST act पारित होना.
2. EWS में राजपूतों की न्यूनतम सहभागिता.
3. राजपूतों पर आये दिन बीजेपी नेताओं द्वारा अभद्र टिप्पणीयाँ.
4. क्षत्रिय इतिहास चोरी
5. क्षत्रिय इतिहास विकृतिकरण
✍️विरासत :-
विदेशी अक्रांताओं से देश को बचाने के लिए जनसंख्या का खत्म होना.
विलय पत्र द्वारा राज्य छिन जाना.
प्रिवी पर्स द्वारा सुविधाएँ छिन जाना.
सीलिंग द्वारा जमीन छिन जाना.
और अब इतिहास चोरी द्वारा स्वर्णिम और रक्तरंजित इतिहास का विकृतिकरण का चोरी होना।
.............
क्षत्रियों ने सब कुछ बर्दास्त किया पर अब अपने पूर्वजों द्वारा दर्ज किये गए रक्तरंजित इतिहास का विकृतिकरण नहीं....।
और हिंदूवादी पार्टी से नाराजगी के यही कारण है।
✍️हिन्दूवादी पार्टी ने राजपूतों के इतिहास को नष्ट करने का कोई कसर नहीं छोड़ा।
कम -से -कम कॉंग्रेस ने राजपूत महापुरुषों को अन्य जाति का तो नहीं बताया।
कॉंग्रेस सरकार के समय में जितने भी राजपूतों के इतिहास पर फिल्मे और धारावाहिक बनी सब में उन्हें राजपूत ही दिखाया गया।
फिल्मे - अमर सिंह राठौड़, जय चित्तौड़, हठी हम्मीर, पृथ्वीराज चौहान आदि।
धारावाहिक - मैं दिल्ली हूँ, धरती का वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान, भारत का वीर पुत्र महाराणा प्रताप आदि।
कॉंग्रेस सरकार के समय में पृथ्वीराज चौहान पर बनी धारावाहिक में पृथ्वीराज को राजपूत दिखाया गया था।
लेकिन पिछले वर्ष आई फ़िल्म सम्राट पृथ्वीराज चौहान में उन्हें कहीं राजपूत शब्द से सम्बोधित नहीं किया गया परन्तु राजपूत यूहीं खुश हो रहे हैं।
राजपूतों के पास एक ही चीज़ बची है वो है उसका इतिहास...। और ये लोग हमसे ये भी छिन लेंगे तो बचेगा क्या?
✍️मनोज तिवारी :- दिल्ली नॉर्थ बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने तो अपने एक पोस्ट में खुल्लम -खुल्ला मिहिरभोज को गुज्जर बताय था।
✍️सत्यपाल मलिक :-तत्कालीन जम्मू -कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने तो प्रतिहारों को गैर राजपूत बताया था।
✍️बिहार बीजेपी :- बिहार बीजेपी ने तो पिछले वर्ष अपने ऑफिशियल अकाउंट से डाला वीर अहीर आल्हा -ऊदल...
इस पेज द्वारा जो भी पोस्ट होता है उसपर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएँ आती है...। कुछ पोस्ट के पक्ष में तो कुछ विपक्ष में। कोई बात नहीं सबकी अपनी अपनी सोच होती है। मैं सबको तो खुश नहीं कर सकता न!
जब राम राज्य (त्रेता )में भी एक धोबी संदेहित रह गया तथा राम से संतुष्ट नहीं हुआ, तो मैं तो फिर भी कलयुग में हूँ वो भी.........।
खैर........, लेकिन बुरा तब लगता है की कमेंट करने वाले अपनी मर्यादा और सीमा भूल जाते हैं।
इस देश में 𝑭𝒓𝒆𝒆𝒅𝒐𝒎 𝒐𝒇 𝒔𝒑𝒆𝒆𝒄𝒉 & 𝑬𝒙𝒑𝒓𝒆𝒔𝒔𝒊𝒐𝒏 है की नहीं...?
लोग पोस्ट पर कई तरह के नकारात्मक कमेंट करने लग जाते है।
गंदी - गंदी गालियाँ देते हैं।
कॉंग्रेस का दलाल और मुस्लिम का पेज कहते हैं।
पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित कहते हैं...।
गैर हिन्दू कहते हैं।
भीमटो का पेज कहते है.....।
फिर कमेंट पर हमारी प्रतिक्रिया आती है तो हमसे राम की मर्यादा की उम्मीद करते हैं।
परवरिश पर सवाल उठाते हैं...।
जो रामत्व को लेकर शालीनता से आएगा उसके लिए राम हूँ परन्तु जो उड्डंडता से पेश आएगा उसके लिए लक्ष्मण हूँ।
और फिर राम ने भी तो कई बार शस्त्र उठाया ही था।
सहनशक्ति से जब चीजें परे जाएगी तो कोई भी तेवर दिखायेगा ही।
और क्षत्रिय अकेले राम ही नहीं थे बल्कि लक्ष्मण भी थे, जो जिस भाषा में समझता था उसे उसी भाषा में समझाते थे.....।
वर्तमान में योगी जी।
इसलिए जब भी पोस्ट पर गंदे कमेंट करें तो अच्छे रिप्लाई की उम्मीद ना करें।
और क्षत्रिय मर्यादा न सिखाने लग जाएँ!
सारी शालीनता क्षत्रियों को ही सिखायी जाती है।
जैसा समय होगी वैसी बातें होंगी।
कभी राम तो कभी कृष्ण या फिर कभी लक्ष्मण की भाषा में समझायेंगे।
गाली देकर फूल की उम्मीद मत करना।
जितना दोगे उससे दुगुना वापस कर दूँगा।
Gulaal movie के दुक्की बना का किरदार याद है न।
वैसा तेवर मिलेगा.......।
मैं तो चाहता हूँ हर राजपूत को समय को देखते हुए दुक्की बना का किरदार अपनाना चाहिए।
अब कोई उल्टा बोल के देखो...!
दुबारा पोस्ट पर दिखोगे नहीं।
मुझे राजपूत समाज के लिए काम करने पर पैसा नहीं मिलता है।
अपना नुकसान कर के काम करता हूँ।
जिसकी औकात सामने खड़े होने की नहीं है, वो भी उल्टा कमेंट करेगा क्या?
मर्यादा की ज्ञान पेलने जो आएगा....।
स्पष्ट बात वह पेला जाएगा।