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जुल्म की कोई जाति धर्म होती है पहले जरा ये बताने का कष्ट करें
कश्मीरी पंडितों के साथ किसने जुल्म किया ये बताने का भी हौसला है
नहीं तो फिर जुल्म की जाति तय हो गई
मतलब हिंदुओं पर हुआ जुल्म तुम्हारी नजर में जुल्म नहीं है
मुस्लिमों पर हुआ जुल्म तुम्हारी नजर में जुल्म है कमाल है

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कांग्रेस के राज में कश्मीर: तुमको कश्मीरी पंडित तो याद है, क्या किसी को याद है 23 फरवरी 1991 और कुनन पोशपोरा गांव?

23 फ़रवरी, 1991. भारत प्रशासित कश्मीर में कुपवाड़ा ज़िले के छोटे से गांव कुनन-पोशपोरा में दिन भर की गहमागहमी के बाद ज़रीना और ज़ूनी (काल्पनिक नाम) रात को सोने की तैयारी कर रही थीं.

तभी अचानक दरवाज़े पर दस्तक हुई.

उस रात जब ज़रीना और ज़ूनी ने दरवाज़े पर फ़ौज को देखा तो समझ गईं कि ये 'क्रैक डाउन' है.

क्रैक डाउन के वक़्त, जैसा कि आम तौर पर होता है, मर्दों को अलग कर दिया गया और सैनिक घरों में घुस आए. मगर इसके बाद जो हुआ, उसे याद करके आज भी ज़ूनी की आंखें भर आती हैं.

'आज भी याद हैं उनके चेहरे'
ज़ूनी बताती हैं, "हम सोने की तैयारी कर रहे थे कि फ़ौज आ गई. उन्होंने मर्दों को बाहर निकाल दिया. कुछ ने हमारे सामने शराब पी. मेरी दो साल की बच्ची मेरी गोद में थी. हाथापाई में वो खिड़की से बाहर गिर गई. वह ज़िंदगी भर के लिए विकलांग हो गई."

वह कहती हैं, "तीन सैनिकों ने मुझे पकड़ लिया. मेरा फ़िरन (कश्मीरी लोग जो लंबा सा लिबास पहनते हैं), मेरी कमीज़ फाड़ दी. इसके बाद मुझे नहीं मालूम कि क्या-क्या हुआ. वो पांच लोग थे. उनकी शक्लें मुझे आज भी याद हैं."

ज़रीना भी इसी घर में मौजूद थीं. उनकी शादी को सिर्फ़ 11 दिन हुए थे.

ज़रीना कहती हैं, "मैं उसी दिन मायके से वापस आई थी. फ़ौजियों ने मेरी सास से पूछा कि ये नए कपड़े किसके हैं. मेरी सास ने कहा कि ये नई दुल्हन के हैं. इसके बाद जो हुआ, मैं उसे बयान नहीं कर सकती. हमारे साथ सिर्फ़ ज्यादती नहीं हुई, ऐसा ज़ुल्म हुआ है जिसकी कोई हद नहीं. आज भी फ़ौजियों को देखकर हम डर से तड़प जाते हैं."

इस सिलसिले में जगह-जगह सर्च ऑपरेशन हुआ करते थे, जो अब तक ख़त्म नहीं हुए हैं. उन्हें आम ज़बान में 'क्रैक डाउन' कहा जाता है.

एक इलाक़े को फ़ौज घेरे में ले लेती है और इसके बाद इलाक़े के तमाम मर्दों को घरों से निकालकर किसी एक जगह पर इकट्ठा किया जाता है. इसके बाद घरों की, जिनमें सिर्फ़ औरतें और बच्चे होते हैं, तलाशी ली जाती है. साथ-साथ मर्दों की शिनाख़्त परेड होती है, जिसमें संदिग्ध चरमपंथियों को अलग किया जाता है.

कुनन और इसके करीबी गांव पोशपोरा के लोग भारतीय फ़ौज पर उस रात गांव की औरतों के साथ बलात्कार का आरोप लगाते हैं.

उनका यह भी आरोप है कि उस रात औरतों के बलात्कार के साथ मर्दों को भी बुरी तरह प्रताड़ित किया गया. उनका कहना है कि वे पिछले 26 सालों से इंसाफ़ की लड़ाई लड़ रहे हैं.

श्रीनगर में महबूबा मुफ़्ती सरकार के एक मंत्री नईम अख़्तर से जब मैंने इस केस के बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि कश्मीर जैसे हालात में कई दफ़ा हक़ीक़त पर धूल सी जम जाती है.

अब कुछ नौजवान कश्मीरी महिलाओं का कहना है कि वे इसी धूल को हटाने की कोशिश कर रही हैं. 2013 में कुछ कश्मीरी औरतों ने कुनन-पोशपोरा के लोगों के हवाले से स्थानीय अदालत में याचिका दायर करके इस केस को दोबारा खोलने की कोशिश की थी.

नताशा राथर उनमें से एक हैं. उन्होंने चार अलग नौजवान कश्मीरी महिलाओं के साथ मिलकर कुनन-पोशपोरा बलात्कारों पर एक किताब लिखी है. इस किताब को कई इनाम भी मिल चुके हैं.

नताशा कहती हैं, "ये एक इतना बड़ा सामूहिक बलात्कार का मामला है जिसमें पीड़ित बड़ी हिम्मत करके सामने आए हैं. और इस मामले में बहुत सारे चश्मदीद मौजूद हैं. हम चाहते थे कि ये केस दोबारा खोला जाए."

केस दोबारा शुरू हुआ और एक लंबे और मुश्किल संघर्ष के बाद हाई कोर्ट ने पाड़ितों को मुआवज़ा देने का आदेश जारी किया.

प्रदेश सरकार ने पहले कहा कि उसे यह फ़ैसला मंज़ूर है, लेकिन उसके बाद इस फैसले को भारत के सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज कर दिया गया, जहां यह केस अब भी जारी है.

भारतीय सेना का पक्ष
भारतीय फौज पहले से इन आरोपों की खंडन करती है. इस बार हमने उनसे इंटरव्यू की दरख्वास्त की तो उन्होंने हमें एक बयान भेजा.

सेना के प्रवक्ता ने हमें बताया कि उन आरोपों की तीन बार स्वतंत्र जांच हुई है और विरोधाभासी बयानों की वजह से पुलिस ने यह केस बंद कर दिया.

लेकिन एक स्थानीय अदालत संदिग्धों की शिनाख्त परेड करवाने का आदेश जारी कर चुकी है, जिस पर अमल होना अभी बाक़ी है.

सरकारी अधिकारी तो बहुत संभल-संभल कर और इशारों में बात करते हैं लेकिन शायद सारे अधिकारी ऐसे नहीं हैं.

हम महिला आयोग की प्रमुख नईमा अहमद महजूर से मिले तो उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि उनकी नज़र में उन गांव वालों के साथ यह जुर्म हुआ है और इसे साबित किया जाना चाहिए.

हालांकि उनका कहना था कि प्रदेश सरकार इस मामले में दख़लअंदाज़ी नहीं कर सकती.

उस रात कुनन पोशपोरा में वाकई क्या हुआ, सच्चाई शायद कभी सामने न आए. यहां एक नई नस्ल जवान हो चुकी है

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23 फरवरी 1991: आधी रात को भारतीय सैनिकों का जत्था दो गांव में घुसा, सभी मर्दों को बंधक बनाया और फिर भारतीय सेना के जवानों ने सैंकड़ों मुस्लिम महिलाओं का बलात्कार किया; गर्भवती महिलाएं समेत 80 साल की बूढ़ी औरत से कर 9 साल की की बच्ची तक किसी को नहीं छोड़ा, सभी का बलात्कार किया गया,
बलात्कारियों को सजा देने से इंकार करते हुए संवैधानिक सिस्टम ने कहा कि अगर इनको (बलात्कारियों को) को सजा दिया गया तो भारतीय सैनिकों का मनोबल टूट जाएगा।
#kunanposhpora

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BIG BREAKING NEWS 🚨 Srilanka says it will not allow any third party or country to compromise India’s security 🔥🔥

Srilanka calls India Big Brother & thanks PM Modi for helping it during the difficult time.

When asked if Sri Lanka is influenced by China, SL Minister Tharaka Balasuriya said, "We have a special relationship with India because of civilizational link which we have with India."

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