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करोना काल की कड़वी यादें.......!!!!!!
हम लोग केवल खाना ही नहीं बांटते, प्यार भी बांटते हैं और काउंसलिंग भी करते हैं।।
आज सुबह एक करोना पीड़ित परिवार का खाने के लिए फोन आया।। मेरी उनसे करीब 15 से 20 मिनट बात हुई।। बातचीत में पता चला भाई साहब बैंक में जोनल ऑफिस में अच्छी पोस्ट पर है।। पति पत्नी दोनों को करोना है और उनकी एक 5 साल की प्यारी सी बच्ची है।। सुनकर बहुत अच्छा लगा कि बच्ची इस महामारी से बची हुई है पर उनके साथ ही रह रही है।। बातचीत में मैंने उनसे पूछा आप बच्ची को कैसे अपने से दूर रखते हो।। भाई साहब ने बताया बहुत मुश्किल है, फिर भी दूर से ही समझा-बुझाकर कि बेटा हमारे पास आओगी तो तुम्हें भी करोना हो जाएगा।। इतनी छोटी बच्ची भी अपना काफी काम अपने आप करने लगी है।।
अभी थोड़ी देर पहले मैं और Ravinder, Munendra भाई का प्यार मतलब कि खाना उस परिवार को देने जा रहे थे तो मुझे ध्यान आया कि प्यारी सी बिटिया तो भी कही नही जा रही होगी। छोटी सी बच्ची की कोई ना कोई छोटी सी इच्छा भी होगी। चलो उसके लिए एक चाकलेट ले चलते हैं।। दोस्तों हमारे पास आक्सीजन और बेड तो हैं नही पर खाना और प्यार बहुत हैं जिसे हम बांटते रहेगे।