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हूं लड्यो घणो, हूं सह्यो घणो, मेवाडी मान बचावण नै |
में पाछ नहीं राखी रण में, बैरया रो खून बहावण नै ||

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ना वे धर्म जात में बँटता,ना ही कुटुम कबीलां में।
पिढ्यां खुद री रण में मेली, राखण खुशियाँ थारा कबीलां में॥
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भावार्थ - वे (राजपूत) ना ही धर्म-जाति में बँटे और ना ही कुटुम्ब-कबीलों में।
उन्होंने किसी भी धर्म-जाति का भेद किये बिना दूसरे समाजों(कबीलों) की सुरक्षा में अपनी कईं पीढ़ियों को युद्धभूमि में भेजा।
फ़ोटो : गुजरात के प्रसिद्ध लोकदेवता विर वच्छराज दादा सोलंकी की है।
जय राजपूताना🙏🚩

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गूगल मैप से दुनिया का हर मार्ग देखा जा सकता है
परन्तु धर्म का मार्ग सिर्फ हमारा धर्म ग्रंथ वेद ही दिखाता है🙏