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बाजरा की रोटी , चने का साग
अब तो सिर्फ यादें ही रह गयी है , हमारे 90s के समय मे गाँवो में इसी प्रकार की किचन होती थी और इसी प्रकार का खाना होता था । इन दिनों में तो आलू भी मीठे हो जाते थे इसलिए घर के लोग चने के साग को काटकर सूखा लेते थे फिर गर्मियों के दिनों में इसका उपयोग किया जाता था । उस समय हर एक सब्जी हर एक सीजन में नही मिलती थी । सीजन के हिसाब से ही सब्जी मिलती थी । गांव के लोग सब्जी बाजार से खरीदते ही नही थे सब खेतों में उगाया जाता था ।
यादें बचपन की
बैंगलोर कर्नाटक में किसानों ने शुरू किया अपना सुपरमार्केट🥰😍
दिल मोह लिया भई 💘
वी.एस.कुदुम्बार जी जो कि कूर्मि समाज से आते है उन्होंने समाज की मजबूती के लिए किसान बैंक की स्थापना की और समाज के हर तबके को रोजगार से जोड़ने का प्रयास कर रहे है। हम सभी इनका बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद करते इन्होंने बहुत अच्छा कार्य किया समाज के लिए गर्व की बात है😍😍