ईद के दिन आतंकी हमले की साजिश।

पुलवामा में आतंकवादियों के साथ एनकाउंटर।

सुरक्षाबलों ने 1 आतंकी को मार गिराया।

पुलवामा के चप्पे चप्पे पर सुरक्षाबल तैनात।

मेरठ में सड़क पर नमाज़ियों के क़ब्ज़े के चलते सेना के ट्रको को भी रोकना पड़ा

पुलिस ने रास्ता ख़ाली करवाकर सेना के ट्रक निकलवाएँ

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रमज़ान के दौरान का एक और हॉरर आया सामने

रामपुर में #ईद से पहले भेंट चढ़ गई 3 साल की मासूम बच्ची

सायरा बानों और सग़ीर अहमद ने #अल्लाह को खुश करने के लिए काट दिये बच्ची के पैर

#rampur #rampurpolice

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अंग्रेजों से लड़े थे कांग्रेस वाले ये तो इतिहास में पढ़ाया गया,
अब वो इतिहास भी सामने आ रहा है,

मगर अंग्रेजों के लिये भारत सरकार से लड़ती हुई कांग्रेस दिखाई पड़ रही है... आज 😳

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महिला दलित हिन्दू नही ईसाई है।
क्यों मोदी के एजेंडे पर काम करते हो??
केवल महिलाओं पर अत्याचार की बात करते तो मान्यता दी जाती लेकिन तुमको राजनैतिक लाभ भी चाहिए।
सारे हिंदुओं के बलिदान को दरकिनार कर मोदी ने आजादी की लड़ाई में ईसाइयों के योगदान को सराहा वही तुम कर रहे हो??
जय हिन्द

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गर्भवती पाकिस्तानी अल्पसंख्यक महिला के साथ उसके पति के सामने दुष्कर्म।पति ने आँखें बंद की तो आँखें खोलकर दिखाया अपनी हैवानियत को और बोला ये पाकिस्तान है यहाँ दलित हिंदू के साथ यही होता है इतनी हैवानियत को देखकर पति बेहोश हो गया रेप के बाद की फोटो पोस्ट नहीं कर सकते क्योंकि वॉयलेंस ले लेगा ।

पाकिस्तान अपनी अल्पसंख्यक आबादी के लिए अन्याय और निराशा का एक भयावह परिदृश्य है।

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मुसलमानों को अभी अभी तक तो यही लग रहा था कि वे भारत जीत लेंगे।

उन्हें लगता है कि उन्होंने 600 साल राज किया, बीच में अंग्रेज टपक पड़े वरना सबकुछ उनका ही था। अलीगढिया इतिहासकारों के अनुसार आजादी की लड़ाई मुस्लिम अपना खोया राज वापस प्राप्त करने के लिए लड़े, खून बहाया लेकिन 1947 में दो छोटे भूमि के टुकड़ों से ही उन्हें संतोष करना पड़ा। जब तक यहूद और हनुद फतेह नहीं कर लिए जाते, कयामत सम्भव नहीं और उसके बिना हिसाब लटका हुआ है और अभी हूरें भी काफी दूर है।

भारत विजय का उनका सपना अब भी अधूरा है। आज जब वे भारत में अपनी स्थिति देखते हैं तो कहीं से भी विजेता जैसी फीलिंग या सम्मान उन्हें नहीं मिल पा रहा, उल्टा उन्हें पता है, सम्मान तो दूर हिन्दू मन अतिशय घृणा के साथ सामने खड़ा दिखाई देता है।

गंगा जर्मनी तहजीब और सेक्युलरों द्वारा खड़े किए गए कृत्रिम टिन टप्पर उड़ चुके हैं, खुला मैदान है, जो छिपा कर करते थे उसकी गुंजाइश नहीं है, चारों तरफ खुला माहौल है, सबको सबकुछ दिख रहा है।

मुसलमानों के अनेक स्थापित विश्वास छिन्न भिन्न हुए हैं।

कश्मीर, जिसे वे बिल्कुल पककर तैयार हुई, अपनी प्लेट में सजी बोटी के रूप में देख रहे थे, अब बहुत दूर खिसक गया है।

उनका यह विश्वास भी भग्न हो चुका है कि दीन की लड़ाई में फरिश्ते आते हैं और सहायता करते हैं। पूर्व में जब उनके आक्रमण होते थे, उनके उस्ताद उन्हें पेट भरकर ऐसे किस्से सुनाते थे और जिन्हें वे बिल्कुल सच भी मानते थे।

आज वे जब ग्लोबल स्थिति देखते हैं तो उन्हें कहीं से भी फरिश्तों का फ़ भी आता हुआ दिखाई नहीं देता।

उनका एक अंधविश्वास यह भी था कि जब भी काफ़िर उनसे अधिक ताकतवर होगा, अल्लाह दुश्मन के ही खानदान में कोई दीनी यौद्धा पैदा कर देगा जिससे हारी बाजी जीत ली जाएगी।

उनके इस विश्वास का आधार इतिहास में वे मंगोल और तुर्क हैं जो कभी इस्लाम के दुश्मन थे लेकिन फिर उन्हीं वंशों में कुछ कन्वर्ट होकर मुस्लिम यौद्धा हुए जिन्होंने दुनिया भर में इस्लाम का प्रसार किया और कहर बरपाया।

भारत में कुछ गद्दार हुए जिन्हें वे इसी नजरिए से देखते हैं। खिलाफत आंदोलन के समय अली बंधुओं के भी महात्मा गांधी के प्रति यही विचार थे।

वर्तमान लिबरल और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट जो हिन्दू अथवा ब्राह्मण नाम से उनके पक्ष में बेटिंग करते हैं उन्हें भी वे अल्लाह द्वारा भेजी गई इस्तेमाल लायक सामग्री ही मानते हैं।

किंतु बदली हुई परिस्थितियों में इसके कोई आसार दिखाई नहीं देते कि ये प्रभावी हो पाएंगे और उनके अधूरे सपने को पूरा कर पाएंगे।

विज्ञान, तकनीकी और इंटरनेट से भविष्य का जो भी चित्र बनता है, उलेमा वर्ग बहुत चिंतित हैं। इस्लाम की एक और चिंता बिगड़ती छवि को लेकर है, यह भी है कि दुनिया भर में अधिकांश आतंकी गुट इस्लाम से सम्बंधित हैं, सबसे बड़ी बात वे आतंकवादी समूह, यह खून खराबे वाली भयानक पैशाचिक लड़ाई इस्लाम के मिशन को आगे बढ़ाने के नाम पर अथवा प्रोफेट की इच्छा मानकर लड़ रहे हैं।

उनके स्वप्न भंग का कारण यह भी है कि खिलाफत के नाम पर बना तुर्की साम्राज्य 100 साल पहले ही टूट कर अनेक देशों में बंट गया जो सभी एक दूसरे के खून के प्यासे हैं और उनके पुनः एक होने के आसार दूर दूर तक दिखाई नहीं देते हैं।

दुनिया की इन घटनाओं का प्रभाव भारत के मुसलमानों पर भी पड़ता है और भारत में गजवा ए हिन्द का उनका स्वप्न दिनों दिन धुंधला और बिखरा हुआ सा लगता है।

संसार भर में उनके आतंक पर लीपापोती करने वाला लिब्रान्दू वर्ग भी नंगा हो गया। आज उनकी लाल कच्छी के नीचे झांकती हरी चड्डी के कारण उनके ये तर्क भी प्रभाहीन हो गए कि आतंक का मजहब नहीं होता अथवा ये गन तो अमरीका ने पकड़ाई है, अथवा गरीबी और अनपढ़ होने के कारण वे दंगाई व्यवहार करने वाले हैं।

इनके स्वप्नभंग का एक कारण पाकिस्तान की दुरावस्था भी है। अब तक वे पाकिस्तान को रियासते मदीना मानकर चल रहे थे और आरम्भ में तो उन्होंने यही सोचा कि मात्र दस ही वर्षों में वे फतेह इंढिया कर लेंगे, यह अत्यंत आसान लक्ष्य खिसकते खिसकते PFI के 2047 मिशन तक खिंच गया है इस बीच पाकिस्तान तो थक चुकी बुढ़िया वेश्या जैसा बन गया है जो सरेराह बोली लगवाकर अपनी बिक्री के लिए प्रस्तुत है। जिसे इन्होंने निरन्तर ऊर्जा देने वाली कमसिन माशूका समझा था वह भयंकर मवाद से पीड़ित मरणासन्न बुढ़िया निकल गई।

ऐसे तमाम करणों से हताश निराश कुंठित मुस्लिम अब दंगा फसाद कर तो देते हैं लेकिन अब उनकी वह अतीत वाली धुनक और वही प्रसिद्ध खेल टीम A B C D चल नहीं पाता। इसमें हिन्दू जागरूकता और सोशल मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका है।

अच्छा लगा तो दूसरा भाग लिखूंगा।

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मोदी सरकार में "इंडिया" का पतन हो रहा है और "भारत" का उदय।

सोनिया सरकार में प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने अपनी पुस्तक एवं एक इंटरव्यू में कहा कि मोदी सरकार ने प्रतिष्ठित अंग्रेजी विद्यालयों ("मेट्रोपोलिटन संस्थानों, जैसे कि सेंट स्टीफेंस कॉलेज", या फिर ऑक्सफ़ोर्ड हारवर्ड) में पढ़े, "औपनिवेशिक और सामंती बैकग्राउंड" वाले अभिजात वर्ग का विनाश कर दिया है।

बारू आगे कहते है कि पुराने अभिजात वर्ग ने राज्य के सभी संस्थानों, नौकरशाही, पुलिस, न्यायपालिका और मीडिया पे कब्जा (captured) कर लिया था। नाममात्र के भूमि सुधारों, कर संरचना और लाइसेंस परमिट नियंत्रण राज के द्वारा इस अभिजात वर्ग का एकाधिकार और सार्वजनिक व्यय पे उनकी पकड़ को (दूसरे शब्दों में, सरकारी खज़ाना इस वर्ग के ऊपर उड़ा दिया जाता था) संरक्षित रखा था, और सब्सिडी के द्वारा मध्यम वर्ग को खुश रखा जाता था।

वह बतलाते है कि पूर्व की सरकारों में, यहाँ तक कि वाजपेयी सरकार में भी प्रधानमंत्री कार्यालय इन प्रतिष्ठित अंग्रेजी विद्यालयों के पढ़ाकुओं से भरा होता था। लेकिन मोदी सरकार में अब छोटे शहरो एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि ("प्रोविंशियल बैकग्राउंड", स्थानीय भाषा एवं विद्यालयों में पढ़े) वाले नौकरशाहों एवं राजनीतिज्ञों की भरमार है। प्रतिष्ठित अंग्रेजी विद्यालय वाले लोगो को नीति आयोग भेज दिया गया है।

बारू स्वीकार करते है कि मोदी सरकार में "इंडिया" का पतन हो रहा है और "भारत" का उदय।

नवंबर 2019 में इंडियन एक्सप्रेस में तवलीन सिंह का लेख छपा था। इसमें तवलीन रूदन कर रही है कि प्रधानमंत्री मोदी के द्वितीय कार्यकाल में "नए", ध्यान दीजिये, नए अभिजात वर्ग ने अब भारत के मार्गदर्शन का पूरा प्रभार ले लिया है। इसलिए यह समझना आवश्यक है कि यह नया अभिजात वर्ग कौन है और इसके मूल्य क्या हैं?

तवलीन लिखती है कि पुराने अभिजात वर्ग के विपरीत, जो आम तौर पर "उच्च वर्ग और उच्च जाति", ध्यान दीजिये, उच्च वर्ग और उच्च जाति, के थे, नया अभिजात वर्ग पूरी तरह से निम्न मूल और निम्न जाति का है।

आप ठीक पढ़ रहे है। तवलीन लिख रही है नया अभिजात वर्ग पूरी तरह से निम्न मूल और निम्न जाति का है।

तवलीन आगे लिखती है कि यह नया अभिजात वर्ग मोदी के प्रति श्रद्धा, नए मूल्यों से लगाव और उन लोगों से गहरी नफरत करता है जो केवल अपने विशेषाधिकार के कारण लाभ उठा रहे थे।

फिर नवंबर 2020 में अरुण शौरी ने एक इंटरव्यू में कहा कि आरएसएस के "भूखे-नंगे" लोग अब प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक है। उनके इस समर्थन से क्रोधित होकर शौरी इन "भूखे-नंगे" लोगो के विरूद्ध इंटरव्यू में आग उगल रहे थे।

मैं कई वर्षो से लिखता आ रहा हूँ कि प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी, GST, आधार, सब्सिडी का सीधे लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर, लोन वसूली, अनुच्छेद 370 के समापन, कृषि सुधारो के द्वारा उच्च वर्ग और उच्च जाति के अभिजात वर्ग का रचनात्मक विनाश का दिया है; साथ ही, शौचालय, घर, कुकिंग गैस, घर में पाइप से जल की आपूर्ति, इत्यादि के द्वारा "निम्न मूल और निम्न जाति" एवं "भूखे-नंगे" वर्ग के नए अभिजात वर्ग का उदय कर दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी भारत में रचनात्मक विनाश (creative destruction) कर रहे है. वही रचनात्मक विनाश, जिसके बिना हम नए समाज, भ्रष्टाचार मुक्त समाज, एकसमान समाज की स्थापना नहीं कर सकते।

तभी भ्रष्ट परिवादवादी पार्टिया, खानदान के बूते पे पत्रकारिता करने वाले लोग, परिवार के बूते पे लाखो करोड़ो का गबन कर जाने वाले दलाल प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में खड़े है।

इस नए उभरते हुए भारत का स्वागत कीजिये, उत्सव मनाइये।

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अरविंद केजरीवाल जी के कट्टर ईमानदारी के सर्टिफिकेट की तो आज दिल्ली हाईकोर्ट ने धज्जियां उड़ा दी। दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्पाद शुल्क नीति मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED द्वारा, उनकी #गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने बयान में कहा: ED द्वारा एकत्र की गई सामग्री से पता चलता है कि वह अपराध की आय के उपयोग और छिपाने में सक्रिय रूप से शामिल था।

खबर के मुताबिक अरविंद केजरीवाल अब सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं, लेकिन अगर वहां से भी ऐसा ही कुछ आ गया तो लोकसभा चुनाव के पहले ना सिर्फ उनको बल्कि उनके हर एक साथी दल को भी बहुत बड़ा झटका लग जाएगा...
@ArvindKejriwal

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