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आखिर इन जैसी पिक्चरों को ऑस्कर क्यों नहीं मिलते सवा करोड़ लोगों की प्रेरणा पर निर्धारित हैं यह मूवी हम जैसों के लिए रियल मोटिवेशन है
मुझे सोच कर शर्म आती है कि एनिमल जैसी मूवी इतने हजार करोड़ का प्रॉफिट कर गई और मुझे बड़ी हैरत से लिखना पड़ रहा है कि समाज को उसने क्या मैसेज दिया गंदी आदतों के सिवा कुछ नहीं
और ट्वेल्थ फैल जैसी मूवी समाज को एक अच्छा मैसेज देती है और इन जैसी मूवी को देखने के लिए लोगों को हमको भेजना चाहिए और बढ़ावा देना चाहिए ताकि हर व्यक्ति की सोच इस तरह बनाए
ज्यादा से ज्यादा शेयर करो ताकि इस मूवी को ऑस्कर मिले समाज के लिए एक अच्छा मैसेज है यह मूवी
हैदराबाद के एक राम भक्त ने 8000 किमी की पैदल यात्रा की है और अयोध्या का इंतजार कर रहे हैं. उनका नाम चल्ला श्रीनिवास शास्त्री है और उनकी उम्र 64 साल है। उन्होंने सिर पर "सोने का खड़ाऊ"लेकर यह यात्रा शुरू की है।
इन पैड्स पर गोल्ड प्लेटिंग की गई है। तो, इन जूतों की कीमत 64 लाख रुपये है।
(और आप कम से कम लाइक तो कर दीजिए 🙏🏻)
जय श्री राम
भले ही पुरुष घर मे सामान बिखेर देता हो पर
घर सँवारने के लिये पसीना वो ही बहाता है।
अपना मोजा भी न ढूँढ पाने वाला पुरुष
अपने बच्चे के मनपसंद खिलौना सारे बाजार में से ढूँढ लाता है।।
घर के काम मे हाथ न बटा पाये चाहे
मगर घर की नींव वही रखता है।।।
जिस घर को औरत सजाती है उस घर में पाई-पाई लगा देता है...
थोड़ा उजट किस्म का हो सकता है पुरूष लेकिन औरत को सवाँर देता है पुरुष।।
सुबह का जब शाम को घर लौटता है पुरुष, अपने साथ कई दीये उज्वलित कर देता है।
ब्रिज सा विशाल पुरुष भीतर से शिशु होता है। प्यार, दुलार और मनुहार की अपेक्षा करता है स्त्री से, तो क्या बुरा करता है..!
लाख नारी शक्ति की बात करें हम । पर हम बखूबी ये जानते है कि औरत पुरुष का ही आधा हिस्सा है।
हमारी बहस इस सोच से भी खत्म हो सकती है कि अगर हम खुद को अलग-अलग स्थापित करते है तो बिखराव निश्चित है। शिव के अर्धनारी रूप को मन से स्वीकार करना होगा। और यही सत्य है...यही प्रकृति है।।
विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम।
मोदी सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई #viksitbharatsankalpyatra में मात्र 50 दिन के भीतर ही 10 करोड़ से अधिक देशवासी शामिल हो चुके हैं।