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ये सुकून भरा सफ़र हुआ करता था !!
क्योंकि उस वक़्त समाज में अमीर / गरीब के बीच कोई लाइन नही थी
उस वक्त इसी बस में समाज के सभी वर्गों के लोग सफ़र किया करते थे और अपनायत तो बेशुमार थी
हथाई भी होती रहती थी
और बस के conductor की बड़ी शान हुआ करती थी हर कोई उसके साथ बात करना दोस्ती करने की चाह रखता था
ख़ैर आजकल लोगों को पता नही है कि कौनसी बस कब और कहाँ जाएगी इसकी ख़बर तक नही है 🤔
ख़ैर नयी-नयी चमचमाति personal cars में भी वो सुकून नही मिल रहा है जो इस बस में मिला करता था
वक़्त वक़्त की बात है