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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित, देवलगढ़ एक प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है, जो अपनी विशिष्ट वास्तुकला और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान 16वीं शताब्दी में राजा अजयपाल की राजधानी रहा और वर्तमान में यहाँ के प्रमुख मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित हैं।

देवलगढ़ की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
स्थान: पौड़ी गढ़वाल में खिर्सू और श्रीनगर के निकट स्थित।
ऐतिहासिक महत्व: 1500-1519 के दौरान गढ़वाल की राजधानी। प्रमुख मंदिर: राजराजेश्वरी मंदिर, गौरी देवी मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर।
पर्यटन आकर्षण: प्राकृतिक सौं

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तुंगनाथ मंदिर में दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। चोपता में हजारों श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। प्रशासन और स्वयंसेवकों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

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गर्मी का मौसम धीरे-धीरे आ रहा है... अभी से सावधान रहें और अपने परिवार को स्वस्थ रखें। गर्मियों में कुछ सावधानियाँ बरतने से आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। दिनभर में खूब पानी पिएं, नींबू पानी, छाछ, लस्सी और नारियल पानी का सेवन करें। हल्का और पौष्टिक भोजन करें, और तेज धूप में निकलते समय टोपी या छाता जरूर लें। सुबह 10 से शाम 4 बजे तक तेज धूप से बचें, रोज नहाएं और साफ-सफाई का ध्यान रखें। पर्याप्त आराम और नींद लें, और यदि चक्कर, कमजोरी या उल्टी लगे तो तुरंत ठंडी जगह जाएं और ORS लें। सावधानी रखें, स्वस्थ रहें और खुशहाल रहें।

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केदारनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सूचना। पवित्र केदारनाथ मंदिर के दर्शनों के लिए उत्साह चरम पर है और यात्रा मार्गों पर यात्रियों की भीड़ देखी जा रही है। देशभर से भक्त बाबा केदार के दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। यात्रियों से अनुरोध है कि यात्रा पर जाने से पूर्व यातायात और मौसम की जानकारी अवश्य प्राप्त करें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित, देवलगढ़ एक प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है, जो अपनी विशिष्ट वास्तुकला और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान 16वीं शताब्दी में राजा अजयपाल की राजधानी रहा और वर्तमान में यहाँ के प्रमुख मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित हैं।
देवलगढ़ की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
स्थान: पौड़ी गढ़वाल में खिर्सू और श्रीनगर के निकट स्थित।
ऐतिहासिक महत्व: 1500-1519 के दौरान गढ़वाल की राजधानी। प्रमुख मंदिर: राजराजेश्वरी मंदिर, गौरी देवी मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर।
पर्यटन आकर्षण: प्राकृतिक सौंदर्य और सूर्योदय के मनमोहक दृश्य। नाथ सिद्धों की गुफाएँ: प्राचीन ब्राह्मी लिपि के अवशेष।
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