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TMC नेता शमीम अहमद कुबेर से भी आगे निकले
बंगाल में TMC विधायक शमीम अहमद के घर छापेमारी के दौरान पूरी टीम सन्न रह गई, दरअसल विधायक के घर सोने का बेड और सोने का सोफा और एक सिक्रेट बेसमेंट जिसमें कई किलो सोना बरामद हुआ। विधायक के घर पूरा फर्नीचर ही सोने का था। कितना लूटा है नेताओं ने?
सोचो अगर बीजेपी सरकार बंगाल में नहीं आती तो ऐसे चोर उचक्के पूरे कोलकाता को खरीद कर बांग्लादेश, पाकिस्तान बना देते…
धन्यवाद शुभेंदु दादा🔥👏
TMC नेता शमीम अहमद कुबेर से भी आगे निकले
बंगाल में TMC विधायक शमीम अहमद के घर छापेमारी के दौरान पूरी टीम सन्न रह गई, दरअसल विधायक के घर सोने का बेड और सोने का सोफा और एक सिक्रेट बेसमेंट जिसमें कई किलो सोना बरामद हुआ। विधायक के घर पूरा फर्नीचर ही सोने का था। कितना लूटा है नेताओं ने?
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कुंभनदास जी और गोपी की कथा
गोवर्धन की एक सखी ने जब सुना कि ठाकुर जी गोपियों के घर माखन चुराने जाते हैं, तो उसके मन में भी यह भाव जागा कि वह ऐसा माखन बनाएगी जिसे चुराने स्वयं भगवान आएँ। वह रोज मंदिर जाती और श्रीनाथ जी को दूर से ही माखन का पात्र दिखाकर ललचाती। वह उनसे कहती कि मैंने बहुत मेहनत से यह माखन निकाला है, पर मैं इसे मंदिर में नहीं चढ़ाऊँगी; अगर तुम्हें इसे खाना है, तो मेरे घर चोरी करने आना। वह उन्हें अपने घर का पूरा रास्ता भी समझा देती।
अयोध्या के एक परम विद्वान भक्त थे , वे माता सीता को अपनी बहू और भगवान राम को अपना बेटा (लाला) मानते थे। उनका भाव इतना सच्चा था कि जब भी वे मंदिर जाते, तो मर्यादावश पुजारी से कहते कि "बहू के सामने का पर्दा कर दो"। एक बार जब नए पुजारी ने पर्दा नहीं किया, तो भक्त के भाव के कारण मंदिर के दरवाजे का सीता जी के सामने जो पट था वो अपने आप जोर से बंद हो गया। यह इस बात का प्रमाण था कि भगवान भक्त के उस नाता-रिश्ते को स्वीकार करते हैं।
भक्त नामदेव जी महाराज कहीं कीर्तन में गए हुए थे, तभी उन्हें सूचना मिली कि उनकी कुटिया में भीषण आग लग गई है। गाँव वालों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आग से कुछ सामान, जैसे कंबल आदि बचाने की कोशिश की। जब नामदेव जी पहुँचे और अपनी कुटिया को जलते देखा, तो वे दुखी होने के बजाय आनंदित हो गए। उन्होंने इसे ईश्वर का ही एक रूप माना और जो सामान लोगों ने बचाकर बाहर निकाला था, उसे भी उन्होंने यह कहकर आग में समर्पित कर दिया कि प्रभु स्वयं पधारे हैं, तो उन्हें सब कुछ अर्पण कर देना चाहिए।
आग बुझने के बाद जब राख ठंडी हुई, तो नामदेव जी उसी राख पर लेट गए और ईश्वर की कृपा का गुणगान करते रहे। भक्त की यह अनन्य निष्ठा देखकर स्वयं भगवान विट्ठल द्रवित हो उठे। उन्होंने माता रुक्मिणी से कहा कि उन्हें महलों में चैन नहीं आ रहा है क्योंकि उनका भक्त राख पर सोया है। इसके बाद भगवान के आदेश पर दिव्य लोक से गरुड़ जी और माता रुक्मिणी की शक्तियों द्वारा रातों-रात एक अत्यंत सुंदर और सुगंधित कुटिया का निर्माण किया गया। भगवान ने स्वयं अपना पीतांबर सोए हुए नामदेव जी को ओढ़ा दिया।
सुबह जब नामदेव जी जागे, तो उन्होंने उस अद्भुत कुटिया को देखकर कोई आश्चर्य नहीं किया, क्योंकि उन्हें ज्ञात था कि यह सब उनके स्वामी की लीला है। जब गाँव वालों ने इतनी सुंदर कुटिया देखी, तो वे अचंभित रह गए और नामदेव जी से पूछने लगे कि यह किस कारीगर ने बनाई है और उसे कितनी दक्षिणा देनी पड़ती है।
नामदेव जी ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया कि यदि ऐसी कुटिया चाहिए, तो पहले अपने घर के मोह और सामान को त्याग कर ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण करना होगा। इस कथा का मुख्य संदेश यही है कि जो भक्त ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखता है और भारी नुकसान होने पर भी विचलित नहीं होता, भगवान स्वयं उसकी रक्षा और सेवा के लिए दौड़े चले आते हैं।
राधे राधे
मार्गदर्शक - श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज
प्रेरणास्त्रोत - श्री श्री १०८ श्री स्वामी हरिहरानंद जी महाराज , होलीपुरा