Discover postsExplore captivating content and diverse perspectives on our Discover page. Uncover fresh ideas and engage in meaningful conversations
केजीएफ से पूरे इंडिया में अपनी पहचान बनाने वाले साउथ सुपरस्टार यश आज 38 साल के हो गए हैं। आज हैं यश का जन्मदिन। जानकर हैरानी होगी कि आज 38वां जन्मदिन मना रहे यश एक बस ड्राइवर का बेटा है। यश आज एक सुपरस्टार हैं, लेकिन उन्होंने अपने लाइफ में बहुत संघर्ष किया हैं। एक समय पर वे बेकग्राउंड डांसर के अलावा एसिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर छोटे मोटे काम करते थे। उस वक्त उन्हें दिनभर 50 रुपया मिलता था। यश ने टेलीविजन एक्टर के तौर पर भी काम किये। यश कि जिंदगी तब बदल गई जब उन्होंने केजीएफ किया। केजीएफ के बाद ही वे पैन इंडिया स्टार बन गए। एक समय पर 50 रुपये में काम करनेवाले यश आज करोड़ों में कमाई कर रहे हैं। जानकर हैरानी होगी कि अभी वे 150 करोड़ तक भी एक फिल्म का चार्ज कर रहे हैं। खबरों के मुताबिक यश रामायण फिल्म में रावण का किरदार निभाने के लिए 150 करोड़ रुपया फीस के तौर पार चार्ज किया हैं। हालांकि फीस को लेकर मेकर्स के तरफ से और यश की तरफ से अबतक कुछ भी खुलासा नहीं हुआ हैं।
प्यार एक पूंजीवादी विचारधारा है. लड़कियों के सपने में आईएएस/IPS ही आते हैं.. चक्की पर काम करने वाले मजदूर नही..
दूसरी लड़की को पहचान रहे हैं जो अपने करियर के लिए विवाह की रात में भाग गई थी..
उसने गलत क्या किया था??
एकदम सही किया था।
मजे की बात देखिये लड़का उस फिल्म में आईएएस इसलिए बना क्योंकि उसको बदला लेना था। उसको देश दुनिया समाज से कोई लेना देना नही था, वरना वो क्लर्क की नौकरी में भी खुश था।
मोटिवेशन तो ऐसा पागल किया है कि पढ़े लिखे लड़के राह चलते मदारी से भी प्रेरित हो जाते हैं।
फिर ये तो फ़िल्म थी..
अब ऐसा लग रहा सब आईपीएस बन जाएंगे लेकिन उनको साथ देने वाली चाहिए।
साथ छोड़ देगी कोई तो ज्यादा ऊंची पोस्ट मिल जाएगी।
पर बिना दिल टूटे कुछ होने वाला नही है..
अब कोचिंग इंस्टीट्यूटों की आवश्यकता नही है. बस प्यार मोहब्बत सिखाया जाए.. सब सेल्फ स्टडी से ही कॉम्पटीशन निकाल ले रहे हैं..
ऐसा फिल्मी भूत चढ़ा हुआ है कि बिना दो तीन पेपर में फेल हुए यह उतरने वाले नही है...
और एक बात 16 घण्टा काम करके पढ़ाई करने का नाटक वही दिखा सकता है जो पहले ही पेपर पास कर चुका हो..
इसलिए हवा में मत रहिके, जमीन पर चलिए। यही लड़की जो मनोज का साथ दे रही थी ये भी मनोज को एरोनॉटिकल इंजीनियर समझ कर ही उनसे नजदीक आई थी। चक्की वाला मजदूर जानती तो
ताकती नही...
खैर कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जो बिना लात खाये समझ नही आते।