झांसी यूनिवर्सिटी में युवक की पीट-पीटकर हत्या:सो रही महिला का हाथ पकड़ा था; पहले भीड़ ने पीटा...ट्रैक्टर से बांधा; गार्डों ने भी मारा....!!

झांसी की बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी के कैंपस में एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। बुधवार रात युवक ने सो रही महिला का हाथ पकड़ लिया था। इससे गुस्साए लोगों ने उसकी पिटाई कर दी। उसे रस्सी से ट्रैक्टर के पहिए में बांध दिया। बाद में यूनिवर्सिटी के गार्डों ने उसे बुरी तरह से पीटा।

गुरुवार सुबह 5:50 बजे युवक ने दम तोड़ दिया। इसके बाद हड़कंप मच गया। हालांकि, पुलिस का कहना है कि युवक चोरी की नीयत से आया था। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

मध्य प्रदेश के पन्ना निवासी दो बहनें अपने पतियों के साथ बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में ग्राउंड की चहारदीवारी बना रही हैं। वे ग्राउंड पर ही झोपड़ी बनाकर रहती हैं। एक बहन ने बताया कि बुधवार रात मैं पति के साथ झोपड़ी के बाहर चबूतरे पर सो रही थी।

रात 2 बजे एक युवक आया। वह नशे की हालत में था। आते ही उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और खींचने लगा। मैंने तुरंत पति को जगाया, तो वह भागने लगा।

पति ने दौड़ाकर उसे पकड़ लिया और ले आया। तब तक आस-पास के लोग जुट गए। उन्होंने उसके साथ मारपीट कर दी। इसके बाद उसे रस्सी से ट्रैक्टर के पहिए में बांध दिया।

महिला का कहना है कि आरोपी को पकड़ने के बाद हम लोग यूनिवर्सिटी के गार्डों के पास गए। उनको पूरे मामले की जानकारी दी। तब गार्ड आ गए और उन्होंने भी उसे पीट दिया। गार्डों ने कहा कि इसे सुबह पुलिस के पास ले जाना। गुरुवार सुबह 5 बजे एक गार्ड आया, उसने भी उसे मारा-पीटा।

इसके बाद सुबह 5:50 बजे युवक की मौत हो गई। तब हम लोग घबरा गए और गार्डों के पास गए। तब गार्डों ने हम लोगों को यूनिवर्सिटी चौकी में भेज दिया। वहां से पुलिस को लेकर मौके पर आए। पुलिस हमारे परिवार के 7 लोगों को पकड़कर थाने ले गई है।

दोनों बहनों का कहना है, ''युवक कौन है? कहां का रहने वाला है? हम लोग कुछ नहीं जानते हैं। हमने तो पहली बार ही उसे देखा है।'' पुलिस ने गार्ड राम किशोर की तहरीर पर भगवान दास, नेता, हीरालाल और अज्ञात के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया। इसके बाद 7 लोगों को हिरासत में लिया है।

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जीवित हैं कुरान जलाने वाले सलवान मोमिका।

सलवान की नहीं हुई है मौत, कुछ ग्लोबल मीडिया ने सलवान के मौत को चलाई थी झूठी खबर।

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महान योद्धा व सेनानायक वीर दुर्गादास जी राठौड़, जिन्होंने 30 वर्षों तक औरंगज़ेब के विरुद्ध संघर्ष करते हुए आखिरकार जोधपुर महाराजा अजीतसिंह को मारवाड़ की राजगद्दी दिलवा ही दी। वीर दुर्गादास जी का अधिकतर समय घोड़े पर सवार ही निकला, प्रसिद्ध है कि वे बाटी भी घोड़े पर सवार होकर ही सेंकते थे।

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3 yrs - Translate

तुम मुझसे नफरत करते हो..... फिर बधाई हो...
वास्तव में मुझे परवाह नहीं है ....
मुझे अपने आप से प्यार है.... मुझे पता है कि कैसे अच्छा रहना है....

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तुम मुझसे नफरत करते हो..... फिर बधाई हो...
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