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गुलामगिरी" महान समाज सुधारक ज्योतिबा फुले द्वारा 1873 में लिखी गई एक क्रांतिकारी पुस्तक है। यह किताब भारतीय समाज में ब्राह्मणवाद और जाति व्यवस्था की आलोचना करती है। फुले ने इसमें जाति-आधारित शोषण और असमानता के खिलाफ अपने विचारों को व्यक्त किया है, और यह बहुजन समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई है। #गुलामगिरी #ज्योतिबाफुले #सामाजिकन्याय 📚 इस पुस्तक में सामाजिक परिवर्तन की दिशा में ज्योतिबा फुले के योगदान का वर्णन है।
1. मेवाराम जैन (पूर्व विधायक बाड़मेर), 2. रामस्वरूप आचार्य, 3. गंगाराम खावा, (पुलिस थानाधिकारी कोतवाली बाड़मेर) 4. आनंद सिंह राजपुरोहित (डिप्टी बाड़मेर) 5. दाऊद खान (SI),6. प्रवीण सेठिया, 7. गिरधरसिंह (बाड़मेर प्रधान), 8. सुरतानसिंह (उपसभापति, न.प.बा.) 9. गोपालसिंह राजपुरोहित के खिलाफ पुलिस थाना राजीव गांधी नगर, जोधपुर पुलिस आयुक्तालय में अनाधिकृत रूप से घर ने घुस कर बलात्कार, गैंगरेप, पॉक्सो, ब्लैकमेलिंग, जान से मारने कि धमकी, मारपीट, दुष्कर्म, एससी-एसटी एक्ट के तहत अंतर्गत धारा 323, 328, 344, 346, 347,354 (क),384, 376(2)(N),376-D, 120-B IPC, 3,4,5(ग),5(1),6,7,8 POCSO Act और 3(2) (V) एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज