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कमाल की बात है मूलनिवासी तुम थे लेकिन…🤔
मुहम्मद बिन कासिम से दाहिर (ब्राह्मण) लड़े।
मुहम्मद गोरी से पृथ्वीराज चौहान (क्षत्रिय) लड़े।
अलाउद्दीन खिलजी से राणा रतन सिंह (क्षत्रिय) लड़े।
इब्राहिम लोदी और बाबर से राणा संग्राम सिंह (क्षत्रिय) लड़े।
हुमायूं को ईरान तक शेरशाह सूरी (पठान) ने खदेड़ा।
मुगलों के लिये सिरदर्द हेमू (ब्राह्मण) बने।
अकबर से महाराणा प्रताप (क्षत्रिय) लड़े।
औरंगजे़ब से विद्रोह ब्राह्मणों, राजपूतों, मराठों और जाटों ने किया।
मुगल सल्तनत और निज़ाम शाही को पेशवा बाजीराव (ब्राह्मण) ने ही समाप्त किया।
अंग्रेजी सरकार के खिलाफ विद्रोह मंगल पांडे (ब्राह्मण) ने किया।
अंग्रेजों से युद्ध रानी लक्ष्मीबाई (ब्राह्मण) ने लड़ा।
जर्नल डायर को मारा उधम सिंह (कम्बोज) ने।
अंग्रेजों की आँखों में पंडित चन्द्रशेखर आज़ाद (ब्राह्मण) और भगत सिंह (जाट) ही चुभते थे।
मूलनिवासी तुम थे लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ लड़कर बलिदान होने वाले 95% स्वर्ण हिन्दू (संविधान के अनुसार) थे।
और तुम जो हिंदुत्व पर उँगली उठाते हो तुम वतन के वो गद्दार हो जिन्होंने 1818 में तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध में मराठों के खिलाफ अंग्रेजी फौज में शामिल हुए थे।
सवर्णों को विदेशी बोलने वाले तुम गद्दार थे इसलिए तुम लोगों से वफादारी की उम्मीद करना बेवकूफ़ी होगी।