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Dr S. Jaishankar
डॉ एस.जयशंकर को जन्मदिन की शुभकामनाएं

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भारत के विकास में प्रवासी भारतीय समुदाय के योगदान को पहचानने के लिए 2003 से हर साल 9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है। इस अवसर को मनाने के लिए 9 जनवरी का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि 1915 में इसी दिन महात्मा गांधी, दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे

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कुछ शुभचिंतक कह रहे थे। आते हैं तो दिखता नही। नया बोर्ड लगा दिये अब दिखेगा।

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राम इस लोक के हृदय में बसते हैं, इसलिए उन्हें लोकनाथ कहा जाता है। इस भूलोक और संस्कृति दोनों में राम समाहित हैं। माता सीता और भगवान श्रीराम विश्वव्यापी हैं। वह पूरे विश्व में लोकप्रिय है। प्रमाण के लिए शुरुआत अखंड भारत का हिस्सा रहे पाकिस्तान से करते हैं:-
1. पाकिस्तान का लाहौर का ऐतिहासिक नाम लवपुरी था जिसकी स्थापना प्रभु राम के पुत्र लव ने की थी। यह नगरी उनकी राजधानी हुआ करती थी। बाद में इसका नाम लौहपुरी हुआ और फिर इसे लाहौर कहा जाने लगा। अब भी यहां के एक किले में लव का मंदिर है।
2. कुछ वर्षों पूर्व तक हिंदू विश्व का एकमात्र हिंदू देश रहा पड़ोसी नेपाल तो भगवान राम की ससुराल है। वहां पर जनक जी का महल और वह यज्ञशाला आज भी स्थित है जहां पर भगवान राम सहित चारों भाइयों का विवाह हुआ था। नेपालवासी आज भी भगवान राम को अपना दामाद मानते हैं और प्रत्येक शुभ कार्य पर अयोध्या उपहार भेजते रहे हैं।
3. एक और पड़ोसी देश श्रीलंका में भगवान राम से संबंधित तमाम तथ्य और निशान बिखरे पड़े हैं । एक टीवी चैनल ने तो श्रीलंका में भगवान राम की निशानियां को लेकर कई घंटे का एक पूरा कार्यक्रम किया था। श्रीलंका का पर्यटन मुख्यतः इसी पर आधारित है।
4. बर्मा में रामायण कई रूपों में प्रचलित है।लोक गीतों के अतिरिक्त रामलीला की तरह के नाटक भी खेले जाते हैं। बर्मा में बहुत से नाम ‘राम’ के नाम पर हैं। रामवती नगर तो राम नाम के ऊपर ही स्थापित हुआ था। अमरपुर के एक विहार में सीता-राम, लक्ष्मण और हनुमान जी के चित्र आज तक अंकित हैं।
5. इबोनिया का मालागासी महाकाव्य अपने भव्य कथानक में भारतीय महाकाव्य रामायण से मिलता-जुलता है।
6. मलेशिया को रावण के नाना के राज्य के रुप में माना गया है।मलेशिया में रामकथा का प्रचार अभी तक है। रामायण का मलेशियाई संस्करण (हिकायत सेरी राम) के रूप में जाना जाता है।
वहां मुस्लिम भी अपने नाम के साथ अक्सर ‘राम-लक्ष्मण’ और ‘सीता’ नाम जोड़ते हैं।
7. थाईलैंड के राजा अपने को राजा राम-X मानते हैं। थाईलैंड के पुराने रजवाड़ों में भरत की भांति राम की पादुकाएं लेकर राज करने की परम्परा है। वे सभी अपने को रामवंशी मानते थे।थाईलैंड का राष्ट्रीय ग्रंथ 'रामायण' है।रामकियेन (रामायण) देश का राष्ट्रीय महाकाव्य है।
8. भारत से करीब 4500 किमी की दूरी पर स्थित देश कम्बोडिया में रामायण को ’’रिमकर’’ के नाम से जाना जाता है। रिमकर’’ यानी राम की महिमा होती है। विश्व का सबसे बड़ा विशाल अंकोरवाट (विष्णु) मंदिर है। यहां की संस्कृति में भगवान राम घर-घर और लोगों के दिलों मे बसते हैं, यहां राम को हर आम आदमी की कहानी से जोड़कर देखा जाता है।भारत में जिस तरह से भगवान राम को पूजते हैं, उसी तरह कम्बोडिया में भी राम की मान्यता है।
9. विश्व के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया में रामायण का प्रतिदिन राष्ट्रीय टेलीविजन से प्रसारण होता है और जनसंख्या के हिसाब से विश्व में सबसे ज्यादा रामलीलाएं वही खेली जाती हैं ।जावा में रामचंद्र राष्ट्रीय पुरुषोत्तम के रूप में सम्मानित हैं। वहां की सबसे बड़ी नदी का नाम सरयू है। रामायण के कई प्रसंगों के आधार पर वहां आज भी रात-रात भर कठपुतलियों का नाच होता है। जावा के मंदिरों में वाल्मीकि रामायण के श्लोक जगह-जगह अंकित मिलते हैं। सुमात्रा द्वीप का वाल्मीकि रामायण में स्वर्ण-भूमि नाम दिया गया है।रामायण यहां के जन-जीवन में वैसे ही बसी है, जैसे भारतवासियों के।
बाली द्वीप आर्य संस्कृति का एक दूरस्थ सीमा स्तम्भ है। रामायण का प्रचार यहां भी घर-घर में है।
10. चीन में रामायण का एक अलग ही रूप है। चीनी साहित्य में राम कथा पर आधारित कोई मौलिक रचना तो नहीं हैं, लेकिन बौद्ध धर्म ग्रंथ त्रिपिटक के चीनी संस्करण में रामायण से संबद्ध दो रचनाएं मिलती हैं। 'अनामकं जातकम्' और 'दशरथ कथानम्'।तीसरी शाताब्दी में चीनी भाषा में लिखी गई 'अनामकं जातकम्' का मूल भारतीय रामायण से मिलता जुलता है। जबकि 'दशरथ कथानम्' के अनुसार राजा दशरथ जंबू द्वीप के सम्राट थे और उनके पहले पुत्र का नाम लोमो (राम) था। दूसरी रानी के पुत्र का नाम लो-मन (लक्ष्मण) था। राजकुमार लोमो में ना-लो-येन (नारायण) का बल और पराक्रम था। उनमें 'सेन' और 'रा' नामक अलौकिक शक्ति थी तीसरी रानी के पुत्र का ना पो-लो-रो (भरत) और चौथी रानी के पुत्र का नाम शत्रुघ्न था।
11. तिब्बत में रामकथा को 'किंरस-पुंस-पा' कहा जाता है। वहां के लोग प्राचीनकाल से वाल्मीकि रामायण की मुख्य कथा से परिचित थे। तिब्बती रामायण की छह प्रतियां तुन-हुआंग नामक स्थल से प्राप्त हुई है।
12. पेरू में राजा स्वयं को सूर्यवंशी ही नहीं ‘कौशल्यासुत राम वंशज’ भी मानते हैं। रामसीतव नाम से आज भी यहां राम-सीता उत्सव मनाया जाता है।
13. दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला गर्व से अपने को भगवान श्रीराम का वंशज मानती हैं।
14. प्राचीन मिस्र के फराओ शासक अपने को रामेसेस कहते थे। रामेसेस -II को लगातार 15 विजयों के कारण 'रामेसेस महान' भी कहा जाता है।
15. बेल्जियम के पादरी कामिल बुल्के रामायण से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने भारत आकर और यहां रहकर दुनियाभर में फैले 'रामकथा' के विषयों पर शोध किया।

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राम इस लोक के हृदय में बसते हैं, इसलिए उन्हें लोकनाथ कहा जाता है। इस भूलोक और संस्कृति दोनों में राम समाहित हैं। माता सीता और भगवान श्रीराम विश्वव्यापी हैं। वह पूरे विश्व में लोकप्रिय है। प्रमाण के लिए शुरुआत अखंड भारत का हिस्सा रहे पाकिस्तान से करते हैं:-
1. पाकिस्तान का लाहौर का ऐतिहासिक नाम लवपुरी था जिसकी स्थापना प्रभु राम के पुत्र लव ने की थी। यह नगरी उनकी राजधानी हुआ करती थी। बाद में इसका नाम लौहपुरी हुआ और फिर इसे लाहौर कहा जाने लगा। अब भी यहां के एक किले में लव का मंदिर है।
2. कुछ वर्षों पूर्व तक हिंदू विश्व का एकमात्र हिंदू देश रहा पड़ोसी नेपाल तो भगवान राम की ससुराल है। वहां पर जनक जी का महल और वह यज्ञशाला आज भी स्थित है जहां पर भगवान राम सहित चारों भाइयों का विवाह हुआ था। नेपालवासी आज भी भगवान राम को अपना दामाद मानते हैं और प्रत्येक शुभ कार्य पर अयोध्या उपहार भेजते रहे हैं।
3. एक और पड़ोसी देश श्रीलंका में भगवान राम से संबंधित तमाम तथ्य और निशान बिखरे पड़े हैं । एक टीवी चैनल ने तो श्रीलंका में भगवान राम की निशानियां को लेकर कई घंटे का एक पूरा कार्यक्रम किया था। श्रीलंका का पर्यटन मुख्यतः इसी पर आधारित है।
4. बर्मा में रामायण कई रूपों में प्रचलित है।लोक गीतों के अतिरिक्त रामलीला की तरह के नाटक भी खेले जाते हैं। बर्मा में बहुत से नाम ‘राम’ के नाम पर हैं। रामवती नगर तो राम नाम के ऊपर ही स्थापित हुआ था। अमरपुर के एक विहार में सीता-राम, लक्ष्मण और हनुमान जी के चित्र आज तक अंकित हैं।
5. इबोनिया का मालागासी महाकाव्य अपने भव्य कथानक में भारतीय महाकाव्य रामायण से मिलता-जुलता है।
6. मलेशिया को रावण के नाना के राज्य के रुप में माना गया है।मलेशिया में रामकथा का प्रचार अभी तक है। रामायण का मलेशियाई संस्करण (हिकायत सेरी राम) के रूप में जाना जाता है।
वहां मुस्लिम भी अपने नाम के साथ अक्सर ‘राम-लक्ष्मण’ और ‘सीता’ नाम जोड़ते हैं।
7. थाईलैंड के राजा अपने को राजा राम-X मानते हैं। थाईलैंड के पुराने रजवाड़ों में भरत की भांति राम की पादुकाएं लेकर राज करने की परम्परा है। वे सभी अपने को रामवंशी मानते थे।थाईलैंड का राष्ट्रीय ग्रंथ 'रामायण' है।रामकियेन (रामायण) देश का राष्ट्रीय महाकाव्य है।
8. भारत से करीब 4500 किमी की दूरी पर स्थित देश कम्बोडिया में रामायण को ’’रिमकर’’ के नाम से जाना जाता है। रिमकर’’ यानी राम की महिमा होती है। विश्व का सबसे बड़ा विशाल अंकोरवाट (विष्णु) मंदिर है। यहां की संस्कृति में भगवान राम घर-घर और लोगों के दिलों मे बसते हैं, यहां राम को हर आम आदमी की कहानी से जोड़कर देखा जाता है।भारत में जिस तरह से भगवान राम को पूजते हैं, उसी तरह कम्बोडिया में भी राम की मान्यता है।
9. विश्व के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया में रामायण का प्रतिदिन राष्ट्रीय टेलीविजन से प्रसारण होता है और जनसंख्या के हिसाब से विश्व में सबसे ज्यादा रामलीलाएं वही खेली जाती हैं ।जावा में रामचंद्र राष्ट्रीय पुरुषोत्तम के रूप में सम्मानित हैं। वहां की सबसे बड़ी नदी का नाम सरयू है। रामायण के कई प्रसंगों के आधार पर वहां आज भी रात-रात भर कठपुतलियों का नाच होता है। जावा के मंदिरों में वाल्मीकि रामायण के श्लोक जगह-जगह अंकित मिलते हैं। सुमात्रा द्वीप का वाल्मीकि रामायण में स्वर्ण-भूमि नाम दिया गया है।रामायण यहां के जन-जीवन में वैसे ही बसी है, जैसे भारतवासियों के।
बाली द्वीप आर्य संस्कृति का एक दूरस्थ सीमा स्तम्भ है। रामायण का प्रचार यहां भी घर-घर में है।
10. चीन में रामायण का एक अलग ही रूप है। चीनी साहित्य में राम कथा पर आधारित कोई मौलिक रचना तो नहीं हैं, लेकिन बौद्ध धर्म ग्रंथ त्रिपिटक के चीनी संस्करण में रामायण से संबद्ध दो रचनाएं मिलती हैं। 'अनामकं जातकम्' और 'दशरथ कथानम्'।तीसरी शाताब्दी में चीनी भाषा में लिखी गई 'अनामकं जातकम्' का मूल भारतीय रामायण से मिलता जुलता है। जबकि 'दशरथ कथानम्' के अनुसार राजा दशरथ जंबू द्वीप के सम्राट थे और उनके पहले पुत्र का नाम लोमो (राम) था। दूसरी रानी के पुत्र का नाम लो-मन (लक्ष्मण) था। राजकुमार लोमो में ना-लो-येन (नारायण) का बल और पराक्रम था। उनमें 'सेन' और 'रा' नामक अलौकिक शक्ति थी तीसरी रानी के पुत्र का ना पो-लो-रो (भरत) और चौथी रानी के पुत्र का नाम शत्रुघ्न था।
11. तिब्बत में रामकथा को 'किंरस-पुंस-पा' कहा जाता है। वहां के लोग प्राचीनकाल से वाल्मीकि रामायण की मुख्य कथा से परिचित थे। तिब्बती रामायण की छह प्रतियां तुन-हुआंग नामक स्थल से प्राप्त हुई है।
12. पेरू में राजा स्वयं को सूर्यवंशी ही नहीं ‘कौशल्यासुत राम वंशज’ भी मानते हैं। रामसीतव नाम से आज भी यहां राम-सीता उत्सव मनाया जाता है।
13. दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला गर्व से अपने को भगवान श्रीराम का वंशज मानती हैं।
14. प्राचीन मिस्र के फराओ शासक अपने को रामेसेस कहते थे। रामेसेस -II को लगातार 15 विजयों के कारण 'रामेसेस महान' भी कहा जाता है।
15. बेल्जियम के पादरी कामिल बुल्के रामायण से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने भारत आकर और यहां रहकर दुनियाभर में फैले 'रामकथा' के विषयों पर शोध किया।

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राम इस लोक के हृदय में बसते हैं, इसलिए उन्हें लोकनाथ कहा जाता है। इस भूलोक और संस्कृति दोनों में राम समाहित हैं। माता सीता और भगवान श्रीराम विश्वव्यापी हैं। वह पूरे विश्व में लोकप्रिय है। प्रमाण के लिए शुरुआत अखंड भारत का हिस्सा रहे पाकिस्तान से करते हैं:-
1. पाकिस्तान का लाहौर का ऐतिहासिक नाम लवपुरी था जिसकी स्थापना प्रभु राम के पुत्र लव ने की थी। यह नगरी उनकी राजधानी हुआ करती थी। बाद में इसका नाम लौहपुरी हुआ और फिर इसे लाहौर कहा जाने लगा। अब भी यहां के एक किले में लव का मंदिर है।
2. कुछ वर्षों पूर्व तक हिंदू विश्व का एकमात्र हिंदू देश रहा पड़ोसी नेपाल तो भगवान राम की ससुराल है। वहां पर जनक जी का महल और वह यज्ञशाला आज भी स्थित है जहां पर भगवान राम सहित चारों भाइयों का विवाह हुआ था। नेपालवासी आज भी भगवान राम को अपना दामाद मानते हैं और प्रत्येक शुभ कार्य पर अयोध्या उपहार भेजते रहे हैं।
3. एक और पड़ोसी देश श्रीलंका में भगवान राम से संबंधित तमाम तथ्य और निशान बिखरे पड़े हैं । एक टीवी चैनल ने तो श्रीलंका में भगवान राम की निशानियां को लेकर कई घंटे का एक पूरा कार्यक्रम किया था। श्रीलंका का पर्यटन मुख्यतः इसी पर आधारित है।
4. बर्मा में रामायण कई रूपों में प्रचलित है।लोक गीतों के अतिरिक्त रामलीला की तरह के नाटक भी खेले जाते हैं। बर्मा में बहुत से नाम ‘राम’ के नाम पर हैं। रामवती नगर तो राम नाम के ऊपर ही स्थापित हुआ था। अमरपुर के एक विहार में सीता-राम, लक्ष्मण और हनुमान जी के चित्र आज तक अंकित हैं।
5. इबोनिया का मालागासी महाकाव्य अपने भव्य कथानक में भारतीय महाकाव्य रामायण से मिलता-जुलता है।
6. मलेशिया को रावण के नाना के राज्य के रुप में माना गया है।मलेशिया में रामकथा का प्रचार अभी तक है। रामायण का मलेशियाई संस्करण (हिकायत सेरी राम) के रूप में जाना जाता है।
वहां मुस्लिम भी अपने नाम के साथ अक्सर ‘राम-लक्ष्मण’ और ‘सीता’ नाम जोड़ते हैं।
7. थाईलैंड के राजा अपने को राजा राम-X मानते हैं। थाईलैंड के पुराने रजवाड़ों में भरत की भांति राम की पादुकाएं लेकर राज करने की परम्परा है। वे सभी अपने को रामवंशी मानते थे।थाईलैंड का राष्ट्रीय ग्रंथ 'रामायण' है।रामकियेन (रामायण) देश का राष्ट्रीय महाकाव्य है।
8. भारत से करीब 4500 किमी की दूरी पर स्थित देश कम्बोडिया में रामायण को ’’रिमकर’’ के नाम से जाना जाता है। रिमकर’’ यानी राम की महिमा होती है। विश्व का सबसे बड़ा विशाल अंकोरवाट (विष्णु) मंदिर है। यहां की संस्कृति में भगवान राम घर-घर और लोगों के दिलों मे बसते हैं, यहां राम को हर आम आदमी की कहानी से जोड़कर देखा जाता है।भारत में जिस तरह से भगवान राम को पूजते हैं, उसी तरह कम्बोडिया में भी राम की मान्यता है।
9. विश्व के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया में रामायण का प्रतिदिन राष्ट्रीय टेलीविजन से प्रसारण होता है और जनसंख्या के हिसाब से विश्व में सबसे ज्यादा रामलीलाएं वही खेली जाती हैं ।जावा में रामचंद्र राष्ट्रीय पुरुषोत्तम के रूप में सम्मानित हैं। वहां की सबसे बड़ी नदी का नाम सरयू है। रामायण के कई प्रसंगों के आधार पर वहां आज भी रात-रात भर कठपुतलियों का नाच होता है। जावा के मंदिरों में वाल्मीकि रामायण के श्लोक जगह-जगह अंकित मिलते हैं। सुमात्रा द्वीप का वाल्मीकि रामायण में स्वर्ण-भूमि नाम दिया गया है।रामायण यहां के जन-जीवन में वैसे ही बसी है, जैसे भारतवासियों के।
बाली द्वीप आर्य संस्कृति का एक दूरस्थ सीमा स्तम्भ है। रामायण का प्रचार यहां भी घर-घर में है।
10. चीन में रामायण का एक अलग ही रूप है। चीनी साहित्य में राम कथा पर आधारित कोई मौलिक रचना तो नहीं हैं, लेकिन बौद्ध धर्म ग्रंथ त्रिपिटक के चीनी संस्करण में रामायण से संबद्ध दो रचनाएं मिलती हैं। 'अनामकं जातकम्' और 'दशरथ कथानम्'।तीसरी शाताब्दी में चीनी भाषा में लिखी गई 'अनामकं जातकम्' का मूल भारतीय रामायण से मिलता जुलता है। जबकि 'दशरथ कथानम्' के अनुसार राजा दशरथ जंबू द्वीप के सम्राट थे और उनके पहले पुत्र का नाम लोमो (राम) था। दूसरी रानी के पुत्र का नाम लो-मन (लक्ष्मण) था। राजकुमार लोमो में ना-लो-येन (नारायण) का बल और पराक्रम था। उनमें 'सेन' और 'रा' नामक अलौकिक शक्ति थी तीसरी रानी के पुत्र का ना पो-लो-रो (भरत) और चौथी रानी के पुत्र का नाम शत्रुघ्न था।
11. तिब्बत में रामकथा को 'किंरस-पुंस-पा' कहा जाता है। वहां के लोग प्राचीनकाल से वाल्मीकि रामायण की मुख्य कथा से परिचित थे। तिब्बती रामायण की छह प्रतियां तुन-हुआंग नामक स्थल से प्राप्त हुई है।
12. पेरू में राजा स्वयं को सूर्यवंशी ही नहीं ‘कौशल्यासुत राम वंशज’ भी मानते हैं। रामसीतव नाम से आज भी यहां राम-सीता उत्सव मनाया जाता है।
13. दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला गर्व से अपने को भगवान श्रीराम का वंशज मानती हैं।
14. प्राचीन मिस्र के फराओ शासक अपने को रामेसेस कहते थे। रामेसेस -II को लगातार 15 विजयों के कारण 'रामेसेस महान' भी कहा जाता है।
15. बेल्जियम के पादरी कामिल बुल्के रामायण से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने भारत आकर और यहां रहकर दुनियाभर में फैले 'रामकथा' के विषयों पर शोध किया।

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1644 ईस्वी का दृष्टांत है .अमर सिंह राठौड़ ,जो जोधपुर के महाराजा गज सिंह के ज्येष्ठ कुंवर थे ,शासकीय कार्य से मुगल सम्राट शाहजहां के दरबार में उपस्थित हुए थे.
तत्कालीन ख्यातों में वर्णित कथानक के अनुसार मुगल सम्राट शाहजहां तत्क्षण अपने विश्वस्त सिपहसालार सलावत खान से मंत्रणा कर रहे थे.
अमर सिंह राठौड़ को भ्रान्ति हुई कि सलावत खान उनके संदर्भ में मुगल सम्राट शाहजहां को दिग्भ्रमित कर रहें हैं ,फलत: उन्होंने प्रतिवाद करना चाहा तो सलावत खान ने अमर सिंह राठौड़ का अपमान कर दिया था.
इतिहास साक्षी है कि अमर सिंह राठौड़ ,जो स्वाभिमानी एवं हठी स्वभाव के थे, ने भरे दरबार में सलावत खान की हत्या कर दी थी.
उक्त हत्याकांड के बाद अमर सिंह राठौड़ आगरा के किले की ऊंची प्राचीर से कूद कर भाग गए थे,किन्तु किले के बाहर पहुंचते ही विठ्ठल गौड़ के पुत्र अर्जुन गौड़ व अन्य प्रहरियों ने अमर सिंह राठौड़ को घेर लिया ,जिसकी परिणति स्वरूप अमर सिंह राठौड़ की जघन्य हत्या कर दी गई.
अमर सिंह राठौड़ के इस वीरोचित्त कृत्य को आज भी पश्चिमी राजस्थान में होली के अवसर पर रम्मत के रूप में याद किया जाता है.

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विश्व की सबसे विशाल और बड़ी तोप जो की जयपुर के जयगढ़ मे स्थित है

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साउथ एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना इन दिनों एनिमल फिल्म के वजह से चर्चाओं में हैं। रश्मिका की यह फिल्म 900 करोड़ के करीब कमाई करके ब्लॉकबस्टर हो चुकी हैं। इन दिनों एनिमल के वजह से चर्चा में रह रही रश्मिका अपनी पर्सनल लाइफ के वजह से फिर से चर्चा मे आ गई हैं। काफी समय से रश्मिका और विजय देवरकोंडा की अफेयर की खबरें आ रही थी। दोनों को कोइ बार एकसाथ देखा गया हैं। एनिमल के प्रोमोशन के दौरान भी मजाक करते हुए रणबीर ने रश्मिका के सामने देवरकोंडा का जिक्र कोइ बार किया हैं। और अब कहा जा रहा हैं कि दोनों सगाई करने जा रहे हैं। इंस्टेंट बॉलीवुड के रिपोर्ट के मुताबिक रश्मिका और देवरकोंडा फरवरी महीने में सगाई कर सकते हैं। हालांकि इसपर रश्मिका ओर विजय देवरकोंडा के तरफ से कुछ भी बयान नहीं आया हैं। बता दे रश्मिका मंदाना ने पहले भी सगाई करी थी। उन्होंने कुछ सालों पहले साउथ के एक्टर और फिल्ममेकर रक्षित शेट्टी के साथ सगाई करी थी। हालांकि दोनों ने शादी नहीं किये। किसी वजह से दोनों का सगाई के बाद ब्रेकअप हो गया।

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🌹🌺🌼जय सियाराम
राम नाम सुंदर कर तारी । संसय बिहग उड़ावनिहारी॥
रामकथा कलि बिटप कुठारी।सादर सुनु गिरिराज कुमारी॥
🌹🌺🌼जय सियाराम
ॐ श्रीरामचन्द्राय नमः। जय श्री सीताराम जी

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