12 w - Translate

ब्रांड एंबेसेडर 2025

image

12 w - Translate

देवताओं की पत्नियों के नाम
#bpsc #uppsc #ssccgl

image
12 w - Translate

मोदी जी सभी से प्रेम करते हैं, लास्ट वाले का नाम आप लोग बताओ 🤪

image
12 w - Translate

हम अक्सर ऑफिस जाने के लिए ट्रैफिक या मौसम की शिकायत करते हैं। लेकिन तमिलनाडु के नीलगिरि में डी. सिवन (Postman D. Sivan) ने जो किया, उसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे।
सिवन ने 30 सालों तक एक ही काम किया— रोज 15 किलोमीटर पैदल चलना। वो भी किसी सड़क पर नहीं, बल्कि नीलगिरि के घने जंगलों, फिसलन भरी पगडंडियों और अंधेरी गुफाओं के बीच से। उनका काम था सुदूर आदिवासियों और गांव वालों तक उनकी चिट्ठियाँ और पेंशन पहुँचाना।
रास्ता इतना खतरनाक था कि कई बार उनका सामना जंगली हाथियों, भालुओं और सांपों से हुआ। कई बार उन्हें जान बचाने के लिए पेड़ों पर चढ़ना पड़ा। लेकिन मजाल है कि कभी उनकी डाक लेट हुई हो!
65 साल की उम्र में वो रिटायर हुए, लेकिन उनकी कहानी आज भी गूंजती है। सिवन साहब ने साबित कर दिया कि इंटरनेट के जमाने में भी 'खाकी वर्दी' वाला जज्बा कभी पुराना नहीं होता।

image
12 w - Translate

"जहाँ आस्था की ज्वाला जलती है,
वहाँ माँ ज्वाल्पा देवी स्वयं विराजती हैं।
जय माँ ज्वाल्पा देवी 🙏🔥"

image
12 w - Translate

पौड़ी की धरती पर विराजमान
🔥 माँ ज्वाल्पा देवी 🔥
जहाँ स्वयं प्रकट हुई शक्ति,
जहाँ ज्वाला बनी आस्था।
जो भी श्रद्धा से शीश झुकाए,
माँ उसकी राह आसान कर देती हैं।
🙏 जय माँ ज्वाल्पा देवी
📍 पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड

image
12 w - Translate

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित बधाण गढ़ी मध्यकालीन इतिहास की एक महत्वपूर्ण धरोहर है। यह वही प्राचीन गढ़ है जिसने गढ़वाल–कुमाऊँ सीमा पर स्थित होकर राजनीतिक, प्रशासनिक और सैन्य गतिविधियों को दिशा दी। दुर्गम पहाड़ी शिखर पर स्थित यह गढ़ अपने समय में शक्ति, सुरक्षा और शासन का प्रतीक रहा है।
📍 स्थान और ऐतिहासिक महत्त्व
बधाण गढ़ी वर्तमान में चमोली जनपद के ग्वालदम क्षेत्र के समीप, गढ़वाल और कुमाऊँ की सीमा पर स्थित है। ऊँची और खड़ी पहाड़ी पर बना यह गढ़ पूरे बधाण पट्टी और आसपास के गाँवों पर निगरानी रखने में सक्षम था। इसकी सामरिक स्थिति इसे मध्यकालीन गढ़वाल की राजनीतिक-सैनिक व्यवस्था में विशेष स्थान दिलाती है।
🏰 स्थापना और प्रारंभिक इतिहास
बधाण गढ़ी की स्थापना प्रारंभिक मध्यकाल में मानी जाती है। कत्यूरी शासन के पतन (लगभग 11वीं–12वीं शताब्दी) के बाद जब गढ़वाल क्षेत्र अनेक छोटे-छोटे स्वतंत्र गढ़ों में विभाजित हो गया, तब स्थानीय गढ़पतियों ने इस गढ़ का विकास किया। यह गढ़ बधाण पट्टी का प्रमुख प्रशासनिक और सैन्य केंद्र बना।
👑 गढ़पति शासन और स्थानीय सत्ता
कत्यूरी साम्राज्य के विघटन के बाद उभरे गढ़पतियों के लिए बधाण गढ़ एक मजबूत आधार था।
गढ़ पत्थरों से निर्मित था
चारों ओर प्राकृतिक ढाल और पहाड़ी सुरक्षा थी
आसपास के गाँवों पर इसका सीधा नियंत्रण था
यहाँ से स्थानीय शासक प्रशासन, कर वसूली और सुरक्षा व्यवस्था का संचालन करते थे।

image
12 w - Translate

107th Happy B'day MSG
#jindaalaashi #drmsgclub #saintmsg #derasachasauda #saintdrmsginsan

image
12 w - Translate

आज पैठाणी बाजार की सड़क के चौड़ीकरण एवं डामरीकरण कार्यों का लोकार्पण किया। इस कार्य से स्थानीय नागरिकों एवं व्यापारियों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी तथा क्षेत्र के विकास को नई गति प्राप्त होगी।
Bharatiya Janata Party (BJP) BJP Uttarakhand BJP INDIA

image