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पंडितगण भारत की जिस वर्ण व्यवस्था का लगभग 1000 वर्षों से किताबों या शास्त्रों में वर्णन करते आ रहे हैं,
तो इस 1000 वर्ष पहले लिखी गयी " वेद' नामक पुस्तक का किसी तो विद्यालय मै अध्यन/ अध्यापन हुवा होगा?
तो जिस विद्यालय/ गुरुकुल मै वेद पढ़ाये जाते थे,उस विद्यालय का आज तक कोई पुरातात्विक प्रमाण क्यू नही मिला है ?
क्यूकि बौद्धों के जितने भी विश्वविद्यालय होकर गए है, सबके पुरातात्विक प्रमाण मिले है|
हैं न मजे की बात बिना प्रमाणों के धूर्तो ने वैदिक व्यवस्था को 1000 वर्ष मै स्थापित कर दिया है|
नमो बुद्धाय