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आज आध्यात्मिक नगरी काशी में मा. केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल जी, श्रीमती मीनाक्षी लेखी जी और G20 के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम 'सुर वसुधा' में सहभाग किया।
इस कार्यक्रम के माध्यम से आज काशी की पावन धरा से 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' की भावना का संदेश पूरे विश्व में गूंजा है।
आज अभिनेत्री नीरू बाजवा का जन्मदिन है। आज ही के दिन यानि 26 अगस्त 1980 को नीरू बाजवा का जन्म हुआ था। नीरू पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री का बहुत बड़ा नाम हैं। हालांकि उन्होंने शुरूआत देवानंद साहब की फिल्म 'मैं सोलह बरस की' से की थी। ये देव साहब ही थे जो नीरू को कनाडा से ढूंढकर लाए थे। देव साहब की ऑटो बायोग्राफी 'रोमांसिंग विद लाइफ' के एक चैप्टर में देव साहब ने नीरू का भी ज़िक्र गया है। वैसे, एक बात और है जो नीरू के बारे में जानने लायक है। वो ये कि नीरू ने पहली दफा 1996 में आई संजय कपूर व ममता कुलकर्णी स्टारर 'बेकाबू' में कैमरा फेस किया था। उस फिल्म के एक गीत की शूटिंग कनाडा के वैंकुवर शहर में हुई थी। और नीरू ने उस गीत में बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम किया था। उस वक्त नीरू की उम्र मात्र 16 साल थी। किस्सा टीवी की तरफ से नीरू बाजवा को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं। #neerubajwa #happybirthday Neeru Bajwa
पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी अपने चाहने वालों के बीच काफी पॉपुलर हैं. महेन्द्र सिंह धोनी के फैंस अपने चहेते खिलाड़ी की झलक पाने के लिए बेताब रहते हैं. बहरहाल, सोशल मीडिया पर एक फोटो तेजी से वायरल हो रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल फोटो में पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी अपने फैंस के साथ नजर आ रहे हैं. इस फोटो में कैप्टन कूल अपने 2 फीमेल फैन संग दिख रहे हैं.
#indiancricketteam #msdhoni #chennaisuperkings
आप सोचते होंगे कि फौजी को घर तक आने के लिए वारंट दिया जाता है या एयर फैसेलिटी लेकिन जब उसे अचानक छुट्टी निकलना है या 10-20 दिन पहले भी अपनी योजना बना भी ले तो जिस रेलवे में 120 दिन में भी वेटिंग टिकट मिलता है वहां भला 20 दिन पहले कन्फर्म टिकट..कैसे मिल सकता है ? एक फौजी घर से हजारों किलोमीटर दूर, 2 से 4 दिन का सफर बिना कन्फर्म टिकट के, लोगों को रात में चैन की नींद सोते देख मन ही मन विचलित सा हो जाता है, रेलवे का सड़ा हुआ खाना और उसे झकझोर देता है।
कभी कभी तो उसे टिकट चेकर से भी शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है क्योंकि लोग....जिस प्रकार फौज के लिए शब्द प्रयोग करते हैं या उसका नाजायज फायदा उठाने के लिए गुणगान करते हैं वैसे होते नहीं है। फौजी दिल और दिमाग से इतना भोला होता है कि सामने वाले की दिखावटी हमदर्दी पर विश्वास कर लेता है और वहां भी उसे धोखा ही मिलता है, राजनीतिक पार्टियां भी खूब मजे लेती है।Anish भी अपने अभी तक कि 8 साल के नौकरी में ऐसे बहुत सी यात्राएं की जिसमें अचानक छुट्टी आते समय वेटिंग टिकट, वर्तमान भारतीय रेलवे की खचा-खच भरी रेलगाड़ियां जिनमें पेर रखने की जगह नहीं वहां कैसे बीततीं है फूस की वो रातें।भारत सरकार से मेरा आग्रह है कि लम्बी दूरी की सभी ट्रेनों में भारतीय सैनिकों के लिए कम से कम एक बोगी रिजर्व रखा जाएं, ताकि किसी फौजी भाई को इस तरह से प्रताड़ित न होना पड़े।