Discover postsExplore captivating content and diverse perspectives on our Discover page. Uncover fresh ideas and engage in meaningful conversations
अक्षर-अक्षर हमें सिखाते शब्द-शब्द का अर्थ बताते,
कभी प्यार से कभी डांट से, जीवन जीना हमें सिखाते।
गुरु पूर्णिमा 2023 की शुभकामनाएं!!
#gurupurnima #respecton #guru #teacher #bharathanatyam #gurupurnima #gurupurnimaspecial #blessings
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय,
बलिहारी गुरु अपने, गोविंद दियो बताए।।
#gurupurnima #respecton #guru #teacher #bharathanatyam #gurupurnima #gurupurnimaspecial #blessings
इन खूबसूरत वादियों को निहारने के लिए लाखों रूपये खर्च करके वीज़ा लगवाकर स्विट्जरलैंड जाने की जरूरत नहीं है यह आपके पड़ोस में है जिसे आप कुछ हजार खर्च करके अपनी गाड़ी को ड्राइव कर के परिवार य अपनों के साथ घूम सकते हैं ओर यहां की आबोहवा का लुत्फ उठा सकते हैं।यह खूबसूरत हिल स्टेशन हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी में बरोट नामक स्थान पर है।यहां सर्दियों में स्नो फॉल भी होता है तो गर्मियों में यह जगह जन्नत से कम नहीं है।यहां की फ्रेश हवा मनमोहक दृश्यावली झील का किनारा एक रोमांटिक अहसास करवा देता है।सुबह उठकर गर्म चाय का प्याला लेकर आप गुनगुनी धूप में वादियों को निहारें तो वो सकूं के पल आपको तरोताजा कर देंगे।यहां अंग्रेजों द्वारा बनाया शानन पावर प्रोजेक्ट है इसलिए एक छोटी सी झील आपको इस तस्वीर में दिख रही है।यहां की ट्राउट फिश दुनियाभर में फेमस है।ट्राउट फिश साफ सुथरे ठंडे पानी में पाई जाती है ओर इसका स्वाद लाजबाब रहता है।ट्राउट फिश यहां आसानी से उपलब्ध हो जाती है।यहां से थोड़ी दूरी पर बीड-बिलिंग है जो पैराग्लाइडिंग के लिए वर्ल्ड फेमस है वहां आप कांगड़ा घाटी की हसीन वादियों को आसमान में उड़ते हुए निहार सकते हैं।बरोट से थोड़ी ही दूर ऋषि पराशर की तपोस्थली पराशर है।यहां के मनोरम दृश्य झील में तैरती शिला आपको स्वप्नलोक में ले जाएगी।तो बनाएं प्रोग्राम।देवभूमि हिमाचल में आपका स्वागत है।
11 सितम्बर 1857 का दिन था जब बिठूर में एक पेड़ से बंधी तेरह वर्ष की लड़की को ब्रिटिश सेना ने जिंदा ही आग के हवाले किया, धूँ धूँ कर जलती वो लड़की उफ़ तक न बोली और जिंदा लाश की तरह जलती हुई राख में तब्दील हो गई|
ये लड़की थी नानासाहब पेशवा की दत्तक पुत्री जिसका नाम था मैनाकुमारी जिसे 160 वर्ष पूर्व आउटरम नामक ब्रिटिश अधिकारी ने जिंदा जला दिया था|
जिसने 1857 क्रांति के दौरान अपने पिता के साथ जाने से इसलिए मना कर दिया की कही उसकी सुरक्षा के चलते उसके पिता को देश सेवा में कोई समस्या न आये और बिठूर के महल में रहना उचित समझा|
नानासाहब पर ब्रिटिश सरकार इनाम घोषित कर चुकी थी और जैसे ही उन्हें पता चला नानासाहब महल से बाहर है ब्रिटिश सरकार ने महल घेर लिया, जहाँ उन्हें कुछ सैनिको के साथ बस मैनाकुमारी ही मिली|
मैनाकुमारी ब्रटिश सैनिको को देख कर महल के गुप्त स्थानों में जा छुपी, ये देख ब्रिटिश अफसर आउटरम ने महल को तोप से उड़ने का आदेश दिया और ऐसा कर वो वहां से चला गया पर अपने कुछ सिपाहियों को वही छोड़ गया|
रात को मैना को जब लगा की सब लोग जा चुके है और वो बहार निकली तो दो सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया और फिर आउटरम के सामने पेश किया आउटरम ने पहले मैना को एक पेड़ से बंधा फिर मैना से नानासाहब के बारे में और क्रांति की गुप्त जानकारी जाननी चाही पर उस से मुँह नही खोला|
यहाँ तक की आउटरम ने मैनाकुमारी को जिंदा जलाने की धमकी भी दी, पर उसने कहा की "वो एक क्रांतिकारी की बेटी है मृत्यु से नही डरती" ये देख आउटरम तिलमिला गया और उसने मैनाकुमारी को जिंदा जलाने का आदेश दे दिया, इस पर भी मैनाकुमारी बिना प्रतिरोध के आग में जल गई ताकि क्रांति की मशाल कभी न बुझे|
धूर्त वामपंथी लेखक चाहे जो लिखें, पर हमारी स्वतंत्रता इन जैसे असँख्य क्रांतिवीर और वीरांगनाओं के बलिदानों का ही प्रतिफल है और इनकी गाथाएँ आगे की पीढ़ी तक पहुँचनी चाहिए|
इन्हें हर कृतज्ञ भारतीय का नमन पहुँचना चाहिये|
आज उसी वीरांगना के नाम पर *कानपुर नगर* से , पेशवाओं की नगरी *बिठूर* तक जाने वाले मार्ग को "मैनावती मार्ग" कहते हैं।
शत शत नमन है इस महान बाल वीरांगना को ।| 🙏🙏