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कई बार सोचता हूं तो समझ नहीं पाता हूं की हम किस ओर जाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि जहां हमारे से पहले के लोग और कुछ घरों में अभी भी लोग घर से निकलते समय अपने से बड़ों का आशीर्वाद लेकर निकलते थे जिससे घर के बड़ों का भी मन खुश हो जाता था वहीं आजकल के लोग घर से निकलते समय हाथ हिलाते हैं बाय बाय करते हैं या फिर बिना बोले ही निकल जाते हैं। में ये तो नहीं कहता की आजकल का तरीका गलत है लेकिन हां पहले वाला तरीका मेरे मन को छू जाता है मुझे तो वही तरीका ज्यादा पसंद आता है। क्योंकि पहले वाले तरीके में हम घर से जब बाहर निकलते समय बड़ों का आशीर्वाद लेकर निकलते थे तो हमें मार्गदर्शन और आशीर्वाद दोनों एकसाथ मिल जाते थे जिससे हमें हमारी मंजिल तक पहुंचने में मदद भी मिलती थी और हमें आशीर्वाद लेने से एक सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति भी होती थी।