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मैं मोहल्लों, संस्थानों, दुकानों के नाम ठीक-ठीक हिन्दी में लिखे जाने का समर्थक हूँ... असल में अंग्रेजी में लिखे जाने पर, एक सामान्य व्यक्ति द्वारा उसे हिन्दी करके पढ़ना कई बार हास्यास्पद हो जाता है.
पुणे में एक स्थान है "भोसारी", इसे अंग्रेजी में लिखने वाले कभी Bhosri लिखते हैं तो कभी Bhosari, जबकि हिन्दी पट्टी में रहने वाला व्यक्ति इसे कुछ और ही पढ़ लेता है. इसी प्रकार संलग्न चित्र में साफ़-साफ़ दिखाया है कि यह राँची की "चुटिया" ब्रांच है... लेकिन जब कहीं भी पत्र-व्यवहार में Chutia अथवा "Chutiya" लिखा जाता है तो पढ़ने वाले इसे क्या समझे?? गलती कर ही देता है...
वर्षों पहले भोपाल में न्यू मार्केट के पास एक रेस्टोरेंट हुआ करता था... "बापू की कुटिया", उसका बोर्ड अंग्रेजी में "Bapu ki Kutiya" लिखा था... शुरुआत में कुछ समय तो लोग यही आश्चर्य करते रहे कि आखिर "बापू की कुतिया" कैसी होती है?? उज्जैन में एक तहसील है जिसका नाम है "घट्टिया" (डबल T), लेकिन अक्सर अंग्रेजी में लिखने वाले इसे "Ghatia" लिख देते हैं... नाम विकृत होते-होते अंततः "घटिया" हो गया.
एक आदमी को हाईवे के बीचोबीच सफेद पट्टियां पोतने का काम दिया गया।
पहले दिन उसने 8 मील तक पुताई की।
फ़िर अगले दिन 5 मील और उसके अगले दिन मात्र 1 मील की ही पुताई की ।
जब उसके ठेकेदार ने उसे डांटते हुए इसका कारण पूछा तो उसने जवाब दिया- मैं इससे ज्यादा और जल्दी काम नहीं कर सकता क्योंकि हर अगले दिन मुझें अपनी रंग की बाल्टी तक आने के लिए ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है।
#काँग्रेस ने ही हिंदुस्तान के #गद्दार #दाऊद को देश का माफिया बनाया और #मुम्बई बम विस्फोटो के बाद उस को देश से #भगाया !!!
काँग्रेस ने ही #गैरकानूनी #बांग्लादेशिओ को हिंदुस्तान में रहने दिया
काँग्रेस ने ही गैरकानूनी #बांग्लादेशिओ को #हिंदुस्तानी #नागरिक बनाया
काँग्रेस ने ही लगातार #बांग्लादेश से आ रहे हिन्दुओ को #हिंदुस्तान में नहीं रहने दिया
काँग्रेस ने ही लगातार #बांग्लादेशी हिन्दुओ का कत्लेआम और #कन्वर्शन होने दिया
काँग्रेस ने ही क़ानूनी #पाकिस्तानी हिन्दुओ को शरण नहीं दी लेकिन #तिबब्बत को दी
#काँग्रेस और #गांधी ने हिन्दुओ को #अहिंसा के नाम पर #चुना लगाया और #कायर रहने पर मजबूर किया।।
काँग्रेस और गांधी ने #हिन्दुओ के हत्याओ पर खुद हिन्दुओ को ही जिम्मेदार ठहराया और मुसलमानो को #निर्दोष बताया
काँग्रेस और गांधी ही असल में अंग्रेज़ो के गुलाम थे और राष्ट्रध्वज में उनका छोटा झंडा लगाना चाहते थे
काँग्रेस और नेहरू ने ही हिंदुस्तान को आज़ादी मिलने के बाद तोड़ ने का ही काम किया था
काँग्रेस ने #आज़ादी के बाद भी #अंग्रेज़ो की गुलामी नहीं छोड़ी थी और जैसा वे कहते वो करते आये है।