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गुलामगिरी" महान समाज सुधारक ज्योतिबा फुले द्वारा 1873 में लिखी गई एक क्रांतिकारी पुस्तक है। यह किताब भारतीय समाज में ब्राह्मणवाद और जाति व्यवस्था की आलोचना करती है। फुले ने इसमें जाति-आधारित शोषण और असमानता के खिलाफ अपने विचारों को व्यक्त किया है, और यह बहुजन समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई है। #गुलामगिरी #ज्योतिबाफुले #सामाजिकन्याय 📚 इस पुस्तक में सामाजिक परिवर्तन की दिशा में ज्योतिबा फुले के योगदान का वर्णन है।

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ले लो जाड़ो है 😄

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गोगामेड़ी की पत्नी को खाजपूत प्रेशान कर रहे है क्यों भाई ये तुम्हारी दादी है इसको क्यों तंग कर रहे हो 35 वालों

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