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एक दिल के साथ फेफड़े भी जीते है देवासियो। आप राजस्थान की आन बान शान पहचान है।
बाकी की हर जाति ने अपने अस्त्र-शस्त्र वस्त्र बदले हैं। लेकिन आपने कभी अपना परिवेश नहीं बदला अपनी संस्कृति के अनुरूप रहे।
आज भी देवासी कहीं भी दिखते हैं देश-विदेश देखते ही लगते हैं राजस्थानी है।
जय श्री जेतेश्वर भगवान की 🚩
करन चहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा॥
सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राउ॥॥
भावार्थ:-मैं श्री रघुनाथजी के गुणों का वर्णन करना चाहता हूँ, परन्तु मेरी बुद्धि छोटी है और श्री रामजी का चरित्र अथाह है। इसके लिए मुझे उपाय का एक भी अंग अर्थात् कुछ (लेशमात्र) भी उपाय नहीं सूझता। मेरे मन और बुद्धि कंगाल हैं, किन्तु मनोरथ राजा है