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९९ साल की लीज पर किया गया था चीन के हवाले वास्तव में, हॉङ्ग कॉङ्ग अन्य चीनी शहरों से काफी अलग है। १५० साल के ब्रिटेन के औपनिवेशिक शासन के बाद हॉङ्ग कॉङ्ग को ९९ साल की लीज पर चीन को सौंप दिया गया। हॉङ्ग कॉङ्ग द्वीप पर १८४२ से ब्रिटेन का नियंत्रण रहा। जबकि द्वितीय विश्व युद्ध में जापान का इस पर अपना नियंत्रण था।
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जापान का इतिहास
मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
जापान के प्राचीन इतिहास के संबंध में कोई निश्चयात्मक जानकारी नहीं प्राप्त है। जापानी लोककथाओं के अनुसार विश्व के निर्माता ने सूर्य देवी तथा चन्द्र देवी को भी रचा। फिर उसका पोता क्यूशू द्वीप पर आया और बाद में उनकी संतान होंशू द्वीप पर फैल गए। हँलांकि यह लोककथा है पर इसमें कुछ सच्चाई भी नजर आती है।
पौराणिक मतानुसार जिम्मू नामक एक सम्राट् ९६० ई. पू. राज्यसिंहासन पर बैठा और वहीं से जापान की व्यवस्थित कहानी आरंभ हुई। अनुमानत: तीसरी या चौथी शताब्दी में 'ययातों' नामक जाति ने दक्षिणी जापान में अपना आधिपत्य स्थापित किया ५ वीं शताब्दी में चीन और कोरिया से संपर्क बढ़ने पर चीनी लिपि, चिकित्साविज्ञान और बौद्धधर्म जापान को प्राप्त हुए। जापानी नेताओं शासननीति चीन से सीखी किंतु सत्ता का हस्तांतरण परिवारों तक ही सीमित रहा। ८वीं शताब्दी में कुछ काल तक राजधानी नारा में रखने के बाद क्योटो में स्थापित की गई जो १८६८ तक रही।
'मिनामोतो' जाति के एक नेता योरितोमें ने ११९२ में कामाकुरा में सैनिक शासन स्थापित किया। इससे सामंतशाही का उदय हुआ, जो लगभग ६०० वर्ष चली। इसमें शासन सैनिक शक्ति के हाथ रहता था, राजा नाममात्र का ही होता था।
१२७४ और १२८१ में मंगोल आक्रमणों से जापान के तात्कालिक संगठन को धक्का लगा, इससे धीरे धीरे गृहयुद्ध पनपा। १५४३ में कुछ पुर्तगाली और उसके बाद स्पेनिश व्यापारी जापान पहुँचे। इसी समय सेंट फ्रांसिस जैवियर ने यहॉ ईसाई धर्म का प्रचार आरंभ किया।
जापान का इतिहास
मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
जापान के प्राचीन इतिहास के संबंध में कोई निश्चयात्मक जानकारी नहीं प्राप्त है। जापानी लोककथाओं के अनुसार विश्व के निर्माता ने सूर्य देवी तथा चन्द्र देवी को भी रचा। फिर उसका पोता क्यूशू द्वीप पर आया और बाद में उनकी संतान होंशू द्वीप पर फैल गए। हँलांकि यह लोककथा है पर इसमें कुछ सच्चाई भी नजर आती है।
पौराणिक मतानुसार जिम्मू नामक एक सम्राट् ९६० ई. पू. राज्यसिंहासन पर बैठा और वहीं से जापान की व्यवस्थित कहानी आरंभ हुई। अनुमानत: तीसरी या चौथी शताब्दी में 'ययातों' नामक जाति ने दक्षिणी जापान में अपना आधिपत्य स्थापित किया ५ वीं शताब्दी में चीन और कोरिया से संपर्क बढ़ने पर चीनी लिपि, चिकित्साविज्ञान और बौद्धधर्म जापान को प्राप्त हुए। जापानी नेताओं शासननीति चीन से सीखी किंतु सत्ता का हस्तांतरण परिवारों तक ही सीमित रहा। ८वीं शताब्दी में कुछ काल तक राजधानी नारा में रखने के बाद क्योटो में स्थापित की गई जो १८६८ तक रही।
'मिनामोतो' जाति के एक नेता योरितोमें ने ११९२ में कामाकुरा में सैनिक शासन स्थापित किया। इससे सामंतशाही का उदय हुआ, जो लगभग ६०० वर्ष चली। इसमें शासन सैनिक शक्ति के हाथ रहता था, राजा नाममात्र का ही होता था।
१२७४ और १२८१ में मंगोल आक्रमणों से जापान के तात्कालिक संगठन को धक्का लगा, इससे धीरे धीरे गृहयुद्ध पनपा। १५४३ में कुछ पुर्तगाली और उसके बाद स्पेनिश व्यापारी जापान पहुँचे। इसी समय सेंट फ्रांसिस जैवियर ने यहॉ ईसाई धर्म का प्रचार आरंभ किया।
जापान का इतिहास
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जापान के प्राचीन इतिहास के संबंध में कोई निश्चयात्मक जानकारी नहीं प्राप्त है। जापानी लोककथाओं के अनुसार विश्व के निर्माता ने सूर्य देवी तथा चन्द्र देवी को भी रचा। फिर उसका पोता क्यूशू द्वीप पर आया और बाद में उनकी संतान होंशू द्वीप पर फैल गए। हँलांकि यह लोककथा है पर इसमें कुछ सच्चाई भी नजर आती है।
पौराणिक मतानुसार जिम्मू नामक एक सम्राट् ९६० ई. पू. राज्यसिंहासन पर बैठा और वहीं से जापान की व्यवस्थित कहानी आरंभ हुई। अनुमानत: तीसरी या चौथी शताब्दी में 'ययातों' नामक जाति ने दक्षिणी जापान में अपना आधिपत्य स्थापित किया ५ वीं शताब्दी में चीन और कोरिया से संपर्क बढ़ने पर चीनी लिपि, चिकित्साविज्ञान और बौद्धधर्म जापान को प्राप्त हुए। जापानी नेताओं शासननीति चीन से सीखी किंतु सत्ता का हस्तांतरण परिवारों तक ही सीमित रहा। ८वीं शताब्दी में कुछ काल तक राजधानी नारा में रखने के बाद क्योटो में स्थापित की गई जो १८६८ तक रही।
'मिनामोतो' जाति के एक नेता योरितोमें ने ११९२ में कामाकुरा में सैनिक शासन स्थापित किया। इससे सामंतशाही का उदय हुआ, जो लगभग ६०० वर्ष चली। इसमें शासन सैनिक शक्ति के हाथ रहता था, राजा नाममात्र का ही होता था।
१२७४ और १२८१ में मंगोल आक्रमणों से जापान के तात्कालिक संगठन को धक्का लगा, इससे धीरे धीरे गृहयुद्ध पनपा। १५४३ में कुछ पुर्तगाली और उसके बाद स्पेनिश व्यापारी जापान पहुँचे। इसी समय सेंट फ्रांसिस जैवियर ने यहॉ ईसाई धर्म का प्रचार आरंभ किया।

इस्लाम, LGBT का विरोध, पीएम मोदी की मुरीद... कौन हैं इटली की पीएम जॉर्जिया? जिनके खूब हो रहे चर्चे
सोशल मीडिया पर लोग इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मे... https://www.aajtak.in/india/st....ory/g20-india-summit
निसंतानता या बांझपन आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। शब्दों में कहना जितना आसान है उतना ही कठिन है उस दर्द को समझना जिससे एक निसंतानता से जुझ रहा दंपती गुजरता है। परिवार की अपेक्षा, समाज की अपेक्षा और सबसे ज्यादा एक दूसरे से अपेक्षा। ऐसा ही कुछ बीत रहा था डॉ संजय जोशी की एकलौती बेटी प्रिया के साथ, लेकिन बेटी को किए वादे के लिए डॉ संजय जोशी के ने वो कर दिखाया जिससे आज हजारों निसन्तान दम्पत्ति निसंतानता के श्राप से मुक्त हो रहे हैं।