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लार्ड विव रिचर्ड! का करियर ही उनकी सुप्रीमेसी को साबित करता है, उनकी बादशाहत दशकों तक कायम रही..
कोई आसपास भी नही था,
Oneday मैचों में 90 का स्ट्राइक रेट.. आज 40 सालों बाद भी बड़े बड़े खिलाड़ियों के खाते में नही है,
टेस्ट मैचों में 50+ का एवरेज..
टेस्ट मैच में तत्कालीन समय का सबसे तेज शतक...56 गेंदों में...
टेस्ट मैचों में एक कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा रन का रिकॉर्ड तीस साल तक रहा... ! जो 2006 में यूसुफ योहाना ने तोड़ा...
एकलौता कप्तान जो कोई टेस्ट सीरीज नही हारा...
क्या नही था उनके पास.... ?????
मतलब जो भी आप एक बैट्समैन के लिए सोच सकते हैं .. सब कुछ...…
1975 के विश्वकप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के तीन बल्लेबाजों ( ग्रेग चैपल, इयान चैपल, एलन टर्नर) को रनआउट रिचर्ड ने किया, नतीजा टीम विश्वकप जीत पायी, आज भी उस जीत का श्रेय उनको ही दिया जाता था।
वो फील्डर भी शानदार थे।
टेस्ट मैचों में रिचर्ड के ऊपर ब्रेडमैन, सोबर्स etc गिने भी जाते हैं लेकिन oneday मैचों में उनका एकतरफा साम्राज्य कायम था, लगभग 17-18 साल का करियर उन्होंने बिना हेलमेट के खेला, और बड़े बड़े बॉलर्स का धागा खोल दिया....
रिचर्ड का जितना भय गेंदबाजों के भीतर हुआ करता था, उसे कोई सोच नही सकता है.. ये तब की बात है जब बॉलर्स बैट्समैन को स्ट्रेचर पर लाद कर पैवेलियन भेजते थे।
क्रिकेट जगत की कितनी भी मशहूर पत्रिकाएं हों, सब की सब की सब विव रिचर्ड का बखान करते हुए नही थकती थीं, पेन की स्याही खत्म हो जाती थी लेकिन रिचर्ड के बखान नही...
वर्ल्डकप 1987 में उनका 181 रन नाबाद का रिकॉर्ड 9 वर्ष तक जिंदा रहा.. 1992 के विश्वकप में भी इस स्कोर के आसपास कोई भी नही पहुंचा...,
और 1996 में इसे गैरी क्रिस्टन ने तोड़ा...
रिचर्ड ने 1979 के विश्वकप में भी अपनी लॉर्डशिप साबित कर चुके थे.. नाबाद 138 रन... ! फाइनल मैच में..
सबसे मजेदार बात ये है कि रिचर्ड 1984 में ही उनका oneday का बेस्टस्कोर नाबाद 189 बना चुके थे.. !
ये उस वक्त की बात है जब टीमों द्वारा इतने स्कोर बहुत बार नही बनते थे..
जब तक विव रिचर्ड थे तब तक कोई भी समकालीन बल्लेबाज उनके आसपास भी नही था..
जिन्होंने रिचर्ड को मैदान पर देखा होगा वो किस्मत वाले होंगे.. क्योंकि उनका पदार्पण भी तो इंडिया के खिलाफ ही था।
दूसरे ही मैच में नाबाद 192 रन की पारी ठोंक दी थी...
असाधारण क्षमता के धनी थे रिचर्ड ... !