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सुभाष घई को फ़िल्में निर्देशित करते 47 साल हो गए। इकलौते निर्देशक हैं वह जिन्हें तीन फ़िल्मों में दिलीप कुमार को निर्देशित करने का सौभाग्य मिला। अमिताभ बच्चन के साथ वह 'देवा' बनाना चाहते थे पर बनी नहीं। 'युवराज' को वह प्रोजेक्ट प्रेशर की फ़िल्म मानने में संकोच नहीं करते। संगीत उनकी रग रग में है। पढ़िए उनके एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के कुछ अंश जो आज के 'अमर उजाला' अख़बार में प्रकाशित हुए हैं। पूरा इंटरव्यू अमर उजाला डॉट कॉम पर

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हिंदी सिनेमा में ऐसा पहली बार हुआ है जब घरेलू बॉक्स ऑफिस पर एक ही साल में दो फ़िल्में 400 करोड़ रुपये की कमाई के पार निकल गईं। जी हां, शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण स्टारर फ़िल्म ‘पठान’ के बाद अब अभिनेता सनी देओल और अमीषा पटेल की फ़िल्म ‘गदर 2’ की भी इस एक्सक्लूसिव क्लब में एंट्री हो गई है। ‘गदर 2’ ने रिलीज के 12वें दिन ये शानदार कारनामा कर दिखाया है। फिल्म ‘पठान’ ने 400 करोड़ क्लब में रिलीज के 11वें दिन ही एंट्री कर ली थी।

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इस बार गांव गया तो पापा की अलमारी से ये तस्वीर मिली। साल 1974-75 की तस्वीर है। सत्र पूरा होने के बाद पहले 10वीं और 12वीं के छात्रों की इस तरह की तस्वीरें खिंचाने की गांवों तक में परंपरा थी। ध्यान से देखेंगे तो पूरे समूह में सिर्फ़ पापा ने ही टाई पहनी हुई है। पापा को हमेशा टिंच रहने की आदत रही। बिना प्रेस की हुई शर्ट और पैंट उन्होंने कभी नहीं पहनी और जूते बिना पॉलिश के। समय की पाबंदी ऐसी कि लोग उनके आने-जाने से घड़ी मिला सकते थे।

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।।तुलसी जयंती महोत्सव।।
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सभी मानस प्रेमी सज्जनों एवम् मानस कविता के कविकुल हंस श्रीराम मुख चन्द्रमा चकोर मानस मंदिर के कुशल शिल्पकार परम अर्चनीय वन्दनीय अभिनंदनीय प्रात.स्मरणीय महनीय रमणीय कमनीय संत पूज्य पाद गोष्वामी तुलसीदास जी महाराज के जन्म महोत्सव पर बहुत बहुत बधाई स्वीकार हो ।हे महापुरुष इस घनघोर कलिकाल में प्रगट होकर अगर आपने संबल न दिया होता तो हम जैसे लाखों दीन हीन समाज मे तिरस्कार का जीवन बिताते हुए गलीगली घूमने को विवश रहते बाबा तुम्हारा मानस ही माता पिता और तो क्या कहूं भगवान राम ही बन कर मिल गया।क्या दो रोटी कपड़ा के लिए नाना प्रकार के ताने बाने बुनने वाले के लिए आपने कल्पवृक्ष नहीं दे दिया ?और तो अथिक क्या कहूं आपके द्वारा ।।
भारत को फिर से धनुधारी राम मिल गये।।
रामायण से चार पदार्थ ललाम मिल गये।।
खुला धर्म का द्वार युगों की विपदा भागी।।
कल्पवृक्ष दे गया जगत को एक विरागी।।
तुलसी की महिमा कलि का प्राणी क्या गाये।।
जुगुनू कैसे भला भानु को दीप दिखाये।।
अस्तु शब्द की शक्ति शिथिल है नाथ हमारी ।।
धन्यवाद कैसे दूं सीमित मति बेचारी।।
अपने उर के भाल तुम्हें अर्पण करता हूं।।
सागर को देने हित जल अंजुलि भरता हूं।।
शब्द तुमँहारे ही तुमको करता हूं अर्पण।।
*श्री राम जय राम जय जय राम*

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