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जब चांदी की कीमत 4 लाख रुपए किलो तक चली गई थी, तो मम्मी ने सोचा कि घर रखें ये अपने टूटे फूटे बेकार पड़े ये चांदी के जेवर बेच देती हूं।
लेकिन हैरानी की बात ये रही कि चांदी इतनी महंगी होने के बावजूद भी किसी सुनार ने इस चांदी को खरीदने में रुचि नहीं दिखाई, बस उस समय सब दुकानदार ऊंचे दामों में अपनी चांदी के सामान बेचने में व्यस्त थे, खरीदने को कोई तैयार नहीं हुआ...
लेकिन इस अनुभव से मैंने एक बात सीखी है, सिर्फ ये सुनकर कि कोई चीज महंगी हो रही है, उस चीज में अपना पैसा फसाना कोई समझदारी नहीं है...
क्योंकि जब आप अपना सामान बेचने जाओगे तो आपको अपने सामान का खरीददार मिलना इतना आसान नहीं होगा।
इसलिए भीड़ के पीछे नहीं, बल्कि अपनी समझदारी से अपने पैसे को निवेश करें।
BREAKING
दिनेश लाला यादव निरहुआ जो दो बेटो के पिता
है जिनकी शादी 26 साल पहले ही हो गई थी
फ्री भी अकेले दिखाते हैं दिनेश लाला यादव
निरहुआ अक्सर चर्चा में बने रहते हैं खासतौर
पर अभिनेत्री आम्रपाली दुबे के साथ दोनों के
साथ दोनों का अफेयर की अफवाहें उड़ी जबकि
निरहुआ की शादी 2000 में मनसा देवी से शादी की थी उनकी बीवी गांव में रहती है
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बिखरा सामान, दीवार पर राधा-कृष्ण की तस्वीर और जगह-जगह पेंसिल से बने स्केच। फिर उस पर बना क्राॅस का निशान। साथ में लिखा है, “ 'I am very alone। Make me a heart of broken यानी मैं बहुत अकेली हूं। मेरा दिल टूट गया है।”
गाजियाबाद की भारत सिटी सोसायटी का यह वह कमरा है, जहां से कूदकर 3 नाबालिग बहनों निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने सुसाइड कर लिया। अब तक की जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें ऑनलाइन गेम 'कोरियन लव गेम' में इतना डूब चुकी थीं कि वह उससे बाहर नहीं निकल पाई।
इस कमरे की दीवारों में जगह-जगह पेंसिल से स्केच बने हुए थे। कहीं स्लोगन लिखे थे तो कहीं कुछ तस्वीरें। ज्यादातर चीजों को लिखने के बाद उन पर क्रॉस के निशान बने हुए थे। यानी, उन्हें काट दिया गया था। फर्श पर फैमिली फोटो को चिपका रखा था।
पिता चेतन ने बताया कि बेटियां अक्सर कहती थीं कि हम लोगों को कोरिया जाना है। गेम में कुल 50 टास्क थे। कल गेम का आखिरी टास्क था, जिसे पूरा करने के बच्चियों ने 9वीं मंजिल से छलांग लगा दी। तीन में से बीच वाली बेटी गेम में “डेथ कमांडर” की भूमिका निभाती थी।
बिखरा सामान, दीवार पर राधा-कृष्ण की तस्वीर और जगह-जगह पेंसिल से बने स्केच। फिर उस पर बना क्राॅस का निशान। साथ में लिखा है, “ 'I am very alone। Make me a heart of broken यानी मैं बहुत अकेली हूं। मेरा दिल टूट गया है।”
गाजियाबाद की भारत सिटी सोसायटी का यह वह कमरा है, जहां से कूदकर 3 नाबालिग बहनों निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने सुसाइड कर लिया। अब तक की जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें ऑनलाइन गेम 'कोरियन लव गेम' में इतना डूब चुकी थीं कि वह उससे बाहर नहीं निकल पाई।
इस कमरे की दीवारों में जगह-जगह पेंसिल से स्केच बने हुए थे। कहीं स्लोगन लिखे थे तो कहीं कुछ तस्वीरें। ज्यादातर चीजों को लिखने के बाद उन पर क्रॉस के निशान बने हुए थे। यानी, उन्हें काट दिया गया था। फर्श पर फैमिली फोटो को चिपका रखा था।
पिता चेतन ने बताया कि बेटियां अक्सर कहती थीं कि हम लोगों को कोरिया जाना है। गेम में कुल 50 टास्क थे। कल गेम का आखिरी टास्क था, जिसे पूरा करने के बच्चियों ने 9वीं मंजिल से छलांग लगा दी। तीन में से बीच वाली बेटी गेम में “डेथ कमांडर” की भूमिका निभाती थी।
बिखरा सामान, दीवार पर राधा-कृष्ण की तस्वीर और जगह-जगह पेंसिल से बने स्केच। फिर उस पर बना क्राॅस का निशान। साथ में लिखा है, “ 'I am very alone। Make me a heart of broken यानी मैं बहुत अकेली हूं। मेरा दिल टूट गया है।”
गाजियाबाद की भारत सिटी सोसायटी का यह वह कमरा है, जहां से कूदकर 3 नाबालिग बहनों निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने सुसाइड कर लिया। अब तक की जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें ऑनलाइन गेम 'कोरियन लव गेम' में इतना डूब चुकी थीं कि वह उससे बाहर नहीं निकल पाई।
इस कमरे की दीवारों में जगह-जगह पेंसिल से स्केच बने हुए थे। कहीं स्लोगन लिखे थे तो कहीं कुछ तस्वीरें। ज्यादातर चीजों को लिखने के बाद उन पर क्रॉस के निशान बने हुए थे। यानी, उन्हें काट दिया गया था। फर्श पर फैमिली फोटो को चिपका रखा था।
पिता चेतन ने बताया कि बेटियां अक्सर कहती थीं कि हम लोगों को कोरिया जाना है। गेम में कुल 50 टास्क थे। कल गेम का आखिरी टास्क था, जिसे पूरा करने के बच्चियों ने 9वीं मंजिल से छलांग लगा दी। तीन में से बीच वाली बेटी गेम में “डेथ कमांडर” की भूमिका निभाती थी।
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गाजियाबाद की भारत सिटी सोसायटी का यह वह कमरा है, जहां से कूदकर 3 नाबालिग बहनों निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने सुसाइड कर लिया। अब तक की जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें ऑनलाइन गेम 'कोरियन लव गेम' में इतना डूब चुकी थीं कि वह उससे बाहर नहीं निकल पाई।
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