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इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि "कोई शादीशुदा पुरुष यदि किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है, तो यह अपने आप में कोई आपराधिक कृत्य नहीं है. जब तक किसी कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा, तब तक अदालत इस तरह के रिश्ते को अपराध नहीं मानेगी"

#allahabadhighcourt #liveinrelationship #abpnews

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अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित लगभग 14 किलोमीटर लंबी बॉर्डर रोड इस साल 1 जुलाई से बंद हो जाएगी. अमेरिकी प्रशासन ने यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया है. अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर अवैध प्रवासन और ड्रग तस्करी बढ़ने के चलते यह जरूरी हो गया है.

यह सड़क तकनीकी रूप से अमेरिका की मोंटाना राज्य की तरफ आती है, लेकिन कनाडा के अल्बर्टा प्रांत की म्युनिसिपालिटी Warner County द्वारा इसका रख-रखाव किया जाता है. 1940 के दशक से यह सड़क दोनों देशों के लोगों के लिए खुली रही है. किसान और परिवार यहां आसानी से अपने पड़ोसियों से मिलने और खेतों में काम करने के लिए इस सड़क का इस्तेमाल करते थे.

स्थानीय लोगों के लिए यह कदम “एक युग का अंत” है. कनाडा की तरफ रहने वाले Ross Ford ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने बताया कि पड़ोसियों के साथ उनका संबंध हमेशा बहुत मजबूत रहा है. वहीं मोंटाना की तरफ रहने वाले Roger Horgus ने याद किया कि बचपन में बच्चे इस सड़क को पार करके खेल-कूद और साइकिल चलाने जाते थे. उन्होंने कहा कि सड़क का बंद होना निराशाजनक है, कनाडाई हमेशा इस सड़क का अच्छा ख्याल रखते थे.

#america | #canada | #canadaborder | #security | #illegalimmigration | #aajtaksocial | #atcard

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आम आदमी पार्टी (AAP) में हाल ही में हुए बड़े बदलाव के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटाकर अशोक कुमार मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंप दी है। इस फैसले के बाद से राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

इसी बीच राघव चड्ढा का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना। मुझे खामोश करवाया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूं।” उनके इस बयान को लेकर सियासी मायने निकाले जा रहे हैं और इसे पार्टी के अंदरूनी हालात से जोड़कर देखा जा रहा है।

पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा की चुप्पी और पार्टी के बड़े फैसलों से दूरी को लेकर सवाल उठ रहे थे। ऐसे में यह बयान और भी ज्यादा अहम हो जाता है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस बदलाव को लेकर कोई बड़ी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

#raghavchadha #aap #delhipolitics #politicalnews #breakingnews #atreel #aajtaksocial

(Raghav Chadha Statement, AAP Politics, Deputy Leader Removed, Ashok Mittal, Party Reshuffle, Delhi Politics)

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान के अंदर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

#iranwar #middleeastcrisis #worldnews #breakingnews #atcard #aajtaksocial

(Iran War, Middle East Crisis, Airstrike, Civilian Targets, Geneva Convention, War Crimes, US-Israel Attack)

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान के अंदर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

#iranwar #middleeastcrisis #worldnews #breakingnews #atcard #aajtaksocial

(Iran War, Middle East Crisis, Airstrike, Civilian Targets, Geneva Convention, War Crimes, US-Israel Attack)

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान के अंदर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान के अंदर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान के अंदर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान के अंदर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

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सबसे ज्यादा चोट तब लगती है जब आप ऊंचाई से ग‍िरते हैं. इसका दर्द आप IAS-IPS की तैयारी में इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद भी फेल होने वाले अभ्यर्थी से भी पूछ सकते हैं. ये एक ऐसा मुकाम होता है जहां कोई व्यक्त‍ि पूरी तरह टूट भी सकता है. लेकिन निर्मल पवार एक ऐसे अभ्यर्थी हैं जिनके जीवन में बहुत सी फेलियर रहीं लेकिन उन्होंने खुद को टूटने से बचाया. भले ही आज उनके सामने पहाड़ जैसी चुनौतियां हों, लेकिन उनके भीतर की उम्मीद आज भी जीत के लिए बेताब है.

महाराष्ट्र के सैनिक स्कूल सातारा से पढ़ाई करने वाले न‍िर्मल का शुरुआती सपना सेना में जाने का था. छठी से बारहवीं तक बोर्डिंग स्कूल की अनुशासित जिंदगी ने उनमें सेवा भावना पैदा की. आगे उन्होंने नासिक के केके वाग इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीन‍ियर‍िंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. इंजीनियरिंग के बाद करियर के कई विकल्प थे, लेकिन उन्होंने UPSC को चुना. वजह साफ थी, समाज में बड़ा बदलाव लाने की इच्छा.

साल 2018 में वह दिल्ली पहुंचे. मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर की लाइब्रेरी, नोट्स और टेस्ट सीरीज के बीच तैयारी शुरू हुई. लेकिन UPSC की असली चुनौती यहीं से शुरू हुई:
2018-19: प्रीलिम्स में असफलता
2020: मेन्स तक पहुंचे लेकिन बात नहीं बनी.
2021-22: प्रीलिम्स और मेन्स का उतार-चढ़ाव जारी रहा.
2023: वो साल जब मंजिल करीब थी. प्रीलिम्स और मेन्स क्लियर कर इंटरव्यू तक पहुंचे. 176 अंक मिले, लेकिन मेरिट में महज 21 अंकों से सपना छूट गया.
2024: एक बार फिर मेन्स की दहलीज पर आकर रुक गए.

#upsc | #education | #upscpreparation | #motivation | #aajtaksocial |#atcard

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