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कई दिनों के पश्चिम बंगाल प्रवास के बाद जनसुनवाई का अवसर मिला।
प्रत्येक बुधवार की भांति कल भी आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय, गुरुधाम में प्रातःकाल 11 बजे से सायंकाल 5 बजे तक निरंतर जनसुनवाई कर बड़ी संख्या में आए लोगों की समस्याओं का समाधान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
प्रत्येक गुरुवार की भांति आज भी शिवाजी नगर जनसम्पर्क कार्यालय पर प्रातः 10 बजे से जनसुनवाई के लिए उपलब्ध रहूंगा।
सादर,
सौरभ श्रीवास्तव
विधायक वाराणसी कैण्ट

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कई दिनों के पश्चिम बंगाल प्रवास के बाद जनसुनवाई का अवसर मिला।
प्रत्येक बुधवार की भांति कल भी आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय, गुरुधाम में प्रातःकाल 11 बजे से सायंकाल 5 बजे तक निरंतर जनसुनवाई कर बड़ी संख्या में आए लोगों की समस्याओं का समाधान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
प्रत्येक गुरुवार की भांति आज भी शिवाजी नगर जनसम्पर्क कार्यालय पर प्रातः 10 बजे से जनसुनवाई के लिए उपलब्ध रहूंगा।
सादर,
सौरभ श्रीवास्तव
विधायक वाराणसी कैण्ट

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द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी भगवान केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू होने में महज 23 दिन बचे हैं। धाम तक जाने वाला मुख्य मार्ग अभी भी बर्फ से ढका हुआ है, लेकिन रास्ते से बर्फ हटाने और ग्लेशियर तोड़ने का कार्य शुरू कर दिया गया है। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन के अनुसार, पैदल यात्रा मार्ग और धाम में कुल 60 मजदूर बर्फ हटाने के कार्य में जुटे हुए हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सबसे पहले पैदल यात्रा मार्ग को आवाजाही लायक बनाना है, ताकि धाम सहित अन्य सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चल सकें। हालांकि लगातार खराब मौसम की वजह से मजदूरों और प्रशासन को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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ऑस्ट्रेलिया- सड़क पर नमाज़ पढ़ रहे मजहबियों को ऑस्ट्रेलिया की पुलिस ने खदेड़ा

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एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक महिला पर 16 साल के नाबालिग के साथ गलत काम करने का आरोप लगा है।
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है।

सूत्रों के अनुसार, घटना एक होटल में हुई बताई जा रही है।
पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और सच्चाई सामने लाने की कोशिश कर रही है।

⚠️ इस खबर की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

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🔥 वायरल हैशटैग

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#crimenews

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मध्य प्रदेश के रीवा जिले से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है. वीडियो में स्कूल की एक शिक्षिका कान में ईयरफोन लगाए बातचीत में व्यस्त दिख रही हैं, जबकि पास में एक बच्चा गर्मी से बचने के लिए हाथ से पंखा झल रहा है

#madhyapradesh

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हमारे शरीर के भीतर चलने वाले एक "महायुद्ध" की दास्तां सुनाती है। जिसे हम अक्सर घृणा की नज़रे से देखते हैं, वह 'मवाद' (Pus) वास्तव में हमारे शरीर की वफादारी का सबसे बड़ा प्रमाण है। विज्ञान की भाषा में मवाद का बनना इस बात का संकेत है कि आपका 'इम्यून सिस्टम' (प्रतिरक्षा प्रणाली) पूरी ताकत से काम कर रहा है।

यहाँ इस "सफेद मवाद" और हमारे "कोशिकीय सैनिकों" के पीछे छिपे अद्भुत विज्ञान को विस्तार से समझाया गया है:

1. 'न्यूट्रोफिल्स': अग्रिम पंक्ति के सैनिक
जब भी कहीं चोट लगती है या बैक्टीरिया हमला करते हैं, तो हमारे शरीर की सफेद रक्त कोशिकाएं (WBCs), विशेषकर 'न्यूट्रोफिल्स' (Neutrophils), सबसे पहले वहां पहुँचती हैं।

आत्मघाती हमला: ये कोशिकाएं बैक्टीरिया को घेर लेती हैं और उन्हें खत्म करने के लिए ज़हरीले रसायन छोड़ती हैं। इस प्रक्रिया में अक्सर ये खुद भी नष्ट हो जाती हैं।

मवाद का निर्माण: मवाद (Pus) मुख्य रूप से इन्हीं मृत न्यूट्रोफिल्स, जीवित और मृत बैक्टीरिया, और क्षतिग्रस्त ऊतकों (Damaged Tissues) का एक गाढ़ा मिश्रण होता है।

2. 'बायोलॉजिकल कचरा' (Biological Debris)
मवाद का रंग अक्सर सफेद, पीला या हल्का हरा होता है। इसके पीछे भी विज्ञान है:‼️

रंग का राज: न्यूट्रोफिल्स में 'मायलोपेरॉक्सिडेस' (Myeloperoxidase) नाम का एक हरा एंजाइम होता है, जो इन्फेक्शन से लड़ते समय सक्रिय होता है। इसी कारण मवाद का रंग कभी-कभी हरापन लिए हुए होता है।🧐

सूजन और दर्द: जहां मवाद जमा होता है, वहां दबाव बढ़ने से सूजन और दर्द होता है। यह शरीर का तरीका है आपको यह बताने का कि वहां "सफाई और मरम्मत" का काम ज़ोरों पर है।

3. 'एब्सेस' (Abscess): सुरक्षा की दीवार
कभी-कभी शरीर मवाद के चारों ओर एक सख्त दीवार बना देता है, जिसे 'फोड़ा' (Abscess) कहते हैं।

घेराबंदी: यह दीवार इसलिए बनाई जाती है ताकि मवाद में मौजूद बैक्टीरिया और ज़हरीले तत्व शरीर के बाकी हिस्सों में न फैल सकें।

इलाज: जब यह फोड़ा फटता है या डॉक्टर इसे साफ करते हैं, तो शरीर का "युद्धक्षेत्र" साफ हो जाता है और घाव भरने की प्रक्रिया (Healing) तेज़ हो जाती है।

4. क्या मवाद का होना हमेशा बुरा है?
नहीं, मवाद का होना इस बात का सबूत है कि:‼️

दुश्मन की पहचान: आपके शरीर ने बाहरी बैक्टीरिया को पहचान लिया है।

सेना की तैनाती: आपकी 'इम्यून आर्मी' सही जगह पर पहुँच गई है।

सफाई जारी है: शरीर मरे हुए बैक्टीरिया और कचरे को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है।…..Khushbu Yadav

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जिसे हम साधारण भाषा में 'रोंगटे खड़े होना' (Goosebumps) कहते हैं, उसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में 'पिलोइरेक्शन' (Piloerection) कहा जाता है। यह हमारे पूर्वजों से विरासत में मिला एक ऐसा सुरक्षा कवच है, जो आज भी हमारे शरीर में "डिफेंस मोड" की तरह काम करता है।‼️

यहाँ रोंगटे खड़े होने के पीछे छिपे 'कुदरती हीटर' और 'पुराने हथियार' के विज्ञान को विस्तार से समझाया गया है:

1. अरैक्टर पिली (Arrector Pili) मांसपेशी का कमाल
हमारे शरीर के हर बाल की जड़ में एक बहुत ही सूक्ष्म मांसपेशी होती है जिसे 'अरैक्टर पिली' कहते हैं।

सिकुड़न का असर: जब हमें बहुत ठंड लगती है, तो हमारा तंत्रिका तंत्र (Nervous System) इन मांसपेशियों को सिकुड़ने का संदेश देता है।

बालों का खड़ा होना: जैसे ही ये मांसपेशियां खिंचती हैं, बाल सीधे खड़े हो जाते हैं और त्वचा पर छोटे-छोटे उभार (Bumps) बन जाते हैं।

2. 'इंसुलेशन' का कुदरती हीटर❤️
लाखों साल पहले जब इंसानों के शरीर पर घने और लंबे बाल होते थे, तब यह प्रक्रिया एक बेहतरीन थर्मल जैकेट का काम करती थी:

गर्मी का जाल (Heat Trapping): बाल खड़े होने से उनके बीच में हवा की एक मोटी परत फंस जाती थी। हवा गर्मी की कुचालक (Insulator) होती है, इसलिए यह परत शरीर की अंदरूनी गर्मी को बाहर जाने से रोक देती थी।

आज की स्थिति: अब हमारे शरीर पर उतने घने बाल नहीं रहे, इसलिए रोंगटे खड़े होने से हमें उतनी गर्मी नहीं मिलती, लेकिन हमारा शरीर आज भी उसी पुराने 'सॉफ्टवेयर' पर काम कर रहा है।

3. डर लगने पर 'शक्ति प्रदर्शन'‼️
आपने गौर किया होगा कि केवल ठंड ही नहीं, बल्कि डर या अचानक आए खतरे के समय भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इसके पीछे एक सामरिक (Strategic) कारण है:

बड़ा दिखना: जानवरों की दुनिया में (जैसे बिल्ली या कुत्ते), जब वे डरते हैं तो उनके बाल खड़े हो जाते हैं ताकि वे अपने दुश्मन को आकार में बड़े और डरावने लगें।

इंसानी भावनाएं: इंसानों में भी एड्रेनालिन (Adrenaline) हार्मोन के अचानक बढ़ने से रोंगटे खड़े होते हैं। इसीलिए डरावनी फिल्म देखते समय या कोई प्रेरणादायक गाना सुनते समय भी हमें 'गूज़बम्प्स' महसूस होते हैं।

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