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"हरी-भरी उत्तराखंड की वादियों में सड़क किनारे लगा साइनबोर्ड—‘शराब पीकर गाड़ी चलाना मना है’, सुरक्षित सफर की जिम्मेदारी याद दिलाता है।"

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आज रोटरी क्लब (ऋषिकेश दिवास) द्वारा आयोजित “स्वावलंबिनी दीपावली मेला” में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इस आयोजन में महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से स्थानीय स्वावलंबी महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई, जो आत्मनिर्भर भारत की भावना को सशक्त रूप से प्रदर्शित करती है।
क्लब की अध्यक्ष शुभांगी रैना जी, सचिव माधवी गुप्ता जी, तथा पूरे दिवास परिवार को इस प्रेरणादायक आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
दीपावली के पावन अवसर पर ऐसे आयोजन समाज में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करते हैं।

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आज रोटरी क्लब (ऋषिकेश दिवास) द्वारा आयोजित “स्वावलंबिनी दीपावली मेला” में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इस आयोजन में महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से स्थानीय स्वावलंबी महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई, जो आत्मनिर्भर भारत की भावना को सशक्त रूप से प्रदर्शित करती है।
क्लब की अध्यक्ष शुभांगी रैना जी, सचिव माधवी गुप्ता जी, तथा पूरे दिवास परिवार को इस प्रेरणादायक आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
दीपावली के पावन अवसर पर ऐसे आयोजन समाज में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करते हैं।

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आज रोटरी क्लब (ऋषिकेश दिवास) द्वारा आयोजित “स्वावलंबिनी दीपावली मेला” में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इस आयोजन में महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से स्थानीय स्वावलंबी महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई, जो आत्मनिर्भर भारत की भावना को सशक्त रूप से प्रदर्शित करती है।
क्लब की अध्यक्ष शुभांगी रैना जी, सचिव माधवी गुप्ता जी, तथा पूरे दिवास परिवार को इस प्रेरणादायक आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
दीपावली के पावन अवसर पर ऐसे आयोजन समाज में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करते हैं।

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अमित मालवीय ने अनिल मिश्रा को जातिवादी कहकर ट्वीट किया, लेकिन इस बार बीजेपी ने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। मालवीय को लगा था कि मिश्रा को "कांग्रेसी" या "जातिवादी" बोलते ही सवर्ण समाज उन्हें चमचा कहकर गालियां देगा। लेकिन हुआ उल्टा! अनिल मिश्रा का समर्थन न सिर्फ सवर्ण, बल्कि हर जाति के लोग कर रहे हैं, जो नीली टोपी वाली नफरती भीम आर्मी गैंग और वैचारिक जहर से तंग आ चुके हैं। बीजेपी को लगता था कि वे हमेशा की तरह हिंदू चूरन चटाकर सवर्णों को मूर्ख बना लेंगे, लेकिन इस बार जनता ने उनके दांव को उल्टा कर दिया।
मुसलमान वोट देते नहीं, "नीले कबूतर" समर्थन देते नहीं, और अब सवर्ण, जो बीजेपी की सरकार बनाते थे, उन्हें ही मालवीय "जातिवादी" कहकर ठेस पहुंचा रहे हैं। अनिल मिश्रा तार्किक बातें करते हैं, जो अपीलमेंट के खिलाफ हैं, और यही वजह है कि विचारधारा से चलने वाले उनका साथ दे रहे हैं, न कि आइटी सेल के प्यादे। बीजेपी का ये दांव फेल हो गया। मालवीय के एक ट्वीट ने सवर्ण हिंदुओं और बाकी पक्के वोटरों को पार्टी से दूर कर दिया। अब लोग तेजी से बीजेपी से किनारा कर रहे हैं, क्योंकि जनता को सच चाहिए, न कि नफरत भरा प्रोपेगेंडा। मिश्रा का साथ हर वो शख्स दे रहा है, जो नफरत और जातिवादी सियासत से ऊब चुका है।

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