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Where the divine energy of Shiva and Shakti unites, the whole universe shines with eternal balance. ✨
In the sacred glow of Ardhanarishvara, strength and compassion become one divine power. 🌟

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ब्रह्मकुमारी आश्रम की पूर्वी उप्र एवं पश्चिम नेपाल जोन की निदेशिका, आध्यात्मिक विदुषी, बाल ब्रह्मचारिणी, परम श्रद्धेया राजयोगिनी ब्र. कु. सुरेन्द्र दीदी जी का दुःखद निधन हो गया।
बाबा विश्वनाथ जी पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान देने की कृपा करें।
उनकी अंतिम यात्रा में सम्मिलित होकर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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ब्रह्मकुमारी आश्रम की पूर्वी उप्र एवं पश्चिम नेपाल जोन की निदेशिका, आध्यात्मिक विदुषी, बाल ब्रह्मचारिणी, परम श्रद्धेया राजयोगिनी ब्र. कु. सुरेन्द्र दीदी जी का दुःखद निधन हो गया।
बाबा विश्वनाथ जी पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान देने की कृपा करें।
उनकी अंतिम यात्रा में सम्मिलित होकर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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ब्रह्मकुमारी आश्रम की पूर्वी उप्र एवं पश्चिम नेपाल जोन की निदेशिका, आध्यात्मिक विदुषी, बाल ब्रह्मचारिणी, परम श्रद्धेया राजयोगिनी ब्र. कु. सुरेन्द्र दीदी जी का दुःखद निधन हो गया।
बाबा विश्वनाथ जी पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान देने की कृपा करें।
उनकी अंतिम यात्रा में सम्मिलित होकर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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छत से फेंका गया गुब्बारा… और चली गई एक जान!

होली के दिन एक 11 साल की बच्ची ने अपने घर की छत से पानी से भरा गुब्बारा नीचे फेंका। गुब्बारा सड़क पर फूटा और उसके छींटे पास से गुजर रही मुस्लिम महिला पर पड़ गए। इस बात पर बहस हुई, लेकिन बताया जा रहा है कि बच्ची के परिवार ने तुरंत माफी भी मांग ली थी। उस समय लगा कि मामला खत्म हो गया।

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हम गंवार हैं…??
जिस सनातन संस्कृति ने हजारों वर्षों से मातृशक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया, उसे आज कोई यह सिखाने चला है कि स्त्रियों का सम्मान कैसे किया जाए?
हमारे वेद, उपनिषद, पुराण और रामायण, महाभारत जैसे महाग्रंथ स्त्री-सम्मान और उनके ज्ञान, त्याग तथा पराक्रम के उदाहरणों से भरे पड़े हैं। गार्गी वाचक्नवी, मैत्रेयी जैसी विदुषी स्त्रियों ने वेदांत की गूढ़ चर्चाओं में ऋषियों को भी चुनौती दी।
हमारी परंपरा में 27 नक्षत्रों में से 19 के नाम स्त्रियों के हैं—चित्रा, स्वाती, अनुराधा, विशाखा, ज्येष्ठा, धनिष्ठा, रेवती, भरणी, कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, अश्लेषा, फाल्गुनी, हस्त आदि।
हमारे यहाँ माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, माता काली, माता गायत्री, चौंसठ योगिनी और षोडश मातृकाओं की पूजा होती है। हमारे देव युग्मों में भी स्त्री का नाम पहले आता है जैसे लक्ष्मी-नारायण, उमा-महेश्वर, सीता–राम, राधा–कृष्ण।
हम धरती माँ, गौ माता और प्रकृति की पूजा करते हैं। गंगा नदी, यमुना नदी, सरस्वती नदी, नर्मदा नदी, कावेरी नदी इन सब नदियों को माँ कहकर पूजते हैं।
इतिहास में भी हमारी वीरांगनाओं और महारानियों ने अद्भुत साहस और नेतृत्व का परिचय दिया जैसे रानी लक्ष्मीबाई, महारानी अहिल्याबाई होलकर, रानी दुर्गावती, किट्टूर रानी चेनम्मा, महारानी ताराबाई जैसी असंख्य मातृशक्तियों ने धर्म, राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया।
और हमें बताया जाता है कि लगभग 50 वर्ष पहले संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाना सिखाया, ताकि महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता आए!
सनातन परंपरा में स्त्री का सम्मान किसी एक दिन का विषय नहीं है।
हमारे यहाँ प्रत्येक दिन मातृशक्ति का है, उनके साथ है, उनके लिए है और उन्हीं को समर्पित है।
इसलिए केवल इसलिए कि विदेशों में कहा जा रहा है, हम दिखावे की होड़ में एक दिन का सम्मान करने नहीं दौड़ते।
जो संस्कृति सहस्राब्दियों से “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:” का आदर्श जीती आई है, उसे स्त्री-सम्मान सिखाने का प्रयास वास्तव में बौद्धिक शून्यता ही है।
#जय_दुर्गे 🙏
#जय_श्रीराम 🚩

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