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जब दुनिया brand, style और status देखती है,
एक पिता ने यादों को पहन लिया।

5 साल की बेटी ने खेल-खेल में काग़ज़ की जो टाई बनाई थी,
आज उसी टाई को पहनकर पापा
उसकी ज़िंदगी के सबसे बड़े दिन में खड़े थे।

👉 रिश्ते महंगे नहीं होते,
👉 सच्चे होते हैं।

ऐसा प्यार हर बेटी की किस्मत में हो… ❤️

#fatherslove
#emotionalstory
#purebond
#familylove

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रदोई, उत्तर प्रदेश

हरदोई जिले के एक सरकारी स्कूल से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल के एक शिक्षक की कथित करतूत से छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश फैल गया। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

बताया जा रहा है कि स्कूल में हुई इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने भी संज्ञान लिया है। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच जारी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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₹35 का दूध, ₹37 में क्यों?
जब 500 ग्राम Amul दूध की तय कीमत ₹35 है, तो ₹37 वसूलना किस नियम के तहत है?
“सिर्फ 2 रुपये ही तो हैं” —
लेकिन सोचिए, रोज़ हजारों पैकेट बिकें तो ये 2 रुपये कितनी बड़ी कमाई बन जाते हैं।
यह मुद्दा सिर्फ 2 रुपये का नहीं,
ईमानदारी और उपभोक्ता अधिकार का है।
फरीदाबाद की मंडी में अगर MRP से ज्यादा वसूली हो रही है, तो प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
जागरूक रहें, सवाल पूछें, और सही कीमत ही दें।

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मैं एक आम नागरिक हूँ।
मैंने सिर्फ इतना कहा था —
सिर्फ चालान काटने से
सड़कें सुरक्षित नहीं हो जातीं।
अगर हेलमेट जरूरी है,
तो अच्छी सड़कें भी जरूरी हैं।
अगर नियम लागू होते हैं,
तो सब पर बराबर होने चाहिए।
मैंने किसी का अपमान नहीं किया,
बस सवाल पूछा।
लेकिन कुछ ही मिनटों में
मुझे उठाकर ले जाया गया।
क्या लोकतंत्र में
सवाल पूछना गलत है?
सुरक्षा सिर्फ जुर्माने से नहीं,
व्यवस्था सुधारने से आती है।
आप क्या सोचते हैं —
सिस्टम सुधारना जरूरी है या
सिर्फ नियम लागू करना?

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मैं एक आम नागरिक हूँ।
मैंने सिर्फ इतना कहा था —
सिर्फ चालान काटने से
सड़कें सुरक्षित नहीं हो जातीं।
अगर हेलमेट जरूरी है,
तो अच्छी सड़कें भी जरूरी हैं।
अगर नियम लागू होते हैं,
तो सब पर बराबर होने चाहिए।
मैंने किसी का अपमान नहीं किया,
बस सवाल पूछा।
लेकिन कुछ ही मिनटों में
मुझे उठाकर ले जाया गया।
क्या लोकतंत्र में
सवाल पूछना गलत है?
सुरक्षा सिर्फ जुर्माने से नहीं,
व्यवस्था सुधारने से आती है।
आप क्या सोचते हैं —
सिस्टम सुधारना जरूरी है या
सिर्फ नियम लागू करना?

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मोदी है तो मुमकिन है!
ये जुमला फिर कल मेरठ मे पूर्ण चरितार्थ हुआ और वायरल हो रहा, बात ये है भइया कि कल महामानव मेरठ मे मेट्रो का उदघाटन करने गए और रविवार होने के बावजूद स्कूल के बच्चे ट्रेन मे आ गए l
मतलब हर जगह लम्पट बाजी, धोखेबाजी ही करते है क्या ये, ज़ब Sunday है तो स्कूल ड्रेस मे. बच्चे कैसे आ गए, यदि बच्चे आये तो ये बनावटी फोटो है केवल दिखावा के लिए l

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नाबालिग बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर सैन समाज ने सौंपा ज्ञापन।#k2snews #news

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फोटो में दिख रहे व्यक्ति का नाम रवि साहू हैं। ओबीसी समाज से आते हैं इनको और इनकी गर्भवती पत्नी कों मारा पीटा गया इनकी पत्नी के साथ छेड़छाड़ कि गयीं दलित समाज के द्वारा जब इन्होंने विरोध किया तों SC-ST एक्ट का मुकदमा दर्ज करवा दिया गया उसके बाद इनसे 4 लाख कि डिमांड की गई जिसकी इनके पास रिकॉर्डिंग भी हैं कल इनका दर्द देख जब जंतर मंतर पर हुए सवर्ण आर्मी के आंदोलन में रोना आ गया।

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फोटो में दिख रहे व्यक्ति का नाम रवि साहू हैं। ओबीसी समाज से आते हैं इनको और इनकी गर्भवती पत्नी कों मारा पीटा गया इनकी पत्नी के साथ छेड़छाड़ कि गयीं दलित समाज के द्वारा जब इन्होंने विरोध किया तों SC-ST एक्ट का मुकदमा दर्ज करवा दिया गया उसके बाद इनसे 4 लाख कि डिमांड की गई जिसकी इनके पास रिकॉर्डिंग भी हैं कल इनका दर्द देख जब जंतर मंतर पर हुए सवर्ण आर्मी के आंदोलन में रोना आ गया।

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फोटो में दिख रहे व्यक्ति का नाम रवि साहू हैं। ओबीसी समाज से आते हैं इनको और इनकी गर्भवती पत्नी कों मारा पीटा गया इनकी पत्नी के साथ छेड़छाड़ कि गयीं दलित समाज के द्वारा जब इन्होंने विरोध किया तों SC-ST एक्ट का मुकदमा दर्ज करवा दिया गया उसके बाद इनसे 4 लाख कि डिमांड की गई जिसकी इनके पास रिकॉर्डिंग भी हैं कल इनका दर्द देख जब जंतर मंतर पर हुए सवर्ण आर्मी के आंदोलन में रोना आ गया।

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