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A fierce fire broke out in a dying company in Bhiwandi, Maharashtra. Several firefighters reached on the scene after the fire and the relief work continues. The fire was so loud that smoke spread in the surrounding area.

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सोच बदलो, देश बदलेगा 🥳

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जय बीम जय मूलनिवशी 😂😂

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पैसा हिंदुओं का, शिक्षा मुसलमानों को...😳🤔

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लेकिन जब कांग्रेसी देश के PM को गंदी गंदी गालिया देते है तो इनको मजा आता है।

Same on you 😏😏😏

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लेकिन जब कांग्रेसी देश के PM को गंदी गंदी गालिया देते है तो इनको मजा आता है।

Same on you 😏😏😏

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लेकिन जब कांग्रेसी देश के PM को गंदी गंदी गालिया देते है तो इनको मजा आता है।

Same on you 😏😏😏

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Can you reply "Hare Krishna"? 🦚💝

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🔥🔥 बिल्कुल सही किया उस पिता ने! 👏
आज के जमाने में जब "कन्यादान" को एक रिवाज़ की तरह निभाया जाता है, उस पिता ने उसे सोच में बदल दिया ❤️
💬 उस एक लाइन में इतना प्यार, सम्मान और जागरूकता थी —
> "मेरी बेटी कोई वस्तु नहीं, जिसे मैं दान करूँ" 🙌
💥 ये नहीं परंपरा तोड़ना है, ये है सोच बदलना!
क्योंकि शादी दो परिवारों का साथ है, ना कि किसी “दान” का लेनदेन।
✨ ऐसे पिता ही असली हीरो हैं — जो अपनी बेटी को ‘जिम्मेदारी’ नहीं, ‘गौरव’ मानते हैं 💖

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सरदार वल्लभभाई पटेल, जिन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है, भारत की स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र-निर्माण की सबसे निर्णायक हस्तियों में से एक थे। देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री के रूप में, पटेल की दूरदृष्टि और दृढ़ निश्चय ने आज़ादी के बाद 560 से अधिक रियासतों को एकजुट कर एक राष्ट्र बनाया — यह उपलब्धि एक सशक्त और एकीकृत भारत की नींव बन गई।
अपने विशाल योगदान के बावजूद, सरदार पटेल का नाम चार दशकों से अधिक समय तक भारत रत्न प्राप्तकर्ताओं की सूची में नहीं था। जबकि कई राष्ट्रीय नेताओं — जैसे जवाहरलाल नेहरू (1955), इंदिरा गांधी (1971) और राजीव गांधी (1991) — को यह सम्मान बहुत पहले मिल गया था, पटेल को यह मान्यता उनके निधन के 41 वर्ष बाद प्राप्त हुई।
इस लंबे विलंब को अक्सर राजनीतिक उपेक्षा के रूप में देखा गया है। कई इतिहासकारों का मानना है कि पटेल की विराट विरासत को कांग्रेस नेतृत्व की वैचारिक मतभेदों और नेहरू-गांधी परिवार के राजनीतिक वर्चस्व के कारण लंबे समय तक पीछे रखा गया। अपने समय के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक होने के बावजूद, उनके योगदान को दशकों तक आधिकारिक रूप से उतनी प्रमुखता नहीं दी गई।

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