31 w - Translate

#बिड़ला_मंदिर के शिलान्यास के लिए संयुक्त भारत के 360 राजा आए पर मंदिर का शिलान्यास #जाट महाराजा उदय भानु सिंह राणा से ही क्यों करवाया गया
धौलपुर के #जाट महाराजा कर्नल #महाराणा उदय भानु सिंह जी की जयंती पर उनको शत शत नमन!
इनका जन्म 12 फरवरी 1893 को बमरौलिया क्षत्रिय जाट शासक महाराणा निहाल सिंहजी के महल में महारानी हरबंस कौरजी (शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंहजी की पडपौत्री) की कौख से हुआ था !, महाराणा निहाल सिंह महाराजा सिंघन देव राणा (गोहद रियासत के संस्थापक 1505ई.) के प्रत्यक्ष वंश थे !
महाराणा उदय भानु सिंह महाराणा रामसिंहजी के छोटे भ्राता थे। 1911 ई. में ज्येष्ठ भ्राता के स्वर्गवास होने पर गद्दी पर बैठे, सन् 1913 ई. में राज्यधिकार प्राप्त हुए। महाराणा उदय भानु सिंह केडिट कोर में भी शिक्षा पाई थी।वह अपनी प्रजा वे गरीब जनता के प्रति बड़े ही संवेदनशील रहा करते थे। वह समय-समय पर उनकी सहायता व उनको कार्य प्रदान किया करते थे। व अपना अधिकतम समय जनता को दिया करते थे ! महाराणा अखिल भारतीय क्षत्रिय जाट महासभा के संस्थापकों में से एक थे जिसका प्रथम सम्मेलन मेरठ में हुआ था !

image
31 w - Translate

#बिड़ला_मंदिर के शिलान्यास के लिए संयुक्त भारत के 360 राजा आए पर मंदिर का शिलान्यास #जाट महाराजा उदय भानु सिंह राणा से ही क्यों करवाया गया
धौलपुर के #जाट महाराजा कर्नल #महाराणा उदय भानु सिंह जी की जयंती पर उनको शत शत नमन!
इनका जन्म 12 फरवरी 1893 को बमरौलिया क्षत्रिय जाट शासक महाराणा निहाल सिंहजी के महल में महारानी हरबंस कौरजी (शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंहजी की पडपौत्री) की कौख से हुआ था !, महाराणा निहाल सिंह महाराजा सिंघन देव राणा (गोहद रियासत के संस्थापक 1505ई.) के प्रत्यक्ष वंश थे !
महाराणा उदय भानु सिंह महाराणा रामसिंहजी के छोटे भ्राता थे। 1911 ई. में ज्येष्ठ भ्राता के स्वर्गवास होने पर गद्दी पर बैठे, सन् 1913 ई. में राज्यधिकार प्राप्त हुए। महाराणा उदय भानु सिंह केडिट कोर में भी शिक्षा पाई थी।वह अपनी प्रजा वे गरीब जनता के प्रति बड़े ही संवेदनशील रहा करते थे। वह समय-समय पर उनकी सहायता व उनको कार्य प्रदान किया करते थे। व अपना अधिकतम समय जनता को दिया करते थे ! महाराणा अखिल भारतीय क्षत्रिय जाट महासभा के संस्थापकों में से एक थे जिसका प्रथम सम्मेलन मेरठ में हुआ था !

imageimage
31 w - Translate

चंडीगढ़ में पंजाब बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व पदाधिकारियों के साथ सीएम मान ने की बैठक
एसोसिएशन के नेताओं की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करेंगे: सीएम मान
#cmbhagwantmann #punjab #barassociation #meeting

image
31 w - Translate

चंडीगढ़ में पंजाब बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व पदाधिकारियों के साथ सीएम मान ने की बैठक
एसोसिएशन के नेताओं की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करेंगे: सीएम मान
#cmbhagwantmann #punjab #barassociation #meeting

image
31 w - Translate

चंडीगढ़ में पंजाब बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व पदाधिकारियों के साथ सीएम मान ने की बैठक
एसोसिएशन के नेताओं की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करेंगे: सीएम मान
#cmbhagwantmann #punjab #barassociation #meeting

image
31 w - Translate

चंडीगढ़ में पंजाब बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व पदाधिकारियों के साथ सीएम मान ने की बैठक
एसोसिएशन के नेताओं की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करेंगे: सीएम मान
#cmbhagwantmann #punjab #barassociation #meeting

image
image
image

image
31 w - Translate

भारत की पारंपरिक युद्ध कलाएं

image
31 w - Translate

"किरदार कोई भी हो, कलाकार उसे जी ही लेता है—चाहे वो मंच की चकाचौंध हो या तिहाड़ जेल की काल कोठरी!"
राजपाल यादव के लिए बीता गुरुवार उम्मीदों और मायूसी का मिला-जुला दिन रहा। जहाँ करोड़ों फैन्स उनके बाहर आने की दुआ कर रहे थे, वहीं कानून की चौखट पर उन्हें एक बार फिर राहत नहीं मिली। दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि अब राजपाल भाई को आने वाले सोमवार तक सलाखों के पीछे ही रहना होगा।
अदालत की दहलीज़ पर इस बार दलीलें नहीं, बल्कि टूटे हुए वादे भारी पड़ गए। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का रुख तब बेहद सख्त हो गया जब उन्होंने याद दिलाया कि ये पहली बार नहीं है, बल्कि इससे पहले भी दर्जनों बार भरोसे को तोड़ा गया है। कानून की नज़र में 'शादी' या 'पारिवारिक मजबूरी' से ज़्यादा अहमियत उस वचन की थी जिसे राजपाल समय पर पूरा नहीं कर सके। अब उनके वकील के पास सोमवार तक का ही वक्त है जब उन्हें कागजों पर कोई पुख्ता समाधान पेश करना होगा।
लेकिन सलाखों के पीछे की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। महलों की सुख-सुविधाओं से दूर, जेल नंबर-2 की उन चारदीवारों में राजपाल भाई ने खुद को एक आम कैदी की तरह ढाल लिया है। वहाँ कोई VIP ट्रीटमेंट नहीं है, बस वही नियम हैं जो सबके लिए हैं—चाहे वो सुबह की हाज़िरी हो या साफ़-सफाई। शुरुआती खामोशी के बाद, अब उन्होंने उस अंधेरे में भी मुस्कुराहटें ढूंढ ली हैं। वे अपने साथी कैदियों को हंसा रहे हैं, अपनी फिल्मों के किस्से सुना रहे हैं और उनके बीच एक 'सितारा' बनकर नहीं, बल्कि एक 'साथी' बनकर रह रहे हैं। वे आज भी यही कहते हैं कि उनकी नीयत कभी बेईमानी की नहीं थी, बस वक्त के थपेड़ों ने उन्हें यहाँ ला खड़ा किया है।

image
31 w - Translate

बाबा राम रहीम 15वीं पैरोल के दौरान लाखों लोगों का नशा छुड़ा चुके है
#babaramrahim #derasachasauda #breakingnews #latestnews

image