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“Warm wishes to you and your family on the auspicious occasion of Makar Sankranti.
May this festival bring happiness, prosperity, and success in your life.”

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सूरज की किरणें जीवन में उजाला लाएं,. तिल-गुड़ की मिठास से रिश्ते और गहराएं। पतंगों की तरह सपने ऊंचाइयां छूएं, · Happy Makar Sankranti

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Mpil India की ओर से मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं

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Mpil India की ओर से मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं

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बांग्लादेश में हिंदू ऑटो चालक की चाकू मारकर हत्या

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हम सब लोहड़ी की बधाई देते हैं और आग जलाकर खुशियां मनाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह त्यौहार असल में एक राजपूत शेर, दुल्ला भट्टी की याद में मनाया जाता है। अगर वो न होते, तो शायद आज लोहड़ी का स्वरूप कुछ और ही होता।
आपने यह लोकगीत तो जरूर सुना होगा:
🎶 "सुन्दर मुन्दरीये तेरा कौन विचारा हो, दुल्ला भट्टी वाला हो..." 🎶
आज जानिए इस गीत और त्यौहार के पीछे का असली इतिहास:
🛑 कौन थे दुल्ला भट्टी?
दुल्ला भट्टी का असली नाम राय अब्दुल्ला खान भट्टी था। वे एक मुस्लिम भट्टी राजपूत थे, जिनका जन्म 1547 में पाकिस्तान के पिंडी भट्टियाँ गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम फरीद खान भट्टी और दादा का नाम साँदल खान भट्टी था।
⚔️ मुगलों से 3 पीढ़ियों का बैर:
यह दुश्मनी तब शुरू हुई जब दुल्ला भट्टी के दादा और पिता ने मुगल बादशाह हुमायूँ को लगान देने से मना कर दिया, जिसके कारण हुमायूँ ने उन्हें मरवा दिया। जब दुल्ला भट्टी बड़े हुए और माँ लद्धी ने उन्हें सच बताया, तो उन्होंने कसम खाई कि एक असली राजपूत होने के नाते वे मुगलों से बदला लेंगे।
🔥 अकबर की नाक में दम:
दुल्ला भट्टी ने ऐसी बगावत छेड़ी कि बादशाह अकबर को डर के मारे अपनी राजधानी दिल्ली से लाहौर शिफ्ट करनी पड़ी। एक किस्सा मशहूर है कि जब अकबर भेष बदलकर उनसे लड़ने आया, तो दुल्ला भट्टी ने उसे पछाड़ दिया, लेकिन सैनिक समझकर जीवनदान दे दिया—यह थी उनकी राजपूती दरियादिली!
🔥 लोहड़ी और सुन्दरी-मुन्दरी की कहानी:
यह त्यौहार उस घटना की याद दिलाता है जब एक गरीब ब्राह्मण ने दुल्ला भट्टी से मदद मांगी। मुगलों की बुरी नजर उस ब्राह्मण की दो बेटियों, सुन्दरी और मुन्दरी पर थी।
दुल्ला भट्टी ने अपनी राजपूती जुबान दी और जंगल में रात के अंधेरे में आग जलाकर उन दोनों बहनों का कन्यादान किया। शगुन के तौर पर देने के लिए पैसे नहीं थे, तो उन्होंने शक्कर (चीनी) देकर रस्म पूरी की।
✅ आज का त्यौहार:
आज जो हम लोहड़ी पर आग जलाते हैं और उसमें तिल-शक्कर डालते हैं, यह उसी ऐतिहासिक घटना और दुल्ला भट्टी के न्याय की याद है। अकबर ने बाद में उन्हें धोखे से पकड़कर फांसी दे दी, लेकिन वह पंजाब, हिमाचल और जम्मू के लोगों के दिलों में अमर हो गए।
🙏 नमन है ऐसे वीर राजपूत योद्धा को जिन्होंने बहन-बेटियों की रक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
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नेता वोट के लिए गरीब के घर जाए सब खुश हो जाते लेकिन आदिवासी समुदाय की रितिका तिर्की वंदे भारत चलाने वाली पहल असिस्टेंट लोको पायलट बनी पर किसी ने भी बेटी को बधाई नहीं दी

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“मिट गए वो, जो सनातन को मिटाने के सपने देखते थे"
धामी अडिग है, सनातन अटल है..!🚩🚩

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राजा खेमकरण सोगरिया जी की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में विशाल रैली ....
#rajakhemkaransogariyaji

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