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युवाओं ने ई-स्पोर्ट्स एरीना चैम्पियनशिप में दिखाया कौशल
स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी ने किया आयोजन
कांपटीटिव गेमिंग और डिजिटल कौशल विकास को मिली नई दिशा
खेलपथ संवाद
भोपाल। स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी भोपाल के स्कूल ऑफ एनीमेशन, मल्टीमीडिया, गेमिंग एवं वीएफएक्स द्वारा भव्य ई-स्पोर्ट्स एरीना चैम्पियनशिप का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में लोकप्रिय गेम्स बीजीएमआई और फ्री फायर शामिल रहे। आयोजन को लेकर शहर भर के विद्यार्थियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला, जिससे कांपटीटिव गेमिंग और डिजिटल कौशल विकास को नई दिशा मिली।

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माननीय नरोत्तम मिश्रा जी ने सवर्ण समाज को संकेत देते हुये इशारो इशारो में अपने समाज की लड़ाई को लड़ने के लिये सवर्ण समाज को अच्छा संकेत दिया है यह कहकर

सबको लड़ने ही पड़े अपने अपने युद्ध
चाहे राजा राम चंद्र हों चाहे महात्मा बुद्ध
समझदार केलिये इशारा काफी है सम्पूर्ण सवर्ण समाज अभी साथ है साथियों यह उचित समय है की हमें निरंतर जातिगत आरक्षण के खात्मे की लड़ाई को जारी रखना है
बिना रुके बिना थके बिना झुके हमारा संकल्प जातिगत आरक्षण मुक्त भारत ही है

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देश का दुर्भाग्य देखो मीडिया में इतनी हिम्मत नहीं की संसद में एक दरिंदे से सिर्फ इतना सवाल कर ले की 6 महीने से देश की बेटी रोहिणी आरोप लगा रही है उस पर क्या कहेंगे !!

देश की आधी आबादी का नेतृत्व करने वाली सभी महिला सांसद भी चुप है !!

क्योंकि मीडिया भी जानती है बीजेपी का आदमी है दलितों को मूर्ख बनाने के लिए इसको चमकाना ज़रूरी है तो रोज़ इसके फोटो डाल देती है !!

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सवर्णों के द्वारा लगातार 2 बार अगर सारे देश के #सवर्णो ने मिलकर चुनाव बहिष्कार किया, फिर उनकी जीत को कोई रोक नहीं सकता..
सरकार को भी अपने मुख्य वोटर की परवाह करते हुए अन्यायी क़ानून समाप्त करने की और सोचना ही होगा - पर सवर्ण समाज अभी सो रहा है शायद हम जैसे लोग 30-40 साल और महेनत करे तब जाकर कुछ होगा
#आरक्षण_बिरोधी_मंच आरक्षण विरोधी मंच #followers_everyone_highlaight आरक्षण विरोधी क्रान्तिवीर महेन्द्र मणि त्रिपाठी Sunil Mishra Suraj

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सवर्णों के द्वारा लगातार 2 बार अगर सारे देश के #सवर्णो ने मिलकर चुनाव बहिष्कार किया, फिर उनकी जीत को कोई रोक नहीं सकता..
सरकार को भी अपने मुख्य वोटर की परवाह करते हुए अन्यायी क़ानून समाप्त करने की और सोचना ही होगा - पर सवर्ण समाज अभी सो रहा है शायद हम जैसे लोग 30-40 साल और महेनत करे तब जाकर कुछ होगा
#आरक्षण_बिरोधी_मंच आरक्षण विरोधी मंच #followers_everyone_highlaight आरक्षण विरोधी क्रान्तिवीर महेन्द्र मणि त्रिपाठी Sunil Mishra Suraj

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वो सिरफिरा अधिकारी संन्तोष भाजपा का रिश्तेदार लगता है क्या ?
रिश्तेदार नहीं मोहन यादव भाजपा सवर्णों के खिलाफ भोकने के लिए पिल्ला पाल रखी है
ओवैसी जी को सादर आभार
#आरक्षण_बिरोधी_मंच आरक्षण विरोधी मंच #followers_everyone_highlaight Sunil Mishra राष्ट्रवादी पार्टी ऑफ इंडिया भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ #highlights2025 #जयति_सवर्ण_समाज

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🔥🔥 दिल की बात केह दी राजा भईया ने - हर समाज का नेता अपने हक अधिकारों के लिए अपने समाज का मुद्दा उठाता है लेकिन सवर्ण समाज के नेता जब अपने समाज की मुद्दे की बात आती है तो मुंह में दही जम जाता है मैं सिर्फ इलेक्शन के समय अपना समाज याद आता है
#आरक्षण_बिरोधी_मंच आरक्षण विरोधी मंच
#highlight_followers 🔥

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आतंक पर शरारत भरी बातें

यह अत्यंत शर्मनाक है कि हमारे यहाँ ऐसे नेता है, जो आतंकियों के हमले को राजनीतिक विरोधियों पर थोपना चाहते हैं

जो भारतीय स्वयं को एक पंथनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक
जीवन शैली का समर्थक मानते हैं, उन्हें उन सभी नेताओं से
सावधान रहना चाहिए, जो लाल किले के निकट हुए आतंकी हमले की स्पष्ट एवं बिना किसी हिचकिचाहट के निंदा करने
से इन्कार कर रहे हैं और मुसलमानों के बीच तथाकथित "असंतोष" को लेकर शरारत भरे तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।

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7 X 11 साईज़ की कोठरी... सीमेंट की पक्की जमीन... ठण्ड हो या गर्मी उसी पर सोना है... इसी कोठरी के एक कोने में खुले में शौच और पेशाब करना है... गले-हाथ और पैरों में बेड़ियाँ लगी रहेंगी... उसी स्थिति में, जो भी और जैसा भी मिले, वैसा भोजन करना है... फिर इसी स्थिति में बैल की तरह कोल्हू में लगकर तेल निकालना पड़ता था...
पूरी जेल में बेहद दुबले-पतले सावरकर एकमात्र ऐसे कैदी थे, जिनके गले में अंग्रेजों ने तांबे की पट्टी लटका रखी थी, जिस पर "D" लिखा हुआ था... D यानी Dangerous... वही एकमात्र कैदी थे, जिसे अंग्रेज अपने लिए "डेंजरस" मानते थे... और यह चक्र चला पूरे 11 साल... जी हाँ!!! पूरे ग्यारह वर्ष तक देश के लिए जेल मे कोल्हू के बैल बने रहे... ..
… ऐसे ही नहीं कोई वीर नहीं बनता …
दूसरी तरफ अंग्रेजो के पिठु दलाल थे जिनको अंग्रेज मलाई खिलाते थे और भारत से जाते समय अपने चमचो को चमचा गिरी का ईनाम भी दे गए....
इस पोस्ट पर आम जन का क्या विचार है कंमेंट् बॉक्स मे पढ़ ले... 🙏

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बेंगलुरु के 22 वर्षीय अंशुल उथैया ने हाल ही में अपनी फुल-टाइम नौकरी को 'बोरिंग' बताकर छोड़ दिया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। अब उन्होंने एक नया अपडेट साझा करते हुए माना है कि उन्हें अपने इस फैसले पर भारी पछतावा है।

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