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आज प्रातःकाल मेरे अभिभावक, मार्गदर्शक Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के क्षेत्र प्रचारक मा. श्री अनिल जी भाई साहब, माँ का कुशल-क्षेम पूछने आवास पधारे। मा. प्रान्त प्रचारक श्री रमेश जी भाई साहब व प्रान्त सम्पर्क प्रमुख श्री दीनदयाल जी भाई साहब भी साथ थे।
उनके साथ संघ के आरम्भिक दिनों में बतौर प्रचारक, पूज्य पिताश्री स्व. हरीश जी द्वारा किये गए कार्यों और कठिनाइयों पर लंबी चर्चा हुई। उन्होंने सिद्धार्थनगर, बस्ती व गोरखपुर के कई प्रेरक प्रसंग सुनाए। पूज्य पिताजी का संपूर्ण जीवन हम सभी स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणादायक है।
श्रीमान अनिल जी भाई साहब से हुई प्रत्येक भेंट, अत्यन्त प्रेरणादायी व पथ प्रदर्शक होती है।

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आज प्रातःकाल मेरे अभिभावक, मार्गदर्शक Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के क्षेत्र प्रचारक मा. श्री अनिल जी भाई साहब, माँ का कुशल-क्षेम पूछने आवास पधारे। मा. प्रान्त प्रचारक श्री रमेश जी भाई साहब व प्रान्त सम्पर्क प्रमुख श्री दीनदयाल जी भाई साहब भी साथ थे।
उनके साथ संघ के आरम्भिक दिनों में बतौर प्रचारक, पूज्य पिताश्री स्व. हरीश जी द्वारा किये गए कार्यों और कठिनाइयों पर लंबी चर्चा हुई। उन्होंने सिद्धार्थनगर, बस्ती व गोरखपुर के कई प्रेरक प्रसंग सुनाए। पूज्य पिताजी का संपूर्ण जीवन हम सभी स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणादायक है।
श्रीमान अनिल जी भाई साहब से हुई प्रत्येक भेंट, अत्यन्त प्रेरणादायी व पथ प्रदर्शक होती है।

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आज प्रातःकाल मेरे अभिभावक, मार्गदर्शक Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के क्षेत्र प्रचारक मा. श्री अनिल जी भाई साहब, माँ का कुशल-क्षेम पूछने आवास पधारे। मा. प्रान्त प्रचारक श्री रमेश जी भाई साहब व प्रान्त सम्पर्क प्रमुख श्री दीनदयाल जी भाई साहब भी साथ थे।
उनके साथ संघ के आरम्भिक दिनों में बतौर प्रचारक, पूज्य पिताश्री स्व. हरीश जी द्वारा किये गए कार्यों और कठिनाइयों पर लंबी चर्चा हुई। उन्होंने सिद्धार्थनगर, बस्ती व गोरखपुर के कई प्रेरक प्रसंग सुनाए। पूज्य पिताजी का संपूर्ण जीवन हम सभी स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणादायक है।
श्रीमान अनिल जी भाई साहब से हुई प्रत्येक भेंट, अत्यन्त प्रेरणादायी व पथ प्रदर्शक होती है।

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आज प्रातःकाल मेरे अभिभावक, मार्गदर्शक Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के क्षेत्र प्रचारक मा. श्री अनिल जी भाई साहब, माँ का कुशल-क्षेम पूछने आवास पधारे। मा. प्रान्त प्रचारक श्री रमेश जी भाई साहब व प्रान्त सम्पर्क प्रमुख श्री दीनदयाल जी भाई साहब भी साथ थे।
उनके साथ संघ के आरम्भिक दिनों में बतौर प्रचारक, पूज्य पिताश्री स्व. हरीश जी द्वारा किये गए कार्यों और कठिनाइयों पर लंबी चर्चा हुई। उन्होंने सिद्धार्थनगर, बस्ती व गोरखपुर के कई प्रेरक प्रसंग सुनाए। पूज्य पिताजी का संपूर्ण जीवन हम सभी स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणादायक है।
श्रीमान अनिल जी भाई साहब से हुई प्रत्येक भेंट, अत्यन्त प्रेरणादायी व पथ प्रदर्शक होती है।

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यही है सनातन का मर्म,
यही है भारत का धर्म,
यही है मनुष्यता का कर्म...
जो आये थे श्री रामचन्द्र जी के काम,
सदैव करेंगे उनका सम्मान!

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यही है सनातन का मर्म,
यही है भारत का धर्म,
यही है मनुष्यता का कर्म...
जो आये थे श्री रामचन्द्र जी के काम,
सदैव करेंगे उनका सम्मान!

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यही है सनातन का मर्म,
यही है भारत का धर्म,
यही है मनुष्यता का कर्म...
जो आये थे श्री रामचन्द्र जी के काम,
सदैव करेंगे उनका सम्मान!

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यही है सनातन का मर्म,
यही है भारत का धर्म,
यही है मनुष्यता का कर्म...
जो आये थे श्री रामचन्द्र जी के काम,
सदैव करेंगे उनका सम्मान!

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