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बेंगलुरु में 2022 में एक शादी होती है दुल्हन सॉफ्टवेयर इंजीनियर नाम शिल्पा, दूल्हा प्रवीण, सॉफ्टवेयर इंजीनियर।
यानी पति और पत्नी दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे साथ ही साथ शादी में शिल्पा के घर वालों ने 40 से 50 लख रुपए खर्च किए बड़े ही धूमधाम से शादी हुई लड़के को डेढ़ सौ ग्राम सोना भी दिया गया।
अब अगर सोचा जाए तो परिवार में पैसे की कमी नहीं थी, सब कुछ अच्छा चलना चाहिए था, लेकिन कुछ वक्त तो सब कुछ ठीक चला प्रवीण और शिल्पा को एक बेटा भी हुआ लेकिन फिर शुरू होता है प्रताड़ना का चैप्टर।
शिल्पा अपने मायके फोन करके बताती है कि, उसकी सास और उसका पति प्रवीण दोनों उसको परेशान कर रहे हैं, प्रताड़ित कर रहे हैं सिर्फ और सिर्फ पैसे के लिए। उनके डिमांड है कि ₹500000 उन्हें चाहिए।
बात तो तब सबसे ज्यादा बिगड़ गई जब प्रवीण ने नौकरी छोड़कर पानी पुरी बेचना शुरू कर दिया।
शिल्पा का बेटा 2 साल का हो चुका था और वह अब दोबारा से गर्भवती थी इसी दौरान घर में गोद भराई का कार्यक्रम होता है इस कार्यक्रम में फिर से शिल्पा और प्रवीण के बीच में झगड़े होते हैं।
26 अगस्त को शिल्पा के मायके वालों को फोन आता है और बताया जाता है कि आपकी बेटी शिल्पा ने आत्महत्या कर ली है।
#news
#virals
#marriedlife
#dahej

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छत से फेंका गया गुब्बारा… और चली गई एक जान!
होली के दिन एक 11 साल की बच्ची ने अपने घर की छत से पानी से भरा गुब्बारा नीचे फेंका। गुब्बारा सड़क पर फूटा और उसके छींटे पास से गुजर रही मुस्लिम महिला पर पड़ गए। इस बात पर बहस हुई, लेकिन बताया जा रहा है कि बच्ची के परिवार ने तुरंत माफी भी मांग ली थी। उस समय लगा कि मामला खत्म हो गया।
लेकिन करीब आधे घंटे बाद कुछ लोग ईंट, पत्थर और लोहे की रॉड लेकर पहुंचे और लड़की के परिवार पर हमला कर दिया। इस हमले में तरुण नाम के युवक की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।
सोचने वाली बात है कि क्या एक छोटे से गुब्बारे के छींटे की सजा किसी की जान लेना हो सकती है? यह घटना कई सवाल खड़े करती है और समाज को सोचने पर मजबूर करती है कि छोटी-छोटी बातों पर हिंसा आखिर कब रुकेगी।
Disclaimer: यह पोस्ट उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और सामने आई जानकारी के आधार पर लिखी गई है। जांच जारी है, आगे तथ्य बदल सकते हैं।

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Saleem Wastik is back to conciousness!!

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आज हरियाणा के मस्तानगढ़, श्री जीवन नगर में खालसाई शूरवीरता और शस्त्र विद्या व विजय के प्रतीक पर्व 'त्रिवेणी होला महल्ला पर्व' में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
नामधारी सम्प्रदाय सदैव शांति, प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश देता आया है। समाज में सद्भावना, नैतिकता और आध्यात्मिकता को मजबूत करने में नामधारी पंथ का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
अंग्रेज़ी हुकूमत की ग़ुलामी से भारत को मुक्त कराने के लिए नामधारी समाज ने जो त्याग, बलिदान और संघर्ष किए हैं, वे भारतीय इतिहास के गौरवशाली अध्याय हैं।
मैं प्रार्थना करता हूँ कि सतगुरु जी की कृपा हम सभी पर बनी रहे और हम सभी समाज में प्रेम, शांति और सेवा के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहें।

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आज हरियाणा के मस्तानगढ़, श्री जीवन नगर में खालसाई शूरवीरता और शस्त्र विद्या व विजय के प्रतीक पर्व 'त्रिवेणी होला महल्ला पर्व' में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
नामधारी सम्प्रदाय सदैव शांति, प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश देता आया है। समाज में सद्भावना, नैतिकता और आध्यात्मिकता को मजबूत करने में नामधारी पंथ का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
अंग्रेज़ी हुकूमत की ग़ुलामी से भारत को मुक्त कराने के लिए नामधारी समाज ने जो त्याग, बलिदान और संघर्ष किए हैं, वे भारतीय इतिहास के गौरवशाली अध्याय हैं।
मैं प्रार्थना करता हूँ कि सतगुरु जी की कृपा हम सभी पर बनी रहे और हम सभी समाज में प्रेम, शांति और सेवा के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहें।

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आज हरियाणा के मस्तानगढ़, श्री जीवन नगर में खालसाई शूरवीरता और शस्त्र विद्या व विजय के प्रतीक पर्व 'त्रिवेणी होला महल्ला पर्व' में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
नामधारी सम्प्रदाय सदैव शांति, प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश देता आया है। समाज में सद्भावना, नैतिकता और आध्यात्मिकता को मजबूत करने में नामधारी पंथ का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
अंग्रेज़ी हुकूमत की ग़ुलामी से भारत को मुक्त कराने के लिए नामधारी समाज ने जो त्याग, बलिदान और संघर्ष किए हैं, वे भारतीय इतिहास के गौरवशाली अध्याय हैं।
मैं प्रार्थना करता हूँ कि सतगुरु जी की कृपा हम सभी पर बनी रहे और हम सभी समाज में प्रेम, शांति और सेवा के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहें।

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