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चंडीगढ़ के सेक्टर 38 में एक्टिवा सवार युवक की चाकू मारकर हत्या

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जैकब एंड कंपनी ने ‘गॉड ऑफ टाइम’ नामक लक्ज़री घड़ी बनाई है, जिसकी कीमत 3.24 करोड़ रुपये है। इसे दुनिया की सबसे सटीक घड़ियों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें दुनिया का सबसे तेज़ टूरबियॉन लगा है, जो सिर्फ 4 सेकेंड में घूमता है और गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से होने वाली समय की छोटी गलतियों को तुरंत सुधार देता है। इस तकनीक की वजह से घड़ी हर परिस्थिति में अधिक सटीक समय दिखाती है।

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बच्चे के हर रंग के पीछे,
एक बाप की अधूरी नींद होती है।
#fatheremotion #बापपेज
#baappage #papakapyaar #fatherlove

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अक्सर हम सुनते हैं कि माँ अपने बच्चों को पढ़ाती है, लेकिन मास्टरशेफ इंडिया सीजन 9 की यह जोड़ी एक अलग ही मिसाल है। जयपुर की पार्वती सोनी को मिलिए, जिनकी पढ़ाई शादी के बाद छूट गई थी। लेकिन उनके बेटे हिमांश ने हार नहीं मानी।
हिमांश ने न केवल अपनी माँ का हौसला बढ़ाया, बल्कि खुद उनका 'गुरु' बनकर उन्हें पढ़ाया। वीडियो कॉल पर क्लास लेना और साथ में बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करना—इस माँ-बेटे की जोड़ी ने "शादी के बाद पढ़ाई नहीं होती" जैसी रूढ़िवादी सोच को हमेशा के लिए तोड़ दिया।
आज वही पार्वती, जो कभी घर की दहलीज तक सीमित थीं, अपने बेटे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दुनिया के सबसे बड़े कुकिंग शो में अपना हुनर दिखा रही हैं। वे आज जयपुर के सिटी पैलेस में 80 पुरुषों की टीम में अकेली महिला शेफ भी हैं।
यह जीत सिर्फ एक डिग्री या कुकिंग कॉम्पिटिशन की नहीं है, यह जीत है उस विश्वास की, जो एक बेटा अपनी माँ पर करता है।
#masterchefindia #parvatisoni #himanshsoni #mothersonduo #inspiration #education #breakingstereotypes #cheflife #nevergiveup #proudson

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राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले का छोटा सा गांव भेरूसरी आज पूरे प्रदेश में एक मिसाल बन चुका है। लोग इसे अब पांच अफसर बहनों वाला गांव कहते हैं। वजह है किसान सहदेव सहारण की पांच बेटियां, जिन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा यानी RAS परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया।
सहदेव सहारण और उनकी पत्नी लक्ष्मी खुद अनपढ़ हैं। खेती के लिए बस जमीन का छोटा सा टुकड़ा था, जिसमें पैदावार भी सीमित रहती थी। कई बार बेटियों की स्कूल फीस भरना तक मुश्किल हो जाता था, लेकिन हौसला कभी नहीं टूटा। बेटियों ने भी हालात समझे और घर पर रहकर पूरी मेहनत से पढ़ाई की।
सबसे पहले 2010 में रोमा RAS अफसर बनीं। फिर 2017 में मंजू ने परीक्षा पास की। इसके बाद 2018 में अंशु और सुमन सफल रहीं और आखिरकार 2021 में ऋतु भी RAS अफसर बन गईं।
यह कहानी बताती है कि संसाधन कम हों, तब भी अगर सोच मजबूत हो तो सपने जरूर पूरे होते हैं।
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