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गुजरात के सूरत से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला शिक्षिका कथित तौर पर 13 साल के छात्र के साथ फरार हो गई। नाबालिग होने की वजह से मामले ने क़ानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर गहरी चिंता पैदा कर दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने महिला शिक्षिका को हिरासत में लिया है। पूछताछ में महिला ने यह दावा किया कि वह पाँच महीने की गर्भवती है और बच्चे का पिता वही नाबालिग छात्र है। इस दावे ने जांच को और अधिक जटिल बना दिया है।
कानून के लिहाज़ से मामला POCSO Act (Protection of Children from Sexual Offences Act) के दायरे में आता है, जहाँ नाबालिग के साथ किसी भी तरह का यौन संबंध अपराध माना जाता है और सहमति जैसी बात लागू नहीं होती।
सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच भी इस घटना को लेकर बड़ी बहस छिड़ी हुई है कि आखिर समाज किन दिशाओं में जा रहा है। कई लोगों ने शिक्षा संस्थानों में निगरानी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल पुलिस मेडिकल और फॉरेंसिक एंगल से जाँच कर रही है और परिवारों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई और कानूनी कार्रवाई का अगला चरण साफ़ होगा।

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माँ भद्रकाली मंदिर में माँ भद्रकाली जी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
माँ भद्रकाली की अनुकंपा हम सब पर बनी रहे—ऐसी कामना करता हूँ।
📍 कुरुक्षेत्र, हरियाणा
#18january2026

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माँ भद्रकाली मंदिर में माँ भद्रकाली जी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
माँ भद्रकाली की अनुकंपा हम सब पर बनी रहे—ऐसी कामना करता हूँ।
📍 कुरुक्षेत्र, हरियाणा
#18january2026

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माँ भद्रकाली मंदिर में माँ भद्रकाली जी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
माँ भद्रकाली की अनुकंपा हम सब पर बनी रहे—ऐसी कामना करता हूँ।
📍 कुरुक्षेत्र, हरियाणा
#18january2026

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भारतीय जनता पार्टी के लिए संगठन पर्व केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र का उत्सव है। जहाँ अन्य दल परिवार-केंद्रित राजनीति तक सीमित रहे हैं, वहीं भाजपा एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पारदर्शी, सहभागी और लोकतांत्रिक तरीके से अपने नेतृत्व का चयन करती है।
जनसंघ की स्थापना से लेकर भारतीय जनता पार्टी के गठन और अब तक चुने गए राष्ट्रीय अध्यक्षों की परंपरा इस सच्चाई का जीवंत प्रमाण है कि भाजपा में बड़े पद और बड़ी ज़िम्मेदारियाँ किसी परिवार से नहीं, बल्कि परिश्रम, समर्पण, जनसेवा और देशसेवा के आधार पर तय होती हैं।

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