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भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड की प्रदेश मंत्री श्रीमती नेहा जोशी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
माँ गंगा से आपके दीर्घायु जीवन की प्रार्थना करता हूँ।
BJP Uttarakhand Neha Joshi

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इसे देखकर तो रोंगटे खड़े हो गए

मेले में झूला टूटकर गिर गया। भगवान सबकी रक्षा करे।

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इतिहास में मुझसे बड़ा दावेदार कोई नहीं”—नोबेल को लेकर ट्रम्प का फिर हमला

डॉनल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अपनी नाराज़गी खुलकर जाहिर की है। उन्होंने कहा कि अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्होंने आठ बड़े संघर्षों को खत्म कराया, कई देशों के बीच समझौते करवाए और युद्ध टालने में निर्णायक भूमिका निभाई—फिर भी उन्हें अब तक यह सम्मान नहीं दिया गया।

ट्रम्प ने नॉर्वे पर निशाना साधते हुए कहा कि वही देश नोबेल पुरस्कार देता है और वही उन्हें नजरअंदाज कर रहा है। उनके मुताबिक, उन्होंने वो काम किया है जो कई नेता अपने पूरे जीवन में नहीं कर पाए।

उनका यह बयान एक बार फिर वैश्विक बहस को हवा दे रहा है—क्या शांति पुरस्कार राजनीति से प्रभावित होता है? क्या पर्दे के पीछे हुए समझौते और डिप्लोमेसी को उतना महत्व नहीं मिलता, जितना खुली लड़ाइयों को?

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34 साल, एक भी छुट्टी नहीं: समीरन डेका बने मेहनत और अनुशासन की मिसाल
आज के दौर में जहां लोग छुट्टियों और आराम को प्राथमिकता देते हैं, वहीं गुवाहाटी के समीरन डेका ने अपनी पूरी ज़िंदगी काम को समर्पित कर दी। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे में 34 साल 7 महीने और 4 दिन की सेवा के दौरान उन्होंने न तो कभी मेडिकल लीव ली और न ही अर्जित छुट्टी।
1991 में एक साधारण सहायक रसोइए के रूप में शुरू हुआ उनका सफर, आज लाखों युवाओं के लिए मिसाल बन गया है। मेहनत, समय की कद्र और ईमानदारी—यही उनकी सफलता का मंत्र रहा। इन्हीं मूल्यों ने उन्हें ग्रुप-बी कमर्शियल ऑफिसर तक पहुंचाया।
समीरन डेका मानते हैं कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती। यह रोज़ किए गए छोटे प्रयासों का नतीजा होती है। उन्होंने कहा, “अगर आप अपने लक्ष्य से जुड़े रहते हैं, तो मंज़िल खुद आपके पास आती है।”
उनकी कहानी यह साबित करती है कि असली हीरो वही होते हैं, जो बिना शोर किए अपने काम से इतिहास बना देते हैं।
#motivation #railwaypride #lifelessons #nevergiveup

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एक जोमैटो डिलीवरी बॉय कस्टमर को ऑर्डर पहुंचाने गया होता है। लेकिन कस्टमर उससे रुखे अंदाज में बात करता है और पैसों की धौंस जमाने लगता है। वह उसे ऊपर आने के लिए मजबूर करता है। लेकिन डिलीवरी बॉय ऊपर जाने के बजाय नीचे ही उसका ऑर्डर खा लेता है। जिसे देखने के बाद अब यूजर्स में बहस छिड़ गई है।फूड डिलीवरी ऐप्स कस्टमर से डोर स्टेप डिलीवरी का वाद करते हैं।
हालांकि, हम बिल्कुल इस बात के पक्ष में है कि कस्टमर को भी डिलीवरी बॉय का सहयोग करना चाहिए। लेकिन सहयोग मिलने का मतलब ये थोड़ी है कि डिलीवरी बॉय, कस्टमर को ऑर्डर ही डिलीवर न करें? इंटरनेट पर वायरल एक वीडियो में ऐसा ही कुछ हुआ है, जिसने यूजर्स के बीच व्यापक पैमाने पर बहस छेड़ दी है।

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रानी पटरियाँ, लेकिन आज भी देश का भार संभाले हुए
#indianrailways #engineeringlegacy #viralindia #gk

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चीनी बहन की ओर से प्यार भरा नमस्ते

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