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‘चौरी चौरा घटना’ की 104वीं वर्षगांठ पर माँ भारती के अमर बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि।

आज ही के दिन हमारे महान क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों का उत्सर्ग कर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई चेतना, नई ऊर्जा और निर्णायक दिशा प्रदान की थी।

देश की एकता, अखंडता और स्वाभिमान हेतु अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले वीर सपूतों का संघर्ष युगों-युगों तक प्रत्येक भारतीय के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करता रहेगा।

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जीजा-साली रिश्ता को कितना लोग बदनाम करते हैं, कहते हैं कि मज़ाकिया रिश्ता है ,

लेकिन यहां एक जीजा ससुराल में सास ससुर के मरने के बाद जीजा ने साली को अपने पास लाया आने के बाद पढ़ाई जारी रखा अपने बेटी की तरह रखा आज साली का नौकरी लग गई,

CRPF में जीजा साली लिपट कर रो रहे थे,
वो आंसु समाज में व्याप्त बुराई को कुचल के ऊपर उठने की थीं,

ऐसे व्यक्तिव को भी धन्यवाद!

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जीजा-साली रिश्ता को कितना लोग बदनाम करते हैं, कहते हैं कि मज़ाकिया रिश्ता है ,

लेकिन यहां एक जीजा ससुराल में सास ससुर के मरने के बाद जीजा ने साली को अपने पास लाया आने के बाद पढ़ाई जारी रखा अपने बेटी की तरह रखा आज साली का नौकरी लग गई,

CRPF में जीजा साली लिपट कर रो रहे थे,
वो आंसु समाज में व्याप्त बुराई को कुचल के ऊपर उठने की थीं,

ऐसे व्यक्तिव को भी धन्यवाद!

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जीजा-साली रिश्ता को कितना लोग बदनाम करते हैं, कहते हैं कि मज़ाकिया रिश्ता है ,

लेकिन यहां एक जीजा ससुराल में सास ससुर के मरने के बाद जीजा ने साली को अपने पास लाया आने के बाद पढ़ाई जारी रखा अपने बेटी की तरह रखा आज साली का नौकरी लग गई,

CRPF में जीजा साली लिपट कर रो रहे थे,
वो आंसु समाज में व्याप्त बुराई को कुचल के ऊपर उठने की थीं,

ऐसे व्यक्तिव को भी धन्यवाद!

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उम्र - लगभग 82 वर्ष, शरीर जर्जर, कारण - षडयन्त्रकारियों द्वारा 3 बार ऐसा कालकूट विष दिया गया । जिसकी 1 बून्द मात्र पी लेने से मतवाला हाथी भी 10 मिनट के अंदर दम तोड़ दे ।
22 बार शीशे का चूर्ण छल पूर्वक पिलाया गया । 3 बार नाग जिसमें मान्त्रिक सर्प एवं 1 बार विषखोपड़ा ने डसा ।

पद - सनातन वैदिक हिन्दू धर्म की सर्वोच्च पद जगद्गुरु शंकराचार्य अनुपम कृति - वैदिक गणित के लगभग दो दर्जन ग्रंथों की रचना एवं विश्व में वैर्दिक गणित के एकमात्र विद्वान एवं वैज्ञानिक के रूप में ख्याति ।

1999 मैं विश्व बैंक की गुप्थी सिर्फ 8 मिनट में सुलझाना, Indian Space Research Organisation isro को सलाह देना आदि कार्यो से प्रसिद्ध सनातन धर्म के सर्वोच्च पद पर विराजमान एवं सनातन धर्म के स्तंभ परम पूजनीय जगद्गुरु गोवर्धन मठ के 145 वें शंकराचार्य ( पुरी पीठाधीश्वर ) स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज की जय हो ।

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उम्र - लगभग 82 वर्ष, शरीर जर्जर, कारण - षडयन्त्रकारियों द्वारा 3 बार ऐसा कालकूट विष दिया गया । जिसकी 1 बून्द मात्र पी लेने से मतवाला हाथी भी 10 मिनट के अंदर दम तोड़ दे ।
22 बार शीशे का चूर्ण छल पूर्वक पिलाया गया । 3 बार नाग जिसमें मान्त्रिक सर्प एवं 1 बार विषखोपड़ा ने डसा ।

पद - सनातन वैदिक हिन्दू धर्म की सर्वोच्च पद जगद्गुरु शंकराचार्य अनुपम कृति - वैदिक गणित के लगभग दो दर्जन ग्रंथों की रचना एवं विश्व में वैर्दिक गणित के एकमात्र विद्वान एवं वैज्ञानिक के रूप में ख्याति ।

1999 मैं विश्व बैंक की गुप्थी सिर्फ 8 मिनट में सुलझाना, Indian Space Research Organisation isro को सलाह देना आदि कार्यो से प्रसिद्ध सनातन धर्म के सर्वोच्च पद पर विराजमान एवं सनातन धर्म के स्तंभ परम पूजनीय जगद्गुरु गोवर्धन मठ के 145 वें शंकराचार्य ( पुरी पीठाधीश्वर ) स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज की जय हो ।

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