31 w - Translate

कथावाचक पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का एक बयान चर्चा में है। कथा के दौरान उन्होंने कहा: चच्चे के तो तीस बच्चे हैं… सरकार ने एक नारा दिया बच्चे दो ही अच्छे पर हिंदुओं ने और बड़ा ले लिया… उन्होंने कहा कि बच्चा ना बच्ची ज़िंदगी कटे अच्छी।

image
31 w - Translate

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी गोवर्धन मठ के 145 वें शंकराचार्य !

Swami Nischalananda Saraswati is the 145th Shankaracharya of Govardhan Math.

image

image
31 w - Translate

भारत ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में अब वह किसी से पीछे नहीं है। आंध्र प्रदेश में NH-544G पर महज 24 घंटे में 28.95 लेन किलोमीटर बिटुमिनस सड़क बनाकर भारत ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। यह रिकॉर्ड बेंगलुरु कडप्पा विजयवाड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर पर, पुट्टपर्थी के पास बनाया गया।

इस ऐतिहासिक काम को National Highways Authority of India - NHAI की निगरानी में अंजाम दिया। लगातार चले इस ऑपरेशन में 10,675 मीट्रिक टन बिटुमिनस कंक्रीट का इस्तेमाल हुआ। बिना रुके काम, सटीक प्लानिंग और बेहतरीन तालमेल ने इसे मुमकिन बनाया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने इसे राज्य और देश दोनों के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने केंद्र सरकार और नितिन गडकरी के नेतृत्व को इस उपलब्धि का श्रेय दिया।

यह कॉरिडोर पूरा होने के बाद व्यापार, यात्रा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा।

image
31 w - Translate

बड़ौदा की महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ एक फैशन गाला में नज़र आईं, लेकिन इस बार वजह उनका लुक नहीं बल्कि उनकी साड़ी थी। उन्होंने गायकवाड़ राजघराने के खजाने से निकली एक विरासत वाली पैठणी साड़ी पहनी, जोकि 100 साल से भी ज़्यादा पुरानी बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह रेशमी पैठणी दशकों तक सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाई गई थी। जब महारानी इसे पहनकर सामने आईं, तो हर नज़र उसी पर ठहर गई। यह सिर्फ एक साड़ी नहीं थी, बल्कि इतिहास, परंपरा और शाही विरासत की झलक थी।

पैठणी की बारीक बुनाई, गहरे रंग और शाही अंदाज़ ने लोगों को पुराने दौर में लौटा दिया। इस साड़ी ने साबित कर दिया कि फैशन सिर्फ नया पहनने का नाम नहीं, बल्कि विरासत को सहेजने और गर्व से आगे बढ़ाने का भी जरिया है।

महारानी का यह अंदाज़ भारतीय हथकरघा और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक खूबसूरत संदेश बन गया।

image
31 w - Translate

उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले के धनैपुर में इक़बाल अहमद पिछले करीब 20 साल से गाड़ियां ठीक कर रहे हैं। कोई बड़ा प्लान नहीं, बस सीखने की आदत और काम से जुड़ा भरोसा। ट्रैक्टरों और पुरानी मशीनों से शुरू हुआ सफर आज मैकेनिकल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों तक पहुंच चुका है।

नई टेक्नोलॉजी आई तो इक़बाल ने खुद को बदला। स्कैनिंग टूल सीखे, ट्रेनिंग ली और यूपी सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ यानी CM YUVA योजना से जरूरी उपकरण जुटाए। उनकी वर्कशॉप आज भी साधारण है, लेकिन काम भरोसेमंद है।

image
31 w - Translate

The Ram Temple was built after 500 years. Our generations were spent for this dream. If we are able to see it with our own eyes today, then we are the luckiest Sanatanis.
#ram 🙏 #temple #sanatani #generations #education #knowledge #facts 😲

image
31 w - Translate

भारत में सौर ऊर्जा अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि देश की क्लीन एनर्जी रणनीति की रीढ़ बन चुकी है। बढ़ती बिजली की जरूरत, जलवायु परिवर्तन को लेकर प्रतिबद्धता और सोलर टेक्नोलॉजी की गिरती लागत ने इस सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

भारत के पास भरपूर धूप है और सरकार की सपोर्टिव पॉलिसीज ने सोलर को तेजी से अपनाने का रास्ता खोला है। बड़े सोलर पार्क हों या घरों की छतों पर लगे पैनल, हर स्तर पर बदलाव साफ दिख रहा है। सोलर एनर्जी आज सबसे सस्ती बिजली के स्रोतों में शामिल है, जिससे आम लोगों और बिजनेस दोनों को फायदा हो रहा है।

साथ ही, देश में ही सोलर मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी स्टोरेज, एग्रीवोल्टिक और फ्लोटिंग सोलर जैसे इनोवेशन नए अवसर पैदा कर रहे हैं। चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन सही निवेश और टेक्नोलॉजी के साथ सोलर एनर्जी भारत की एनर्जी सिक्योरिटी और इकोनॉमिक ग्रोथ की बड़ी ताकत बन सकती है।

image
31 w - Translate

लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में, 14,500 फीट की ऊंचाई पर बना गलवान वॉर मेमोरियल आज भी हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा कर देता है। यह दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित युद्ध स्मारक है, जो गलवान घाटी में शहीद हुए भारत के 20 वीर जवानों को श्रद्धांजलि देता है।

दिसंबर 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस स्मारक का वर्चुअल उद्घाटन किया था। लेह आर्मी बेस से हुए इस कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इतनी ऊंचाई पर स्मारक बनाना आसान नहीं था, लेकिन बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने इसे सीमित समय में पूरा कर दिखाया।

यह स्मारक सिर्फ पत्थर और संरचना नहीं है, बल्कि यह देश की कृतज्ञता, साहस और बलिदान की जीवित मिसाल है। यह दुनिया को साफ संदेश देता है कि भारत अपने शहीदों को कभी नहीं भूलता।

image
31 w - Translate

#life #motivation

image