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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में 'एंटी-पेपर लीक बिल' के पारित होने के बाद इंस्टाग्राम पर छात्रों और युवाओं के लिए एक नया सेल्फी वीडियो संदेश जारी किया है। इस वीडियो में उन्होंने बिल के पास होने की सराहना करते हुए कहा कि यह नया कानून देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाएगा।

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि इस सख्त कानून के लागू होने के बाद किसी भी 'पेपर लीक माफिया' या गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि सरकार परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसके तहत एक विशेष टास्क फोर्स का गठन, मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना और राज्यों से सुझाव लेने जैसे अहम उपाय शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक की समस्या ने वर्षों से केंद्र और कई राज्यों को प्रभावित किया है। इस नए बिल के जरिए परीक्षाओं में सेंधमारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।

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नीट पेपर लीक विवाद के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक आंदोलन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। दीपके ने आरोप लगाया कि अलग-अलग राज्यों में पुलिस छात्रों के घर जाकर उन्हें हिरासत और गिरफ्तारी का डर दिखाकर परेशान कर रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र केवल तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से संतुष्ट नहीं हैं और पूरी सरकार से नाराज हैं। दीपके के अनुसार, अगर भविष्य के निर्माताओं (छात्रों) का उत्पीड़न इसी तरह जारी रहा, तो वे सरकार बदलने की ताकत भी रखते हैं।

इसके साथ ही, सीजेपी दिल्ली सरकार की उस घोषणा से भी असंतुष्ट है जिसमें आपराधिक रिकॉर्ड या हिंसा में शामिल छात्रों पर कानूनी कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई है। सीजेपी की मांग है कि बिना किसी शर्त के सभी छात्रों से एफआईआर वापस ली जाएं, क्योंकि उन्हें आशंका है कि पुलिस इस शर्त का दुरुपयोग कर सकती है। मांगें पूरी न होने पर सीजेपी ने दोबारा विरोध-प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी है।

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राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को सदन में नीट (NEET) पेपर लीक मामले पर अपना बयान दिया। उन्होंने छात्रों और उनके परिवारों के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों का गुस्सा, दर्द और शिकायत पूरी तरह जायज है।

चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक होने से सिर्फ पर्चा ही आउट नहीं होता, बल्कि छात्रों की सालों की मेहनत, भरोसा और सपने भी टूटते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान केवल मीडिया बयानों से नहीं, बल्कि मजबूत संस्थागत बदलावों से ही होगा।

इसके साथ ही उन्होंने नए बिल के जरिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की तारीफ की। चड्ढा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक अभिभावक की तरह छात्रों की चिंताएं सुनीं और व्यवस्था में सुधार के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए। उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वह एक पूर्व सीए (CA) छात्र रहे हैं, इसलिए वह परीक्षार्थियों के दर्द और उनके परिवारों द्वारा किए गए भारी आर्थिक और सामाजिक समझौतों को गहराई से समझते हैं।

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गुरुग्राम की 33 वर्षीय फूड कंटेंट क्रिएटर प्रिया ने इंस्टाग्राम पर अपने और पति के बीच एक अनोखे 'फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट' का खुलासा किया है। प्रिया जब भी घर पर कैफे या रेस्टोरेंट स्टाइल डिश बनाती हैं, तो उनके पति उन्हें इसके लिए 1,000 रुपये देते हैं।

प्रिया का कहना है कि यह उनकी मेहनत और कुकिंग स्किल की कद्र करने का एक तरीका है। इस व्यवस्था से वह घर का खाना बनाकर ही महीने के 15,000 से 20,000 रुपये तक कमा लेती हैं। प्रिया के पति उन्हें इन पैसों को बचाने के लिए प्रेरित करते हैं। प्रिया इन पैसों को जमा कर रही हैं ताकि भविष्य में अपना खुद का 'सैंडविच ब्रांड' शुरू कर सकें।

इंस्टाग्राम पर यह वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। कुछ यूजर्स ने इसकी आलोचना करते हुए इसे रिश्तों का व्यापारीकरण बताया है। वहीं, कई लोगों ने इसे गृहिणियों के काम को सम्मान देने का एक स्मार्ट और बेहतरीन तरीका मानकर इस पहल का समर्थन किया है।

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36 दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है। सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए शिक्षा मंत्री का बिलकिस बानो के दोषियों का स्वागत करते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था। दीपके ने कहा कि एक 'रेपिस्ट के समर्थक' को शिक्षा मंत्री बनाना देश और छात्रों के लिए बेहद शर्म की बात है।

इसके साथ ही, दीपके ने शिक्षा विभाग के नए सचिव पर भी करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए और पुलिस द्वारा छात्रों को परेशान न करने का लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो उनका आंदोलन फिर से सड़कों पर उतरेगा। इसके अलावा दीपके ने 19 जुलाई के प्रदर्शन में गुंडे भेजकर अशांति फैलाने का आरोप लगाया और पेपर लीक मामले में प्रभावितों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे की अपनी मांग दोहराई है।

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एक महिला ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर अपनी शादी में करीब 30 लाख रुपये खर्च करने को अपनी जिंदगी की 'सबसे बड़ी आर्थिक गलती' बताया है। महिला ने लोगों को सलाह दी है कि वे समाज और परिवार के दबाव में आकर शादी में अपनी क्षमता से अधिक पैसा न खर्च करें।

महिला के अनुसार, 30 लाख रुपये एक बड़ी रकम है, जिसका इस्तेमाल घर की डाउन पेमेंट, कोई नया बिजनेस शुरू करने या भविष्य को सुरक्षित करने के लिए निवेश के तौर पर किया जा सकता था। उनका कहना है कि कुछ घंटों या दिनों के समारोह पर इतना बड़ा खर्च भविष्य में आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है।

वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स ने उनकी इस बात का समर्थन करते हुए भविष्य के लिए बचत को जरूरी बताया। वहीं, कुछ अन्य लोगों का मानना है कि शादी जीवन का एक खास मौका है और अगर पैसे हैं तो अपनी खुशी से खर्च करने में कुछ भी गलत नहीं है।

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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाली 25 वर्षीय रुचिका सिंह का समर्थन किया है। नोएडा निवासी रुचिका के खिलाफ गाजियाबाद की एक महिला की शिकायत पर नोएडा पुलिस ने 'जीरो एफआईआर' दर्ज की है, जिसे आगे की जांच के लिए दिल्ली ट्रांसफर किया जाएगा।

पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (352, 353(1), और 356(1)) के तहत दर्ज किया है। इस पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि एक युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ सरकारी मशीनरी का इस तरह बदले की भावना से इस्तेमाल करना शर्मनाक है और "यह सरकार कभी नहीं सीखेगी।"

रुचिका ने जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन में हिस्सा लिया था। महुआ मोइत्रा के अलावा सीजेपी ने भी पुलिस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि केवल गाली-गलौज के लिए युवाओं पर आपराधिक मामला दर्ज करना और उन्हें परेशान करना तुरंत बंद होना चाहिए।

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संसद परिसर में मकर द्वार के बाहर एक पत्रकार ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से 20 जुलाई की हिंसा में घायल हुए दिल्ली पुलिसकर्मियों के परिजनों की मांगों को लेकर सवाल किया। पत्रकार ने पूछा था कि क्या विपक्ष घायल पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की चिंताओं को संसद में उठाएगा।

इस पर सीधा जवाब देने के बजाय राहुल गांधी ने पत्रकार से पूछा, "क्या आप बीजेपी से हैं?" और बिना कोई उत्तर दिए वहां से आगे बढ़ गए। पत्रकार ने तुरंत स्पष्ट किया कि यह सवाल किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों के परिवारों का है, जिन्होंने उसी दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी समस्याएं रखी थीं।

इसके बावजूद राहुल गांधी ने कोई जवाब नहीं दिया और विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन में शामिल होने चले गए। बाद में, संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद जब वे बाहर निकले, तब भी पत्रकार ने उनसे दोबारा यही सवाल पूछा। हालांकि, राहुल गांधी ने दूसरी बार भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और बिना कुछ बोले संसद परिसर से बाहर निकल गए।

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CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा देने वाला बयान दिया है। उनका साफ कहना है कि देश के युवाओं और उनके भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़ अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उनका तीखा बयान: "अगर देश का भविष्य इसी तरह संकट में डाला गया, तो जिस तरह धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटना पड़ा... कल अगर सरकार लाइन पर नहीं आई (सही से काम नहीं किया), तो हम जाकर सरकार ही बदल देंगे।" इस बेबाक बयान पर आपकी क्या राय है? अपनी आवाज उठाइए और कमेंट्स में बताएं!

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