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◆ राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की X पोस्ट पर "नोट" लगा दिया गया है..मगर गोदिमीडिया और सरकार ख़ामोश है..ये सीरियस मसला है..

◆ राष्ट्रपति ने लिखा था कि उन की सरकार दलितों, पिछड़ों, वंचितों, जनजातीय समाज, सभी के लिए काम कर रही है..

👉 इस वाक्य में आख़िर में सर्वसमाज शब्द लिखा गया होता तो शायद X नोट नहीं लगाता..

◆ X ने नोट में लिखा है कि राष्ट्रपति का काम हर नागरिक के लिए होना चाहिए..सिर्फ़ पिछड़ों के लिए काम करना काफ़ी नहीं है

● भारत सरकार को चाहिए था कि X से सरकारी तौर पर ए'तिराज़ दर्ज करवाए..क्योंकि भारत की राष्ट्रपति सब के लिए काम करती हैं..

● हालांकि अब तक कोई सरकारी आपत्ति दर्ज करने की ख़बर नहीं मिली है..ये राष्ट्रपति के पोस्ट के लिए लापरवाही है..

~ अगर मोदी के पोस्ट पर नोट लगाया जाता तो अब तक एलन मस्क के ख़िलाफ़ तूफ़ान आ चुका होता..भजपैया प्रवक्ताओं की 20 प्रेस मीट हो चुकी होती..भारत का अपमान हो चुका होता

~ और राहुल गांधी की पोस्ट पर X का नोट लगता तो एलन मस्क को बाप बना लेते और राहुल गांधी को देशद्रोही ए'लान कर चुके होते

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◆ आदरणीय मल्लिकार्जुन खड़गे साहब, राहुल गांधी और शशि थरूर की इस तस्वीर को देखता हूं और गोदिमीडिया की याद आती है..😀

◆ गोदिमीडिया ने क्या कुछ नहीं लिखा और बोला था..भजपैया को केरल का CM मिल गया और "अब की बार केरल में थरूर सरकार" जैसी डिबेट तक चलाई गई थी

◆ भक्तों को लगा था कि एक "इंग्लिश स्पीकिंग और इंटरनेशनल लेवल" का पापा मिलेगा..मगर भक्तों को आशाराम, राम रहीम से ही काम चलाना पड़ेगा..😆

● तो आख़िर ऐसा क्या हुआ था और ऐसा क्या हुआ कि गोदिमीडिया शशि थरूर पर ख़ामोश हो गया?

● कोई भी यक़ीनी तौर पर नहीं बता सकता है कि क्या हुआ था..सब क़िस्से कहानियां बताई जा रही थी..सिर्फ़ 3 लोग सच्चाई से वाक़िफ़ थे जो तस्वीर में हैं..

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◆ गौतम अदाणी अमरीकन कोर्ट में "फुल सरेंडर"..अदाणी परिवार ने अमरीकी कोर्ट का समन मंज़ूर कर लिया है..दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा था..

◆ नरेन्दर के बा'द गौतम भी सरेंडर ✌️😆

◆ अदाणी के समन मंज़ूर करते ही अब अदाणी अमरीकी कोर्ट का ऑफिसियल मुल्ज़िम बन चुका है..

◆ अब अदाणी को साबित करना है कि उस ने अमरीका में कोई जुर्म नहीं किया है..अमरीकन कोर्ट में रखे गए सुबूतों को देखते हुए अदाणी के लिए ख़ुद को बे-क़ुसूर साबित करना बहुत मुश्किल काम होगा..

◆ अमरीकन कोर्ट में "डिजीटल एविडेंस" रखे गए हैं..डिजिटल सुबूतों पर अदाणी बुरी तरह से फंसा हुआ है..अगर डिजिटल सुबूत नहीं होते तो अदाणी सरेंडर नहीं होता..

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◆ क्या आप यक़ीन करेंगे कि 9000 करोड़ का मालिक IT रेड के ख़ौफ़ से ख़ुद को गोली मार कर ख़ुदकुशी कर सकता है? यक़ीन करना नामुमकिन है

◆ सी जे रॉय साहब, रियल एस्टेट कंपनी "कॉन्फिडेंट ग्रुप" के मालिक, ने IT रेड के दौरान ख़ुद को गोली मार ली और दुनिया को अलविदा' कह दिया..

◆ वारदात को सिलसिलेवार तरीक़े से समझिए

~ दोपहर 12 बजे IT की टीम पहुंचती है
~ दोपहर 2 बजे सी जे रॉय दफ़्तर पहुंचे
~ 2.30 पर IT अफ़सर ने काग़ज़ दिए
~ रॉय साहब से काग़ज़ पर दस्तख़त करने कहा
~ 3 बजे रॉय साहब प्राइवेट केबिन में गए
~ 3.10 पर ख़ुद को गोली मार ली
~ 3.30 पर हॉस्पिटल ने उन्हें मृत बता दिया

◆ ये कोई मज़ाक़ चल रहा है कि एक इतना बड़ा उद्योगपति मामूली IT रेड से ख़ुद की ज़िंदगी ख़त्म कर ले? ऐसी IT रेड बड़े उद्योगपतियों का रोज़ का काम होता है

◆ IT वाले आए थे या IT की आड़ में कोई और ही आया था? क्या रॉय साहब का क़त्ल करने की कोई साज़िश थी?

◆ IT केंद्र सरकार की है..वित्तमंत्री सीतारमण का डिपार्टमेंट है..और सीतारमण मोदी के मातहत काम करती है..सीतारमण को जवाब देना है..

◆ IT रेड के ज़रि'ए भारत में क्या क्या किया गया है इस बात से पूरा भारत वाक़िफ़ है..

👉 कर्नाटक में रॉय साहब से वुसूली और राज़ी ना होने पर उन का क़त्ल करने की अफ़वाह चल रही है..और सच्चाई शायद ही कभी सामने आएगी

👉 अगर आप को याद हो तो "कैफ़े कॉफ़ी" के मालिक का भी मशकूक/संदेहजनक हालात में क़त्ल हुआ था..आज तक कोई फ़ैसला नहीं हुआ है..

✋ इस वक़्त भारत में इस वक़्त "चंदा दो, धंधा लो" गैंग काम कर रहा है..अगर किसी ने चंदा नहीं दिया तो उस की जान लेने में कोई हिचक नहीं है..

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मथुरा एस्केप नहर पर अतिक्रमण हटाने की कवायद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्या सरकारी विभाग आपस में बात नहीं करते? यहां सिंचाई विभाग ने जिन 800 मकानों और दुकानों पर 'लाल निशान' लगाए हैं, उनमें से कई घरों पर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का सरकारी पत्थर लगा है। सवाल यह है कि जिस घर को बनाने के लिए खुद सरकार ने ढाई लाख रुपये का अनुदान दिया, अब उसे ही अवैध मानकर ढहाने की तैयारी क्यों है?

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