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जबलपुर: भगवान शिव की पिंडी पर रिजवान ने किया था पेशाब, मुस्लिम बोले- समाज से होगा बहिष्कार!
मध्‍य प्रदेश के जबलपुर के गढ़ा थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। आरोप है कि एक विशेष समुदाय के युवक ने भगवान शिव की पिंडी और मंदिर परिसर में अशोभनीय कृत्य किया, जिससे स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में हिंदू संगठन के कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक सक्रिय हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, काजी मोहल्ला निवासी मोहम्मद रिजवान उर्फ रिज्जु भूरा नशे में धुत था। वो मंदिर परिसर में आया और चबूतरे के पास पेशाब करने लगा। इसके बाद वो चबूतरे के पास ही सो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे पकड़ लिया और गुस्से में उसकी जमकर धुनाई कर डाली। हालात बिगड़ते देख हिंदू संगठन के लोगों ने बीच-बचाव करते हुए युवक को पुलिस के हवाले कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद सहित अन्य हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता गढ़ा थाने पहुंच गए। थाना परिसर में जमकर नारेबाजी हुई और आरोपी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। संगठनों का कहना था कि इस तरह की घटनाएं धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली हैं और समाज में तनाव पैदा करती हैं।
पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे कानून को अपने हाथ में न लें और जांच पूरी होने दें। फिलहाल इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है।
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केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक नया नियम लागू किया है। अब सरकारी और औपचारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले ‘वंदे मातरम्’ बजाया या गाया जाएगा। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि जब ‘वंदे मातरम्’ का आधिकारिक रूप से गायन या वादन होगा, तब वहां मौजूद सभी लोगों को सम्मान में खड़े रहना अनिवार्य होगा। इस नए नियम का उद्देश्य लोगों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करना और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाना है।

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कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के टम्बलर रिज शहर के सेकेंडरी स्कूल में गोलीबारी में संदिग्ध समेत आठ लोग मारे गए। इसके अलावा एक घर से दो व्यक्तियों के शव मिले हैं। माना जा रहा है कि इन दोनों का संबंध इस गोलीबारी से है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने यह जानकारी दी है।
#canada #firing #tumblerridge #panchjanya

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आर्य समाज के प्रवर्तक, महान समाज सुधारक और नवजागरण के अग्रदूत महर्षि दयानंद सरस्वती जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।
महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने अंधविश्वास, आडंबर और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया। शिक्षा के प्रसार, नारी सशक्तिकरण तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण हेतु उनके प्रयासों ने राष्ट्र को नई वैचारिक दिशा और आत्मगौरव प्रदान किया।
वर्गविहीन, जातिविहीन और समतामूलक समाज की स्थापना तथा उच्च नैतिक मूल्यों के प्रसार के लिए उनके योगदान आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
महर्षि दयानंद सरस्वती जी के विचार सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहें, यही मंगलकामना है।

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भारतीय राजनीति में कुछ चेहरे ऐसे हैं जो केवल अपने नाम या विरासत के कारण चर्चा में बने रहते हैं, जबकि उनकी वैचारिक दिशा, नीतिगत स्पष्टता और राष्ट्रीय मुद्दों पर दृष्टिकोण लगातार सवालों के घेरे में रहता है। हाल के वर्षों में राहुल गांधी को लेकर भी यही बहस तेज़ हुई है। समर्थकों और आलोचकों—दोनों के बीच यह प्रश्न लगातार उठता रहा है कि उनकी राजनीति आखिर किस दिशा में देश को ले जाना चाहती है और उसका प्रभाव भारतीय समाज, संस्कृति और परंपराओं पर क्या पड़ता है।

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भोलेनाथ को किसी ताम-झाम की ज़रूरत नहीं। वे केवल एक लोटा जल और बेलपत्र से भी उतने ही खुश होते हैं जितना किसी बड़े अनुष्ठान से।
हर हर महांदेव 🙏🙏🙏

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पति-पत्नी और वो....फिर शॉपिंग मॉल में कुछ इस तरह का रिजल्ट आमने आया।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गौसेवा संरक्षण एवं संवर्धन पर आधारित फिल्म "गोदान" आज दोपहर 3 बजे एस०आर०एस० सिनेमा विपुल खंड गोमती नगर में प्रदर्शित की जा रही है। आप सभी फिल्म अवश्य देखें।

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🚩 क्या कांग्रेस वाकई 'हिंदू विरोधी' है? देश पूछ रहा है सवाल! 🚩
सोशल मीडिया पर इस वक्त यह तस्वीर और इसके साथ लिखा संदेश तेजी से वायरल हो रहा है। सवाल सीधा है और जनता के मन में घर कर रहा है: "कांग्रेस कोई पार्टी नहीं, एक हिंदू विरोधी संगठन है। क्या आप सहमत हैं?"
भारतीय राजनीति में कांग्रेस का इतिहास दशकों पुराना है, लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी की विचारधारा और बयानों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। चाहे वो राम मंदिर के निमंत्रण को ठुकराना हो, सनातन धर्म पर दिए गए विवादास्पद बयानों पर चुप्पी साधना हो, या तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप—आम जनता के बीच पार्टी की छवि को लेकर गहरा असंतोष देखा जा रहा है।
सोचने वाली बात यह है:
क्या एक राष्ट्रीय पार्टी को किसी खास धर्म के खिलाफ खड़ा दिखना चाहिए?
क्या 'सेक्युलरिज्म' के नाम पर बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाना सही है?
क्या आने वाले समय में जनता इस विचारधारा को स्वीकार करेगी या पूरी तरह नकार देगी?
यह केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं और उनके आक्रोश का प्रतिबिंब है। लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है और उसका फैसला ही अंतिम होता है। अब समय आ गया है कि हम खुलकर इस पर चर्चा करें और अपनी राय रखें।
आपकी क्या राय है? क्या आप इस बात से सहमत हैं कि कांग्रेस की दिशा बदल चुकी है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें और इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि सच सबके सामने आ सके। 🇮🇳🙏
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