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झांसी में 11वीं की छात्रा माया राजपूत ने आईफोन के लिए जान दे दी। वह कई दिनों से आईफोन दिलाने की जिद कर रही थी।
आत्महत्या से पहले छात्रा ने अपने पिता तुलसीराम राजपूत को धमकी देते हुए कहा था- अगर दो दिन में आईफोन नहीं मिला तो देख लेना। उस वक्त तुलसीराम को बेटी की धमकी समझ नहीं आई।
शनिवार को जब माता-पिता काम पर चले गए, उसी दौरान छात्रा ने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आनन-फानन में उरई मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
छात्रा की रविवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। बेटी की मौत से पूरा परिवार आहत है। पिता ने कहा- मैं गरीब किसान हूं। आईफोन के लिए पैसे नहीं थे। पूरा मामला जालौन के डकोर थाना क्षेत्र के कुशमिलिया गांव का है।
झांसी में 11वीं की छात्रा माया राजपूत ने आईफोन के लिए जान दे दी। वह कई दिनों से आईफोन दिलाने की जिद कर रही थी।
आत्महत्या से पहले छात्रा ने अपने पिता तुलसीराम राजपूत को धमकी देते हुए कहा था- अगर दो दिन में आईफोन नहीं मिला तो देख लेना। उस वक्त तुलसीराम को बेटी की धमकी समझ नहीं आई।
शनिवार को जब माता-पिता काम पर चले गए, उसी दौरान छात्रा ने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आनन-फानन में उरई मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
छात्रा की रविवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। बेटी की मौत से पूरा परिवार आहत है। पिता ने कहा- मैं गरीब किसान हूं। आईफोन के लिए पैसे नहीं थे। पूरा मामला जालौन के डकोर थाना क्षेत्र के कुशमिलिया गांव का है।
झांसी में 11वीं की छात्रा माया राजपूत ने आईफोन के लिए जान दे दी। वह कई दिनों से आईफोन दिलाने की जिद कर रही थी।
आत्महत्या से पहले छात्रा ने अपने पिता तुलसीराम राजपूत को धमकी देते हुए कहा था- अगर दो दिन में आईफोन नहीं मिला तो देख लेना। उस वक्त तुलसीराम को बेटी की धमकी समझ नहीं आई।
शनिवार को जब माता-पिता काम पर चले गए, उसी दौरान छात्रा ने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे आनन-फानन में उरई मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
छात्रा की रविवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। बेटी की मौत से पूरा परिवार आहत है। पिता ने कहा- मैं गरीब किसान हूं। आईफोन के लिए पैसे नहीं थे। पूरा मामला जालौन के डकोर थाना क्षेत्र के कुशमिलिया गांव का है।

5 साल नंगे पाँव... सिर्फ पेड़ों के लिए? 🦶🌳
राजस्थान की तपती धूप में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने वो कर दिखाया जो नामुमकिन था। मिलिए अजीत सिंह (36) से जो सिर्फ पौधे लगाने के संकल्प के लिए 5 साल तक नंगे पाँव चले (अपना संकल्प पूरा करने के लिए)। अपनी जमापूंजी और पत्नी के गहने तक बेच दिए।
नतीजा? 1,00,000+ पेड़ और 10 ऑक्सीजन पार्क
इन्होंने रेगिस्तान में सिर्फ पेड़ नहीं, उम्मीद उगाई है। एक इंसान सच में दुनिया बदल सकता है। ❤️