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देहरादून के आकाश राणा का भारतीय सेना में ऑफिसर बनने का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। एक समय प्रोफेशनल MMA फाइटर के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले आकाश ने नेशनल टाइटल जीता और सुपर फाइट लीग में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई।
हालांकि, उनका सपना सिर्फ खेल तक सीमित नहीं था। कई बार असफलता और रिजेक्शन झेलने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए वे सबसे पहले भारतीय सेना में क्लर्क के रूप में भर्ती हुए, लेकिन उनका सपना था वर्दी में अधिकारी बनना।
ड्यूटी के साथ लगातार मेहनत और समर्पण के बल पर उन्होंने आर्मी कैडेट कॉलेज (ACC) की परीक्षा पास की और इसके बाद इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), देहरादून पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी प्रतिभा और अनुशासन से सबको प्रभावित किया और ‘चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ गोल्ड मेडल’ अपने नाम किया। साथ ही उन्हें ‘मिस्टर IMA 2024’ का खिताब भी मिला।
उत्तराखंड के चमोली जिले के रानो गांव में जन्मे सुरजन सिंह भंडारी की वीरता और बलिदान की कहानी देशभक्ति की एक ऐसी मिसाल है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
24 सितंबर 2002 को गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस कठिन घड़ी में NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) के कमांडो सुरजन सिंह भंडारी भी ऑपरेशन का हिस्सा थे। गढ़वाल स्काउट्स से NSG में डेपुटेशन पर आए सुरजन सिंह ने बिना अपनी जान की परवाह किए आतंकियों से सीधे मोर्चा लिया।
मुठभेड़ के दौरान आतंकियों की गोली उनके सिर में लगी, जो ब्रेन स्टेम में फंस गई। वे गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उनकी बहादुरी की वजह से सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकी। इस हमले में कई लोग शहीद हुए, लेकिन NSG कमांडोज ने आतंकियों को मार गिराकर ऑपरेशन को सफल बनाया।
घायल अवस्था में उन्हें पहले अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई जटिल सर्जरी हुईं। बाद में उन्हें AIIMS दिल्ली शिफ्ट किया गया। वहां वे लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहे और करीब 600 दिनों तक कोमा में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे।
उनकी बहादुरी और अदम्य साहस को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया—यह देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान उन्हें कोमा में रहते हुए ही प्रदान किया गया था।
उस समय देश के बड़े नेताओं—तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी—ने उनके इलाज और सम्मान में विशेष रुचि दिखाई।
लगभग दो साल तक जिंदगी से जंग लड़ने के बाद, 19 मई 2004 को AIIMS दिल्ली में उन्होंने अंतिम सांस ली। उस समय उनकी उम्र मात्र 25 वर्ष थी। उनके पार्थिव शरीर के पास तिरंगा रखा गया था—जो उनके बलिदान और सम्मान का प्रतीक था।
आज भी सुरजन सिंह भंडारी की कहानी NSG, भारतीय सेना और पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि कर्तव्य, साहस और देशभक्ति सबसे ऊपर होती है।
🇮🇳 जय हिंद, वीर सपूत को शत-शत नमन
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🔘Radio Doctor
📌Topic: Solid Habits, Strong Liver
▶️Expert:- Dr Shiv Sarin,
Founder, Director & Chancellor, Institute of Liver & Biliary Sciences( ILBS), New Delhi
PRODUCER & HOST - Shalini Mittal
📻On Akashvani Rainbow & NewsOnAir ****
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मुख्यमंत्री श्री Pushkar Singh Dhami जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में देवभूमि उत्तराखण्ड तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है, जहां आस्था और विकास का संतुलन साफ दिखाई देता है।
इसी कड़ी में ₹1252 करोड़ की बड़ी सौगात न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था को सशक्त करेगी, बल्कि प्रदेश के बुनियादी ढांचे, पर्यटन, शिक्षा और आपदा प्रबंधन को भी नई गति देगी। ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर से लेकर हरिद्वार हर की पौड़ी विकास, टिहरी झील रिंग रोड और कैलाश मानसरोवर मार्ग तक, हर योजना दूरदर्शी नेतृत्व का प्रमाण है।
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मुख्यमंत्री श्री Pushkar Singh Dhami जी के दूरदर्शी नेतृत्व में केदारनाथ धाम ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक मिसाल कायम की है।
आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग कर बाबा केदार के धाम को ‘ग्रीन और क्लीन' बनाने का संकल्प अब धरातल पर उतर रहा है। वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, वैज्ञानिक पृथक्करण और कचरे के पुनर्चक्रण जैसे अभिनव प्रयासों से धाम न केवल निर्मल हो रहा है, बल्कि रोजगार और आय सृजन के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
ॐ गं गणपते नमः 🙏
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को एकदंत संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।
इस बार यह पर्व मंगलवार को पड़ रहा है, मंगलवार के दिन चतुर्थी तिथि होने के कारण इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं, जिसे शास्त्रों में अत्यधिक शुभ माना गया है।
इस दिन व्रत और पूजा करने से विघ्नहर्ता श्री गणेश जी के आशीर्वाद से सभी समस्याओं का समाधान होता है, दरिद्रता का नाश होता है और घर-परिवार में सुख समृद्धि का वास होता है।
इस दिन चंद्रमा को जल से अर्ध्य दे कर भगवान गणेश से अपनी मनोकामना पूरी करने की कामना की जाती है।
यह व्रत विशेष रूप से मानसिक शांति और संतान की रक्षा के लिए रखा जाता है।