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लगभग 1540 में, शेर शाह सूरी ने 'रुपया' नाम का एक चांदी का सिक्का चलाया जिसका वज़न 178 ग्रेन (लगभग 11.5 ग्राम) था। यह इतना स्टैंडर्ड था कि मुगलों, मराठों और अंग्रेजों ने भी इसके बेसिक स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया।
जब 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली, तब वैश्विक अर्थव्यवस्था और विनिमय दर की स्थिति आज से बिल्कुल भिन्न थी। उस समय $1 अमेरिकी डॉलर महज 3.3 रुपये के बराबर हुआ करता था।
ओडिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 202 और ओडिशा करिकुलम फ्रेमवर्क 2025 के तहत तैयार की गई कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,678 त्रुटियां मिलने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन गलतियों में केवल टाइपिंग या भाषा संबंधी त्रुटियां ही नहीं, बल्कि कई गंभीर तथ्यात्मक और शैक्षणिक गलतियां भी शामिल हैं।
🔹 महान वैज्ञानिक आइज़ैक न्यूटन को "महान पायलट" बताया गया।
🔹 कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर को ओडिशा विधानसभा के रूप में प्रकाशित किया गया।
नवी मुंबई के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार के पंकज श्रीवास्तव ने साबित कर दिया है कि बिना किसी गॉडफादर या भारी-भरकम फंडिंग के भी सफलता पाई जा सकती है। पंकज श्रीवास्तव आज डिजिटल मार्केटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी 'यूनोसर्च' (UnoSearch) के फाउंडर और सीईओ हैं। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्हें लगातार तीन बड़े बिजनेस फेलियर का सामना करना पड़ा, जिसमें उनकी करीब 2 करोड़ रुपये की जमा-पूंजी डूब गई थी।
40 साल की उम्र, दो बच्चों की मां, सुनने की दिव्यांगता... और आखिरकार UPSC में सफलता! केरल के तिरुवनंतपुरम की रहने वाली नीसा उन्नीराजन ने वह कर दिखाया, जिसे कई लोग असंभव मान लेते हैं।
जब अधिकांश UPSC अभ्यर्थी 30 की उम्र तक अपने प्रयास पूरे कर चुके होते हैं, तब नीसा ने 35 वर्ष की उम्र में इस कठिन परीक्षा की तैयारी शुरू की। उनके सामने सिर्फ एक चुनौती नहीं थी।
🔹 वे दो बच्चों की मां थीं।
🔹 फुल-टाइम नौकरी कर रही थीं।
🔹 सुनने की दिव्यांगता (Hearing Disability) के साथ जीवन जी रही थीं।
🔹 और UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा का सपना देख रही थीं।
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सात लंबे प्रयासों, असफलताओं और संघर्षों के बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में ऑल इंडिया रैंक 1000 हासिल की। दिव्यांग श्रेणी के तहत वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए पात्र हैं।
इस सफर में उनके पति अरुण, उनकी बेटियां नंदना और थान्वी, तथा उनके माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया। नीसा का मानना है कि असफलता कभी व्यर्थ नहीं जाती। उन्होंने कहा कि हर असफल प्रयास ने उन्हें कुछ नया सिखाया और उनकी रणनीति को बेहतर बनाया।
प्रेरणा बनाए रखने के लिए वे सफल लोगों की जीवनी पढ़ती थीं, मोटिवेशनल वीडियो देखती थीं और लगातार खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करती थीं। उनकी सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि उम्र, परिस्थितियां या शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति की क्षमता तय नहीं करतीं।
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उत्तर प्रदेश को विकास के पथ पर अग्रसर कर रहे, यशस्वी मा० मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के कानपुर नगर आगमन पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन।
MYogiAdityanath
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