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जब वाजपेयी नहीं थे तब लोग चाहते थे कि वाजपेयी आये और हिंदुत्व का झंडा लहराये। वाजपेयी आये भारत परमाणु शक्ति बना, कारगिल आज़ाद भारत का पहला युद्ध था जिसमे भारत ने अपनी शर्तो पर सन्धि की।
लेकिन फिर गुजरात दंगे हो गए, उससे 3 महीने पहले ही अमेरिका अफगानिस्तान मे घुस चुका था, विदेशी खुदरा कम्पनियो को चीन मे घुसने से रोकना था, रूस मे पुतिन की सत्ता आ चुकी थी जो की फिर से रूस को रूढ़िवादी बनाने की जिद पर थे।
वाजपेयी जी चौतरफ़ा नए नए समीकरण समझ रहे थे और ऐसे मे उनसे वही गलती हुई जो हर इंसान करता है। 4 मे से 1 काम बिगाड़ दिया और कुछ पुराने मुद्दों पर थोड़े सॉफ्ट पड़ गए।
लेकिन जनता के अनुसार आपका परफेक्ट होना ही आवश्यक है क्योंकि राजनीति की बात करते समय लोगो को ऐसा लगता है की वे तो अपने व्यवसाय और नौकरी मे कही भी कोई गलती नहीं करते।
महंगाई से त्रस्त हार्ड हिंदुत्व की भूखी जनता को सॉफ्ट हिंदुत्व ऐसा चुभा की 2004 मे उसने भारतीय इतिहास की सबसे भ्रष्ट और हिन्दू विरोधी सरकार ही चुन डाली। आप अंदाज इस बात से लगा सकते है की 2004 मे सोनिया गाँधी ही उम्मीदवार थी।
लोग एक बार को एक विदेशी महिला को बैठाने के लिये आतुर थे, वो भी वाजपेयी जी को हटाकर। अंग्रेज हमें क्या देकर गए थे यदि वो जानना हो तो 2004 का चुनाव उत्कृष्ट उदाहरण है या उस समय के जिन नए वोटर्स ने कांग्रेस को वोट दिया उनकी मेंटल स्टेट पढ़ लीजिये।
2004 तक जो चीन भारत के बराबर था वो 2009 तक बहुत आगे था, चीन ने तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश के आसपास गाँव बसाने शुरू कर दिए और जनता तब भी नहीं समझ सकी।
लेकिन 2009 के बाद जब प्रभाव दिखा और चीन ने अंदर घुसना शुरू किया, पाकिस्तान ने सैनिको के सिर काटने शुरू किये तब जनता को ध्यान आया की इससे अच्छे तो वाजपेयी के 100 रूपये के प्याज़ थे। फिर जनता वाजपेयी से ज्यादा हार्ड फेस मोदी ले आयी।
जो कुछ वाजपेयी जी के साथ हुआ ठीक वैसा ही मोदीजी के साथ हुआ। पहले पुरानी चीजें ठीक की फिर नई बनाई और अब विरोध झेल रहे है। बस इन दोनों नेताओं मे फर्क था जनता की जागृति का।
2004 के समय की जनता ने एक बार को विदेशी महिला स्वीकार ली थी और 2024 मे विदेशी महिला के खून को भी नहीं स्वीकारा। आज लोगो को योगी जी बड़े पसंद आ रहे है मगर ये तय मानिये की 2029 मे यदि वे प्रधानमंत्री बन गए तो 2039 तक ये ही कट्टर पंथी उनकी जान के दुश्मन हो जायेंगे।
क्योंकि सत्ता के बाहर रहकर आप जितना हार्ड होते है वो सत्ता मे रहकर नहीं हो सकते। जनता इसे एक पाप की तरह देखती है और सजा देती है, लगभग हर परिपक्व लोकतंत्र मे ये ही हाल है।
वोटर का चरित्र दोहरा होता है राम मंदिर जब तक नहीं बना तब तक तो "बन ही नहीं सकता", जैसे ही बन गया "इसमें कौन सी बड़ी बात थी" परमाणु शक्ति जब तक नहीं बने तब तक "चीन बन गया है पता नहीं हम कब बनेंगे" जैसे ही बन गए "क्या फर्क पड़ता है उससे"
लेकिन चलो अंत मे सोशल मीडिया और इंटरनेट का धन्यवाद करना चाहिए, जो पुरानी घटनाये सीधे प्रचारित कर देता है और वोटर की याददाश्त 2004 जितनी खराब नहीं होती।

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Highway Accident, Drug Suspicion, and Political Links: The Furman Raza Khan Case

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Iran has issued a warning that it could target and sink the USS Abraham Lincoln with hypersonic missiles if provoked, once again intensifying tensions in the Middle East.

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Mahavatar Narsimha has officially made it to the Oscars 2026 entry list, marking a proud and defining moment for Indian animation. What started as a passion-led project, shaped by belief, patience, and perseverance, has now reached one of the most prestigious global platforms—signalling a major milestone in India’s creative journey.
This recognition goes far beyond a single film. It reflects a larger shift: Indian animation is evolving—becoming more confident, refined, and ready to stand alongside the world’s best storytellers. Rooted in India’s rich mythological legacy and brought to life through powerful visuals and emotionally nuanced storytelling, Mahavatar Narsimha is achieving something rarely seen in Indian animated cinema.
By crossing long-standing barriers and attracting global attention, the film is redefining expectations of what Indian animation can deliver on the international stage. For its creators, this is a moment of validation. For the industry, it opens new doors of possibility. And for India, it is a moment of shared pride—proof that stories grounded in tradition, when told with modern vision, can resonate across the world.
A new chapter is unfolding. Indian animated storytelling is stepping into global recognition with confidence, creativity, and bold ambition.

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