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भारतीय समाज में मंदिरों की रक्षा और सवर्ण हितों की लड़ाई लड़ने वाली एक अनोखी पिता-पुत्र जोड़ी ने देशव्यापी पहचान बना ली है। ये वो सपूत हैं जो हिंदू धरोहर को बचाने और आरक्षण-जातिवाद के खिलाफ खुलकर उतरते हैं। चाहे अयोध्या राम मंदिर विवाद हो या हरिद्वार-काशी के मंदिरों पर कब्जे की धमकी, यह जोड़ी हमेशा सबसे आगे रहती है।

संघर्ष की शुरुआत: पिता का अडिग संकल्प
पिता ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा सामाजिक न्याय के नाम पर हो रही सवर्ण उत्पीड़न के खिलाफ समर्पित किया। 1990 के दशक से वे मंदिरों पर अवैध कब्जों के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं। दिल्ली के चित्रकूट मंदिर से लेकर तमिलनाडु के सबरीमाला तक, हर जगह उनकी आवाज गूंजी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कई PIL दाखिल कीं, जिनमें मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग की। सवर्ण आरक्षण के खिलाफ उनकी सबसे तीखी आलोचना रही—'यह सवर्णों का अपमान है, योग्यता पर चोट।' उनके भाषणों ने लाखों युवाओं को जागृत किया।

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भूटान ने अपने राजकुमार के जन्मदिन पर 1,08,000 पेड़ लगाकर पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संदेश दिया। यह हिमालयी राज्य, जो पृथ्वी का एकमात्र कार्बन-नेगेटिव देश है, ने खुशी और विकास को प्रकृति से जोड़ते हुए एक मिसाल कायम की। बौद्ध संस्कृति में 108 का पवित्र महत्व है, इसलिए ठीक इतने पेड़ लगाए गए—प्रत्येक एक प्रार्थना बनकर।
अनोखे जश्न की शुरुआत
यह पहल 2016 में तब हुई जब राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और रानी जेत्सुन पेमा के पहले पुत्र, क्राउन प्रिंस जिग्मे नामग्याल वांगचुक का जन्म हुआ। देश के 82,000 घरों ने एक-एक पेड़ लगाया, बाकी 26,000 स्वयंसेवकों ने 14 जिलों में रोपे। पर्यटन मंत्रालय ने 'हैप्पीनेस गार्डन' भी खोला, जहां विदेशी पर्यटक अपने देश के नाम पर पेड़ लगा सकें। संयोजक तेनजिन लेक्पेल ने कहा, "पेड़ जीवनदायी हैं—दीर्घायु, स्वास्थ्य, सौंदर्य और करुणा के प्रतीक।"
भूटान की ग्रीन फिलॉसफी
भूटान का संविधान 60% भूमि हमेशा जंगलों में रखने का आदेश देता है। 1972 से लागू 'ग्रॉस नेशनल हैप्पी' सूचकांक आर्थिक विकास को पर्यावरण और कल्याण से जोड़ता है। 2015 में इसने गिनीज रिकॉर्ड बनाया—एक घंटे में 50,000 पेड़ लगाकर। राजपरिवार पर्यावरण का प्रतीक है; राजा पैदल यात्राएं करते हैं, रानी वन संरक्षण में सक्रिय। यह जश्न राजशाही के प्रति भूटानियों की निष्ठा भी दर्शाता है।
वैश्विक प्रेरणा
यह कदम जलवायु परिवर्तन से जूझती दुनिया के लिए मॉडल है।
कार्बन संतुलन: भूटान कार्बन सोखता ज्यादा छोड़ता कम, O2 का भंडार।
सांस्कृतिक एकीकरण: बौद्ध मान्यताओं से पर्यावरण प्रेम।
सार्वजनिक भागीदारी: हर नागरिक साझेदार, कोई जबरदस्ती नहीं।
फरवरी 2026 में, जब दुनिया पेरिस समझौते पर सवाल उठा रही, भूटान याद दिलाता है—जश्न विनाश नहीं, सृजन से मनाएं। यह संदेश सीमाओं से परे है: पेड़ लगाओ, धरती बचाओ। छोटा देश, बड़ा सबक

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एफआईएच प्रो लीगः भारतीय पुरुष हॉकी टीम घोषित
मुख्य कोच क्रेग फुल्टोन टीम संतुलन से खुश
राजस्थान की धावक पूजा डोप टेस्ट नहीं देने के कारण निलम्बित
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। हॉकी इंडिया ने राउरकेला के बिरसा मुंडा अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में दस से 15 फरवरी तक होने वाले एफआईएच प्रो लीग के पहले चरण के लिये 24 सदस्यीय भारतीय पुरूष टीम की घोषणा की। हॉकी इंडिया ने पिछले महीने 33 सम्भावित खिलाड़ियों की सूची जारी की थी जिसे अब घटाकर 24 कर दिया गया है। इस चरण में भारत के अलावा बेल्जियम और अर्जेंटीना की टीमें भाग लेंगी।

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✴️भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष पूरे राजकीय सम्मान के साथ श्रीलंका पहुंचे
✴️कोलंबो के गंगारामया मंदिर में पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया
✴️यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है

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✴️भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष पूरे राजकीय सम्मान के साथ श्रीलंका पहुंचे
✴️कोलंबो के गंगारामया मंदिर में पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया
✴️यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है

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✴️भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष पूरे राजकीय सम्मान के साथ श्रीलंका पहुंचे
✴️कोलंबो के गंगारामया मंदिर में पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया
✴️यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है

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✴️भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष पूरे राजकीय सम्मान के साथ श्रीलंका पहुंचे
✴️कोलंबो के गंगारामया मंदिर में पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया
✴️यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है

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A memorable #parikshapecharcha26 with my young friends. From overcoming exam blues to navigating life’s challenges, it was a truly enriching experience.

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A memorable #parikshapecharcha26 with my young friends. From overcoming exam blues to navigating life’s challenges, it was a truly enriching experience.

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In the city of Jilin, northeast China's Jilin Province, trees started appearing sculpted from crystal on Monday as rime frost blanketed every branch, transforming the winter landscape into a delicate world of ice and white. The combination of water vapor from the Songhua River and low temperatures lead to the enchanting phenomenon. Against the clear azure sky, the frost glistened in the sunlight, showcasing the pure beauty of this natural vista

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