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🚨 तमिलनाडु | न्यायपालिका | द कम्यून ग्राउंड रिपोर्ट....

मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन के एक आदेश ने तमिलनाडु की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। थिरुप्परनकुंड्रम में परंपरागत दीपम प्रज्वलन को लेकर दिए गए आदेश में न्यायालय ने कोई नया अधिकार नहीं दिया, बल्कि वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा को लागू करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद इस आदेश के बाद 100 से अधिक सांसदों द्वारा महाभियोग की पहल ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरोप यह नहीं है कि न्यायाधीश ने कानून तोड़ा, बल्कि यह है कि उन्होंने हिंदू धार्मिक अधिकारों को कानून के दायरे में मान्यता दी। राज्य सरकार द्वारा लंबे समय से कानून व्यवस्था के नाम पर धार्मिक गतिविधियों पर रोक के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में अदालत का हस्तक्षेप राजनीतिक टकराव का कारण बना।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला न्यायिक स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों के संतुलन से जुड़ा है। सवाल यह है कि क्या परंपराओं के संरक्षण को भी अब राजनीतिक कसौटी पर कसा जाएगा।

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शाहरुख खान जिस बांग्लादेशी मुस्तफिजुर रहमान को 9 करोड़ 20 लाख की भारी भरकम रकम देकर आईपीएल नीलामी में अपनी टीम में शामिल कर रहा था।

उसी बंग्लादेश देश में दीपू चन्द्र दास को खंभे में टांगकर पीट-पीटकर जलाया गया।

यह मोटी रकम भी बंग्लादेशी हिंदुओं को मारने पीटने जलाने के ही काम आएगी।

धिक्कार है इस सरकार पर की क्यों दुश्मन देश के खिलाड़ियों को अपने घर में दामाद बनाकर खेलने देती है।
भारत को पाकिस्तान के अधिकारी से ट्राफी लेने में दिक्कत थी लेकिन हजारों बेकसूर हिंदुओं को बेरहमी से मारने वाले बांग्लादेशियों को दामाद बनाकर भारत में खेलने दे रहा है।
यह कैसा दोगलापन है आखिर सरकार बीसीसीआई की ऐसी क्या मजबूरी है।

इसे शाहरुख खान ने अपनी टीम में शामिल किया है वही शाहरुख खान जिसका मन्नत पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए जन्नत बना रहता था।
शोएब अख्तर से लेकर शोएब मलिक तक सब इसके घर में दामाद बनकर रहते थे।

पाकिस्तान बांग्लादेश परस्त जंगजू शाहरुख खान 9 करोड़ एक दुश्मन देश को दिए जबकि भारतीय खिलाड़ियों को बस 30 लाख 75 लाख दिए इसने 90% पैसा विदेशी खिलाड़ियों को दिए यह इसकी गंदी देशविरोधी मानसिकता है।

सोचने की बात यह है कि जब इतना सब होने के बावजूद इसने खुलेआम आईपीएल में दुश्मन देश बांग्लादेश के खिलाड़ी को शामिल किया जंहा रोज़ हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है तो इसने बालिवुड में अपने रसूख का इस्तेमाल करके कितने देशविरोधियों को घुसाया होगा।

हमें आपको चुपचाप बैठकर तमाशा नहीं देखना है बल्कि बहिष्कार करना है।

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शाहरुख खान जिस बांग्लादेशी मुस्तफिजुर रहमान को 9 करोड़ 20 लाख की भारी भरकम रकम देकर आईपीएल नीलामी में अपनी टीम में शामिल कर रहा था।

उसी बंग्लादेश देश में दीपू चन्द्र दास को खंभे में टांगकर पीट-पीटकर जलाया गया।

यह मोटी रकम भी बंग्लादेशी हिंदुओं को मारने पीटने जलाने के ही काम आएगी।

धिक्कार है इस सरकार पर की क्यों दुश्मन देश के खिलाड़ियों को अपने घर में दामाद बनाकर खेलने देती है।
भारत को पाकिस्तान के अधिकारी से ट्राफी लेने में दिक्कत थी लेकिन हजारों बेकसूर हिंदुओं को बेरहमी से मारने वाले बांग्लादेशियों को दामाद बनाकर भारत में खेलने दे रहा है।
यह कैसा दोगलापन है आखिर सरकार बीसीसीआई की ऐसी क्या मजबूरी है।

इसे शाहरुख खान ने अपनी टीम में शामिल किया है वही शाहरुख खान जिसका मन्नत पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए जन्नत बना रहता था।
शोएब अख्तर से लेकर शोएब मलिक तक सब इसके घर में दामाद बनकर रहते थे।

पाकिस्तान बांग्लादेश परस्त जंगजू शाहरुख खान 9 करोड़ एक दुश्मन देश को दिए जबकि भारतीय खिलाड़ियों को बस 30 लाख 75 लाख दिए इसने 90% पैसा विदेशी खिलाड़ियों को दिए यह इसकी गंदी देशविरोधी मानसिकता है।

सोचने की बात यह है कि जब इतना सब होने के बावजूद इसने खुलेआम आईपीएल में दुश्मन देश बांग्लादेश के खिलाड़ी को शामिल किया जंहा रोज़ हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है तो इसने बालिवुड में अपने रसूख का इस्तेमाल करके कितने देशविरोधियों को घुसाया होगा।

हमें आपको चुपचाप बैठकर तमाशा नहीं देखना है बल्कि बहिष्कार करना है।

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शाहरुख खान जिस बांग्लादेशी मुस्तफिजुर रहमान को 9 करोड़ 20 लाख की भारी भरकम रकम देकर आईपीएल नीलामी में अपनी टीम में शामिल कर रहा था।

उसी बंग्लादेश देश में दीपू चन्द्र दास को खंभे में टांगकर पीट-पीटकर जलाया गया।

यह मोटी रकम भी बंग्लादेशी हिंदुओं को मारने पीटने जलाने के ही काम आएगी।

धिक्कार है इस सरकार पर की क्यों दुश्मन देश के खिलाड़ियों को अपने घर में दामाद बनाकर खेलने देती है।
भारत को पाकिस्तान के अधिकारी से ट्राफी लेने में दिक्कत थी लेकिन हजारों बेकसूर हिंदुओं को बेरहमी से मारने वाले बांग्लादेशियों को दामाद बनाकर भारत में खेलने दे रहा है।
यह कैसा दोगलापन है आखिर सरकार बीसीसीआई की ऐसी क्या मजबूरी है।

इसे शाहरुख खान ने अपनी टीम में शामिल किया है वही शाहरुख खान जिसका मन्नत पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए जन्नत बना रहता था।
शोएब अख्तर से लेकर शोएब मलिक तक सब इसके घर में दामाद बनकर रहते थे।

पाकिस्तान बांग्लादेश परस्त जंगजू शाहरुख खान 9 करोड़ एक दुश्मन देश को दिए जबकि भारतीय खिलाड़ियों को बस 30 लाख 75 लाख दिए इसने 90% पैसा विदेशी खिलाड़ियों को दिए यह इसकी गंदी देशविरोधी मानसिकता है।

सोचने की बात यह है कि जब इतना सब होने के बावजूद इसने खुलेआम आईपीएल में दुश्मन देश बांग्लादेश के खिलाड़ी को शामिल किया जंहा रोज़ हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है तो इसने बालिवुड में अपने रसूख का इस्तेमाल करके कितने देशविरोधियों को घुसाया होगा।

हमें आपको चुपचाप बैठकर तमाशा नहीं देखना है बल्कि बहिष्कार करना है।

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मार्गशी के भजन से शांति दूतों को दिक्कत क्यों?

और दिक्कत है तो पाकिस्तान या बांग्लादेश चले जाओ बे नमक हालामों 😡

ड्रग केस में आरोपी रहे इस्लामो-द्रविड़ियन विचारधारा से जुड़े फ़िल्म निर्देशक "अमीर सुल्तान" को अब तमिल संस्कृति के सबसे पवित्र महीने मार्गशी के भजनों से समस्या हो गई है।

वही मार्गशी, जिसमें पीढ़ियों से तमिल हिंदू समाज सुबह-सुबह भक्ति संगीत, सुप्रभातम और मंदिर परंपराओं के साथ दिन की शुरुआत करता आया है।

हिंदू आस्था और परंपराओं को बार-बार “नीचा दिखाने” बताने और दिखाने की हिम्मत कहाँ से आती है इन मुगल पुत्रों में ?

अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर हिंदू रीति-रिवाज़ों को निशाना बनाने की हिम्मत कहां से आ रही है ??

शायद इस लिए कि याद इंडी गठबंधन की सरकार है ??

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निशा चटर्जी बाबरी मस्जिद का सपोर्ट करती थी और जब बंगाल में बाबरी नाम से मस्जिद की नींव रखी गई तब भी देश भर के विरोध के बाद भी निशा जी हुमायूं कबीर के साथ रही

इसके बाद हुमायूं कबीर को डैमेज कंट्रोल के लिए TMC ने निकाल दिया तो उसने अपनी पार्टी खड़ी कर दी और अपने उम्मीदवार के रूप में निशा चटर्जी को खड़ा कर दिया

लेकिन जैसे ही पता चला कि सीट तो मुस्लिम समुदाय के बहुल वाला है, तो फौरन निशा जी का नाम काट दिया गया और एक मुस्लिम नाम वाले को टिकट दे दी गई

अब निशा जी जो भाईचारे और सेक्युलर की जबर पैरोकार थी, उनको लग गया झटका

अब सबको कहे जा रही है कि उनका धर्म देखकर हुमायूं कबीर ने उसका टिकट काटा है

अब मुस्लिम बहुल है इसका ये मतलब तो नहीं कि हिंदू को टिकट नहीं दिया जा सकता, ये तो सेक्युलरिज्म नहीं है, अगर इनकी पार्टी सेकुलर होती तो मेरा टिकट नहीं काटते

इन सेकुलर लोगों की अक्ल तभी खुलती है जब खुद पर कुछ बीते, नहीं तो इनको सब RSS, बीजेपी का प्रोपेगैंडा ही तब तक लगता रहता है जब तक ये इन तक पहुंच नहीं जाते।

ऐसे दोगले हिंदू नेताओं से सदैव दूरी बनाकर रखें 🙏

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मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले एक मुस्लिम युवक ने जीवन का सबसे बड़ा और साहसिक निर्णय लेते हुए इस्लाम धर्म का त्याग कर सनातन हिंदू धर्म को अपनाया है।

मध्य प्रदेश सागर निवासी आदम खान ने उत्तर प्रदेश के पवित्र नगर काशी (बनारस) जाकर पूरे विधि-विधान और सनातन परंपराओं के साथ घर वापसी की।हिंदू धर्म अपनाने के पश्चात उनका नया नाम अथर्व त्यागी रखा गया।

अथर्व त्यागी ने काशी में......
→ गंगा स्नान किया
→ मुंडन संस्कार कराया
→ विधिपूर्वक पूजा-पाठ और हवन संपन्न किया
→ बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया
→ शिवलिंग का अभिषेक किया

इसके पश्चात वह संध्या कालीन गंगा आरती में भी सम्मिलित हुए और पूरी सनातन रीति-रिवाजों के साथ घर वापसी की।

यह निर्णय केवल धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि आस्था, आत्मबोध और सनातन संस्कृति की ओर लौटने का प्रतीक है।

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मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले एक मुस्लिम युवक ने जीवन का सबसे बड़ा और साहसिक निर्णय लेते हुए इस्लाम धर्म का त्याग कर सनातन हिंदू धर्म को अपनाया है।

मध्य प्रदेश सागर निवासी आदम खान ने उत्तर प्रदेश के पवित्र नगर काशी (बनारस) जाकर पूरे विधि-विधान और सनातन परंपराओं के साथ घर वापसी की।हिंदू धर्म अपनाने के पश्चात उनका नया नाम अथर्व त्यागी रखा गया।

अथर्व त्यागी ने काशी में......
→ गंगा स्नान किया
→ मुंडन संस्कार कराया
→ विधिपूर्वक पूजा-पाठ और हवन संपन्न किया
→ बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया
→ शिवलिंग का अभिषेक किया

इसके पश्चात वह संध्या कालीन गंगा आरती में भी सम्मिलित हुए और पूरी सनातन रीति-रिवाजों के साथ घर वापसी की।

यह निर्णय केवल धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि आस्था, आत्मबोध और सनातन संस्कृति की ओर लौटने का प्रतीक है।

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मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले एक मुस्लिम युवक ने जीवन का सबसे बड़ा और साहसिक निर्णय लेते हुए इस्लाम धर्म का त्याग कर सनातन हिंदू धर्म को अपनाया है।

मध्य प्रदेश सागर निवासी आदम खान ने उत्तर प्रदेश के पवित्र नगर काशी (बनारस) जाकर पूरे विधि-विधान और सनातन परंपराओं के साथ घर वापसी की।हिंदू धर्म अपनाने के पश्चात उनका नया नाम अथर्व त्यागी रखा गया।

अथर्व त्यागी ने काशी में......
→ गंगा स्नान किया
→ मुंडन संस्कार कराया
→ विधिपूर्वक पूजा-पाठ और हवन संपन्न किया
→ बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया
→ शिवलिंग का अभिषेक किया

इसके पश्चात वह संध्या कालीन गंगा आरती में भी सम्मिलित हुए और पूरी सनातन रीति-रिवाजों के साथ घर वापसी की।

यह निर्णय केवल धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि आस्था, आत्मबोध और सनातन संस्कृति की ओर लौटने का प्रतीक है।

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