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लुधियाना में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री Nitin Nabin जी ने सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, राज्य पदाधिकारियों एवं जिला अध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित किया।
बैठक में संगठन को और अधिक सशक्त बनाने, आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तथा पंजाब में भाजपा के जनाधार को विस्तार देने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के मार्गदर्शन ने सभी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह और ऊर्जा का संचार किया।

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लुधियाना में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री Nitin Nabin जी ने सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, राज्य पदाधिकारियों एवं जिला अध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित किया।
बैठक में संगठन को और अधिक सशक्त बनाने, आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तथा पंजाब में भाजपा के जनाधार को विस्तार देने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के मार्गदर्शन ने सभी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह और ऊर्जा का संचार किया।

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लुधियाना में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री Nitin Nabin जी ने सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, राज्य पदाधिकारियों एवं जिला अध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित किया।
बैठक में संगठन को और अधिक सशक्त बनाने, आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तथा पंजाब में भाजपा के जनाधार को विस्तार देने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के मार्गदर्शन ने सभी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह और ऊर्जा का संचार किया।

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11 साल की जुड़वां बेटियों की ह"त्या के बाद जेल में खुद की ग"र्दन का"टी! आरोपी पिता बोला - "मुझे कोई पछतावा नहीं" 😱⚖️
कानपुर का यह मामला पूरे देश को झकझोर देने वाला है। 48 वर्षीय शशि रंजन मिश्रा, जो अपनी 11 साल की जुड़वां बेटियों ऋद्धि और सिद्धि की ह"त्या के आरोप में जेल में बंद है, ने जेल के अंदर आ"त्महत्या की कोशिश कर सनसनी फैला दी। अधिकारियों के अनुसार उसने स्टील की थाली को घिसकर धारदार बनाया और उससे अपना ग"ला काटने की कोशिश की। साथी कैदियों और जेल कर्मियों की सतर्कता से उसकी जा"न बच गई और उसे तुरंत अ"स्पताल में भर्ती कराया गया।
इस मामले ने पहले ही लोगों को स्तब्ध कर दिया था। अप्रैल में कानपुर के नौबस्ता क्षेत्र स्थित घर में जुड़वां बेटियां मृ"त पाई गई थीं। पुलिस के अनुसार, शशि रंजन मिश्रा ने खुद पुलिस को फोन कर घटना की सूचना दी थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में सामने आया कि दोनों बच्चियों की ह"त्या धारदार हथियार से की गई थी।
जेल में आ"त्महत्या की कोशिश के बाद आरोपी के बयान ने लोगों को और हैरान कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने कहा कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है और यदि उसे फांसी की सजा भी मिलती है तो वह स्वीकार करेगा। वहीं पूछताछ में उसने आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर डर जैसी बातें भी बताईं। दूसरी ओर, जेल अधिकारियों ने यह जांच शुरू कर दी है कि आखिर उसने थाली को हथियार में कैसे बदल लिया।
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक तनाव और समाज में बेटियों को लेकर सोच पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। 😔💔
👉 क्या आपको लगता है कि मानसिक तनाव किसी भी हाल में ऐसी घटना का कारण बन सकता है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। 👇

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सत्य वचन ❤️❤️❤️❤️❤️❤️

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भारतीय मुक्केबाज ज्योति गुलिया ने जमाया स्वर्णिम पंच
भारत ने कुल छह पदकों के साथ किया सफर का अंत
खेलपथ संवाद
गुइयांग (चीन)। चीन में आयोजित विश्व बॉक्सिंग कप 2 में भारतीय मुक्केबाज ज्योति गुलिया ने रविवार को रिंग में बेहतरीन और दमदार प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में एकमात्र स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) डाल दिया। ज्योति ने 48 किलोग्राम भारवर्ग के कड़े फाइनल मुकाबले में उज्बेकिस्तान की मुक्केबाज फरजोना फोजिलोवा को धूल चटाई। इसके साथ ही भारतीय मुक्केबाजों ने दमदार खेल का प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता में तीन और रजत पदक (सिल्वर मेडल) भी अपने नाम किए।

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आज के इस मतलबी दौर में जहाँ लोग अपनों के लिए भी समय नहीं निकाल पाते, वहाँ कोई पति-पत्नी अपने संडे की नींद और सुकून को त्याग कर खामोशी से हज़ारों अजनबियों की भूख मिटाने में लग जाए—तो समझ जाना कि इंसानियत आज भी जिंदा है! ❌🥞❤️
मुंबई की भागदौड़ भरी ज़िंदगी से आई यह तस्वीर कोई मामूली फोटो नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। मिलिए पूजा डेढ़िया और दीपेश डेढ़िया से, जो हर रविवार को जब पूरी दुनिया गहरी नींद में सो रही होती है, ठीक सुबह 4 बजे उठ जाते हैं। वे किसी ट्रिप पर जाने के लिए नहीं उठते, बल्कि अपनी रसोई में 100 से ज़्यादा गरीब बच्चों, मज़दूरों और ज़रूरतमंदों के लिए अपने हाथों से ताज़ा और पौष्टिक नाश्ता तैयार करने के लिए जागते हैं।
'मातोश्री फाउंडेशन' के तहत चल रही इस रसोई की नीयत और कहानी बेहद खूबसूरत है:
एक पुराना कर्ज, एक नया संकल्प: दीपेश भाई जब छोटे बच्चे थे, तो एक बेहद गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उस वक्त एक बिल्कुल अनजान ब्लड डोनर ने खून देकर उनकी जान बचाई थी। दीपेश उस मसीहा को कभी ढूंढ तो नहीं पाए, लेकिन उन्होंने और उनकी पत्नी पूजा ने तय किया कि वे उस अनजान इंसान के अहसान का कर्ज समाज के गरीब लोगों की सेवा करके चुकाएंगे।
क्वालिटी से कोई समझौता नहीं: वे कोई बचा-कुचा खाना नहीं बांटते, बल्कि अपने घर के सदस्यों की तरह पूरी शुद्धता और इज़्ज़त के साथ बढ़िया खाना तैयार करते हैं। साल 2023 से शुरू हुआ यह सफर आज 2026 में भी बिना एक भी संडे मिस किए लगातार जारी है और वे अब तक 15,000 से ज्यादा मुफ्त थालियां परोस चुके हैं।
आज सोशल मीडिया पर 'कपल गोल्स' के नाम पर महंगे होटलों और विदेशी दौरों की रील्स बनाकर दिखावा करने वाले लाखों लोग मिल जाएंगे भाई, लेकिन असली और सबसे खूबसूरत 'कपल गोल्स' ये हैं जो भूखे पेट को तृप्त कर रहे हैं। बिना किसी सरकारी मदद या बड़े प्रचार के, चुपचाप समाज का पेट भरने वाले इस सच्चे और नेक दिल जोड़े को 'अच्छे विचार' का झुककर कड़क सलाम! 🫡🇮🇳👑✨
PC: pooja_dipesh_dedhia

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बेटियों को शादी ही मत करो,अपने घर में रखो,मृतक दीपिका नगर के चाचा का बयान सुन आपकी भी आंखों में आ जाएगी आंसू

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नगर सेठ अमरचन्द बांठिया / बलिदान दिवस - 22 जून
स्वाधीनता समर के अमर सेनानी सेठ अमरचन्द मूलतः बीकानेर (राजस्थान) के निवासी थे। वे अपने पिता श्री अबीर चन्द बाँठिया के साथ व्यापार के लिए ग्वालियर आकर बस गये थे। जैन मत के अनुयायी अमरचन्द जी ने अपने व्यापार में परिश्रम, ईमानदारी एवं सज्जनता के कारण इतनी प्रतिष्ठा पायी कि ग्वालियर राजघराने ने उन्हें नगर सेठ की उपाधि देकर राजघराने के सदस्यों की भाँति पैर में सोने के कड़े पहनने का अधिकार दिया। आगे चलकर उन्हें ग्वालियर के राजकोष का प्रभारी नियुक्त किया।
अमरचन्द जी बड़े धर्मप्रेमी व्यक्ति थे। 1855 में उन्होंने चातुर्मास के दौरान ग्वालियर पधारे सन्त बुद्धि विजय जी के प्रवचन सुने। इससे पूर्व वे 1854 में अजमेर में भी उनके प्रवचन सुन चुके थे। उनसे प्रभावित होकर वे विदेशी और विधर्मी राज्य के विरुद्ध हो गये। 1857 में जब अंग्रेजों के विरुद्ध भारतीय सेना और क्रान्तिकारी ग्वालियर में सक्रिय हुए, तो सेठ जी ने राजकोष के समस्त धन के साथ अपनी पैतृक सम्पत्ति भी उन्हें सौंप दी।
उनका मत था कि राजकोष जनता से ही एकत्र किया गया है। इसे जनहित में स्वाधीनता सेनानियों को देना अपराध नहीं है और निजी सम्पत्ति वे चाहे जिसे दें; पर अंग्रेजों ने राजद्रोही घोषित कर उनके विरुद्ध वारण्ट जारी कर दिया। ग्वालियर राजघराना भी उस समय अंग्रेजों के साथ था।

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