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#आपका_विधायक_आपके_द्वार

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नागालैंड के लोक कला गुरु Sangyusang S. Pongener को कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया गया है।
संगयुसांग एस. पोंगेनर ने वर्षों तक नागालैंड की लोक कला, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया है। उनकी मेहनत की बदौलत कई पारंपरिक कलाएं आज भी जीवित हैं।
पद्म श्री सम्मान मिलने के बाद उनकी कहानी देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे उन गुमनाम कलाकारों और सांस्कृतिक कर्मियों के सम्मान के रूप में देख रहे हैं, जो वर्षों से बिना किसी प्रचार-प्रसार के अपनी संस्कृति को बचाने में लगे हुए हैं।
ऐसे सम्मान यह संदेश देते हैं कि देश के दूर-दराज़ इलाकों में रहकर समाज और संस्कृति के लिए काम करने वाले लोगों के योगदान को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।
संगयुसांग एस. पोंगेनर की यह उपलब्धि न केवल नागालैंड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उनकी कहानी यह बताती है कि समर्पण और सेवा कभी अनदेखी नहीं रहती।
#padmashri #nagaland #sangyusangpongener #culture #folkart #india #prideofindia #awards

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“साहब, मेरे पास दिल्ली आने के पैसे नहीं हैं, कृपया पद्मश्री डाक से भेज दीजिए” - यह बात कहने वाले कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि ओडिशा के मशहूर लोक कवि हलधर नाग थे। 2016 में साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री पाने वाले हलधर नाग की सादगी ने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया।
सफेद धोती, गमछा, बनियान और नंगे पांव जब वह राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से सम्मान लेने पहुंचे, तो हर आंख ठहर गई। गरीबी, संघर्ष और साधना की यह मिसाल ओडिशा के बरगढ़ जिले से निकली थी। 10 साल की उम्र में माता पिता को खोने के बाद पढ़ाई छूटी, ढाबे में जूठे बर्तन धोए, स्कूल में बावर्ची बने और छोटी सी स्टेशनरी दुकान चलाई।
लेकिन लिखना नहीं छोड़ा। 1990 में पहली कविता छपी और फिर कोसली भाषा में 20 महाकाव्य रचे, जो आज भी उन्हें शब्दशः याद हैं।
यह कहानी बताती है कि सच्ची दौलत शब्दों की शक्ति, स्मृति की साधना और जमीन से जुड़ी रचनात्मकता होती है। हलधर नाग ने साबित किया है कि गरीबी कभी प्रतिभा की सीमा नहीं बनती।
#haldharnag #padmashri #koslipoet #indianpoetry #simpleliving #inspiration #odishapride

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रा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें।
आज पंजाब, मोगा में Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) की उस पावन शाखा में सहभागी होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसकी पवित्र माटी वीर स्वयंसेवकों के त्याग, तप और बलिदान से धन्य हुई है।
25 जून 1989 के कायराना आतंकी हमले के बाद भी जिस शाखा की परंपरा नहीं रुकी, आज उस पावन स्थल पर उपस्थित होकर पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी हमले में बलिदान देने वाले अमर स्वयंसेवकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनका सर्वोच्च बलिदान हमें राष्ट्र की एकता, अखंडता, सनातन संस्कृति, पंजाबियत और हिंदू-सिख भाईचारे की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहकर कार्य करने की प्रेरणा देता है।

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रा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें।
आज पंजाब, मोगा में Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) की उस पावन शाखा में सहभागी होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसकी पवित्र माटी वीर स्वयंसेवकों के त्याग, तप और बलिदान से धन्य हुई है।
25 जून 1989 के कायराना आतंकी हमले के बाद भी जिस शाखा की परंपरा नहीं रुकी, आज उस पावन स्थल पर उपस्थित होकर पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी हमले में बलिदान देने वाले अमर स्वयंसेवकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनका सर्वोच्च बलिदान हमें राष्ट्र की एकता, अखंडता, सनातन संस्कृति, पंजाबियत और हिंदू-सिख भाईचारे की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहकर कार्य करने की प्रेरणा देता है।

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रा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें।
आज पंजाब, मोगा में Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) की उस पावन शाखा में सहभागी होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसकी पवित्र माटी वीर स्वयंसेवकों के त्याग, तप और बलिदान से धन्य हुई है।
25 जून 1989 के कायराना आतंकी हमले के बाद भी जिस शाखा की परंपरा नहीं रुकी, आज उस पावन स्थल पर उपस्थित होकर पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी हमले में बलिदान देने वाले अमर स्वयंसेवकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनका सर्वोच्च बलिदान हमें राष्ट्र की एकता, अखंडता, सनातन संस्कृति, पंजाबियत और हिंदू-सिख भाईचारे की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहकर कार्य करने की प्रेरणा देता है।

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रा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें।
आज पंजाब, मोगा में Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) की उस पावन शाखा में सहभागी होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसकी पवित्र माटी वीर स्वयंसेवकों के त्याग, तप और बलिदान से धन्य हुई है।
25 जून 1989 के कायराना आतंकी हमले के बाद भी जिस शाखा की परंपरा नहीं रुकी, आज उस पावन स्थल पर उपस्थित होकर पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी हमले में बलिदान देने वाले अमर स्वयंसेवकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनका सर्वोच्च बलिदान हमें राष्ट्र की एकता, अखंडता, सनातन संस्कृति, पंजाबियत और हिंदू-सिख भाईचारे की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहकर कार्य करने की प्रेरणा देता है।

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✨ राधे राधे ✨

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