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बहन फाउंडेशन के तत्वावधान में आज कैंप कार्यालय में बहन रीता मिश्रा और सुनीता यादव का केक काटकर जन्मदिन मनाया।
ईश्वर से दोनों बहनों के जीवन में सुख, समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य कामना की।
#sevakajaykopoor #bjp #bjp4india #bjp4up #kanpur happybirthday

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बहन फाउंडेशन के तत्वावधान में आज कैंप कार्यालय में बहन रीता मिश्रा और सुनीता यादव का केक काटकर जन्मदिन मनाया।
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बहन फाउंडेशन के तत्वावधान में आज कैंप कार्यालय में बहन रीता मिश्रा और सुनीता यादव का केक काटकर जन्मदिन मनाया।
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एआई के विकास में मानवीय गरिमा को प्राथमिकता जरूरी
प्राइवेसी, रोजगार, असमानता और मानवीय मूल्यों से जुड़े खतरे भी
अश्विनी कुमार
मानवता के लिए एआई के करिश्माई फायदे सामने आ रहे हैं। यह तकनीक स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सक्षम है लेकिन इससे प्राइवेसी, रोजगार, असमानता और मानवीय मूल्यों से जुड़े खतरे भी हैं। विशेषज्ञों व नीति नियंताओं का दायित्व है कि एआई के उपयोग में मानवीय गरिमा तथा प्रभावी वैश्विक नियमन को प्राथमिकता मिले।

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पदक सम्भावना ही होगी एशियाड में खिलाड़ियों के चयन का आधार
खेल मंत्री मनसुख मांडविया बोले- एशियन गेम्स कोई एक्सपोजर टूर नहीं
भारतीय फुटबॉल टीम इस बार एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएगी
खेलपथ संवाद
नई दिल्ली। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि एशियन गेम्स 2026 किसी भी खिलाड़ी के लिए एक्सपोजर टूर नहीं है। उन्होंने कहा कि जापान के आइची-नागोया में 19 सितम्बर से चार अक्टूबर तक होने वाले एशियन गेम्स में भारत की ओर से केवल वही खिलाड़ी भेजे जाएंगे, जिनके पास पदक जीतने की वास्तविक सम्भावना होगी। मांडविया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारतीय दल का आकार करीब 600 खिलाड़ियों तक सीमित रखा जाएगा, ताकि केवल प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों का चयन हो।

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सरल व सौम्य शालिगराम तोमर
संघ के वरिष्ठ प्रचारक, सरल व सौम्य व्यवहार के धनी, समयपालन व अनुशासनप्रिय श्री शालिगराम तोमर का जन्म मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के ग्राम पोलायकलां में चार जुलाई, 1941 को एक सामान्य किसान परिवार में हुआ था। इनके पिता श्री उमराव सिंह तथा माता श्रीमती आशीबाई थीं।
शालिगराम जी की प्राथमिक शिक्षा अपने गांव में हुई। गांव में शाखा लगने पर अपने बड़े भाई श्री रामप्रसाद तोमर के साथ वे भी शाखा में जाने लगे। धीरे-धीरे संघ के विचार और शाखा के कार्यक्रमों के प्रति उनका अनुराग बढ़ता चला गया। कुछ समय बाद उन्हें ही शाखा का मुख्यशिक्षक बना दिया गया। इस काल में शाखा में भरपूर संख्यात्मक एवं गुणात्मक वृद्धि हुई। अतः तहसील और जिले के अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता उनकी शाखा पर आये।
तत्कालीन व्यवस्था के अनुसार अल्पावस्था में ही उनका विवाह हो गया। उनकी पत्नी का नाम श्रीमती शांता देवी था। कुछ समय बाद उनके घर में एक पुत्री ने जन्म लिया, जिसका नाम मानकुंवर रखा गया। अब वे अपनी आगामी शिक्षा पूर्ण करने के लिए जिला केन्द्र शाजापुर आ गये। यहां पढ़ाई के साथ ही संघ कार्य की गति भी बढ़ने लगी। 1965 में हायर सैकेंड्री कर उन्होंने स्वयं को संघ कार्य के लिए समर्पित कर दिया।

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