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'We'll mix sleeping pills in tea and steal votes', Bengal Chief Minister Mamata Banerjee's major allegation against BJP
Ahead of the West Bengal elections, Mamata Banerjee has made serious allegations against the BJP in several rallies, including threatening candidates, conspiring to divide Bengal, the SIR scam, and voting irregularities, and appealed to the public to stay vigilant. She also claimed that the BJP might introduce a delimitation bill in the next 15 days.
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नेपाल की राजनीति से जुड़ी एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि गृह मंत्री सुदान गुरूंग ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सबसे पहले अपने ही घर पर बुलडोज़र चलवाया। सुनने में यह कहानी बेहद प्रभावशाली लगती है, क्योंकि यह उस आदर्श नेतृत्व की झलक दिखाती है जहाँ नेता खुद को कानून से ऊपर नहीं मानता।
लेकिन सच यही है कि सोशल मीडिया पर हर वायरल दावा पूरी तरह सही हो—ऐसा जरूरी नहीं। कई बार अधूरी या गलत जानकारी भी भावनाओं के साथ तेजी से फैल जाती है। इसलिए किसी भी खबर को आगे बढ़ाने से पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
अगर वाकई कोई नेता ऐसा कदम उठाता है, तो यह निश्चित रूप से एक मजबूत और सकारात्मक संदेश देता है कि कानून सबके लिए बराबर है। लेकिन लोकतंत्र में असली बदलाव किसी एक घटना से नहीं, बल्कि लगातार पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही से आता है।
इसलिए जरूरी है कि हम भावनाओं में बहने के बजाय तथ्यों पर भरोसा करें और जागरूक नागरिक बनें।
एलपीजी सिलेंडर की सुरक्षा और उसका काम करने का वैज्ञानिक तरीका बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण है, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। आमतौर पर लोगों को लगता है कि सिलेंडर पूरी तरह गैस से भरा होना चाहिए, लेकिन सच्चाई यह है कि उसमें लगभग 15% खाली जगह (Ullage Space) जानबूझकर छोड़ी जाती है, और यही खाली हिस्सा सिलेंडर की सबसे बड़ी सुरक्षा ढाल होता है। सिलेंडर के अंदर एलपीजी बहुत अधिक दबाव में तरल (Liquid) रूप में मौजूद होती है, लेकिन जैसे ही ऊपर थोड़ी जगह मिलती है, यह तरल गैस में बदलने लगती है। जब हम चूल्हा जलाते हैं, तो ऊपर जमा यही गैस बाहर निकलती है, जिससे अंदर का दबाव कम होता है और नीचे का तरल फिर से वाष्प बनकर उस जगह को भर देता है। अगर सिलेंडर पूरी तरह लिक्विड से भरा होता, तो यह प्रक्रिया संभव ही नहीं हो पाती।
दूसरी ओर, तापमान का प्रभाव भी बहुत अहम भूमिका निभाता है। एलपीजी में थर्मल एक्सपैंशन (Thermal Expansion) बहुत अधिक होता है, यानी गर्मी मिलने पर यह तेजी से फैलती है। गर्मियों में या रसोई की गर्मी से जब सिलेंडर का तापमान बढ़ता है, तो अंदर का लिक्विड फैलने लगता है। ऐसे में वही 15% खाली जगह इस फैलाव को समायोजित करने का काम करती है। यदि यह जगह न हो, तो फैलता हुआ लिक्विड सिलेंडर की दीवारों पर अत्यधिक दबाव डाल सकता है, जिससे विस्फोट जैसी खतरनाक स्थिति बन सकती है। इसके अलावा, अगर सिलेंडर पूरी तरह भरा हो, तो रेगुलेटर खोलते समय गैस के बजाय तरल एलपीजी पाइप में आ सकती है, जो अचानक फैलकर खतरनाक आग का कारण बन सकती है। यही खाली जगह सुनिश्चित करती है कि केवल गैस ही बाहर निकले, न कि तरल।
इसी वैज्ञानिक और सुरक्षा सिद्धांत के आधार पर घरेलू एलपीजी सिलेंडर में 14.2 किलो गैस ही भरी जाती है, जबकि उसकी कुल जल क्षमता (वाटर कैपेसिटी) लगभग 33.3 लीटर होती है। यह मात्रा इस तरह तय की गई है कि सिलेंडर के अंदर सुरक्षित दबाव बना रहे और एक जरूरी सुरक्षा मार्जिन हमेशा मौजूद रहे। यानी यह 15% खाली जगह सिर्फ एक डिजाइन नहीं, बल्कि एक जीवन रक्षक व्यवस्था है, जो हमें अनजाने में बड़े खतरों से बचाती है।
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो मरने के बाद फिर से ज़िंदा हो जाते हैं, और पूरी दुनिया में ऐसे करीब 400 केस बताए जाते हैं। इन लोगों के अनुभव सुनकर किसी का भी दिमाग हिल सकता है। इस घटना को Near-Death Experience (NDE) कहा जाता है, जिसमें इंसान मौत के बेहद करीब पहुंचकर वापस लौट आता है और अपने अनुभव को विस्तार से बताता है। हैरानी की बात यह है कि अलग-अलग लोगों के अनुभव काफी हद तक एक जैसे ही होते हैं—जैसे आत्मा का शरीर से अलग होना, खुद को ऊपर से देखना, और एक अजीब सी हल्केपन की अनुभूति होना।
कई लोग बताते हैं कि उन्हें ऐसा लगा जैसे वे किसी अंधेरी सुरंग (tunnel) से गुजर रहे हों, जिसके अंत में एक तेज रोशनी दिखाई देती है। उस दौरान उन्हें एक गहरी शांति महसूस होती है, जैसे सारी परेशानियां खत्म हो गई हों। कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि मरने के बाद भी दिमाग कुछ मिनटों तक सक्रिय रह सकता है, और कुछ रिपोर्ट्स में लगभग 7 मिनट तक brain activity दर्ज की गई है। इसी दौरान लोगों को अपनी पूरी जिंदगी एक फिल्म की तरह तेजी से सामने गुजरती हुई महसूस होती है—हर याद, हर खुशी और हर दर्द एक साथ।
हालांकि, विज्ञान अभी तक इस रहस्य को पूरी तरह समझ नहीं पाया है कि ये अनुभव किसी दूसरी दुनिया से जुड़े हैं या सिर्फ दिमाग की आखिरी गतिविधि का परिणाम हैं। यह एक ऐसा सवाल है जिसका स्पष्ट जवाब आज भी नहीं मिला है। हो सकता है ये सब एक illusion हो, या इसके पीछे कोई गहरी सच्चाई छिपी हो—लेकिन एक बात जरूर समझ आती है कि जिंदगी बेहद कीमती और सीमित है, क्योंकि जो भी है, सब कुछ इसी एक life में है !