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“हर आवश्यकता में साथ, हर क्षण जनसेवा के संकल्प के साथ।”
#भाजपा #lic की तरह है। जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी।
हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह हेतु दो चरण पादुका निर्माण कार्य का विधि-विधान से शुभारंभ हुआ। लगभग ₹3 लाख की लागत से होने वाला यह निर्माण कार्य अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सम्मानजनक बनाएगा।
शिलान्यास का पूजन डोम समाज के वरिष्ठ नागरिक श्री अमरनाथ चौधरी जी द्वारा संपन्न कराया गया। इस अवसर पर क्षेत्रीय मा. पार्षद श्री राजेश यादव 'चल्लू' जी ने नारियल फोड़ा, जबकि शिलापट्ट का अनावरण वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता श्री शरद यादव जी एवं डोम समाज से श्री बहादुर चौधरी जी ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों, मातृशक्ति एवं भाजपा कार्यकर्ताओं का पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण कर अभिनंदन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ
इस अवसर पर श्री गुरुदेव चौधरी जी, श्री विशाल चौधरी जी, श्री कन्हैया यादव जी, श्री संगम चौधरी जी, श्री श्याम जी यादव जी, श्री गोलू केसरी जी, श्री दीनानाथ चौधरी जी, श्री महेश यादव जी, श्री शेरू यादव जी, श्री पंडित उमाशंकर त्रिपाठी जी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जनसेवा, जनसुविधा और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए हम निरंतर प्रतिबद्ध हैं। आप सभी के सहयोग और विश्वास से ऐसे कार्य सफल हो रहे हैं।
#विकास #आपका_विधायक_आपके_द्वार #विधायक #विधायक_आपके_द्वार #sevasankalp #bjpharghar #bjp4up #bjp4ind #bjp4people #भाजपा

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हरिद्वार आज के दर्शन, 6 जनवरी🙏 #haridwar #harkipauri #reelsfbviral #viralreelschallenge #reelsfbシ #ganga

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मुंशी प्रेमचंद : गरीबी में पली महानता की अमर कहानी
मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के वो स्तंभ थे, जिनकी कलम ने भूख, गरीबी, अन्याय और इंसानियत की आवाज़ को शब्द दिए। उनका वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, पर दुनिया ने उन्हें प्रेमचंद के नाम से जाना—और आज भी उसी नाम से सम्मान दिया जाता है।
प्रेमचंद जितने महान लेखक थे, उतने ही गरीब इंसान भी थे। जीवन भर उन्होंने दूसरों के दुःख लिखे, लेकिन अपने दुःख कभी शब्दों में नहीं ढाले। कई बार ऐसा हुआ कि घर में रात का भोजन नहीं होता था, इलाज के लिए पैसे नहीं होते थे, फिर भी उनकी कलम कभी रुकी नहीं।
✒️ एक सच्ची घटना
जब प्रेमचंद हंस पत्रिका के संपादक थे, तब वे अक्सर दूसरे लेखकों को अपनी जेब से पैसे दे देते थे, जबकि खुद कर्ज़ में डूबे रहते थे।
एक दिन उनकी पत्नी शिवरानी देवी ने उनसे पूछा—
“जब हमारे पास खुद कुछ नहीं है, तो आप दूसरों की इतनी मदद क्यों करते हैं?”
प्रेमचंद ने शांत स्वर में उत्तर दिया—
“अगर मेरी कहानियाँ भूख और अन्याय पर लिखी जाती हैं,
और मैं किसी भूखे लेखक को लौटा दूँ,
तो मेरी कलम झूठी हो जाएगी।”
यही वाक्य उनके पूरे जीवन का सार है।
🕯️ गरीबी में अंतिम सांस
सन् 1936 में मुंशी प्रेमचंद का निधन हो गया।
ना इलाज के लिए पर्याप्त पैसे थे,
ना आराम के साधन,
ना वैभव।
जिस व्यक्ति ने गोदान, कफ़न, निर्मला जैसी अमर रचनाएँ दीं—
वह कर्ज़ और अभाव में इस दुनिया से चला गया।
🌼 सच्ची महानता
प्रेमचंद ने यह सिद्ध कर दिया कि—
“महानता धन से नहीं,
दूसरों के दुःख को समझने की क्षमता से आती है।”
वे धन में गरीब थे,
लेकिन मानवता में अपार धनी।
आज भी उनकी कहानियाँ
किसानों की पीड़ा बोलती हैं,
गरीबों की भूख बताती हैं,
और समाज को आईना दिखाती हैं।
मुंशी प्रेमचंद मर सकते हैं,
पर उनकी कलम—
कभी नहीं।

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माननीय खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह ने आज सुबह मुख्यमंत्री आवास में माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार से मिलकर नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं। साथ में खेल विभाग के विशेष सचिव श्री महेन्द्र कुमार और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रवीन्द्रण शंकरण भी उपस्थित रहे।
#dilsekhelomilkejeeto #bssa #biharrising #sports #biharsports

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"कौन कहता है कि अफसर बनने के लिए परंपरा छोड़नी पड़ती है? असली सशक्तिकरण तो जड़ों से जुड़कर आसमान छूने में है। 🇮🇳
सिर पर चुनरी और हाथ में कलम, यही है नए भारत की नारी शक्ति। 'तहसीलदार' की कुर्सी पर बैठकर भी अपनी संस्कृति को जो मान दिया है, वो काबिले तारीफ है।
सशक्त नारी, समृद्ध समाज! 👑✍️"
#narishakti #womenempowerment #tehsildar #indianculture #rajputana #traditionandmodernity

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"कौन कहता है कि अफसर बनने के लिए परंपरा छोड़नी पड़ती है? असली सशक्तिकरण तो जड़ों से जुड़कर आसमान छूने में है। 🇮🇳
सिर पर चुनरी और हाथ में कलम, यही है नए भारत की नारी शक्ति। 'तहसीलदार' की कुर्सी पर बैठकर भी अपनी संस्कृति को जो मान दिया है, वो काबिले तारीफ है।
सशक्त नारी, समृद्ध समाज! 👑✍️"
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"कौन कहता है कि अफसर बनने के लिए परंपरा छोड़नी पड़ती है? असली सशक्तिकरण तो जड़ों से जुड़कर आसमान छूने में है। 🇮🇳
सिर पर चुनरी और हाथ में कलम, यही है नए भारत की नारी शक्ति। 'तहसीलदार' की कुर्सी पर बैठकर भी अपनी संस्कृति को जो मान दिया है, वो काबिले तारीफ है।
सशक्त नारी, समृद्ध समाज! 👑✍️"
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"कौन कहता है कि अफसर बनने के लिए परंपरा छोड़नी पड़ती है? असली सशक्तिकरण तो जड़ों से जुड़कर आसमान छूने में है। 🇮🇳
सिर पर चुनरी और हाथ में कलम, यही है नए भारत की नारी शक्ति। 'तहसीलदार' की कुर्सी पर बैठकर भी अपनी संस्कृति को जो मान दिया है, वो काबिले तारीफ है।
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लुधियाना के दुगरी इलाके में भगवान भोले नाथ के मंदिर में बेअदबी का मामला सामने आया है। भगवान भोले शंकर की मूर्ति पर पहनाई गई माला तोडी नंदी जी को तोड़न… See more