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चुनाव समाप्त होते ही दोनों युवराज जनता से मुँह मोड़ लेते हैं,
और परिणाम आते ही एक सुर में ‘#वोट_चोरी’ का शोर मचाने लगते हैं।
ब्रह्मोस-2K: भारत की हाइपरसोनिक शक्ति, जो युद्ध की परिभाषा बदल सकती है
भारत की रक्षा क्षमताओं में एक बार फिर बड़ा बदलाव आने की आहट सुनाई दे रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और रूस के बीच ब्रह्मोस-2K हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम को दोबारा गति देने पर गंभीर बातचीत चल रही है। माना जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin के आगामी भारत दौरे के दौरान इस संबंध में बड़ा समझौता हो सकता है।
1971 की ऐतिहासिक जीत: जब भारत की विजय से बना बांग्लादेश
1971 का भारत–पाकिस्तान युद्ध भारत के इतिहास में गौरव और साहस का स्वर्णिम अध्याय है। यह वही युद्ध था, जिसकी निर्णायक जीत के परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ और पूरे विश्व ने भारत की सैन्य क्षमता, रणनीति और मानवीय संवेदनशीलता को करीब से देखा।
इस युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने अद्भुत पराक्रम दिखाया। इतिहास में दर्ज है कि लगभग 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था—यह अपने आप में एक असाधारण घटना थी, जिसने भारत की जीत को और भी ऐतिहासिक बना दिया। यह विजय केवल एक युद्ध जीतने की कहानी नहीं थी, बल्कि यह अन्याय के खिलाफ खड़े होने, मानवता के साथ मजबूती से खड़े रहने और राष्ट्रहित में निर्णायक कदम उठाने का प्रतीक थी।
शौर्य, त्याग और राष्ट्रीय गौरव का दिन
हर साल इस दिन देश अपने उन वीर सपूतों को याद करता है, जिनके सर्वोच्च बलिदान ने हमें यह दिन देखने का अवसर दिया। ये केवल नाम नहीं, बल्कि वो प्रेरणाएँ हैं जिनकी कहानियाँ हर भारतीय के भीतर देशभक्ति, अनुशासन और साहस की आग जलाती हैं। सैनिकों का जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमा पर नहीं होती—वह हर नागरिक के सम्मान, आत्मविश्वास और एकता में भी बसती है।
इस दिन का असली अर्थ सिर्फ इतिहास को याद करना नहीं, बल्कि उस भावना को जीना है—
देश के लिए समर्पण, कर्तव्य के लिए दृढ़ता और एकता के लिए प्रतिबद्धता।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब पूरा देश एक होकर खड़ा होता है, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं रहती।
जहाँ भी जिहादी विचारधाराएँ प्रभावी हुई हैं, वहाँ हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाएँ सामने आई हैं।
महाराष्ट्र के भाजपा नेता नितेश राणे ने एक मीडिया इंटरव्यू में बांग्लादेश की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे हालात में हिंदुओं को सतर्क रहना चाहिए।
उनके अनुसार, बांग्लादेश से सबक लेते हुए हिंदू समाज को एकजुट होना चाहिए और कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ लोकतांत्रिक व संवैधानिक तरीकों से मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
मोहाली में चल रहे राष्ट्रीय न्याय मोर्चा के तीन साल पूरे हुए
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