Discover postsExplore captivating content and diverse perspectives on our Discover page. Uncover fresh ideas and engage in meaningful conversations
महाराष्ट्र: स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक के वंशज रोहित तिलक ने कहा, "... तिलक जी किसी पार्टी के नहीं थे उस समय कांग्रेस एक आंदोलन थी, पार्टी नहीं थी, यह एक स्वतंत्रता आंदोलन था जिसमें सभी लोग शामिल थे। बाद में यह अलग-अलग पार्टियों में बंट गया। तिलक जी, या मैं जिन भी क्रांतिकारी का ज़िक्र करता हूं, वे किसी एक पार्टी से जुड़े नहीं थे, उनका बलिदान देश के लिए था.
#balgangadhartilak #rohittilak #freedommovement #indianhistory
मैं पिछले 5 सालों से लगातार लोगों को याद दिलाती आई हूँ कि UPA या काँग्रेस की सरकारों में सेनाओं के बेस पर आतंकवादियों के हमले नहीं होते थे.
जब-जब भी हमारे देश की सेनाओं के बेस (यूनिट) पर आतंकवादियों की नज़र पड़ी है, हमेशा भारतीय जनता पार्टी की सरकार ही रही है.
अब इन तारीखों को चुनावों से मिलाकर भी देखिए, आपको मेरी बात की पूरी सच्चाई समझ में आ जाएगी.
Kanha – Best Sweets Manufacturer in India & Trusted Wholesale Supplier
Kanha, the best sweets manufacturer in India, offers premium cookies and biscuits. Trusted sweets wholesale supplier in India with quality bakery delights.
https://kanha.co/
Suji (Semolina) Chilla! It’s a fantastic, quick breakfast or snack that’s light yet filling.
Here is the recipe:
Ingre****nts
• 1 cup Suji (Semolina/Rava)
• ½ cup Curd (Yogurt)
• Water (as needed for consistency)
• Salt to taste
• Vegetables (Finely chopped): Carrots, Capsicum (Bell pepper), Onions, and Fresh Coriander.
Soak at least 30 minutes
• Oil/Ghee for cooking.
Serve it hot with Tomato Chutney or a spicy Green Mint Chutney
#recipes #foods #comfortfood #homecooking #chilla
Quick. Spicy. Addictive- Schezwan Rice ❤️
Recipe
Ek pan mein 3 cup Paani boil Karke add karenge 1 cup basmati rice
90 percent Tak cook hone denge phir strain Karle
In a pan, add oil,
Garlic, onions and mix veggies
Add 2 tbsp schezwan sauce
1 tsp vinegar
1 tsp soy sauce
1/2 tsp ketchup
Add cooked rice
Sautéed paneer
Salt + Black pepper
Green onion
Give it a good mix
And, it’s ready
Serve it hot and Enjoy !!
.
.
[schezwan rice, masala rice, Chinese rice, fried rice, tiffin box recipes, lunch ideas, dinner recipe ideas]
.
.
#paneerfriedrice #schezwanrice #tiffinboxideas #indichinese #foodreel
Which roll do you like the most?
Please follow @khana_peena_recipe for more recipes and food hacks 🙏
#snacks #rolls #instagood #viral #crispy
तलाक के बाद महिलाओं और पुरुषों के प्रति समाज के अलग-अलग नजरिए को दिखाने की कोशिश की गई है। तस्वीर में एक तरफ महिला को बच्चे के साथ दिखाया गया है, जबकि दूसरी तरफ पुरुष को अपनी नई जिंदगी का आनंद लेते हुए दर्शाया गया है। इसके साथ यह संदेश भी दिया गया है कि समाज अक्सर महिलाओं को ज्यादा जज करता है, जबकि पुरुषों के लिए नियम अपेक्षाकृत कम होते हैं। इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। कई लोग इस संदेश से सहमत दिखाई दे रहे हैं और उनका कहना है कि समाज में आज भी महिलाओं पर अधिक सामाजिक दबाव और अपेक्षाएं होती हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि हर व्यक्ति की परिस्थितियां अलग होती हैं और किसी एक तस्वीर से पूरी सच्चाई तय नहीं की जा सकती। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते समय के साथ समाज में सोच भी बदल रही है, लेकिन अभी भी लैंगिक समानता को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा जरूरी है। इस वायरल पोस्ट ने एक बार फिर समाज में मौजूद धारणाओं और सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बच्चों के व्यवहार पर माता-पिता का गहरा प्रभाव पड़ता है। कई मनोवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बच्चे केवल बातें सुनकर ही नहीं, बल्कि अपने माता-पिता के व्यवहार को देखकर भी बहुत कुछ सीखते हैं। इसे Social Learning Theory कहा जाता है, जिसे प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक Albert Bandura ने समझाया था। इस सिद्धांत के अनुसार बच्चे अपने आसपास के लोगों, खासकर माता-पिता को देखकर उनके व्यवहार की नकल करते हैं।
जब घर में किसी बात पर झगड़ा या बहस होती है, तो बच्चे यह ध्यान से देखते हैं कि उनके पिता उस स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। कई अध्ययनों में पाया गया है कि लगभग 60–70% तक बच्चे वही तरीका अपनाने लगते हैं, जो वे अपने पिता को गुस्से या विवाद के समय इस्तेमाल करते हुए देखते हैं। अगर पिता गुस्से में ऊँची आवाज़ में बात करते हैं, दूसरों का अपमान करते हैं, या आक्रामक व्यवहार दिखाते हैं, तो बच्चा इसे एक सामान्य और स्वीकार्य तरीका मान सकता है।
ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि बहुत से परिवारों में पिता को अधिकार और शक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। बच्चे अक्सर सोचते हैं कि पिता जैसा व्यवहार करना ही सही तरीका है। इसलिए वे अनजाने में वही भाषा, वही गुस्सा और वही प्रतिक्रिया अपने दोस्तों, भाई-बहनों या स्कूल के साथियों के साथ इस्तेमाल करने लगते हैं।
हालाँकि इसका मतलब यह नहीं है कि माँ का प्रभाव नहीं होता। माँ भी बच्चों के भावनात्मक विकास और व्यवहार को प्रभावित करती हैं। लेकिन झगड़े या टकराव के तरीके में कई शोधों ने यह पाया है कि बच्चे अक्सर पिता के आक्रामक या असम्मानजनक व्यवहार को अधिक तेजी से कॉपी करते हैं, क्योंकि वे उसे ताकत और नियंत्रण से जोड़कर देखते हैं।
इसी कारण मनोवैज्ञानिक सलाह देते हैं कि जब भी बच्चों के सामने कोई मतभेद या विवाद हो, तो माता-पिता को सम्मानजनक, शांत और समाधान-केंद्रित तरीके से बात करनी चाहिए। जब बच्चे देखते हैं कि बड़े लोग बिना चिल्लाए, बिना अपमान किए समस्या का समाधान कर रहे हैं, तो वे भी वही स्वस्थ तरीका सीखते हैं।
संक्षेप में:
बच्चे झगड़ा करना नहीं सीखते, बल्कि झगड़ा कैसे करना है यह अपने घर के माहौल से सीखते हैं। इसलिए माता-पिता का व्यवहार ही बच्चों के भविष्य के व्यवहार की सबसे बड़ी सीख बन जाता है।