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नेपाल में हाल ही में हुए आम चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. जिसके बाद देश की राजनीतिक तस्वीर साफ हो चुकी है. जेन जी आंदोलन से युवाओं के बीच लोकप्रिय हुए बालेन शाह नेपाल के अगुवा बनने जा रहे हैं.
उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने सभी पुरानी पार्टियों को भारी मात दी है. इन सबके बीच एक नाम खूब सुर्खियां बटोर रहा है. नेपाल में उस नाम पर भले ही कम चर्चा हो रही है, लेकिन भारत और भारत की राजनीति में उसकी पकड़ बालेन शाह से भी ज्यादा है. हम बात कर रहे हैं नेपाल चुनाव में जीत कर नए नवेले सांसद बने Sandeep Rana की.
संदीप राणा ने संसदीय सीट Palpa-1 से जीत हासिल की है. उन्होंने मार्च 2026 में हुए चुनाव में अपने गृह क्षेत्र Palpa-1 से पर्चा भरा था. भारतीय छात्र राजनीति से अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले संदीप भारत के गृह मंत्री अमित शाह के पीए रह चुके हैं.
संदीप राणा ने अपनी पढ़ाई नई दिल्ली से की है और यहीं से उनकी राजनीतिक और सामाजिक सफर की शुरुआत हुई. दिल्ली में पढ़ाई के दौरान वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और यहीं पर छात्रों के हितों, सामाजिक अभियानों और संगठनात्मक गतिविधियों की ABCD सीखी. ABVP में रहने के दौरान उन्होंने कई सामाजिक अभियानों में भाग लिया. इसकी एक झलक उनके आधिकारिक एक्स अकाउंट पर भी दिख सकती है. जहां उन्होंने खुद को एक्टिविस्ट बताया है. धीरे-धीरे उनकी पहचान एक मेहनती और युवा कार्यकर्ता के रूप में होने लगी.
छात्र राजनीति में उनके काम को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का मौका दिया. धीरे-धीरे वो अपने संगठनात्मक कामों और अनुभव के दम पर बीजेपी की बड़ी राजनीतिक हस्तियों तक पहुंच गए. वो लंबे समय तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पीए (पर्सनल असिस्टेंट) के रूप में काम किया. जहां उन्होंने अमित शाह से संगठन संचालन और राजनीतिक गुणा गणित सीखी.
'एलपीजी की कमी' पर संसद के बाहर विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य सांसदों का विरोध
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हैदराबाद के श्री वेंकटेश्वर मंदिर में पिछले 25 सालों से एक ऐसा चमत्कार रोज हो रहा है, जिसे देखकर बड़े-बड़े युवा भी दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। मंदिर परिसर में ही रहने वाली 80 वर्षीय 'राजी' अम्मा की कमर ढलती उम्र के कारण झुक चुकी है, लेकिन उनकी आस्था बहुत ज्यादा मजबूत है।
वे दिन में तीन बार होने वाली आरती और अनुष्ठान के दौरान लगातार 15 मिनट तक 30 किलो वजनी विशाल घंटा बजाती हैं! बिना थके, बिना रुके उनकी यह सेवा देखकर मंदिर के पुजारी और दर्शन करने आए भक्त भी हैरान रह जाते हैं।
80 साल की उम्र में 30 किलो का घंटा लगातार 15 मिनट तक बजाना सिर्फ शारीरिक बल नहीं है, बल्कि यह उस परमेश्वर की दी हुई शक्ति और अटूट विश्वास का प्रमाण है।
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दिन-भर गाजा, फिलिस्तीन और ईरान की बात करने वाले नेता जब कैमरों के सामने आते हैं तो ऐसा दिखाते हैं जैसे दुनिया में सबसे ज्यादा दुख इन्हीं को है। बयान देते हैं, बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और खुद को इंसानियत का सबसे बड़ा हमदर्द बताते हैं।
लेकिन दूसरी तरफ तस्वीर कुछ और ही कहानी बताती है। जहां गाजा में लोग भूख और संकट से जूझ रहे हैं, वहीं यहां आराम से बैठकर कई तरह के पकवानों का आनंद लिया जा रहा है। हंसी-मजाक के बीच भरपूर दावत चल रही है, जैसे सब कुछ बिल्कुल सामान्य हो।
यही विरोधाभास लोगों को सोचने पर मजबूर करता है। एक तरफ दुख और संवेदना की बातें, दूसरी तरफ आराम और राजनीतिक दिखावा। इससे साफ समझ आता है कि कई बार ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल केवल राजनीति और छवि बनाने के लिए भी किया जाता है।
अब जनता को खुद तय करना होगा कि असली चिंता किसे है और कौन सिर्फ कैमरों के सामने संवेदना दिखाकर अपनी राजनीति चमका रहा है।
डिस्क्लेमर: यह पोस्ट सार्वजनिक तस्वीरों और चर्चाओं के आधार पर लिखी गई एक राय है।
Neeraj Mahajan
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