वेदों में परिवर्तन क्यों नहीं हो सकता? Veda can not be changed.

التعليقات · 16231 الآراء

वेदों में परिवर्तन क्यों नहीं हो सकता? संसार का सबसे अद्भुत चमत्कार! विश्व की सबसे पुरानी पुस्तक – वेद – आज भी उसी प्रकार सुरक्षित है जैसे सृष्टि के आदि काल में| पढ़ें और समझें की यह किस प्रकार संभव हुआ| वेदों का स्वर-रक्षण हमारे पूर्वजों ने नियमों के आधार पर यह सुनिश्चित किया कि मंत्र का गान करते हुए एक भी अक्षर, मात्रा या स्वर में फेरबदल न हो सके और मंत्र के गायन से पूर्ण लाभ प्राप्त हो सके | उन्होंने शब्द के प्रत्येक अक्षर को उच्चारित करने में लगनेवाले समय को निर्धारित किया और समय की इस इकाई या समय के अंतराल को मंत्र कहा | वेद मन्त्रों को शुद्धस्वरुप में उच्चारित करने के लिए विधिवत श्वसनक्रिया के द्वारा शरीर के एक खास हिस्से में वांछित स्पंदन निर्माण करने की प्रक्रिया के विज्ञान को जिस वेदांग में बताया गया है, उसे शिक्षा कहते हैं | यदि आप वैदिक मंत्र को संहिता में देखें तो आपको अक्षरों के पीछे कुछ चिन्ह मिलेंगे | उदहारण के लिए निम्न छवि देखें:- यह चिन्ह स्वर चिन्ह कहलाते हैं | जो मन्त्रों की उच्चारण पद्धति को दर्शाते हैं | इन चिन्हों से यह पक्का हो जाता है कि वेद मन्त्रों में अक्षर, मात्रा, बिंदु, विसर्ग का भी बदलाव नहीं हो सकता है | परंपरागत गुरुकुलों में विद्यार्थी वेदमंत्रों के पठन में इन स्वरों के नियत स्थान को हाथ व सिर की विशिष्ट गतिविधि द्वारा स्मरण रखते हैं | अतः आप उन्हें वेदमंत्रों के पठन में हाथ व सिर की विशिष्ट गतिविधियाँ करते हुए देख सकते हैं | और यदि मंत्रपठन में अल्प- सी भी त्रुटी पाई गयी तो वे आसानी से ठीक कर लेते हैं | इसके अलावा अलग-अलग गुरुकुल, पठन की विभिन्न प्रणालियों में अपनी विशेषता रखते हुए भी स्वरों की एक समान पद्धति को निर्धारित करते हैं – जिससे प्रत्येक वैदिक मंत्र की शुद्धता का पता उसके अंतिम अक्षर तक लगाया जा सके | वेदों का पाठ-रक्षण वेदमन्त्रों के शब्दों और अक्षरों को फेर बदल से बचाने के लिए एक अनूठी विधि अविष्कृत की गयी | जिसके अनुसार वेदमन्त्रों के शब्दों को साथ में विविध प्रकारों (बानगी) में बांधा गया, जैसे- वाक्य, पद, क्रम, जटा, माला, शिखा, रेखा, ध्वज, दंड, रथ और घन | ये सभी एक वैदिक मंत्र के शब्दों को विविध क्रम-संचयों में पढ़ने की विधि को प्रस्तुत करते हैं

التعليقات